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गीत चाँदनी 2025 | Geet Chandni 2025 | Aman Akshr | कवि सम्मेलन

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[0:07]Section 1

और अब बिना किसी भूमिका के देश के एक बहुत बड़े गीतकार को जो इंदौर से हमारे बीच में तशरीफ लाया है मैं जानता हूं आप में से अधिकांश लोग उसको...

[6:38]Section 2

मेरी वरिष्ठ पीढ़ी के लगभग सभी लोग इस मंच पर हैं जो और मैं अपनी पीढ़ी से वो 10 घंटे की पूरी यात्रा में मैंने वो दृश्य कई बार देखा। यहां पर...

[8:26]Section 3

जयपुर राजाओं की नगरी है पूरा राजस्थान ही भव्य इतिहास से भरा हुआ है लेकिन एक प्रेम का मैं मुक्तक पढ़ता हूं उसमें हम जिस समय प्रेम हमारे जी...

[14:14]Section 4

दोस्तों अगर अमन की कविता अच्छी लग रही है तो जोरदार ताली होनी चाहिए भाई कि आप ही उदास पायलों को पाऊं दीजिए और एक तरफ कवि का स्वाभिमान और उ...

[16:30]Section 5

किरणों के देश से इधरती पे आए फिर धरती पे आके और खास हुए चेहरे जितने भी सुंदर लोग आपने देखे हो

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[8:11]जिन्हें मां-बाप का टूटा हुआ चश्मा नहीं दिखता बहुत-बहुत प्रणाम एक कदम और आगे बढ़ाता हूं।
[16:30]किरणों के देश से इधरती पे आए फिर धरती पे आके और खास हुए चेहरे जितने भी सुंदर लोग आपने देखे हो
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[0:07]और अब बिना किसी भूमिका के देश के एक बहुत बड़े गीतकार को जो इंदौर से हमारे बीच में तशरीफ लाया है मैं जानता हूं आप में से अधिकांश लोग उसको सुनने के लिए यहां हैं। मैं अमन अक्षर जो मेरा छोटा भाई है उसको बुला रहा हूं अमन आओ और इस महफिल को लूट लो। आप सभी को बहुत प्रणाम करता हूं।

[0:28]अभी तक जितने भी मैंने मंच पढ़े होंगे उनमें से सर्वाधिक कविता की दृष्टि से समृद्ध मंच आज का कवियों की दृष्टि से भी और परंपरा की दृष्टि से भी पूरे मंच को प्रणाम करता हूं। दुर्गा दान सिंह जी, राजेश शर्मा जी, रमेश दादा मधु जी दीदी और मुकेश भैया और साहिल सर सभी लोगों को मेरा प्रणाम है सामने मां जी बैठी हैं। रमेश शर्मा जी की धर्म पत्नी है और मेरे लिए तो मां समान है और सामने विशंबर मोदी जी आदरणीय हम सब के आदरणीय जिनके जिनके पूरे प्रयास इस पूरी परंपरा को 50 वर्षों से अधिक तक आज तक लेकर आए और साहिल सर सब लोगों की एक बार इस आयोजन के नाम आप सब लोगों का और आप सब लोगों को भी बहुत प्रणाम की इस परंपरा का निर्वहन और आप श्रोताओं के रूप में इस विशुद्ध कविता के कार्यक्रम में उपस्थित हुए। ऋषि भैया, रमेश दादा और साहिल सर मेरे जीवन में जब मैं पहली बार 2016 में जयपुर आया 2016 में ही विधिवत मेरे कवि सम्मेलनों की शुरुआत हुई थी। 10वां वर्ष मुझे कवि सम्मेलन में आए हुए हुआ और ये तीन लोग ऐसे हैं जिसमें रमेश दादा का सानिध्य तो मुझे कई मंचों पर मिला जिन्होंने मुझे कवि सम्मेलन की जितनी भी कवि सम्मेलनों में कविता की दुनिया की जितनी चीजें मैंने इनसे सीखी और इन्होंने बताई। दो लोग कवि सम्मेलनों में रहे स्वर्गीय डॉक्टर राजेंद्र राजन जी और रमेश शर्मा जी हमारे साथ आज मंच पर है मैं कई मंचों पर इनके साथ रहा मेरे पिता तुल्य और उनको आज जिस जिस जिस आग्रह से बुलाया ऋषि भैया और साहिल सर का भी बहुत धन्यवाद और उनको ऐसे देखकर वो बात मैं कहना नहीं चाहता था लेकिन मेरे लिए बड़ा कठिन है कि उनको ऐसे देखना क्योंकि वो एक ऐसे स्वर हैं कवि सम्मेलनों की कि जिनको देखकर हम ये सीखते थे कि कैसे शालीनता के साथ मंच भी लूटे जा सकते हैं और कविता भी सुनाई जा सकती है। क्या बात है अमन जिंदाबाद मैंने कई मंचों पर ये देखा है और खैर लेकिन सबको बहुत प्रणाम सारे लोगों को मैं अपनी बात जितना भी समय मेरे पास है जितना भी मुझे कहा गया है मैं अपनी बात प्रारंभ करता हूं चार पंक्तियों से शुरू होता हूं। एक बार तालियां हो जाए आप सभी की मैं अकेला ही ऐसा आज ऐसा हूं जो बार-बार आपसे बोल के भी करवा लूंगा क्योंकि बाकी सब लोग को बहुत उनको जरूरत भी नहीं पड़ेगी वैसे पराजय का नहीं होता है कोई शोर मत कहना पराजय का नहीं होता है कोई शोर मत कहना जमाने में कहां होते हैं अब चित चोर मत कहना मुझे लड़ना है दुनिया से अकेले अब तुम्हारे बिन मुझे लड़ना है दुनिया से अकेले अब तुम्हारे बिन अगर मैं हार जाऊं तो मुझे कमजोर बहुत अच्छा मन बहुत अच्छा है यार बहुत अच्छा है यार बहुत अच्छा है अगर मैं हार जाऊं तो मुझे कमजोर मत कहना और चार पंक्तियां सौंपता हूं ये वैसे भी जीवन में और ये जो कवि सम्मेलन में आज मंच के जितने भी कवि हैं मेरे लिए पाठशाला के जैसे हैं राजेश शर्मा जी को जब मैं पहली बार मिला था उनसे मैंने उनके वर्षों पुराने दूरदर्शन के कार्यक्रम में सुने हुए गीत की चर्चा भी की थी। मैं सौंपता हूं सुनिएगा बताता थी जिसे दुनिया हमारी भूल का रास्ता उसे खुशबू ने समझाया वहीं पर फूल का रास्ता क्या अच्छा है वाह पढ़ा था जिसपे चलकर पाठ पहले प्यार का हमने पढ़ा था जिसपे चलकर पाठ पहले प्यार का हमने वो रास्ता था हमारे गांव की स्कूल का रास्ता वो रास्ता था हमारे गांव की स्कूल का रास्ता मैं एक उस तरह की कोई चीज मैं नहीं सुनाऊंगा जो मैं मंचों पे सुनाता हूं लेकिन आज मैं एक एक मुक्तक और सुनाता हूं उसमें मेरे जीवन से जुड़ी एक घटना है। दो वर्ष पहले मैं दिल्ली से भोपाल की एक रेल यात्रा में था और मेरी सीट के सामने एक बुजुर्ग बैठे थे उन्होंने चश्मा लगाकर रखा था। भैया ये माइक का डिस्टरबेंस क्यों हो रहा है आप भी उधर से कुछ कर रहे हो क्या वो उस तरफ कर लीजिए उसका मुंह ये वाले माइक को बंद ही कर दीजिए वो वाला चालू कर लीजिए वो घटना सिर्फ इतनी सी है कि मेरी सीट के सामने एक बुजुर्ग बैठे थे उन्होंने चश्मा लगाकर रखा था उसके चश्मे की एक उनके चश्मे की एक डंडी टूटी हुई थी। और 60-65 वर्ष उनकी उम्र होगी थोड़ी अधिक भी हो सकती है और उन्होंने धागे से उस चश्मे को संभाल के रखा था।

[6:38]मेरी वरिष्ठ पीढ़ी के लगभग सभी लोग इस मंच पर हैं जो और मैं अपनी पीढ़ी से वो 10 घंटे की पूरी यात्रा में मैंने वो दृश्य कई बार देखा। यहां पर भी हमारी बुजुर्ग पीढ़ी के लोग बैठे हैं और उस संघर्ष को मैंने अपनी पीढ़ी से एक शिकायत के रूप में गाने का प्रयास किया। मैं आप लोगों को सौंपता हूं वो संवेदना पहुंचे तो मुझे बताइएगा अलग होते हुए कोई अलग इतना नहीं दिखता ये घटना और ये चार पंक्तियां अलग होते हुए कोई अलग इतना नहीं दिखता मगर ऊंचाइयों से नीव का हिस्सा नहीं दिखता मगर ऊंचाइयों से नीव का हिस्सा नहीं दिखता उन्हीं आंखों को चश्मे की कहीं ज्यादा जरूरत है उन्हीं आंखों को चश्मे की कहीं ज्यादा जरूरत है जिन्हें मां-बाप का टूटा हुआ चश्मा नहीं दिखता अरे क्या बात है अमन बहुत अच्छा है

[8:11]जिन्हें मां-बाप का टूटा हुआ चश्मा नहीं दिखता बहुत-बहुत प्रणाम एक कदम और आगे बढ़ाता हूं।

[8:26]जयपुर राजाओं की नगरी है पूरा राजस्थान ही भव्य इतिहास से भरा हुआ है लेकिन एक प्रेम का मैं मुक्तक पढ़ता हूं उसमें हम जिस समय प्रेम हमारे जीवन में आता है कई सारे संघर्ष एक साथ चलते हैं परिवार के पढ़ाई के पैसा कमाने के एक गलती मेरी पीढ़ी शायद कर बैठती है और एक बात निकाल कर लाया हूं ठीक लगे तो मुझे बताइएगा। मोहब्बत ने यहां अक्सर यही अंजाम पाया है कमाया मोल मिट्टी का मगर सोना गवाया है कमाया मोल मिट्टी का मगर सोना गवाया है किसी के प्यार में उसने महल की नौकरी कर ली किसी के प्यार में उसने महल की नौकरी कर ली जिसे एक मान बचपन से सदा राजा बुलाया है वाह मन वाह बहुत अच्छा है

[9:42]जिसे एक मान बचपन से सदा राजा बुलाया है बहुत अच्छा है अमन बहुत अच्छा है जिसे एक मान बचपन से सदा राजा बुलाया है वाह मन वाह बहुत-बहुत धन्यवाद और प्रेम जब थोड़ी और जिद में आता है तो अजब किरदार था जिसको निभाने में लगे थे हम जो पत्थर था उसे दरिया बनाने में लगे थे हम बहुत से काम थे करने को जो बेहद जरूरी थे बहुत से काम थे करने को जो बेहद जरूरी थे मगर बस एक उसको ही मनाने में लगे थे हम मगर बस एक उसको ही मनाने में लगे थे हम आदरणीय मोदी जी की उपस्थिति है इस तरह के कार्यक्रम की परंपराएं जिसमें विशुद्ध साहित्य और कविता की बात हो तो एक मुक्तक जो ऋषि भैया ने याद दिलाया है कुछ लोगों तक पहले पहुंचा भी होगा। एक तरफ पूरी दुनिया और एक तरफ इस परिसर में बैठे हुए वो लोग जो गीत और कविता को सुनने आए हैं। पूरी दुनिया और हम लोगों के बीच का एक अंतर चार पंक्तियों में सुनाता हूं सुनिएगा कि अधबसे नगर में अपने ख्वाब लेके आए थे हर सवाल का गलत जवाब लेके आए थे हर सवाल का गलत जवाब लेके आए थे प्रेम की गली में सब शराब लेके आए थे हम बहुत खराब थे किताब लेके आए थे ताली कम बजाइए आप लोगों ने अच्छे से बजाइए

[14:14]दोस्तों अगर अमन की कविता अच्छी लग रही है तो जोरदार ताली होनी चाहिए भाई कि आप ही उदास पायलों को पाऊं दीजिए और एक तरफ कवि का स्वाभिमान और उसे अगर किसी अपनी प्रेमिका की प्रशंसा करनी हो तो मैं उस नैसर्गिक के लिए चार पंक्तियां एक छंद और सुनाता हूं सुनाता हूं सुनिएगा कि आयु ही स्वयं जब देह का श्रृंगार करे देह का श्रृंगार हर और से बचाइए क्या बात है आयु ही स्वयं जब देह का श्रृंगार करे देह का श्रृंगार हर ओर से बचाइए अरे क्या बात है अरे वाह वाह वाह वाह अरे बहुत अच्छा है ये बहुत अच्छा है ये

[14:48]कंचनी कलाई के जो रंग बोलने लगे तो उन्हें चूड़ियों के इन शोर से बचाइए क्या बात है कंचनी कलाई के जो रंग बोलने लगे तो उन्हें चूड़ियों के इन शोर से बचाइए वंदनवार अलकों के रूप को सजाए तब उन्हें बंधनों की हर डोर से बचाइए तन की किशोरी को किशोरों से बचाइए तो मन को हमारे जैसे चोर से बचाइए दोस्तों ईमानदारी से बताना आज हिंदी कविता के किसी मंच पे ऐसी कविता होती है क्या कमाल पढ़ रहे हो अमन शाबाश बहुत अच्छा है कि मन को हमारे जैसे मैंने मन का चोर इसलिए कहा कि किसी का मेरा तन ऐसा नहीं कि तेरा तन से मैं किसी को चुरा सकूं तो मैंने इसी के लिए मैं चार पंक्तियां मैं आपको और सौंपता हूं। देखिए एक तरफ जितने भी सुदर्शन लड़के हैं उनको छोड़ देते हैं नहीं तो इस बात से बुरा भी मान सकते हैं हां ऋषि भैया का के लिए ही चली है मान लीजिए मेरा ये मानना है कि जैसा मैं दिखता हूं मैं अपना व्यक्तिगत अनुभव बताता हूं ऐसे 99% लड़के वैसे ही दिखते हैं और लड़कियां और महिलाएं स्त्रियां सभी सुंदर होती हैं। जितनी भी महिलाएं हैं तो एक शिकायत ऐसा ही एक शिकायत है ईश्वर से या वो नहीं भी कहे लेकिन मैं चार पंक्ति सौंपता हूं एक अंतर पढ़ता हूं और अगर वो आत्म स्वीकृति अच्छी लगे तो मुझे बताइएगा स्वागत भाई स्वागत कि किरणों के देश से इधरती पे आए फिर

[16:30]किरणों के देश से इधरती पे आए फिर धरती पे आके और खास हुए चेहरे जितने भी सुंदर लोग आपने देखे हो

[31:21]किरणों के देश से इधरती पे आए फिर धरती पे आके और खास हुए चेहरे गोरे रंग में भी थोड़ी चांदनी सी घोल कर चंद्रमा के सांचे में बताशे हुए चेहरे वाह वाह गोरे रंग में भी थोड़ी चांदनी सी घोल कर चंद्रमा के सांचे में बताशे हुए चेहरे एक यही बात ना समझ आई अब तक इतने अलग ये कहां से हुए चेहरे एक और हम जैसे टाले हुए चेहरे तो एक और आपसे तराशे हुए चेहरे बहुत अच्छा है अमन बहुत अच्छा है अमन बहुत अच्छा है मन बहुत अच्छा है अरे वाह वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे वाह वाह वाह वाह अरे 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