[0:00]हमारी ऑडियंस में से एक बंदा फाइनली 30 साल पॉलिटिकल कैंपेनिंग करने के बाद एक पॉलीटिशियन बन गया है और इसको पॉलिटिकल सीट मिल गई है। अभी अपने पॉलिटिकल कैंपेन के अंदर हमेशा एडवर्टाइज करता था कि इंडियन गुड्स को कंज्यूम करो। इंडियन फैक्ट्रीज के अंदर काम करो ताकि इंडिया में और बढ़िया ग्रोथ हो और बढ़िया एंप्लॉयमेंट जनरेट हो। पर अब दोस्तों इसको अपना थोड़ा बहुत लाइफ स्टाइल अपग्रेड करना है तो इसलिए क्या यह टाटा सिएरा को परचेज करेगा? क्या ये टाटा सफारी को परचेज करेगा? क्या ये महिंद्रा स्कॉर्पियो n को परचेज करेगा या फिर क्या ये टोयोटा fortuner को परचेज करेगा? इसने दोस्तों परचेज करी टोयोटा लैंड क्रूजर lc300 gr स्पोर्ट जो कि दोस्तों स्पोर्टी भी परफॉर्मेंस चाहिए ना थोड़ी बहुत अगर आपको बढ़िया अपना पॉलिटिकल करियर को सही रखना है। और ये स्टोरी सिर्फ इसी पॉलीटिशियन की, बल्कि इंडिया के मेजर पॉलीटिशियन की है जो कि बोलते तो है कि इंडियन गुड्स ऑलमोस्ट वर्ल्ड क्लास लेवल की हो गई है। और आपको इंडियन गुड्स को ही कंज्यूम करना चाहिए और खुद इटालियन कपड़े पहनते हैं, स्विस वॉचेस पहनती है और गाड़ी जर्मन या फिर जैपनीज का इस्तेमाल करते हैं। वहीं पर अगर आप फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुअल माइक्रो का एग्जांपल है तो इनिशियली वह एक सेट्रोन की गाड़ी में घूमते थे। बाद में इन्होंने बुलेट प्रूफ डी 7 क्रॉस बैक के अंदर अपग्रेड कर लिया जिसके बाद इस गाड़ी की सिर्फ फ्रांस के अंदर तो क्या पूरे यूरोप के अंदर अपील बढ़ गई और सेल्स इनक्रीज हो गई। अमेरिका के प्रेसिडेंट तो बढ़िया अपनी 9000 किलो वाली कैडलक वन के अंदर ही घूमते हैं काफी एक्सेप्शनल गाड़ी है। वहीं पे पर रशिया के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन पहले s600 पुल मैन के अंदर घूमते थे। बाद में इन्होंने ऑर्डर दिया कि मैं रशियन गाड़ी के अंदर ही घूमूंगा जो कि रशिया के अंदर बननी चाहिए। 1400 करोड़ की आर एन डी के बाद एक ऑरस सेनेट लिमोजिन बनी जो कि अब रशिया में ऑल टाइम पॉपुलर है। और वहीं पे चाइना के प्रेसिडेंट अपनी hongqi एल 5 के अंदर ही घूमते आए हैं और अब इस गाड़ी की रिस्पेक्ट चाइना के अंदर एक रोल्स रॉयस फैंटम से ज्यादा है। तो सोचने वाली बात है कि हमारे इंडियन पॉलीटिशियंस को ही क्यों एक जैपनीज या फिर जर्मन गाड़ी चाहिए अपने कैंपेनिंग करने के लिए। तो ऐसा दोस्तों स्टार्टिंग से था नहीं क्योंकि 1947 में इंडिपेंडेंस के बाद जब हमारे प्राइम मिनिस्टर जवाहरलाल नेहरू बने थे। तो वो काफी कुछ ट्राई करते थे इंडियन गुड्स को कंज्यूम करने का दिखाने के लिए कि इंडियन गुड्स भी काफी अच्छे हैं। पर साथ ही में इनके पास एक रोल्स रॉयस सिल्वर शैडो और एक एंटी कैडलाग भी थी जो कि ये फॉरेन डिप्लोमेटिक पर्पसेस के लिए इस्तेमाल करते थे। इसके लिए इनकी रीजनिंग थी कि ये दिखा सके कि जो इंडिया का प्राइम मिनिस्टर है वो भी काफी रिसोर्सफुल है और एक काफी प्रॉपर एक अच्छी कंट्री है इंडिया जिसके पास रिसोर्सेस है। अब आने वाले 1957 के अंदर इंडिया की हिंदुस्तान मोटर यूरोप की मॉरिस ऑक्सफर्ड से उनकी एंबेसडर की पेटेंट्स राटस को खरीद लेती है और वेस्ट बंगाल में इस गाड़ी को बनाना शुरू कर देती है। जो गाड़ी हम इतने सालों से इस्तेमाल करते आए वो भी दोस्तों इंडियन थी नहीं और सेकंड हमारे प्राइम मिनिस्टर मिस्टर शास्त्री ने इसी गाड़ी को इस्तेमाल करा अपने पूरे कैंपेनिंग या फिर हर एक पॉलिटिकल पर्पस के लिए। जिसको देख के बाकी सारे पॉलीटिशियंस ने भी इसको इस्तेमाल करना शुरू कर दिया 5 डकेट्स के अंदर इसकी इमेज सॉलिडिफाई हो गई एज अ प्रॉपर पावरफुल पॉलिटिकल कार जिसके अंदर अगर कोई बंदा बैठा है। He has some resources, पर फिर 1990s में ये गाड़ी काफी पुरानी हो जाती है जिसके अंदर काफी बेकार फ्यूल एफिशिएंसी होती है। इसके अंदर सेफ्टी के नाम पे लिटरल एयरबैग्स भी नहीं थे ना तो इस गाड़ी के अंदर कोई क्रंपल्स जोन थे तो मैं पर्सनली खुद भी ना चाहूं कि मेरे जो पॉलीटिशियंस हैं इस गाड़ी के अंदर घूम रहे हैं। पर फिर 2001 के पार्लियामेंट अटैक के बाद सब कुछ चेंज हो जाता है जिसमें ग्रुप ऑफ टेररिस्ट एक सिमिलर दिखने वाली वाइट कलर की एंबेसडर को लेते हैं जिसके अंदर पॉलिटिकल नंबर प्लेट होती है और इसको पार्लियामेंट के गेट के आगे लेके जाते हैं। अब सिक्योरिटी गार्ड्स को लग रहा होता है कि भाई अंदर तो कोई पॉलीटिशियन ही बैठा होगा क्या ही चेकिंग करनी और वो डायरेक्टली इस गाड़ी को अंदर ले जाते हैं और अंदर जाते ही दोस्तों इस गाड़ी के अंदर बम ब्लास्ट होता है जिससे इंडिया को काफी नुकसान हो सकता था। और अगर ये भी स्टोरी कम है तो अटल बिहारी वाजपेई जी भी एक अपने कॉन्वोय के अंदर चल रहे थे इस एंबेसडर के अंदर ही और रैंडमली ये गाड़ी बीच में रुक जाती है। और फिर इंडिया की स्पेशल प्रोडक्शन ग्रुप्स को उनको इवैकुएट करना पड़ता है एक दूसरी गाड़ी के अंदर। तो एसपीजी ग्रुप बोलता है कि भाई हम अब रिस्क और नहीं ले सकते इस गाड़ी के अंदर अपने प्राइम मिनिस्टर को और नहीं घुमा सकते। इसलिए वो दो वीआर 7 प्लस प्रोडक्शन वाली बीएमडब्लू 7 सीरीज के ऑर्डर देती है जिसके बाद इंडिया की हिस्ट्री में पहली बार ही होता है कि पूरे प्राइम मिनिस्टर के कॉन्वोय के अंदर सारी गाड़ियां फॉरेन मेड हैं। अब इसी टाइम में सिमिलरली जो छोटे लेवल के बाकी मिनिस्टर्स थे वो टाटा सफारी या फिर एंबेसडर या फिर महिंद्रा स्कॉर्पियो या फिर छोटी-मोटी और इंडियन कार्स के अंदर भी ट्रैवल करते थे। पर फिर 2009 में इंडिया में फॉर्चुना का लॉन्च होता है जो कि पॉलीटिशियंस को लगता है भाई ये तो कुछ ज्यादा एक्सेप्शनल गाड़ी है इतनी कुछ महंगी भी नहीं है और भाई इसके अंदर बढ़िया थोड़ी चौड़ भी है लैंड क्रूजर वाली तो इसकी अडॉप्टशन और होना शुरू हो जाती है। अब इस गाड़ी को दोस्तों पॉलीटिशियंस परचेज कर रहे होते हैं तो बढ़िया भाई लोग भी परचेज करना शुरू हो जाते हैं और 2010 के बाद इंडिया में काफी सारी हाई स्टैंडर्ड वाली फॉरेन कार मेकर्स भी इंडिया में गाड़ियों को लॉन्च करना स्टार्ट कर देते हैं। जिनकी क्वालिटी हमारे इंडियन कार मेकर मैच नहीं कर पाते तो धीरे-धीरे करके सारे पॉलीटिशियन भाई जैपनीज या फिर जर्मन या फिर बाहर की गाड़ियों पे शिफ्ट होते रहते हैं और हमारे इंडियन कार का सीन ऑलमोस्ट खत्म हो जाता है पॉलिटिकल सीन से। और अब इंडिया में जो मिनिस्टर्स की कार एडॉप्टशन है वो तीन चार टियर्स के अंदर डिवाइड हो रखी है जिसमें अगर एकदम एक लोअर लेवल वाला मिनिस्टर है तो जनरली वो एक टोयोटा fortuner के अंदर घूमेगा और उसके आसपास दो तीन और गाड़ियां होगी। हो सकता है स्कॉर्पियो n हो या फिर एक इनोवा वगैरह हो उसके ऊपर अगर उसने अपग्रेड कर लिया है तो वो जनरली एक डिफेंडर या फिर रेंज रोवर चलाएगा मतलब एज अ मेन कार और आसपास उसके तीन चार इनोवा या फिर स्कॉर्पियन घूम सकती है टोटल पांच गाड़ियां हो गई। उसके ऊपर अगर उसने अपग्रेड कर लिया है तो उसकी मेन गाड़ी एक रेंज रोवर ऑटोबायोग्राफी या फिर लैंड क्रूजर या फिर एक वेल्फायर हो सकती है और आसपास ऑलमोस्ट 10 गाड़ियां घूमनी होगी इनोवा fortuner और बाकी स्कॉर्पियो n वगैरह। और उसके ऊपर अगर उसने अपग्रेड कर लिया है दोस्तों तो वो ऐसे दिखाएगा कि वो तो नॉर्मल गाड़ी के अंदर घूम रहा है पर उसको अभी दोस्तों शौक होगा गाड़ी का पर वहीं पे अगर आप देखें फॉरेन में तो एकदम डिफरेंट सीन चल रहा है जिसमें जो फ्रांस के प्रेसिडेंट है वो स्टार्टिंग से ही एक फ्रेंच गाड़ी के अंदर घूमते आए है। लेटेस्ट में उनके पास एक d7 क्रॉस बैक है जो कि स्पेसिफिकली उनके लिए बुलेट प्रूफ कराई गई थी वहीं पे रशिया के प्रेसिडेंट इनिशियली एक mercedes pullman के अंदर घूमते थे। बाद में ऑरस कंपनी को उन्होंने ऑर्डर दिया स्पेसिफिकली रशिया के लिए उनके लिए गाड़ी बनाने की और अब बढ़िया 4.4 लीटर v8 वाली ऑरस सेनेट लिमोजिन के अंदर घूमते हैं। सबको शो ऑफ भी करते हैं कि भाई मेरी गाड़ी देखो कितनी कूल है। अमेरिका के प्रेसिडेंट अपनी स्टार्टिंग से cadilac1 के अंदर घूमते आए हैं जो कि 9000 किलो की गाड़ी है। लिटरली हमारे इंडिया के एक फुटपाथ के ऊपर फंस गई थी जब बराक ओबामा आए थे। अच्छा हुआ ट्रंप नहीं थे उस टाइम में वो तो बेइज्जती और कर देते। भाई जापान के जो प्राइम मिनिस्टर्स और प्रेसिडेंट वगैरह स्टार्टिंग से ही टोयोटा सेंचुरी या फिर लेक्सस की कार्स के अंदर घूमते आए हैं और अब इन्होंने पूरा शिफ्ट कर लिया है सेंचुरी के ऊपर। जितने पेट्रोट है ना जैपनीज लोग आप इनको लिटरली कन्वेंस नहीं कर सकते कि आप एक जर्मन गाड़ी ले लो या फिर कोई कोरियन गाड़ी ले लो। वही कोरिया के प्राइम मिनिस्टर एक genesis g90 या फिर हुंड नेक्सो के अंदर घूमते हैं दिखाने के लिए कि भाई इलेक्ट्रिक कार्स कितनी कूल है और हम भी इसी को चला रहे हैं। वहीं पे इटली के प्राइम मिनिस्टर मिला निया जी तो दोस्तों मजरत या फिर अल्फा रोमियो की कार्स के अंदर घूम रही है। Now that is really cool और जर्मनी के सारे मेन मेन मिनिस्टर्स तो ऑब्वियसली अपनी जर्मन कार्स के अंदर ही घूमने वाले हैं उनके पास वैरायटी इतनी ज्यादा है। तो अब आप सोचोगे कि भाई इंडियन कार मेकर्स भी अब तो ऑलमोस्ट इंटरनेशनल लेवल की गाड़ियां बनाने लग गए हैं। तो क्या दिक्कत आ रही है हमारे इंडियन मिनिस्टर्स को भी इन वाली गाड़ी के अंदर घूमने में तो अगर आप टॉप लेवल मिनिस्टर फॉर एग्जांपल प्राइम मिनिस्टर या फिर प्रेसिडेंट का एग्जांपल है। तो वो अपनी गाड़ियां खुद नहीं चूज करते बल्कि उनके लिए स्पेशल प्रोडक्शन ग्रुप्स चूज करते हैं। अब ये गाड़ियों को काफी डिफरेंट डिफरेंट क्राइटेरिया के ऊपर एसस करते हैं फॉर एग्जांपल गाड़ी में मिनिमम r7 प्रोडक्शन होनी चाहिए। अगर प्राइम मिनिस्टर के लिए गाड़ी है तो r10 प्लस प्रोडक्शन होनी चाहिए साथ ही में गाड़ी के साइड और अंडर बॉडी में 15 केजी के टीएनटी को हैंडल करने की क्षमता होनी चाहिए। तभी वो गाड़ी इनके काम की है उसका कैबिन पूरा सील्ड होना चाहिए ताकि बाहर की कोई भी प्रदूषण वाली हवा अंदर ना आ जाए और साथ ही में उसके अंदर एक सेफ्टी एग्जिट होना चाहिए ताकि अगर सारे दरवाजे लॉक हो जाए तो अंदर के ऑक्यूपेंट्स एकदम सेफ्ली बाहर आ पाए। और गाड़ी के अंदर एक काफी पावरफुल इंजन होना चाहिए ताकि अगर इमरजेंसी पड़े तो जल्दी से भाग के वो गाड़ी कहीं सेफ जोन के अंदर आ जाए और उसका इंजन थका ना हो। और गाड़ी का जो कोर है वो भी प्रॉपर्ली सील्ड और बुलेट प्रूफ होना चाहिए ऐसे नहीं है सिर्फ बाहर बाहर प्रोटेक्शन कर दी जो कि हमारे इंडिया के मेजर कार मेकर्स को प्रोवाइड करने में अभी फिलहाल काफी दिक्कत आती है। क्योंकि एवरेज फिलहाल एक इंडिया में गाड़ी का वेट है 1500 से लेकर 2500 किलो के बीच का अब अगर इन्हीं गाड़ी को बुलेट प्रूफ बना दिया जाता है तो वो अराउंड 5 से लेकर 6000 किलो की हो जाएगी। अब इतनी भारी गाड़ी को चलाने के लिए काफी पावरफुल इंजन चाहिए होगा पर मैक्सिमम इंडियन कार मेकर्स के पास 200 हॉर्स पावर वाला इंजन है तो भाई वो काही इतनी भारी गाड़ी को भगा पाएंगे। और अगर लगा दिया तो भाई ये 0 टू 100 14 सेकंड में करेगी उतने में तो बम फूट जाएगा क्या फायदा साथ ही में इंडियन कार मेकर अगर बाहर से भी अपनी गाड़ी को बुलेट प्रूफ कर देंगे पर उनका कोर को बुलेट प्रूफ करना काफी मुश्किल है। क्योंकि उनके पास कोई भी स्पेशल यूनिट है नहीं ये सब करने की जैसे रेंज रोवर, बीएमडब्लू या फिर mercedes के पास है जो कि एक और बड़ी दिक्कत आती है। और थर्ड दिक्कत है कि एक प्रॉपर जीरो से लेकर टॉप तक बुलेट प्रूफ कार को बनाने के लिए 1000 करोड़ प्लस की आर एन डी कॉस्टिंग आती है। जो कि अगर कोई भी इंडियन पॉलीटिशियन या फिर पॉलिटिकल पार्टी करती भी है तो अपोजिशन वाली पार्टी बोलेगी कि भाई ये कितने सेल्फिश लोग है अपनी खुद की गाड़ी के लिए 1000 करोड़ खर्च कर रहे जनता के। जब उनको पता नहीं कि भाई इससे पूरे देश का कितना फायदा होने वाला है और कितनी अच्छी मार्केटिंग होने वाली है पर वहीं पे जो लोअर लेवल वाले पॉलीटिशियंस है फॉर एग्जांपल मिनिस्टर्स वगैरह एमएलएज वगैरह इनके पास कोई भी दोस्तों स्पेशल एसपीजी ग्रुप्स की एडवाइस होती नहीं है कि आप इस वाली गाड़ी को परचेज करो या फिर इस वाली गाड़ी को। इनका खुद का इंटरेस्ट होता है कि इनको कौन सी गाड़ी के अंदर घूमना है तो अगर ये एक इंडियन कार मेकर को छोड़ के एक जर्मन जैपनीज या फिर यूरोपियन कार मेकर के पास जा रहे हैं तो इनकी पर्सनल चॉइस है इनको वही गाड़ी ज्यादा अच्छी लगती है एज कमिटेड टू टाटा सफारी या स्कॉर्पियो n वगैरह। इसमें आपको इनको कन्वेंस करना पड़ेगा इसमें कोई भी भाई ऐसे टेक्नोलॉजी या कुछ भी दिक्कत आ नहीं रही। अब इसमें अगर आप देखें तो हमारे जो योगी जी है उनके पास एक gls 350 d आर्मर्ड या फिर एक लैंड क्रूजर आर्मर्ड है जो कि दोस्तों काफी कुछ aptain को चाहिए होगी इतनी सिक्योरिटी वाली गाड़ी। नितीश कुमार जी के पास एक रेंज रोवर या फिर एक हुंड आयोनिक 5 है तो इलेक्ट्रिक कार के ऊपर भी थोड़ा बहुत ट्रांजिशन हो रहा है। जो हमारे राहुल गांधी जी है उनके पास जीप रैंगलर या फिर टाटा सफारी है वहीं पे दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता जी एक एमजी ग्लस्टर के अंदर ट्रैवल करती है जो और बाकी अगर आप देखें काफी सारे मिनिस्टर्स के पास रेंज रोवर है काफी सारों के पास टोयोटा की लैंड क्रूजर या फिर fortuner वगैरह है। पर अब के टाइम में इंडियन कार्स की कंसंट्रेशन काफी कम हो गई है टू बी ऑनेस्ट। अब ऐसा भी नहीं है हमारे इंडिया के टॉप लेवल जो बड़े-बड़े कार मेकर है इन वाली कार्स को बनाने में असक्षम है क्योंकि जो इंडिया की तीन बड़े आप कार मेकर कह सकते हैं जो कि पैसेंजर व्हीकल्स बनाते हैं। जिसके अंदर टाटा मोटर्स के पास खुद का अपना टाटा एडवांस सिस्टम वाला एक बुलेट प्रूफिंग वाला डिपार्टमेंट है जो कि सिर्फ अपनी नहीं बल्कि और कार मेकर की कार्स को भी बुलेट प्रूफ बनाते हैं ऑलमोस्ट नेटो लेवल पे।
[10:04]पर कोई भी इनकी प्रॉपर पैसेंजर व्हीकल है नहीं जो कि वाइड स्केल हर एक बंदा इस्तेमाल कर रहा हो जिसकी वजह से अगर आप देखें इनकी सब्सिडियरी जैगवार लैंडरोवर के पास एक sentinel वाला डिपार्टमेंट है जो कि स्पेसिफिकली बुलेट प्रूफ रेंज रोवर को बनाती है। जो कि ऑलमोस्ट वर्ल्ड के टॉप फाइव बुलेट प्रूफ कार्ड्स में से आप ये कह सकते हैं ऑलमोस्ट सारी कंट्री के पॉलीटिशियन इनडायरेक्टली इस वाली गाड़ी का इस्तेमाल करती है जिसके अंदर आपको r8 से लेके r10 तक की प्रोटेक्शन मिलती है। और इस गाड़ी के कोर से लेके इस गाड़ी की ओवरऑल बाकी सारी चीजें लैंड रोवर खुद से बना रहे हैं अब टाटा मोटर चाहे तो sentinel वाले डिपार्टमेंट का इस्तेमाल कर के अपनी खुद की एक बुलेट प्रूफ कार को बना सकती है। जिसमें सबसे अप्रोपो होने वाली है जो कि इंडिया में लोकली बनेंगे टाटा मोटर के नए वाले प्लांट पे और इस वाली गाड़ी के अंदर वही कोर इस्तेमाल हो रहा है जो कि लैंड रोवर की आने वाली कार्स के अंदर इस्तेमाल होगा तो शेयर्ड आर्किटेक्चर भी है। अब इसके अंदर बेनिफिट क्या है कि ये गाड़ी काफी बड़ी होने वाली है काफी लग्जरियस होने वाली है तो जो टॉप लेवल पॉलीटिशियंस है उनके लिए काफी अप्रोपो है। साथ ही में ये गाड़ी इलेक्ट्रिक होने वाली है जिसमें आपको अराउंड 95 किलोवाट आर की बैटरी मिलेगी ड्यूल मोटर मिलेगी 400 हॉर्स पावर प्रोड्यूस करने वाली। अब अगर यह गाड़ी इलेक्ट्रिक है तो मोदी जी के लिए इस गाड़ी को एकदम चार्ज करके रखना पड़ेगा जिसके लिए आप सबको पता ही है। मैं एक ही रिलायबल ईवी चार्जिंग नेटवर्क पर ट्रस्ट करता हूं दैट इज स्टैटिक अब यह गाड़ी 800 वोल्ट वाले आर्किटेक्चर के ऊपर बेस्ड है और स्टैटिक के नेटवर्क के अंदर 240 किलोवाट वाले चार्जर्स भी है। जिससे इस गाड़ी में 30 मिनट्स के अंदर 300 किलोमीटर की रेंज आ सकती है स मोदी जी इज गोइंग टू नेवर फेस अ डिले। साथ ही में स्टैटिक के एक सिंगल ऐप में आपको मल्टीपल ईवी चार्जिंग नेटवर्क्स के चार्जर भी दिख जाएंगे डिफरेंट कलर से दिख रही है। ये मोदी जी के घर के आसपास के सारे चार्जर्स है और उनका नीचे प्रॉपर स्टेटस भी आता है कि कौन सा चार्जर अवेलेबल है और वो कितने वट्स का है तो कहीं पे भी रेंज एंग्जाइटी होने नहीं वाली और साथ ही में बाकी सारे ईवी चार्जिंग नेटवर्क्स के ऊपर या तो मेजरली चार्जर्स खराब पड़े होते हैं। या तो वो चल नहीं रहे होते या तो आउटडेटेड होते हैं पर स्टैटिक के अंदर आपको चार्जर्स में मैक्सिमम अप टाइम मिलेगा विथ न्यूएस्ट टेक्नोलॉजी दैट आई कैन एश्योर यू विद माय पर्सनल एक्सपीरियंस। और मान लो अगर ये गाड़ी घर पे चार्ज करनी है तो स्टैटिक का नेक्टर वाला चार्जर है और अगर पोर्टेबल ही कई और पे भी चार्ज करनी है तो स्टैटिक का 3.3 किलोवाट वाला पोर्टेबल चार्जर भी आता है। जो कि आप सब कुछ ऑर्डर कर सकते हैं स्टैटिक के ऐप से लिंक डिस्क्रिप्शन में है। अभी जाके डाउनलोड करो इंडियास मोस्ट रिलायबल ईवी चार्जिंग नेटवर्क ऐप वहीं पे जो टाटा मोटर्स की सफारी है और जो हैरियर है उसका भी काफी कुछ इस्तेमाल हो सकता है एस्कॉर्टिंग व्हीकल के तौर में। जिसमें अगर आप देखें इंडिया के जो टॉप लेवल मिनिस्टर है उनकी एक प्राइमरी गाड़ी होती है आसपास तीन चार पांच और गाड़ियां होती है जिसमें सिग्नल ब्रेकर्स या फिर प्रोडक्शन वाला इक्विपमेंट होता है। अब इन वाली कार्स को भी बुलेट प्रूफ बनाना होता है पर उस लेवल का नहीं जिस लेवल में मेन ऑक्युपेंट बैठा हुआ है तो जो टाटा सफारी है और जो हैरियर है उनका भी ऐसा बुलेट प्रूफ वर्जन बन सकता है एक vr67 लेवल पे। पर साथ ही में अगर आप देखें इंडियन कार मेकर की जो टाटा मोटर है उसकी लेटेस्ट प्रोडक्ट है टाटा सिएरा जिसका अगर एक प्रॉपर बुलेट प्रूफ लिमोजिन वाला वर्जन बनता है दैट वुड बी रियली गुड फॉर द मार्केटिंग ऑफ द ओवरऑल ब्रांड और इंडियन कार मेकर्स के लिए भी। वहीं पे अगर आप देखें जो सेकंड कार मेकर है force मोटर्स उसकी गुर्खा काफी एक यूटिलिटी टेरियन काफी बड़ी सी गाड़ी है। जिसका जेसीबीएल और बाकी सारी आर्मरिंग कंपनीज खुद से एक बुलेट प्रूफ वाला वर्जन बनाती है अब force मोटर खुद से तो इसका बुलेट प्रूफ वर्जन बनाती नहीं पर यह गाड़ी भी एस्कॉर्टिंग व्हीकल के तौर पे काफी बढ़िया इस्तेमाल हो सकती है। क्योंकि एक तो इस गाड़ी के अंदर 3000 सीसी का इंजन है जो कि काफी बढ़िया टॉर्क प्रोड्यूस करता है और अंडर पावर्ड है। साथ ही में गाड़ी काफी बड़ी सी है और इसकी बॉडी ऑलरेडी काफी भारी है तो अगर इसके ऊपर चेंजेज करते भी है force मोटर तो वो काफी कम इंपैक्ट डालेंगे गाड़ी की ओवरऑल ड्राइविंग वगैरह में। अब वहीं पे इससे और पोटेंशियल लगता है महिंद्रा जिसकी खुद की एक बुलेट प्रूफिंग आर्मी है यूएई के अंदर जो कि लैंड क्रूजर और महिंद्रा की खुद की कार्स को भी बुलेट प्रूफ करते हैं। पर अगर आप देखें महिंद्रा की जो पूरी लाइनअप है वो काफी पोटेंशियल लगती है इन वाले काम के लिए जिसमें जो इनकी स्कॉर्पियो n है ऑलरेडी उसका बुलेट प्रूफ वाला वर्जन काफी सारे एस्कॉर्ट व्हीकल्स के तौर पे इस्तेमाल हो रहा है। और अगर इसकी सेफ्टी एनहांस महिंद्रा कर देते हैं और इसके अंदर जो कोर है उसको भी बुलेट प्रूफ बनाते हैं तो काफी ज्यादा पोटेंशियल है कि टॉप लेवल पॉलीटिशियंस भी इस गाड़ी का इस्तेमाल कर पाए। स्पेशली अगर हमारे इंडिया की पीएम करते हैं दैट वुड बी रियली नाइस। साथ ही में जो थर है उसका भी बुलेट प्रूफ वाला वर्जन ऑलरेडी बन रहा है। महिंद्रा नहीं बना रहे बाकी सारे जेसीबीएल वगैरह बना रहे हैं। इसका भी काफी इस्तेमाल हो सकता है अगर ऐसे एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल फॉर्म में एक ऐसे बढ़िया व्हीकल चाहिए। जिससे एटलीस्ट टॉप टियर वाले तो नहीं पर सेकंड टियर वाले पॉलीटिशियंस इस गाड़ी का इस्तेमाल कर ले तो और बढ़िया होगा और अगर ऐसा होने लग जाता है तो दोस्तों तीन चार काफी बड़े बेनिफिट्स हैं। पहला है मार्केटिंग का कि फॉर एग्जांपल जब भी हमारे इंडिया का कोई भी मिनिस्टर बाहर जाता है और वह अगर अपनी गाड़ी को लेकर बाहर जाएगा तो बाकी मीडिया भी उस गाड़ी को कवर करेगी उस कॉन्वोय को कवर करेगी जिससे हमारी इंडियन ब्रांड्स की अपील फॉरेन मार्केट के अंदर भी और इनक्रीस होने वाली है। और हमारे ब्रांड्स को बाहर गाड़ियां बेचने में और आसानी होगी कि जो हमारे प्राइम मिनिस्टर है वो खुद हमारी टाटा सीरा के बुलेट प्रूफ वाले वर्जन का इस्तेमाल कर रहे हैं। तो आप भी इसको खरीद के देखो आपने ऑलरेडी तो देखी हुई है ये गाड़ी जब हमारे प्राइम मिनिस्टर मिलने आए थे आपसे जो कि बाकी सारी कंट्रीज को भी हो भी रहा है क्योंकि जापान के अंदर सेंचुरी टोयोटा ने स्पेसिफिकली उनके रॉयल फैमिली और उनके मिनिस्टर्स के लिए बनाई थी। उसके बाद ही उस गाड़ी की अपील इतनी बढ़ गई जापान में इस गाड़ी के लिए ऑलमोस्ट दो दो साल की वेटिंग चलती है और फॉरेन में भी अब लोग इस गाड़ी को परचेज करना स्टार्ट हो गए हैं। साथ ही में जो रशिया के प्रेसिडेंट अपनी ऑरस सेनेट लिमोजिन को हर एक कंट्री के अंदर लेके जाती है। तो प्रॉपर्ली सब को दिखाते हैं कि भाई मेरी कंट्री में देखो कितनी बढ़िया गाड़ी बनी है। उनको ऐसे ड्राइव पे लेके जाते हैं दिखाने के लिए कि रशियन टेक्नोलॉजी इज सो गेटिंग अहेड ऑफ एवरीवन। तो हमारे इंडियन पॉलीटिशियन भी दोस्तों ऐसे ही ब्रैक कर सकते हैं बाहर जाके कितना बढ़िया होगा जिससे ऑर्डर भी और मिल सकते हैं कि फॉर एग्जांपल मान लो एक कोई साउथ अफ्रीका की कंट्री का कोई प्रेसिडेंट है मान लो वो बोल रहा है कि भाई मुझे रेंज रोवर sentinel पड़ रही है 4 करोड़ की। जो इसकी पेरेंट कंपनी है टाटा मोटर उनकी अवनिया सेम लेवल की बुलेट प्रूफिंग ऑफर कर रही है। ₹80 लाख में तो मैं पांच ऑर्डर कर देता हूं मेरा पूरा जो कॉन्वोय है वही बुलेट प्रूफ हो जाएगा। सेकंड दोस्तों अगर इंडिया में प्रॉपर इस लेवल की गाड़ी बनती है जिसके ऊपर 1000 करोड़ के आसपास की आर एन डी होती है इनफैक्ट उससे भी ऊपर तो इंडिया का इंजीनियरिंग लेवल थोड़ा और इनक्रीस होगा। और हम वर्ल्ड क्लास लेवल की सेफ्टी प्रोडक्ट्स वगैरह बना पाएंगे जो कि अभी हम इतने सक्षम है नहीं क्योंकि कॉस्ट कटिंग के ऊपर हम ध्यान देते रहते हैं और थर्ड इससे फायदा होने वाला है कि जब इंडियन पॉलीटिशियन इंडियन गाड़ियों का ही इस्तेमाल करेंगे। तो उनको इंडियन गाड़ियों की दोस्तों दिक्कत भी दिखेगी और प्लस पॉइंट्स भी दिखेंगे। दिक्कतें अगर दिखेगी तो हमारे इंडियन कार मेकर्स को और इंसेंटिव होगा इन गाड़ियों को दोस्तों और अच्छा बनाने का। बाकी मैं तो ये मानता हूं कि एक अवनिया का बुलेट प्रूफ वाला वर्जन वुड बी द परफेक्ट कॉमिनेशन फॉर इंडियन पॉलीटिशियंस। यही था आज की वीडियो में अगर आपको पसंद आया तो लाइक शेयर सब्सक्राइब कर देना कार वर्सल



