[0:00]वह उसे अपने करीब खींच गया, अपने दोनों हाथ उसके सीने पर रखते हुए खुद को उसके साथ टच होने से बचाया, लेकिन उसके दोनों हाथों को अपने खुले सीने पर महसूस करते पृथ्वीराज का दिल जोरों से धड़क उठा था। पहली बार किसी लड़की ने उसे यूं छुआ था और उसका जुनून समंदर में तैरने के बराबर हुआ था। खींचकर उसे अपने सीने में ज़ोर से दबाया था। छोड़ दो मुझे, क्या कर रहे हो? सोनल छटपटाने लगी। क्या मतलब क्या कर रहा हूं, तुम्हें महसूस कर रहा हूं। आज की रात तुम्हें जी भर कर महसूस करना चाहता हूं। वह उसे लिए बिस्तर पर गिर चुका था। सोनल अब अपने ऊपर कंट्रोल नहीं रख पा रही थी और सीधा उसके साथ बिस्तर पर गिर गई। क्या बदतमीजी है। सोनल ने अब की बार थोड़ा सा गुस्सा दिखाया था और उसे ऊपर से हटाना चाहा, जो दोनों बाजू का घेरा उसके आसपास बनाकर उसके जिस्म पर पानी की नन्ही बूंदे गिरने से। सोनल का दिल बुरी तरह से कांप रहा था। छोड़ने के लिए शादी थोड़ी की है। उसकी गर्दन में मुंह छुपाता गंभीर शब्दों में बोला, भूलो मत, यह शादी सिर्फ एक रात की शर्त थी। पृथ्वीराज ने गुस्सैल आंखों से उसे देखते हुए उसके गुलाबी होंठ पर उंगली रखी। तुम मेरी हो, और सिर्फ पृथ्वीराज की ही रहोगी। वह अब खुमारी भरे शब्दों में बोला। सोनल की सांस रुक गई। उसको यूं बेबाकी करते वह बड़ी आश्चर्य से उसे देखने लगी। पृथ्वीराज के चेहरे पर एक मुस्कान उभरी। उसने एक पल में पोजीशन चेंज की थी। अब वह नीचे और पृथ्वीराज ऊपर होते, उसके दोनों तरफ हाथ रखते उसके चेहरे पर झुका था। सोनल अपने दिल को संभालती अपनी आंखें मिच गई। उसे भी पृथ्वी की मोहब्बत भरी इस अदा पर तड़प कर प्यार आया था। पृथ्वीराज ने उसके नर्म नाजुक गालों पर हाथ फेरा तो वह गहरी सांस भरकर रह गई थी। वह चाह कर भी अब उसका हाथ पीछे नहीं हटा पा रही थी। धीरे से उसके सर के पीछे हाथ ले जाते उसका चेहरा ऊपर को उठाया। सोनल ने बेडशीट को बड़ी ज़ोर से मुट्ठियों में दबोच लिया। सोनल, प्लीज़ अपनी आंखें खोलो, धीरे से बोला, लेकिन सोनल अपने दिल की धड़कनों को संभालती या उसकी मोहब्बत को सहती। पृथ्वीराज अबकी बार अपना गाल उसके चेहरे के साथ बड़ी ज़ोर से रगड़ा, तो सोनल ने आंखें खोलकर उसे बड़ी ज़ोरों से घूरा था। पृथ्वीराज के चेहरे पर एकदम मुस्कान छा गई थी और जल्दी से अब वह उसके होंठों पर झुका था। सोनल का दिल ही दहल कर रह गया था। आंखें फैलाए अब पृथ्वीराज को अपने ब्यूटी पर झुके हुए आंखों को देख रही थी, जो उसके होंठों पर और अब उसके ब्यूटी बोन पर झुका उसकी सांसें खींच रहा था। सोनल ने घबराकर सांस लेने के लिए अपना मुंह खोला, लेकिन पृथ्वीराज ने अपनी सांसो छोड़ते उसकी सांसों को महसूस कर रहा था और अब उसे पूरा बेबस कर दिया। वह उसके कंधे पर अपना नाखूं गाड़ गई थी, लेकिन उसके होंठों से लिपटा मदहोश होता सब कुछ भूला गया। दो आंसू टूटकर उसके गालों पर गिरते हुए। गहरी सांस लेती पृथ्वीराज अब उसका होंठ अपने होंठों से चूमता ज़रा सा पीछे हटा था। और उसका लाल भूका का चेहरा देखते अपने होंठ दांतों तले कुचल गया। वह गहरी सांस भरकर रह गई थी। प्लीज़ पीछे हटो, मुझे सांस लेने दो। लंबे-लंबे सांस ले रही थी। पृथ्वीराज उसकी गर्दन पर अपने होंठ रखे उसे अपनी सांसों से महकाने लगा था। सोनल आंखें मीचे उसका प्यार बर्दाश्त करती अब रो देने वाली थी। इस तरह बेबाक होगा, उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था। उसके अंकल ने तो उसे पृथ्वीराज से दूर रहने को कहा था और साफ शब्दों में समझाया भी था कि इस शादी को तुम हकीकत मत समझना। पृथ्वीराज की उस पहल मोहब्बत पर वह खुद को बेबस महसूस कर रही थी। कैसे वह उससे बच पाती और अपने आप को बचा पाती। पृथ्वीराज अब मदहोश हो रहा था, उसके खूबसूरत जिस्म पर घूम रहा था। एकदम सोनल ने उसे ज़ोर से खुद से पीछे हटाया था। उसकी पकड़ हल्की थी, जिस वजह से वह बिस्तर पर एक तरफ को हुआ था। सोनल झट से उठती दूर जाकर खड़ी हुई थी। आंखों में ढेर आंसू थे, चेहरा गुलाल बना हुआ था। वह होंठों पर पृथ्वीराज के अभी-अभी दिए हुए निशानों को अपने हाथों से छू रही थी। उस वक्त पृथ्वीराज के दिल पर जैसे बिजलियां गिरी हुई थी। प्लीज़ मेरे पास मत आओ, दूर रहो मुझसे, वरना। वह उंगली उठाकर पृथ्वीराज को अब वार्निंग कर रही थी। पृथ्वीराज का दिमाग भक से उड़ा। आज तक किसी की हिम्मत नहीं हुई थी कि उसे न्यू वार्निंग कर सके। सामने खड़ी लड़की ने इतनी हिम्मत की पृथ्वीराज को वह इस तरह धमकाएगी और अब वह अच्छी तरह से जानता था। सोनल का इतना हौसला अब पृथ्वीराज ने हीं बढ़ाया था। उसके पास जाकर झटके से उसे बाजू से पकड़कर अपनी तरफ ज़ोर से खींचा, वह फिर से उसके सीने से जा टकराई। एक इंच की दूरी भी अब ना रह सकी थी। उसके चेहरे को गुस्से से देख रहा था। तुम, तुम रुकोगी पृथ्वीराज को तुम? वह गुस्से से अब दहाड़ रहा था। हां, रोकूंगी, क्योंकि यह एक दिन की शादी थी बस। सब दौलत का खेल है, पैसों के लिए सब रिश्ते बिकने लगे हैं। हमारी शादी भी उसी का एक कड़वा सच है। आज की रात गुज़रते हैं, पृथ्वीराज भूल जाओ गांव की कोई सोनल थी और उसे एक रात के लिए सोनल अपनी इज्ज़त को यूं आपके हाथों बर्बाद नहीं होने दे सकती। सुना आपने, अब छोड़ो मुझे। वह उसे दूर धकेलने की नाकाम कोशिश में लगी हुई थी। जबकि पृथ्वीराज का दिमाग उस बात पर और ज़्यादा घूम गया था। उसने उसे बिस्तर पर धक्का दिया। अपने उस छोटे से दिमाग में एक बात अच्छी तरह से बैठा लो। पृथ्वीराज तुम्हें अपने हाथों से मार तो सकता है, लेकिन छोड़ नहीं सकता, समझी तुम? वह गुस्से से भड़का और ड्रेसिंग रूम में बंद हो गया था। उसको छोड़ने की बात कैसे कर सकती थी। पृथ्वीराज ने ड्रेस चेंज करते हुए अपने कदम बाहर निकाले। वह बिस्तर पर बैठी आंसू बहा रही थी। चाहे तो एक मिनट में तुमसे अपना अधिकार भी ले सकता हूं, लेकिन अब ऐसा मैं नहीं करूंगा। तुम्हें बस एक रात का डर है ना कि तुम सिर्फ एक रात के लिए यहां आई हो। वह अपनी घड़ी पहनता हुआ उसको अपने गुस्से से मिलवा रहा था और उसे घूरते हुए सब कुछ बोल रहा था। अब तुम्हारा यह डर खत्म करके उसके बाद तुमसे अपना अधिकार वसूल करूंगा, जब तक तुम खुद मेरे पास नहीं आओगी, सुना तुमने? यह बात उसने इतनी ज़ोर से दोहराई कि सोनम बिल्कुल डरकर सहम गई। अपना मुंह फेरता अब शीशे के आगे खड़ा अपने बालों को कंघी करने लगा। विदेशी लफंडर लड़का, वह मिनमिनेते हुए बोली थी, लेकिन पृथ्वीराज ने उसकी बड़बड़ाहट सुन लिया था। सर झटका, तब अलमारी से अपनी जैकेट निकालकर पहनने लगा, फिर चुप से कमरे के दरवाज़े की तरफ कदम बढ़ा दिए। तुम्हें इस कमरे से कमरे से बाहर निकालने की ज़रूरत नहीं, अभी मैं जा रहा हूं सुबह तक आऊंगा। वह मुड़कर उसे गुस्से से बोला तो सोनल का जी चाहा उसे पूछे वह कहां जा रहा है? लेकिन फिर उसके जाने में ही अपनी भलाई समझती चुप रही। उसके जाते ही उठकर दरवाज़ा लॉक किया और आईने में खड़े होते अपना चेहरा देखा, जो पल भर में पृथ्वीराज की मोहब्बत ने उस पर अपना रंग छोड़ दिया था। इसका दोनों होंठ सूजा हुआ था। और बिल्कुल सुर्ख लाल हो रहा था उसके खून छलकते होंठ अब आईना उसको मुंह चिढ़ा रहा था। वह चेहरा छुपाते फूट-फूटकर रो दी। सारी दुनिया एक जैसी है, मतलबी। प्लीज़ नाना जी, मरते-मरते यह मुझ पर कौन सा जुर्म कर दिया आपने, मुझे इस विदेशी इंसान के हवाले जोड़ दिया। वह अपने नाना अंकल से दिल ही दिल में अब भगवान से शिकायत कर रही थी और बिस्तर पर आकर लेट गई। रोते-रोते कब उसकी आंख लग गई, उसे खबर भी ना हुई। सुबह पूजा-आराधना के समय उसका दरवाज़ा बजा, लेकिन वह गहरी नींद में सोई हुई थी। पृथ्वीराज को अब उस पर गुस्सा आ रहा था। वह मंदिर में पूजा करने गया हुआ था और सोनल अपना दरवाज़ा लगाकर सो गई थी। अपने गुस्से पर वह सब्र करता रूम के बैक साइड आता, गैलरी से जंप करता, मुड़कर गैलरी का दरवाज़ा अंदर से लॉक कर गया। अब खिड़की के रास्ते अपने बिस्तर पर आया था वह तो गहरी नींद में लेट सपने देख रही थी, मज़े से लेटी हुई थी। उसके दूसरी तरफ आराम से कंबल में घुसता वह भी नींद में चला गया। आज का दिन बहुत-बहुत खास था, आज बहुत ज़रूरी फैसला होना था। वह सोनल की तरफ करवट लेता उसे देखता, आंखें बंद कर गया। सुबह जब आंख खुली तो सोनल पृथ्वीराज की बांहों में थी। उसके बांहों में बुरी तरह से कसमसाई, पीछे हटना चाह रही थी। पृथ्वीराज ने उसकी तरफ करवट ली थी, उसे और ज़्यादा अपने सीने में दबाते हुए उसे फिर से चूम लिया था। छोड़ो विदेशी लड़के। सोनल को फिर से रात का मंजर याद आने लगा, जब उसने उसके होंठों पर जुल्म ढाया था। उसके आनाकानी करने पर सोनल गहरी नींद से जाग चुकी थी और उसे अपने ऊपर इस तरह फिदा होते बुरी तरह घबरा गई थी। क्या बोल रही हो विदेशी लड़का, उसके चेहरे के पास चेहरा करते फिर से खुमारी भरे शब्दों में बोला, तुम सही कह रही हो, मैं विदेशी लफंडर नहीं, अब ठर्की हूं। सोनल ने माथे पर बल डालते, अपनी कलाई छुड़वाते, तड़पकर जवाब दिया। पृथ्वीराज का ठहाका गूंजा अपने दिल को बहुत बुरी तरह तड़पा चुका था, जो बार-बार सोनल की मोहब्बत की मांग कर रहा था, लेकिन वह हकीकत में उसकी खूबसूरत पसंद की लड़की थी। वह जानती थी यह सब एक सपना है, यह फ्रॉड आदमी उसका कभी नहीं हो सकता था। तुम्हारे लिए मैं बहुत कुछ हूं, लेकिन तुम मेरे लिए क्या हो, तुम खुद भी नहीं जानती। लगता है तुम्हारे नाना अंकल ने मेरे बारे में तुम्हें कुछ भी नहीं बताया। अब वह एक तरफ होकर लेटता उसके तरफ देख कर प्यार से बोला। बताने लायक कुछ होता तो बताती ना। सोनल थोड़ा ऊपर होकर बैठी। एक यही चीज़ बे-हिसाब थी, उसका कॉन्फिडेंस कभी खत्म नहीं होता था। वैसे एक बार बताया था उन्होंने कि उनका एक पोता भी है जो विदेश में रहता है, पूरा लफंडर टाइप है। उस जैसा लफंडर इस दुनिया में अभी उसके शब्द मुंह में थे, सोनल ने उसे अपने चेहरे पर झुकने दिया, उसके होंठों को फिर से कुचल दिया था। वह अब फिर से तड़प गई थी। वह भी अपने नाम की तरह अटल बंदा था, अपनी मोहब्बत और अपनी प्यास मिटाकर ही पीछे हटा था। मेरे सामने अपनी ज़ुबान थोड़ा कम ही खोला करो। तुम्हारे होंठ जब बोलने के लिए आगे बढ़ाती हो तो दिल ऐसी बेमनिया पर उतर जाता है। उन्हें थोड़ा कम ही खोला करो, वरना खा जाऊंगा इन्हें। इन होंठों का पाउच बनाकर फिर से गहरी किस करता पीछे जाता। सोनल के होंठों को अब जगह-जगह कट भी लगा चुका था। तुम एक नंबर के बेशर्म इंसान हो। गुस्से से उसे देखकर बोली थी, पृथ्वीराज मुझे छोड़ दो। तुम पृथ्वी की मोहब्बत हो। आज वसीयत का फैसला होना भी बाकी है, एक तूफानी पहाड़ है जो सब पर गिरने वाला है। पृथ्वीराज की बात पर सोनल ने उसे घूरकर देखा। क्या मतलब, तुम जानते हो वसीयत में क्या है? वह उठकर उसके पास आते शक से बोली। तुम फिर वही गलती दोहरा रही हो, मेरी प्यारी मनमोहिनी। फिर कोई गलती कर जाऊंगा तो मुझसे शिकायत मत करना। उसके होंठों की तरफ इशारा करते हुए, गहरी नज़रों से उसे देखते, अपना ड्रेस अलमारी से निकालते रुका था। सोनल उसका यूं खुला जिस्म देखकर पीछे हट गई थी। वह मुस्कुराता हुआ ठहाका लगाता बाथरूम में घुस गया। सोनल अब टेढ़ा-मेढ़ा मुंह बनाती, उसकी नकल उतारते हुए वहीं बैठ गई। कितना बेशर्म इंसान है, रात से मेरे होंठों के इसने चूरमा बनाकर रख दिया है। बेशर्म इन होंठों के पीछे ही पड़ा हुआ है। इतना लिहाज़ नहीं है। अभी नाना अंकल को गए सिर्फ दो-तीन दिन बीते हैं, सभी भूल गए उन्हें। आई मिस यू नाना अंकल जी। वह उठकर अब अपने कमरे की खिड़की की तरफ आ गई और बाहर गुस्से से देखती, हवाओं ने सुबह से बसेरा किया हुआ था। आज वसीयत खुल जानी थी, फिर अंकल मुझे यहां से अपने साथ ले जाएंगे। वह बातों को सोचती रो रही थी। क्या खेल मेरे साथ इश्क ने खेला है, क्या गम का समां होगा। दिल कल भी मेरा अकेला था, दिल आज भी मेरा अकेला रह जाएगा। हम तिनके जैसे फिरते रहे, यह कैसा ठोकर खा बैठे। एक बार फिर वकील साहब हवेली में पहुंच चुके थे। इस बार उनके हाथ में वसीयत की फाइल थी, जैसे आज वह सबके सामने पढ़कर सुनाने वाले थे। सभी अपनी-अपनी जगह पर पोजीशन संभाले, सांस रोके उन्हें देख रहे थे, सिवाय पृथ्वीराज के, जैसे उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ने वाला था। सोनल अपने होंठ काट ली, बेकाबू बेचैन हो रही थी। जैसा कि खानदान के हिसाब से पृथ्वीराज और सोनल की शादी हो चुकी थी, अब वसीयत को खोलने का वक्त भी आ गया था। वकील साहब ने बड़े प्यार से वसीयत खोली, उन्होंने पढ़ना शुरू किया। सब उनकी बातों को बड़े गौर से सुन रहे थे। पृथ्वीराज, सोनल की शादी के बाद, इस वसीयत के हिसाब से मेरी सारी जायदाद, बैंक बैलेंस, ज़मीन, अपना बिजनेस, सब कुछ मैं अपनी इकलौती पोते और उसकी पत्नी सोनल के नाम करता हूं। यह दोनों मेरी जायदाद के केयरटेकर होंगे, तब तक जब तक उनकी औलाद नहीं हो जाती। जैसे ही उनकी औलाद होगी, यह सब कुछ उसके बालिग होने पर बच्चों के नाम ट्रांसफर हो जाएगा। लेकिन अगर औलाद होने से पहले ही वह अलग हो जाते हैं, तो मेरी सारी जायदाद ट्रस्ट को दे दी जाए। वकील साहब ने यह सब पढ़कर चश्मा ठीक किया और सबके तरफ देखा। यशवर्धन और उनके दोनों भाइयों के तो होश ठिकाने लग गए थे। सोनल बिल्कुल हैरान होती पृथ्वीराज के तरफ देख रही थी, जो साइड में मुट्ठी बनाए बहुत सुकून से वकील साहब की बातें सुन रहा था। सोनल के देखने पर उसने एक आंख दबाई और उसकी तरफ मुस्कुरा कर देखता ठहर गया। उसके हिलते होंठों से अंदाजा लग गया था कि उसने क्या कहा। वकील साहब, शायद आप वसीयत का कुछ हिस्सा छोड़ गए हो। वकील साहब को गहरी सोच में डूबा देखकर पृथ्वीराज ने उन्हें चौंका दिया, तो वह अपना चश्मा ठीक करने लगे। पृथ्वीराज अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ, सबकी नज़रें उसी पर टिक गई। आपने यह तो बताया ही नहीं कि अगर दोनों में से किसी एक को कुछ हो जाता है, तो इस सूरत में जायदाद का क्या सीन होगा। यही वह बात थी जिसे वकील साहब पढ़ नहीं रहे थे, लेकिन पृथ्वीराज के पूछने पर अब उन्हें बताना पड़ा। जी, अगर आप दोनों में से किसी एक को भी कुछ हो जाता है, तो सारी जायदाद ट्रस्ट के नाम ट्रांसफर हो जाएगी और अगर दोनों को कुछ होता है, तो भी जायदाद ट्रस्ट में ही जाएगी। मतलब अगर मैं मर जाता हूं, तो सारी जायदाद ट्रस्ट में ही जाएगी। पृथ्वीराज ने अब पूरी जांच-पड़ताल कर ली थी। वकील साहब ने सिर हां में हिलाया। तो गोल्डन चांस है तुम सबके लिए। यह कहते हुए पृथ्वीराज एक तरफ से मुस्कुराया, जबकि यशवर्धन उसे घूरते हुए अपने भाइयों को देखने लगे। ठीक है वकील साहब, आप जा सकते हैं। पृथ्वीराज ने उन्हें दरवाज़े तक छोड़ा। सबकी तरफ देख वह बोला, पहले शादी का ड्रामा रचाया, अब यह साजिसे जो आप सब मिलकर खेल रच रहे हैं। क्यों भाई साहब, सही कह रहा हूं ना पृथ्वीराज गुस्से से अब अपने पिता और अंकल को देखने लगे। सभी ने अपना-अपना सिर झुका लिया। पृथ्वीराज ने सोनल की तरफ कदम बढ़ाए। मैं फैसला लेने में आज़ाद हूं, ठीक है। इसी तरह तुम भी फैसला लेने में आज़ाद हो। अभी, इसी वक्त फैसला लो। तुम्हें जो भी फैसला लेना है, उसकी आंखों में आंखें डालकर गंभीरता से बोला। सोनल ने एक नज़र अपने अंकल पर डाली। किसी के प्रेशर में फैसला मत लेना, अपनी मर्ज़ी से और अपने दिल की सुनकर लो। अगर तुम्हें भी इस जायदाद का लालच है, तो ज़रूर पहले सोच लेना, फिर डिवोर्स का फैसला लेना, और मुझे पहले से ही पता है क्या प्लान होगा बल्कि मेरे साथ रिश्ता निभाने के बजाय मुझे रास्ते से हटाओगी और अपने अंकल के साथ मिल जाओगी। पृथ्वीराज की सीधी बातों पर सोनल की पलकें कांप गई। मतलब यह सब जानता था, लेकिन सारा इल्ज़ाम वह उस पर कैसे डाल सकता था। सोनल अब बुरी तरह से चिड़ गई थी। एक मिनट, आप तो सारा इल्ज़ाम मुझ पर और अंकल पर डाल रहे हो जबकि इसमें बराबर के हिस्सेदार तुम्हारे पिता भी है और सभी घरवाले हैं जिनको जिनको दौलत की लालच है और आपका परिवार दूध के धुले हो। वह गुस्से में बोली। ऐ फालतू लड़की। यशवर्धन गुस्से से बोले। जो बोलना है साफ-साफ बोलो। पृथ्वीराज ने पिता को नज़रअंदाज़ करते हुए सोनल से कहा। अगर सुनना ही है तो सुनिए, मेरे अंकल, जी के दिल में लालच आपके पापा ने जगाया था। उन्हें क्या पता था कैसी वसीयत है। ज़्यादा आपके पापा को चाहिए थी, इसलिए उन्होंने ही अंकल से कहकर आपकी और मेरी शादी करवा दी। और आप तो दूध पीते बच्चे हैं ना, जो ज़बरदस्ती शादी कर ली आपसे। आप भी जानते होंगे कि इस शादी की वजह आपके खुद के दादा, मेरे नाना अंकल की वसीयत है। सोनल बोलते-बोलते चुप नहीं हुई। उसकी ज़ुबान की तेज़ी देख सब गूंगे रह गए, जबकि बराबर हिलते उसके होंठों को देखते पृथ्वीराज के गले में जैसे कांटे चुभ गए थे। मना किया है इस लड़की को कम बोला करो, लेकिन इसे भी शौक है अपने होंठ खोलने का। वह मन ही मन बड़बड़ाया। अब फालतू बकवास बंद करो। उसकी आंटी ने गुस्से में दहाड़ा। जब उसके पति को उसके बोलने पर ऐतराज़ नहीं, तो आपको क्या प्रॉब्लम है। सोनल की बजाय पृथ्वीराज के जवाब पर सभी हैरान होकर उसे देखने लगे जी, और कुछ बोलना है या बस। पृथ्वीराज थोड़ा उसके नज़दीक हुआ, अपने होंठ उसके कान के पास ले जाकर धीमे से बोला, अपने होंठों को उतनी ही तकलीफ दो जितनी बाद में तुम सह सको। यह कहकर वह पीछे हट गया, लेकिन उसका यह अंदाज़ सोनल के दिल को बुरी तरह घायल कर गया। किसी और को कुछ कहना है। पृथ्वीराज सबको तरफ सवालिया नज़रों से देखते हुए बोला। सभी उसके गुस्से से सहमे हुए थे, मगर यशवर्धन के लिए उनका बेटा कितनी अहमियत रखता था, यह सब जानते थे, लेकिन इस वक्त उसके दिमाग में क्या चल रहा था, कोई नहीं जानता था। सही है, अब मैं बोलने लगा हूं तो सब सुनो, सोनल पृथ्वीराज की पत्नी है और हमेशा ही रहेगी। मुझे इस रिश्ते को आखिरी सांस तक निभाना है। अपने अंकों को देखकर वह बोला, आपको मेरी बात से कोई ऐतराज़ है तो अभी बता दो। पृथ्वीराज की सारी बातें सुनकर वे लोग शर्मिंदा हो चुके थे। दौलत की लालच ने उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी थी, लेकिन जिस लड़की को उन्होंने कुर्बानी के लिए चुना था, वही आज अपने अधिकार की बात करके उन्हें उनकी गलती का एहसास दिला रही थी। अगर सोनल इस रिश्ते को निभाना चाहे तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं। लेकिन अगर वह इस रिश्ते से अलग होने का फैसला सोच-समझकर लेना, अंकल जी, वह अपना फैसला सुना चुकी है। वह पृथ्वीराज की पत्नी बन चुकी है, उसके नाम के साथ मेरा नाम जुड़ चुका है और जुड़ा ही रहेगा। यही मेरे परिवार की इच्छा थी और यही मेरी इच्छा भी है। एक-एक शब्द पर ज़ोर देते हुए उसने सबको गूंगा कर दिया। मतलब सोनल से शादी तुम खुद करना चाहते थे और यह वसीयत। तुम कहना क्या चाहते हो।? साफ़-साफ़ कहो। अगर तुम्हें सोनल से शादी निभानी है तो ठीक है, हमें कोई ऐतराज़ नहीं, पर यह सब करके तुम साबित क्या करना चाहते हो। यशवर्धन, जो आज तक बेटे को आप कहकर बुलाते आए थे, आज उसकी बातों पर तुम पर उत्तर आए थे। साफ़-साफ़ सुनना चाहते हैं तो सुनिए। परिवार की यह वसीयत मेरी मर्ज़ी से बनी है। पृथ्वीराज की बात पर सब पर जैसे पहाड़ गिर पड़ा। यशवर्धन अपनी जगह से हिल गए, पृथ्वीराज की आंखें भी नम हो गई। दादा ने मुझसे ज़्यादा अपनी उस अनाथ बच्ची का सोचा। उन्हें हमेशा उसकी फिक्र रहती थी और वह चाहते थे कि सोनल को मुझे सौंप दें, लेकिन वह यह भी जानते थे कि इस घर में इतने स्वार्थी लोग हैं कि कोई भी मेरा रिश्ता सोनल से नहीं होने देगा। इसलिए मैंने दादाजी से यह वसीयत बनाने को कहा था और वैसा ही हुआ। वसीयत में जायदाद के उसूल के लिए आपने सोनल की शादी मुझसे करवा दी। पृथ्वीराज बहुत सुकून भरे अंदाज़ में एक सिंगल सोफे पर बैठा, टांग पर टांग रखकर बोला। तो इसका मतलब यह सब तुम्हारी साज़िश थी। यशवर्धन ने बेटे को गुस्से भरी निगाहों से देखा। अब आप कुछ भी कह सकते हैं, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरे हिसाब से यह एक समझदारी भरी प्लानिंग थी, जो दादा-पोते ने बहुत सोच-समझकर की थी। बहुत पछताओगे तुम। भूलो मत, रिश्ते में तुम्हारा पिता हूं। अगर तुम्हें जायदाद चाहिए थी तो साफ कह देते, यह खेल हम सबके साथ खेलने की क्या ज़रूरत थी।? सोनल का दिल यह सुनकर ज़ोर से धड़क उठा। जिस तरह वह इतने भरोसे से उसका नाम ले रहा था, उसे लगा जैसे उसने उसे अपनी ढाल बना लिया हो। आप मानो या न मानो, यह लड़की भी अब इस खेल का हिस्सा बन चुकी है। उसकी आंटी ने नफ़रत भरे शब्दों में कहा। जो भी बोलना है मुझसे बोलो, मेरी पत्नी का यहां कोई रोल नहीं है। ठंडी आवाज़ में पृथ्वीराज बोला। उसके चाचा आगे बढ़े और सोनल के सिर पर प्यार भरा हाथ रखा। खुश रहो, हमेशा खुश रहो। अगर कोई भूल हो गई है तो पिता समझकर माफ कर देना। सोनल ने उनके हाथ थाम लिए। नाना के बाद वह अपने चाचा से सबसे ज़्यादा प्यार करती थी और उनका झुका सिर वह देख नहीं पाई। मुझे खुशी है कि तुम्हारे नाना ने तुम्हारे लिए बहुत अच्छा सोचा और तुम्हें ऐसे इंसान के हवाले किया जो तुम्हें हर बुरी नज़र से बचाकर रखेगा और खुद से ज़्यादा तुम्हारा ख्याल रखेगा। उनके भरोसे भरे शब्दों पर सोनल ने अपने होंठ भींच लिए और अपने पति पृथ्वीराज को देखा, जो अब बहुत गहराई से उसके चेहरे को देख रहा था। देर हो रही है, अब मुझे चलना चाहिए। सोनल के चाचा सब से माफ़ी मांगते हुए अपने बड़े भाई यशवर्धन की तरफ मुड़े। वक्त रहते आप भी समझ जाइए भाई साहब और इस दौलत के पीछे भागना छोड़ दीजिए। भगवान के सामने खाली हाथ जाना होगा, सिवाय अपने कर्मों के हम कुछ नहीं ले जा सकते। तुम जा सकते हो। यशवर्धन ने गुस्से में उन्हें जाने को कहा। भगवान आपको भी समझ दें। यह कहकर वे चले गए। अफ़सोस होता है कि तुम मेरे बेटे हो। यशवर्धन भड़क उठे। अपने ही पिता को धोखे में रखा। भाई साहब, बस कीजिए। जो होना था हो गया। अब इस रिश्ते को अपनाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। दिल बड़ा कीजिए। लेकिन यशवर्धन ने गुस्से से सबको चुप करा दिया और पृथ्वीराज के पास आकर खड़े हो गए। तुम्हें अभी इसी वक्त इन डिवोर्स पेपर्स पर साइन करने होंगे। तुम्हारी मरी हुई मां ऐसा कभी नहीं चाहती थी कि तुम किसी ऐसे परिवार की लड़की से शादी करो। वाह पापा, मां के ज़िंदा रहते आपने कभी हमारी खबर नहीं ली। दूसरी पत्नी के साथ अय्याशी करते रहे और आज मेरी शादी पर ज्ञान देने लगे। पृथ्वीराज ने मुट्ठियां कस लीं। सोनल मेरी पत्नी है। उसका नाम मेरे नाम से जुड़ा है। उसे मेरे अलावा किसी और पहचान की ज़रूरत नहीं। उसका परिवार सिर्फ पृथ्वीराज है। उसका यह जुनून देखकर सब चुप रह गए। अगर तुम्हें उस लड़की से रिश्ता रखना है तो इस घर से चले जाओ। वरना क्या। पृथ्वीराज ने आंखों में आंखें डालकर कहा। भूलिए मत पापा, दादाजी ने यह सब मेरे नाम कर दिया है, इसलिए मुझे और मेरी पत्नी को यहां से कोई नहीं निकाल सकता। आपके पिता ने आप सबको उनका हिस्सा दिया था। अब अपनी कमाई की जायदाद वह जिसे चाहें दे सकते हैं। दांत चबाते हुए उसने कहा। आप लोग जितना लड़ना है लड़ लीजिए। मेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा है, मुझे आराम चाहिए। यह कहकर वह सोनल का हाथ थामे अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। पीछे हवेली में अब भी बहस चल रही थी, यशवर्धन को उनके भाई समझाने की कोशिश कर रहे थे। पृथ्वीराज जवान खून था और परिवार का इकलौता वारिस उसके खिलाफ नहीं जाए बल्कि प्यार मोहब्बत से उसे हैंडल करें, अब हमारे पास कोई ऑप्शन नहीं बचा है। मुझे क्यों लेकर आए रूम में, सोनल घबराते हुए बोली थी, जबकि दरवाज़े को उसका लॉक लगाना सोनल के अपने आसपास खतरे की घंटी बजाती हुई दिखाई दे रही थी। बिस्तर पर आओ, सिर दबाओ, मेरा। बिस्तर पर लेते उसे हुक्म देने लगा था। मैं तुम्हारी कोई नौकरानी नहीं हूं। पृथ्वीराज के घूरने पर उसके शब्द मुंह में ही दम तोड़ गए थे। पूरे आठ साल बाद हूं तुमसे, आप कहकर बुलाया करो मुझे, और आप चुपचाप यहां आ जाओ, वरना मैं उठकर तुम्हारे पास आया तो हर शब्द बोलने की सज़ा दूंगा। अब उसको इस तरह बोलकर बुरी तरह से डरा गया था। सोनल हाथों की उंगलियों मोड़ते हुए उसके पास आकर बैठी। पृथ्वीराज ने उसके हाथ में अपने सिर पर रखा। सोनल धीरे-धीरे उसका सिर दबाने लगी, जबकि दिल पसलियां तोड़कर बाहर आने को बेताब बैठा था। तुम्हें मेरे साथ खुशी नहीं हुई। सोनल आंखें मूंदे, धीरे शब्दों में पूछा। पता नहीं वह साफ शब्दों में बोली, तो वह सीधा होकर उसके गोद में सिर रखकर लेटा, उसके दोनों हाथ अपने सीने पर रखे। या मुझे तुम हमेशा अपनी आंखों के सामने चाहिए, सोनल। सोनल, जब दादा ने तुम्हारी पिक्चर सेंड की, इस वक्त में अपना सब कुछ मन बैठा था। उसके हाथों को चूमता, बड़े प्यार भरे शब्दों में बोला। सोनल का दिल फिर से घबराया, वह बहुत बेखौफ लग रहा था। सोनल दिल ही दिल में उसे नया नाम दे चुकी थी। मेरा प्यार करना क्या तुम्हें बुरा लगता है। वह उसको देखते खुमार शब्दों में बोला। आपको अपने पापा से इस तरह बदतमीजी से बात नहीं करनी चाहिए थी। वह उसका नरम शब्द देखी, पहली बार उसे आप कहकर बात कर रही थी। उसके शब्द में अब बहुत मान-सम्मान झलक रहा था। पृथ्वीराज के चेहरे पर मुस्कुराहट फैली थी। चलो, नेक्स्ट टाइम थोड़ी कम बोलूंगा। वह उसके सिर के पीछे हाथ रखे, उसका चेहरा अपने ऊपर झुकाए, उसके होंठों को अपने होंठों में जकड़ गया। सोनल का दिल उछलकर फिर से गले में आया। बेशर्म इंसान। उसके पीछे हटते, उसे गुस्से से घूरते बोली। इतना बोलो जितना सह सकूं, आप तो हाथ धोकर मेरे होंठों के पीछे ही पड़ गए हो। वह रोनी सी शक्ल बनती बोली। अरे, पहले तो बताना था ना। होंठों के अलावा भी बहुत सी जगह फोकस की हुई है मैंने देखो वहां पर सोनल ने उसके होंठों पर हाथ रखते, उसे चुप करवाया, जबकि चेहरा पल में लाल हुआ था। आई एम सॉरी, मेरी पत्नी, अब मैं तुम्हारे हर जिस्म को अपने फोकस में लूंगा। वह उसको बिस्तर पर लिटाते, उस पर पूरी तरह से हावी हो चुका था। वह, मुझे डर लग रहा है, ऐसे मत करो। वह घबरा गई। घबराना बनता भी है, कहते के साथ में लाइट डिम करता, उसकी गर्दन पर मुंह छुपा गया। वह आना कानी करती उसे पीछे करने में बेहाल होती रही, और सिसकियां भरने लगी। पृथ्वीराज के मुंह ज़ोर ज़ज़्बातों के आगे अपने आपको उसे सौंप गई। अब वह धीरे-धीरे उसके धड़कनों से होते हुए उसके ब्यूटी बोन पर पहुंच चुका था, जो उसकी नज़रों में कब से फोकस बनाया हुआ था। उसके सूट को ऊपर करता, वह उस पर बुरी तरह से चिपक गया था। सोनल अपना हाथ सूटों में फंसाए बुरी तरह से परेशान हो रही थी। पृथ्वीराज को कभी अपने होंठों से हटाने की कोशिश करती है, तो कभी अपने ब्यूटी बोन से, लेकिन वह आदमी टच से मस नहीं होता, और ऐसे करते ही अब उसको इतना बेहाल कर चुका था कि अब वह हार मानती आहें भर रही थी। वह मैं पिछले दो दिन से उसके होंठों का बुरा हाल बना चुका था, अब तो उसके ब्यूटी बोन को पूरा लाल कर चुका था। उसके बैली बटन को चूमता हुआ, उसे चीखने पर मजबूर कर दिया था। उसकी चीखें तेज़ करता, धीरे-धीरे उसके अंदर समाता, उसकी सिसकियां भी तेज़ कर गया था। सारी रात उसके कमर का बुरा हाल कर चुका था। वह उसे उम्र में दस साल छोटी थी, लेकिन उसकी भी ग्रेजुएशन कंप्लीट हो गई थी। वह विदेश में ज़रूर रहता था, लेकिन आज तक किसी लड़की को अपने इतने करीब नहीं किया था, जितना कि उसने सोनल को अपने दिल में बसा चुका था। आज तो उसे वह पूरा मिल चुकी थी, तो क्यों ही उसे जाने देता। आज पूरी रात उसको सुहागन बना चुका था, उसे चूमता, हर जगह से लाल करता, खुद भी दीवाना हुआ था। वह वसीयत तो नकली थी, सिर्फ शादी के लिए बनाई गई थी, क्योंकि उसकी शादी किसी भी कीमत पर पृथ्वीराज से उसके चाचा या उसके पिता नहीं होने देते। उसके दादा ने तो पहले ही सबके हिस्से की ज़मीन और ज़ेवर सबको दे चुके थे। हां, काज़ उनके हाथ में नहीं था, वकील के हाथ में था। वकील को अपने साथ मिलाकर उसने नकली वसीयत बनवाई थी, जो सिर्फ शादी के लिए बनवाई। आज मैं अपने मिशन में कामयाब हो गया था। सोनल एक अनाथ बच्ची थी। पृथ्वीराज की इकलौती बुआ ने उस लड़की को गोद लिया था। उनकी खुद की कोई औलाद नहीं थी, लेकिन उनका एक एक्सीडेंट में मृत्यु होते ही उन्होंने अपनी गोद ली हुई बेटी को अपने पिता के हवाले सौंप गई थी। उसके दादा ने उसे पढ़ने के लिए अपने मझले बेटे जनार्दन को सौंप दिया था, और उसका पूरा खर्चा वह अपने पास से भेजा करते थे। कहने को वह सिर्फ पढ़ाई करने के लिए उनके पास थी, लेकिन उसका अपना दिल का हाल सुनाने वाला कोई नहीं था, सिवाय उसकी सहेली तन्वी की, जो उसकी पक्की सहेली थी, वही उसका ख्याल रखती थी। सोनल अपने पति के साथ विदेश में शिफ्ट हो गई थी, पर उसने एक प्यारे से बेटे को जन्म दिया था। सोनल को हर रात जैसे सुहागरात जैसे लगती थी। वह उसे इतना मोहब्बत करता था, इतना बेकाबू कर देता था कि वह भी दीवानी हो जाती थी, और पृथ्वीराज से अपने आप को छुपाती रहती थी। हर रात उसके कमर को हिला कर बुरा हाल कर देता, सुबह उसी कमर में मालिश करता, और उसका इतना ख्याल रखता कि वह पागल हो जाती। पृथ्वीराज ने उसको हर चीज़ की आज़ादी दी थी। वह बाहर अपनी मर्ज़ी से आ-जा सकती थी, जॉब कर सकती थी, लेकिन सोनल ने जॉब करना अच्छा नहीं समझा। उसके पास उसका छोटा सा बच्चा था, जिसे मां की बहुत ज़रूरत थी। वह बच्चा सोनल का आंखों का तारा था, जिसे वह देखकर जीती थी। जब भी वह अपने बच्चों को देखती, तो उसके मां-बाप की बहुत याद आते, जो इस दुनिया में थे ही नहीं, और उसने अपने मां-बाप को देखा भी नहीं था। पृथ्वीराज उसे बड़े प्यार से समेटता था। यह थी पृथ्वीराज और सोनल की प्रेम कहानी। आप लोगों को कैसी लगी, मुझे कमेंट में ज़रूर। और मेरी वीडियो जहां कहीं से भी आप लोग देखते हैं, कमेंट में अपने शहर का और राज्य का नाम ज़रूर बताएं, मुझे आप लोगों के कमेंट पढ़ने में बहुत आनंद आता है, और उन सभी का मैं बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहती हूं। जो लोग मेरी वीडियो को देखते हैं और लाइक करते हैं और शेयर करते हैं। अगर आपको आज की कहानी पसंद आई है तो वीडियो को ज़रूर लाइक कीजिएगा और अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कीजिएगा। और हां, अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो ज़रूर सब्सक्राइब कर लें। मिलते हैं हम अपनी कल की एक नई 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विरासत के फैसले ने पहुंचाई सुहागरात तक नई प्रेम कहानी 2..Emotional sexy Hindi story romantic stories
SD Sacchi kahaniyan
39m 47s5,357 words~27 min read
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