[0:12]टूनी का पति उसी समय मर गया था जब टूनी की बेटी अभी अंडे में ही थी। टूनी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो अपनी बेटी का पालन पोषण कैसे करे। टूनी, मेरी सहेली मेरी मां तो दूसरी शादी कर ले। इतना लंबा जीवन पड़ा है तुम्हारे सामने। अकेले कैसे बिताएगी।
[0:36]तेरी बेटी तो कल को भी हा कर अपने घर की हो जाएगी। लेकिन तेरे लिए अकेले रहना बहुत मुश्किल होगा। नहीं, बबली मैं ऐसा नहीं कर सकती। कोई भी गैर पक्षी मेरी बेटी को बाप जैसा प्यार और सम्मान नहीं दे सकता। मेरे जीवन का मकसद तो सिर्फ मेरी बेटी है। मुझे चिंता है तो सिर्फ इस बात की कि मैं अपने घर को कैसे चलाऊं। मेरे पति ने जो पैसे जमा कर रखे थे, वो भी अब खत्म होने वाले हैं। मैं कोई ऐसा काम करना चाहती हूं कि मुझे घर से बाहर ना जाना पड़े। मेरी बेटी आज तो छोटी है, लेकिन कल बड़ी हो जाएगी। जमाना बहुत खराब है। मैं अपनी बेटी को घर में अकेला कभी नहीं छोड़ सकती। फिर तो घर में तुम एक ही काम अच्छे से कर सकती हो। मेरी सहेली बताओ ना कौन सा काम? तुम सिलाई का काम शुरू कर लो। लेकिन बबली मुझे तो सिर्फ साधा-साधा से कपड़े सिलाई करना आते हैं। तुम तो जानती हो, यह मॉडर्न जमाना है। पक्षियों को डिजाइनिंग वाले कपड़े ही पसंद आते हैं। तो इसमें कौन सा मुश्किल काम है? आजकल इंटरनेट का दौर है। कौन सी ऐसी चीज है जो तुम घर में बैठकर सीख नहीं सकती। तुम youtube पर सर्च करके हर तरह की डिजाइनिंग सीख सकती हो। हां, बबली यह तो मैंने सोचा ही नहीं। मैं आज से ही youtube से कपड़ों की डिजाइनिंग सीखना शुरू कर देती हूं। टूनी को सादा सिलाई तो पहले ही आती थी। फिर वो कुछ ही दिनों में youtube से डिजाइनिंग भी सीख लेती है। और फिर समय के साथ पूरे जंगल में टूनी की सिलाई मशहूर हो जाती है। अब टूनी घर में बैठकर सिलाई भी कर लेती। और अपनी बेटी का अच्छे से ध्यान भी रख लेती। गुड़िया भी अब थोड़ा बड़ी हो गई थी। वह पढ़ाई में बहुत जहीन थी। वह पढ़ाई करने के बाद फारिक समय अपनी मां के पास बैठी रहती। और उसे कपड़े सिलाई करते देखती रहती। ऐसे ही एक दिन टूनी कपड़े सिलाई कर रही थी। कि उसका पंख सिलाई मशीन की सुई में आ जाता है और उसका पंख घायल हो जाता है। गुड़िया अपनी मम्मा को जल्दी से बुलबुल डॉक्टर के पास ले जाती है। बुलबुल टूनी के पट्टी करती है। चिंता वाली कोई बात नहीं है। बस पट्टी हर रोज करवानी है और दो हफ्ते इस पंख के साथ कोई काम नहीं करना। लेकिन बुलबुल डॉक्टर जी अगर मैं सिलाई नहीं करूंगी तो पक्षी तो मेरे साथ बहुत गुस्सा हो जाएंगे। आपको तो पता है, दिवाली भी आने वाली है। मुझे हर हाल में सिलाई का काम करना ही होगा। अगर जख्म में इंफेक्शन बढ़ गया तो पंख काटना भी पड़ सकता है। फिर टूनी निराश होकर अपने घर वापस आ जाती है। गुड़िया बेटा अब क्या होगा। अगर पक्षियों के कपड़े समय पर ना दिए तो वो तो मुझसे बहुत गुस्सा हो जाएंगे और दोबारा मुझसे सिलाई भी नहीं करवाएंगे। मां अगर मैं कहूं कि मैं भी कपड़े सिलाई कर सकती हूं तो क्या आप मेरा विश्वास करेंगी? बेटी ऐसे कैसे तू सिलाई कर सकती है? तूने कौन सा सिलाई सीखी है? मां जब आप सिलाई करती थी तो मैं आपके पास बैठकर सब देखती रहती थी। मुझे सिलाई अच्छे से आती है। आप मेरा विश्वास करें। बेटी अगर पक्षियों के कपड़े खराब हो गए तो हम नुकसान कैसे भरेंगे? मां आप देखना पक्षी खुश होकर आपको सिलाई ज्यादा ही देकर जाएंगे। फिर टूनी अपनी बेटी पर विश्वास करके उसे कपड़े सिलाई करने दे देती है। और गुड़िया तो इतने प्यारे कपड़े सिलाई करती है कि खुद टूनी भी देखकर हैरान रह जाती है। बेटी तू तो सच में बहुत अच्छे कपड़े सिलाई करती है। मेरी बेटी तो बहुत-बहुत बुद्धिमान निकली। बुद्धिमान मां की बेटी भी बुद्धिमान ही होगी। मां अब मैंने फैसला कर लिया है कि मैं फैशन डिजाइनिंग में डिग्री लूंगी और खुद की बतक बनाऊंगी और उसमें गरीब महिल पक्षियों को नौकरी दूंगी। भगवान मेरी बेटी के सब सपने पूरे करें। जो भी पक्षी अपने कपड़े लेने आता कपड़ों की सिलाई की खूब तारीफें करता और सिलाई भी पहले से ज्यादा देकर जाता। टूनी तेरा तो पंख घायल है। फिर तूने कैसे इतने कपड़े सिलाई कर लिए और वह भी इतने प्यारे-प्यारे? अगर मेरी बेटी ना होती तो आज मुझे सबके सामने बहुत शर्मिंदा होना पड़ता। यह सब कपड़े मेरी बेटी ने ही सिलाई किए हैं। फिर तो गुड़िया की सिलाई अपनी मां की सिलाई से भी ज्यादा मशहूर हो जाती है। फिर गुड़िया कॉलेज से फैशन डिजाइनिंग की डिग्री लेती है। और खुद की बतक खोल लेती है। गुड़िया के डिजाइन किए हुए कपड़े तो आसपास के सभी जंगलों में मशहूर हो जाते हैं। और फिर वह दोनों मां बेटी बहुत अच्छा जीवन गुजारती हैं। सोनो चिड़िया की मम्मा एक हाथ से में मर जाती है। और सोनो चिड़िया अपने घर में अकेली रह जाती है। वो बहुत दुखी थी क्योंकि उस जंगल में उसका और कोई नहीं था। दूसरे जंगल में उसकी मौसी रहती थी। उसकी मौसी को जब अपनी बहन के मरने की खबर पहुंचती है तो वो सोनो चिड़िया के पास आती है। सोनो चिड़िया अपनी मौसी के गले लगकर बहुत रोती है। चुप कर जाओ मेरी बेटी चुप कर जाओ। तुम्हें रोता देख तुम्हारी मां की आत्मा को बहुत दुख हो रहा होगा। मैं तुम्हारी मौसी हूं। मैं तुम्हारी मां की जगह तो नहीं ले सकती। लेकिन तुम्हारी मां जितना तुम्हें प्यार जरूर दे सकती हूं। चलो बेटी तुम मेरे साथ मेरे जंगल चलो। मैं तुम्हें यहां अकेला नहीं छोड़ सकती। यह दुनिया बहुत जालिम है, मेरी बेटी। फिर सोनो चिड़िया अपनी मौसी के साथ उसके जंगल चली जाती है। गुड़िया बेटी ये तुम्हारी छोटी बहन है। तुम इसका बहुत ख्याल रखना। तुम दोनों बाहर खेलने भी इकट्ठी जाओगी और स्कूल भी इकट्ठी जाया करोगी। सोनो चिड़िया की मौसी उसका बहुत ख्याल रखती है। सोनो चिड़िया जल्द ही अपनी मौसी के घर में घुलमिल जाती है। गुड़िया चिड़िया पहले तो सोनो चिड़िया का बहुत प्यार करती है। लेकिन धीरे-धीरे वो यह महसूस करती है कि उसकी मम्मा उससे ज्यादा सोनो का प्यार करती है। इसलिए वो सोनो चिड़िया से जलने लगती है। एक दिन जब सोनो चिड़िया स्कूल से घर आती है तो उसकी मौसी मम्मा भोजन तैयार कर रही थी। आगे मेरी बेटी जी मम्मा मैं आ गई। बेटा बस भोजन तैयार होने ही वाला है। मम्मा मुझे आज भूख नहीं है। मेरी बेटी को भूख क्यों नहीं है। तुम्हारी सेहत तो ठीक है। जी मम्मा मैं बिल्कुल ठीक हूं। आज वैसे ही मेरा कुछ खाने को मन नहीं कर रहा। तुम यहां मेरे पास बैठो। मैं तुम्हें अपने पंखों से भोजन खिलाऊंगी। फिर देखना मेरी बेटी को भूख भी लग जाएगी। फिर मम्मा चिड़िया भोजन तैयार कर लेती है और सोनो को अपने पंखों से खिलाती है। मम्मा आपके पंखों से भोजन खाने का तो मजा ही आ गया है। गुड़िया चिड़िया दरवाजे पर खड़ी यह सब देख रही थी। वह भी अपनी मम्मा से कहती है। मम्मा मैं भी आज आपके हाथों से ही खाना खाऊंगी। बेटा तुम तो बड़ी हो गई हो। तुम अपने पंखों से अच्छे से खाना खा सकती हो। वैसे भी अब मुझे किसी काम के लिए बाहर जाना है। तुम अपनी छोटी बहन का ख्याल रखना। फिर मम्मा चिड़िया बाहर चली जाती है। अब तो मुझे इस सोनो का कुछ करना ही होगा। जब से यह आई है इसने मेरी मम्मा का सारा प्यार मुझसे छीन लिया है। अगली सुबह गुड़िया और सोनो स्कूल के लिए निकलती हैं। गुड़िया सोनो को स्कूल की दिशा में जाने की बजाय और दिशा में लेकर उड़ती है। गुड़िया बहन क्या आज हम स्कूल नहीं जाएंगी? हम स्कूल ही जा रही हैं। आज हम शॉर्टकट रास्ते से स्कूल जाएंगी। सोनो चिड़िया तो रास्तों से अनजान थी। इसलिए वह गुड़िया के पीछे उड़ती है। गुड़िया सोनो को खतरनाक चीलों वाले इलाके में ले जाती है और वहां जाकर एक जगह बैठ जाती है। गुड़िया बहन हम यहां क्यों बैठ गई हैं? मैं थोड़ा थक गई हूं। सोचा थोड़ा सांस ले लूं। फिर दूर से चीलों के बोलने की आवाज आती है। गुड़िया चुपके से वहां से भागने लगती है। लेकिन उसका पांव तो एक झाड़ी में फंस चुका था और वह उड़ नहीं पाती। सोनो मेरी बहन मुझे आजाद कराओ। वरना वो चीलें आकर मुझे पकड़ लेंगी। फिर सोनो चिड़िया पूरा जोर लगाकर गुड़िया का पांव झाड़ी से निकालती है और वो दोनों जल्दी से वहां से उड़ जाती हैं। आज गुड़िया को यह एहसास हो रहा था कि अगर उसकी बहन ना होती तो वह जिंदा ना होती क्योंकि सोनो ने चीलों की आवाज सुनकर वहां से भागने की बजाय गुड़िया की मदद की थी। उस दिन के बाद गुड़िया भी अपनी छोटी बहन सोनो का बहुत प्यार करती है।



