[0:00]पहले तालीम से तुम मोड़ दिए जाओगे। पहले तालीम से तुम मोड़ दिए जाओगे। फिर किसी जुर्म से तुम जोड़ दिए जाओगे। हाथ से हाथ की जंजीर बनाकर निकलो वरना धागे की तरह तोड़ दिए जाओगे। खुद रख के जो राह पर औरों के हादी बन गए क्या नजर थी जिसने मुर्दों को मसीहा कर दिया।
[0:40]बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अल्हम्दु अहलिही व सलातो अला अहलिहा अम्माबाद फउज़ुबिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम। कुल हल यस्त विलल लज़ीना यल मूना वल लज़ीना ला यल मून। इन्नामा यतज़क्करू उलिल अलबब। सदकलाहुल अलील अजीम
[1:18]पहले तालीम से तुम मोड़ दिए जाओगे। पहले तालीम से तुम मोड़ दिए जाओगे। फिर किसी जुर्म से तुम जोड़ दिए जाओगे। हाथ से हाथ की जंजीर बनाकर निकलो वरना धागे की तरह तोड़ दिए जाओगे।
[1:48]स्टेज पर रौनक अफरोज ओलमाए इकराम मेहमान ने इज़ाम। शुआराये इकराम ज़िम्मेदारान ए मोहतराम। और मेरे अज़ीज़ दीनी इस्लामी गयूर भाइयों। आज का हमारा यह प्रोग्राम तालीम की मुनासिबत से मुनकिद किया गया है। और हम यह समझते हैं कि हमारे आका मौला जनाब मोहम्मदुर्रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत का सबसे अहम पैगाम आपकी सीरत का सबसे बड़ा उनवान अगर कोई है तो वह तालीम है।
[2:49]अल्लाह तबारक व ताला ने दुनिया में 18000 किस्म की मखलूकात पैदा की हैं। इन 18000 किस्म की मखलूकात में इंसान को सबसे आला सबसे अफ़ज़ल सबसे अशरफ बनाया गया। सबसे बड़ी बुलंदी से नवाजा गया। जब के इंसान के पैदा किए जाने से पहले अल्लाह ताला ने फरिश्तों को भी पैदा किया था। हम सब जानते हैं कि फरिश्ते नूर से पैदा की हुई मखलूक है। इंसान की पैदाइश से पहले अल्लाह ने जिन्नात को भी पैदा कर दिया था और हम सब जानते हैं कि जिन्नात के अंदर आग का मादा ज्यादा है। तीसरे नंबर पर इंसान को पैदा किया गया मिट्टी से पैदा किया गया जिसकी दुनिया में कोई हैसियत नहीं है। और पैदा करते ही इंसान को सारी मखलूकात में अफ़ज़लतरीन और आलातरीन बना दिया गया। सवाल यह है कि इस मिट्टी के पुतले में वह क्या खासियत है। वह कौन से सुर्खाब के पर इस मिट्टी से बने हुए इंसान में मौजूद हैं जिसकी वजह से इतना बड़ा मकाम इस इंसान को दे दिया गया। इसका जवाब कुरान करीम ने दिया है बहुत मुख्तसर लफ्ज़ों में उस पूरे वाकिये की तरफ इशारा कर रहा हूं। जिसकी बुनियाद पर इंसान को अशरफ बनाया गया। जब अल्लाह तबारक व ताला ने इंसान को हजरते आदम अलैहिस्सलातो अस्सलाम को पैदा करने का इरादा किया। तो सबसे पहले फरिश्तों के सामने यह बात रखी कि फरिश्तों मैं दुनिया के अंदर एक और मखलूक पैदा करने जा रहा हूं। इन्नी जालुन फिल अर्ज़ खलीफा एक मखलूक पैदा करने जा रहा हूं। फरिश्तों के जेहन में यह बात आई कि हम अल्लाह की इबादत करते हैं हम अल्लाह की इताअत और फरमाबरदारी करते हैं तो वह दूसरी मखलूक आएगी वह क्या काम करेगी। अल्लाह से सवाल किया इलाहल आलमीन उस मखलूक को पैदा करने का मकसद वह मखलूक दुनिया में आए तो क्या करेगी। अल्लाह ताला ने फरमाया किताबों के अंदर लिखा है अल्लाह ने फरिश्तों को जवाब दिया कि फरिश्तों वह मखलूक सारे काम करेगी। अच्छे काम भी करेगी बुरे काम भी करेगी मेरे अहकाम की पाबंदी भी करेगी। मेरे अहकाम की नाफरमानी भी करेगी दुनिया के अंदर साफ सफाई भी रखेगी और दुनिया के अंदर खून खराबा भी करेगी। जब यह सारा तफ़सीली जवाब फरिश्तों के सामने आया तो फरिश्तों के जेहन में फिर दोबारा सवाल पैदा हुआ और कहने लगे अतजलु फीहा मय्युफ़सिदु फीहा व यस्फिकुदिमा। इलाहल आलमीन ऐसी मखलूक को दुनिया में पैदा करने की क्या जरूरत है जो मखलूक दुनिया में आकर तेरे अहकाम की नाफरमानी करें। दुनिया में आकर दुनिया को गंदा करें दुनिया में आकर दुनिया में खून खराबा पैदा करें ऐसी मखलूक को पैदा करने की जरूरत क्या है और रही तेरी इबादत और इताअत की बात वनहनु नुसब्बिहुबिहमदिका व नुकद्दिसुलक। तेरी तस्बीह हम बयान करते हैं तेरी इबादत और इताअत हम करते हैं उसके लिए हम काफी है किसी और मखलूक को पैदा करने का मकसद समझ में नहीं आता। फरिश्तों का सवाल था। अल्लाह ताला ने उस सवाल के जवाब में फरमाया इन्नी अलमु माला तअलमून फरिश्तों जो मैं जानता हूं वह तुम नहीं जानते। बात खत्म हो गई। हजरत आदम अलैहिस्सलातो अस्सलाम को अल्लाह ने पैदा फरमा दिया। उनके अंदर रूह डाल दी गई। फिर अल्लाह ताला ने हजरत आदम अलैहिस्सलातो अस्सलाम को दुनिया में पाई जाने वाली तमाम चीजों के नाम और काम सिखला दिए। अरबी ज़बान में इस इल्म को इल्मुल अस्मा कहा जाता है और मेरी और आपकी ज़बान में इसको साइंस कहा जाता है। यूं कहिए अल्लाह ताला ने हजरत आदम अलैहिस्सलातो अस्सलाम को साइंस का इल्म अता कर दिया दुनिया में पाई जाने वाली हर चीज का नाम भी बता दिया और यह भी बता दिया कि यह चीज किस काम आती है। इसकी खासियत क्या है इसका फायदा क्या है इसके फीचर्स क्या है हर चीज अल्लाह ताला ने हजरत आदम अलैहिस्सलातो अस्सलाम को सिखला दी। जब हजरत आदम सारी चीजें जान गए सीख गए तो अब अल्लाह ताला ने हजरत आदम के सामने फरिश्तों को बुलाया और वह सारी चीजें जो हजरत आदम को सिखलाई गई थी अल्लाह ने फरिश्तों से मालूम की। कहा फरिश्तों यह बताओ इस चीज का क्या नाम है इसकी क्या खासियत है यह किस काम आती है। फरिश्तों के पास इस चीज का इल्म नहीं था फरिश्ते नहीं जानते थे कि कौन सी चीज का क्या नाम है उसकी क्या खासियत है उसका क्या काम है। सारे फरिश्तों ने आजज़ी का इजहार करते हुए कहा सुभानका ला इल्मलना इलाहल आलमीन तेरी जात बहुत बुलंद है हर ऐब से पाक है हमें इन चीजों का इल्म नहीं आता। जब फरिश्तों ने अपनी आजज़ी का इजहार किया तब अल्लाह ने हजरत आदम से कहा या आदम अंबिहुम बिअसमायहिम आदम अब इन तमाम फरिश्तों के सामने तुम तमाम चीजों के नाम बताओ तमाम चीजों की खासियतें और काम बताओ। हजरत आदम को इल्म था सारी चीजों के नाम और काम फर-फर बता दिए। फरिश्ते देख कर के दंग रह गए अल्लाह ताला ने फरिश्तों के सामने हुज्जत ताम की और कहा अलम अकुल्लकुम इन्नी अलमु गैबससमावाती वल अर्ज़। फरिश्तों मैं तुमसे पहले कह चुका था कि जो बातें मैं जानता हूं वह तुम नहीं जानते तुम इताअत करते हो यकीनन करते हो तुम इबादत करते हो यकीनन करते हो। तुम्हारी इबादत भी कबूल है तुम्हारी इताअत भी कबूल है लेकिन याद रखो जिस दुनिया को मुझे चलाना है उस दुनिया में मुझे अपना खलीफा और नायब पैदा करना है। वह खलीफा और नायब बगैर इल्म के काम नहीं कर सकता। हजरत आदम अलैहिस्सलातो अस्सलाम को सारी चीजों का नाम सिखला दिया और यह बता दिया कि आदम को तमाम मखलूकात पर फौकियत अगर मिली है। बुलंदी अगर मिली है शराफत अगर मिली है तो इल्म की बुनियाद पर मिली है।
[9:56]याद रखिए इस दुनिया का सबसे बड़ा मसला इल्म से दूरी है और उसके लिए सबसे बड़ा हल इल्म का हासिल करना है अपने आप को तालीम से और एजुकेशन से जोड़ना है। नबी की सीरत का सबसे पहला पैगाम जो कुरान करीम ने हमें बताया है वह है इकरा बिस्मि रब्बिकल् लज़ी खलक। नबी की सबसे पहली वही अगर आई है तो वह सबसे पहला लफ्ज़ इकरा है आप जरा गौर कीजिए ज़माने जाहिलियत वह जमाना था जिस ज़माने में हर तरह की बुराई पाई जाती थी। जज़ीरतुल अरब का इलाका जिस इलाके में जनाब मोहम्मदुर्रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ लाए हैं उस इलाके के अंदर कोई बुराई ऐसी नहीं थी जो ना पाई जाती हो। और इतना गंदा इलाका समझा जाता था जज़ीरतुल अरब का तारीख की किताबों में लिखा है कि उस ज़माने में दुनिया दो हिस्सों के अंदर बंटी हुई थी। आधी दुनिया कैसर के तहत आती थी आधी दुनिया किसरा के तहत आती थी। यह दोनों सुपर पावर ताकतें थी आधी दुनिया पर उनका कब्जा आधी दुनिया पर इनका कब्जा लेकिन जज़ीरतुल अरब का इलाका वह इलाका था जो ना कैसर के मातहत था ना किसरा के मातहत था। कैसर और किसरा दोनों ताकतों को शर्माती थी कि जज़ीरतुल अरब के इलाके को अपनी तातहती में ले लिया जाए सिर्फ इसलिए कि उनके अंदर जो बुराइयां पाई जाती थी। जो गंदगी पाई जाती थी वह पूरी दुनिया के अंदर कुफ्र होने के बावजूद मौजूद नहीं थी। लेकिन आप गौर कीजिए उसी इलाके के अंदर उसी माहौल के अंदर जनाब मोहम्मदुर्रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम को मबूस किया गया। नबी बना करके भेजा गया आपने नबी बनने के बाद किसी इंसान के पास जाकर पहली मर्तबा यह नहीं कहा कि तुमने चोरी की है चोरी करना गलत है तुमने ज़िना किया है ज़िना करना गलत है। तुमने चुगली की है चुगलखोरी करना गलत है आपने किसी शख्स के पास जाकर उसकी बुराई की बुराई नहीं बयान की। लेकिन अगर किसी के पास जाकर बयान किया तो सिर्फ यह कहा इकरा बिस्मि रब्बिकल् लज़ी खलक। मेरे भाई तालीम हासिल कर लो मेरे भाई एजुकेशन हासिल कर लो क्यों इसलिए कि दुनिया के अंदर जितनी गंदगी है जितनी बुराइयां हैं जितनी खराबियां हैं इनका खात्मा सिर्फ एक रास्ते से हो सकता है और वह है तालीम का रास्ता।
[12:33]किसी बुराई को बुराई बता करके उसका खात्मा नहीं किया जा सकता। चोर के पास जाकर उसको चोर कहो और उससे कहो तुम्हारी चोरी बुरी है शायद उसकी बुराई का खात्मा ना हो पाए। किसी ज़िनाकार के पास जाकर उसकी ज़िनाकारी की बुराई करो खत्म नहीं हो सकती। किसी झूठ बोलने के वाले झूठ बोलने वाले के पास जाकर उसके झूठ की बुराई बयान करो तो शायद वह बुराई खत्म ना हो। लेकिन अगर उसको उसी चीज की तालीम दे दी जाए उसी चीज की उसको एजुकेशन दे दी जाए उस चीज के बारे में उसको मालूमात दे दी जाए कि गीबत करना यह गुनाह का काम है चुगलखोरी करना यह गलत बात है। झूठ बोलना यह गलत बात है तो इस तालीम और एजुकेशन के ज़रिए वह अपने आप को बुराइयों से दूर कर सकता है। इस दुनिया के अंदर से हर बुराई का हर बिगाड़ का हर फसाद का खात्मा हो सकता है और उसका वाहिद रास्ता सिर्फ और सिर्फ तालीम है। दुनिया की जिन कौमों ने अपने आप को तालीम से दूर रखा है वह कौमें हर गंदगी के अंदर मुब्तला हुई है। हर बुराई के अंदर मुब्तला हुई हैं और वही कौमें जब तालीम से जुड़ी है तो दुनिया की रहनुमा बनी है। सहाबा-ए-किराम इसी की मिसाल है सहाबा-ए-किराम पहले ज़माने से सहाबी नहीं बने हैं एक ज़माना उनका वह भी था जिस ज़माने में वह कुफ्र के अंदर मुब्तला थे। शिर्क के अंदर मुब्तला थे गुनाहों के अंदर मुब्तला थे लेकिन जब जनाब मोहम्मदुर्रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आकर उनके सामने तालीम रखी। इकरा का लफ्ज़ उनको सुनाया कुरान करीम के उलूम से जोड़ा कुरान करीम की तालीमात से जोड़ा तो फिर अल्लामा इकबाल ने भी उनके बारे में कह दिया। खुद रख के जो राह पर औरों के हादी बन गए क्या नजर थी जिसने मुर्दों को मसीहा कर दिया।
[14:30]वह सहाबा-ए-किराम थे एक ज़माने तक वह पस्ती में मुब्तला थे लेकिन कुरानी तालीमात से जुड़ते ही वह सारी दुनिया के रहबर रहनुमा बने। एक ज़माने में उनको गंदा कहा जाता था लेकिन कुरान करीम को थामने के बाद खुद कुरान करीम ने उनके बारे में गवाही दी उलाइक हुमुल मुफ़लिहून यह लोग कामयाब हो गए।
[15:01]एक ज़माने के अंदर उनको बुरा समझा जाता था लेकिन तालीम से जुड़ते ही कुरान ने उनके लिए तकल्लुस दिया रज़िअल्लाहू अनहुम व रज़ू अन। यह लोग अल्लाह से राजी हैं और अल्लाह इनसे खुश है। याद रखिए दुनिया का वाहिद मसला तालीम है और इसका वाहिद हल भी तालीम है। जितना कौम तालीम से एजुकेशन से दूर होगी उतनी ही पस्ती के अंदर मुब्तला होगी उतनी ही कमजोरी के अंदर मुब्तला होगी। उतनी ही बुराइयों के अंदर मुब्तला होगी और जितना तालीम के करीब जाएगी मुआशरे के अंदर उतना ही सुधार पैदा होगा। हम लोग मुआशरे की इस्लाह की फिक्र करें लेकिन तालीम की फिक्र ना हो मैं कसम खाकर कह लूंगा मुआशरे की इस्लाह नहीं हो सकती। इस मुआशरे को हर किस्म की तालीम की जरूरत है मजहबी तालीम भी इस मुआशरे की जरूरत है। असरी तालीम भी इस मुआशरे की जरूरत है मेरे घर का बच्चा अगर कुरान से जुड़ा हुआ हो तो मेरे घर का बच्चा साइंस से भी जुड़ा हुआ हो। मेरे घर का बच्चा अगर अहादीस ए शरीफा से जुड़ा हुआ हो तो मेरे घर का बच्चा इंजीनियर और डॉक्टर भी हो। इसलिए क्योंकि दुनिया के अंदर यह सारे धारे चल रहे हैं यह सारे रास्ते चल रहे हैं और मेरे नबी ने यह सारे रास्ते बनाए हैं। आपके सहाबा की तादाद सवा लाख के करीब थी और आपके सहाबा की तारीख उठा कर के देखो उन्हीं सहाबा में कुछ वह लोग भी थे जो मस्जिद और मदरसों में बैठकर मसले और फतवे दिया करते थे। कुरान पढ़ाया करते थे हदीस पढ़ाया करते थे उन्हीं सहाबा में कुछ ऐसे भी लोग थे जिनके पास पनेतिप था। वह हकीम और डॉक्टर थे कुछ ऐसे भी लोग थे जिनको सियासी बसीरत हासिल थी तो नबी ने उनको बाज बाज इलाकों का लीडर और गवर्नर बनाया है। बाज ऐसे भी लोग थे जिनको तिजारत से शगफ था तो नबी ने उनको तिजारती लाइन के अंदर आगे बढ़ाया है। याद रखिए मुआशरा किसी एक पहिए पर नहीं चलता है मुआशरे के लिए इन तमाम पहियों की जरूरत है। खाली मजहबी तालीम से या खाली असरी तालीम से अगर हम यह कोशिश करें कि हमारा मुआशरा आगे बढ़ जाए नहीं बढ़ सकता। इस मुआशरे की जरूरत मजहबी तालीम भी है हमारे घर के बच्चे कुरान से जुड़ें कुरान पढ़ें हदीस पढ़ें जरूरी मसले मसाइल सीखें पाक और नापाक का फर्क जाने। और हमारे ही घर के बच्चे स्कूलों की तालीम हासिल करें कॉलेजों की तालीम हासिल करें यूनिवर्सिटीज़ की तालीम हासिल करें। हमारे मुआशरे से अगर उलमा तैयार हों हुफ्फाज़ तैयार हों कुर्रा तैयार हों मुफ्ती आने इकराम तैयार हों तो हमारे ही मुआशरे से अच्छे डॉक्टर्स भी तैयार हों। अच्छे लीडर भी तैयार हों अच्छे इंजीनियर्स भी तैयार हों अच्छे प्रोफेसर्स और लेक्चरर्स भी तैयार हों तभी यह मुआशरा तरक्की करेगा। किसी एक धारे को देखकर मुआशरे की तरक्की का तसव्वुर नामुमकिन है। याद रखिए इस दुनिया की तरक्की अगर हुई है तो मेरे नबी की सीरत से और मेरे नबी की सीरत बताती है कि दुनिया में रहकर अपने आप को हर तरीके की तालीम से जोड़ने की जरूरत है। मुआशरे में सब तरह के लोग हों इसलिए क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया में हर एक को दूसरे की खिदमत करता हुआ देखना चाहते हैं। यह ज़ाबते है प्यारे नबी ने इस दुनिया में आकर हर एक को दूसरे की हमदर्दी करना सिखाया है। फरमान ए नबवी है अल मुमिनुलिल मुमिन कल्बुनियान अशददु बाअदु बाअदा। एक मुसलमान दूसरे मुसलमान के लिए एक इमारत की तरह है। जैसे इमारत में एक ईंट की मजबूती दूसरी ईंट से दूसरी की मजबूती तीसरी ईंट से तीसरी की मजबूती चौथी ईंट से होती है। इसी तरीके से एक मुसलमान को तकवियत दूसरे से मिलती है दूसरे को तकवियत तीसरे से मिलती है। तमाम मुसलमान भाई-भाई हैं आपस में एक दूसरे के हमदर्द हैं एक दूसरे के ताल्लुकदार हैं एक दूसरे की खैरख्वाही करने वाले हैं। बल्कि आप अलैहिस्सलातो अस्सलाम ने तो इसी बात पर जोर दिया और यह फरमाया कि तमाम मुसलमानों को ऐसा रहना चाहिए जैसे एक जिस्म के अंदर तमाम आज़ा होते हैं। तकलीफ अगर आंख में हो तो पूरा जिस्म करने लगता है चोट अगर हाथ में लग जाए तो पूरे जिस्म के अंदर बेचैनी होती है। ज़ख्म एक उज़्व को लगता है लेकिन परेशानी तमाम आज़ा को होती है। इसी तरीके से तमाम मुसलमानों का मामला है कि अगर एक मुसलमान के साथ तकलीफ हो तो तमाम मुसलमान उसकी हमदर्दी में खड़े हो जाएं। यह मेरे नबी का पैगाम और यह मेरे नबी की तालीम है यह खिदमत का जज्बा है और याद रखिए इस खिदमत के जज्बे को दोनों किस्म की तालीम हासिल किए बगैर पूरा नहीं किया जा सकता। इसलिए शुरू से आखिर तक सिर्फ एक ही बात अर्ज़ करनी है कि अपने आप को तालीम से जोड़ने की जरूरत है। और इल्म कितनी बड़ी चीज है जरा हजरत अली इब्ने अबी तालिब रज़िअल्लाहू ताला अन्हु के एक शेर से अंदाजा लगाइए। हजरत अली फरमाते हैं रज़ीना किस्मतल जब्बारी फीना। हजरत अली खाली सहाबी नहीं है हजरत अली के अंदर जो खूबियां हैं उनको हम अपने अल्फाज़ में बयान नहीं कर सकते। वह अगर एक तरफ कातिब ए वही है तो दूसरी तरफ शायर ए रसूल भी है। हजरत अली फरमाते हैं दीवान अली के नाम से बहुत बड़ा ज़खीरा मौजूद है फरमाते हैं रज़ीना किस्मतल जब्बारी फीना। रज़ीना किस्मतल जब्बारी फीना लना इल्मुन वलिल आदा मालू फइन्नल मालु यफना अन करीबिन वइन्नल इल्म यबका ला यज़ालू फरमाते हैं हजरत अली इब्ने अबी तालिब रज़ीना किस्मतल जब्बारी फीना। हमारे परवरदिगार ने जो तकसीम की है जो बंटवारा किया है बड़ा ही खूबसूरत बंटवारा किया है। उस बंटवारे से हम पूरे तौर पर खुश हैं बंटवारा किया है लना इल्मुन वलिल आदा मालू। हमारे हिस्से में परवरदिगार ने तालीम दी है दुश्मनों के हिस्से में माल दिया है और फर फइन्नल मालु यफना अन करीबिन वइन्नल इल्म यबका ला यज़ालु। माल तो ऐसा है खर्च करोगे तो खत्म हो जाएगा लेकिन इल्म ऐसी खूबसूरत चीज है जितना खर्च करोगे उसमें उतना ही इजाफा होता चला जाएगा। यह तो अल्लाह ने हमें दिया है तो हम अपने आप को तालीम से क्यों ना जोड़ें अपने मुआशरे को तालीम से आरस्ता क्यों ना करें। तीन बातें याद रख लीजिए अपनी बात खत्म कर रहा हूं। तीन बातें हैं जिन बातों को इख्तियार करके हम अपने मुआशरे को आगे बढ़ा सकते हैं। सबसे अहम और पहली चीज है अपने आप को तालीम से जोड़ना। नंबर दो अपने बच्चों की सही तरबियत करना जैसा कि अभी आपने बयान में सुना है। और आखिरी और तीसरी चीज है अपने घर की औरतों को परदे में रखना। इन बातों पर ज्यादा गुफ्तगू करने का मौका नहीं है लेकिन यह तीन उसूल है जिस मुआशरे में यह तीन उसूल होंगे। यकीन जानिए वह मुआशरा आज नहीं तो कल और कल नहीं तो परसों तरक्की जरूर करेगा। हम अगर अपने छोटे बच्चों की तरबियत पर अभी से तवज्जो दें तो यह हम और आप जानते हैं हर 30 साल के बाद ज़माना बदलता है। नस्लें बदलती हैं हालात बदलते हैं तौर तरीके बदलते हैं आज जो बच्चे पांच और छह और सात साल के हैं अगले 30 साल के बाद वह 35 36 37 साल के होंगे। अगर उन बच्चों की तरबियत सही कर दी गई उनको तालीम से जोड़ दिया गया तो यकीन जानिए अगले 30 साल के बाद जो मुआशरा निकल कर के आएगा तो पूरी फज़ा के अंदर सिर्फ इल्म ही इल्म नजर आएगा। एक दूसरे की हमदर्दी और खैरख्वाही नजर आएगी उस फ्यूचर की तरफ उस मुस्तकबिल की तरफ देखकर के हमें इकदाम करें और अपने बच्चों की तरबियत पर भी तवज्जो दें। खुद भी तालीम से अपने आप को जोड़ें अपने बच्चों की तरबियत और तालीम पर तवज्जो दें और अपनी खवातीन की खैरख्वाही में इकदाम करें। अल्लाह ताला इन बातों पर अमल की हम सबको तौफीक अता फरमाए व आखिर दवाना अलहमदुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन।



