Thumbnail for Zubair Ali Tabish latest Shayari, Zubair Ali Tabish new Shayari, ZubairAli Tabish Shayari with music by Tipmaster Sajid

Zubair Ali Tabish latest Shayari, Zubair Ali Tabish new Shayari, ZubairAli Tabish Shayari with music

Tipmaster Sajid

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[0:01]देखो ऐसे जान गवानी पड़ती है। तुमको तो हर बात बतानी पड़ती है। देखो ऐसे जान गवानी पड़ती है। तुमको तो हर बात बतानी पड़ती है। सारे शिकारी सामने आ ही जाते हैं। सारे शिकारी सामने आ ही जाते हैं। उड़ने की अफवाह उड़ानी पड़ती है। सारे शिकारी सामने आ ही जाते हैं। उड़ने की अफवाह उड़ानी पड़ती है। तुम तो मेरी आहट से वाकिफ होना। तुम तो मेरी आहट से वाकिफ होना। फिर क्यों मुझको बेल बजानी पड़ती है। तुम तो मेरी आहट से वाकिफ होना। फिर क्यों मुझको बेल बजानी पड़ती है। जब भी उसकी चाय पीकर आता हूं। जब भी उसकी चाय पीकर आता हूं, सब यारों को चाय पिलानी पड़ती है।

[1:10]जी भाई वह मैडम ने कुछ कहा था, मैं वह पढ़ देता हूं के, ना कोई खुशी ना कोई गिला, बड़ी बेदिली से मिला है वह। ना कोई खुशी ना कोई गिला, बड़ी बेदिली से मिला है वह। उसे यह भी याद नहीं रहा मेरा कौन है मेरा क्या है वह। उसे यह भी याद नहीं रहा, मेरा कौन है मेरा क्या है वह। और तेरे जुल्म की भी है इंतहा, मेरे सब्र की भी है इंतहा। तेरे जुल्म की भी है इंतहा, मेरे सब्र की भी है इंतहा। तेरे कहकहे मेरी सिसकियां, उसे सब पता है खुदा है वह।

[2:02]इसी खुशी ने मेरा दम निकाल रखा है। इसी खुशी ने मेरा दम निकाल रखा है। के उसने अब भी मेरा गम संभाल रखा है। मैं खाक ही तो हूं आखिर मेरा बनेगा क्या। मैं खाक ही तो हूं आखिर मेरा बनेगा क्या। मुझे कुम्हार ने चक्कर में डाल रखा है। और मेरे खिलाफ मिले हैं कई सबूत मगर। शेर इशारों की जबान होते हैं मैंने इस इस शेर में जो इशारा है ये मेरी मां है। आप गौर करना इशारों में बात कर रहा हूं। के इसी खुशी ने मुझे इसी खुशी ने मेरा दम निकाल रखा है के उसने अब भी मेरा गम संभाल रखा है। और मेरे खिलाफ मिले हैं कई सबूत मगर। मेरे खिलाफ मिले हैं कई सबूत मगर। मेरे वकील ने जज को संभाल रखा है।

[3:06]दुआ में मांग लूं लेकिन दुआ से क्या होगा। दुआ में मांग लूं लेकिन दुआ से क्या होगा। खुदा है यार वह उसको तो सब पता होगा। दुआ में मांग लूं लेकिन दुआ से क्या होगा। खुदा है यार वह उसको तो सब पता होगा। और उसे एक रात अयोध्या में तो दिवाली हुई। उसे एक रात अयोध्या में तो दिवाली हुई। मैं सोचता हूं कि जंगल में क्या हुआ होगा।

[3:46]बहुत शुक्रिया। उसे एक रात अयोध्या में तो दिवाली हुई। मैं सोचता हूं कि जंगल में क्या हुआ होगा। कुछ शेर और।

[5:39]कक्षा में मर जाने वाली लड़की हो। तुम सचमुच अफसाने वाली लड़की हो। आखिरी बेंच पर बैठने वाला लड़का मैं जाओ तुम अवल आने वाली लड़की हो।

[6:10]इश्क है मुझको इस तस्वीर की लड़की से। तुम तस्वीर बनाने वाली लड़की हो।

[6:23]और यह बस्ती पिंजरे वालों की बस्ती है। यह बस्ती पिंजरे वालों की बस्ती है। और तुम पंछी उड़ाने वाली लड़की हो।

[6:43]मैं हूं ढाल बनाने वाला एक मजदूर। तुम तलवार चलाने वाली लड़की हो।

[6:54]मैं हूं ढाल बनाने वाला एक मजदूर। तुम तलवार चलाने वाली लड़की हो। और मेरी मंजिल कोई दूसरी लड़की है। तुम रास्ते में आने वाली लड़की हो।

[9:55]जी भाई मैं यह इसलिए कर रहा हूं यार एक घंटे हो गया लगभग मैं तब से फोन देख रहा हूं। सांस तो लेने दो नहीं नहीं कोई बात नहीं भाई सुनाता हूं सुनाता हूं।

[10:07]खाली बैठे हो तो एक काम मेरा कर दो ना। हालांकि आप लोग खाली नहीं बैठे मुझे लग रहा है कि इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी काम कोई कर रहा है तो वह सिर्फ आप लोग कर रहे इस दुनिया के अंदर। कि खाली बैठे हो तो एक काम मेरा कर दो ना। खाली बैठे हो तो एक काम मेरा कर दो ना। मुझको अच्छा सा कोई जख्म अता कर दो ना।

[10:35]और ध्यान से पंछियों को देते हो दाना पानी। ध्यान से पंछियों को देते हो दाना पानी। इतने अच्छे हो तो पिंजरे से रिहा कर दो ना।

[10:53]सितम ढाते हुए सोचा करोगे। हमारे साथ तुम ऐसा करोगे। सितम ढाते हुए सोचा करोगे। हमारे साथ तुम ऐसा करोगे। अंगूठी तो मुझे लौटा रहे हो। अंगूठी तो मुझे लौटा रहे हो। अंगूठी के निशान का क्या करोगे।

[11:27]मैं तुमसे अब झगड़ता भी नहीं हूं। तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे।

[11:37]और बताओ वादा करके आओगे ना। के पिछली बार के जैसा करोगे। बताओ वादा करके आओगे ना। कि पिछली बार के जैसा करोगे। मेरा दामन तुम्ही थामे हुए हो। मेरा दामन तुम्ही थामे हुए हो। मेरा दामन तुम्ही मैला करोगे।

[12:10]वह दुल्हन बन के रुखसत हो गई है। कहां तक कार का पीछा करोगे।

[13:35]जितने मुजरिम हैं सब चले जाएं। तू ठहर कुछ नहीं किया तूने। इश्क को छोड़कर किया सब कुछ। भूक मर कुछ नहीं किया तूने।

[13:49]इश्क को छोड़कर किया सब कुछ। भूक मर कुछ नहीं किया तूने।

[14:15]और हम हैं हमें सिर्फ वफा आती है। चूड़ियां बेच के वह मेरे लिए लाई गिटार। तार छेड़ूं तो खनकने की सदा आती है।

[14:38]ये रंग है जुबेर के। मैं एक मतला एक शेर देखके कह रहा हूं कि। अरे यार सारे जाम भर देना। वो जो खाली है वो इधर देना। जा रहे हो मैं क्या कहूं तुमसे अच्छा दरवाजा बंद कर देना।

[15:03]चुड़ियां बेच के वह मेरे लिए लाई गिटार। तार छेड़ूं तो खनकने की सदा आती है।

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