[0:00]एक शाम का वक्त था। एक नया शादीशुदा जोड़ा आर्यन और रिया बाइक पर शहर की तरफ जा रहे थे। दोनों जल्दी में थे क्योंकि सफर लंबा था लेकिन थोड़ी दूर जाते ही सामने से एक ट्रक बहुत तेजी से उनकी तरफ आता दिखा। आर्यन घबरा गया उसने बिना सोचे बाइक को एक तरफ मोड़ दिया और एक अनजान रास्ते पर घुस गया। बाइक संभालते-संभालते किसी तरह आगे बढ़ी ही थी कि कुछ ही दूर जाकर अचानक इंजन धड़धड़ा कर बंद हो गया। आर्यन ने दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की एक बार फिर दूसरी बार लेकिन बाइक ने साथ नहीं दिया। दोनों ने जब आसपास देखा तो चारों तरफ घना अंधेरा था और हर तरफ सिर्फ एक भरी हुई खामोशी। फिर दोनों बाइक से नीचे उतरे। रिया ने घबराकर खेत की तरफ इशारा किया। आर्यन वहां देखो। खेत के बीच सूखी घास के बीच एक पुतला खड़ा था। आर्यन ने नजर डाली और हल्का सा हंसा। अरे रिया ये तो बस बिजुका है पक्षियों को भगाने के लिए होता है। तुम बेकार में डर रही हो। यह कहकर वह बाइक चेक करने लगा लेकिन रिया की नजर उस पुतले से हटी नहीं। तभी उसे लगा जैसे उस पुतले का सिर थोड़ा सा बस थोड़ा सा हिल गया हो। रिया जोर से चिल्लाई। आर्यन वह हिला। मैंने देखा वो हिला। आर्यन ने गुस्से में कहा क्या यार तुम भी। और वह खेत की तरफ मुड़ गया। तभी एक खौफनाक मंजर हुआ। उस पुतले ने एक अजीब दिखने वाले इंसान का रूप ले लिया। उसका शरीर बिल्कुल सूखा था। रंग अजीब सा नारंगी आंखें बाहर निकली हुई और चेहरे पर एक शैतानी पागलपन भरी मुस्कान थी। वह इंसान नहीं लग रहा था बल्कि भूखा जानवर लग रहा था। यह देखकर दोनों की रूह कांप गई। रिया चीख उठी। भागो आर्यन भागो। दोनों गांव के अंदर की तरफ चीखते हुए जान बचाने के लिए भागने लगे। बचाओ बचाओ बचाओ बचाओ गांव इतना वीरान था कि उनकी चीखें खुद से ही टकराकर खामोशी में डूब जा रही थी। तभी वह अजीब प्राणी एक जोरदार छलांग लगाता है और सीधा उनके सामने आ खड़ा होता है। उसे देखते ही आर्यन लड़खड़ा कर गिर पड़ा। रिया ने कांपते हुए हाथ जोड़कर बोला। प्लीज हमें कुछ मत करो। हमारी नई-नई शादी हुई है। लेकिन उस शैतान की आंखों में कोई रहम नहीं था। एक ही झपट में उसने रिया का गला अलग कर दिया। और अगले ही पल उस शैतान ने आर्यन को दबोच लिया। जब तक उसकी सांस पूरी तरह थम नहीं गई। वह उसे कुचलता रहा फिर खेत की सूखी घास को दोनों के खून से लाल रंग में रंगा दिया और फिर एक खौफनाक हंसी हंसा। जिसकी आवाज गांव की खामोशी के बीच गूंज उठी। फिर सुबह हुई। गांव के इंचार्ज इंस्पेक्टर राय स्टार जो कभी इसी गांव का एक लड़का था। एक हवलदार के साथ वहां पहुंचा। खेत में उन्हें सिर्फ लाल खून के दाग मिले और जमीन पर पड़ा एक कद्दू। लाशों का कहीं कोई निशान नहीं था। हवलदार ने घबरा कर पूछा। सर यहां कोई जंगली जानवर रहता है क्या लाशों का पता ही नहीं चल रहा। राय स्टार ने जमीन पर पड़े उस कद्दू को देखा और गंभीर आवाज में बोला। ये कोई जानवर नहीं है रे ये थुमथुम का शाप है। हवलदार सुनकर हैरान रह गया और थोड़ा घबरा कर बोला। शाप कैसा शाप सर राय स्टार ने एक गहरी सांस ली और गांव के उस डरावने राज से पर्दा उठाया। पता है हवलदार कुछ गांव खाली नहीं होते उन्हें खाली करवाया जाता है। ये बात तब की है जब मैं छोटा था। 20 साल पहले सुखापुर एक भरा पूरा और खुशहाल गांव था। इन खेतों में हरियाली थी लेकिन फिर गांव पर एक मनहूस साया पड़ गया। लगातार दो साल तक बारिश नहीं हुई जमीन सूखकर पत्थर हो गई। फसलें जलने लगी और लोग भूख से मरने लगे। सबने बारिश के लिए भगवान से दुआ की लेकिन इसी गांव में एक किसान था थुमथुम। वो किसान के साथ-साथ एक तांत्रिक भी था। थुमथुम अपनी फसल को लेकर पागल था। उसने कहा था अगर आसमान पानी नहीं देगा तो मैं जमीन को खून पिलाऊंगा। इसलिए उसने काला जादू शुरू किया। पहले उसने गांव के जानवरों की बलि दी। लेकिन जब उससे भी काम नहीं बना तो वह रात के अंधेरे में लोगों के घरों में चुपके से घुसने लगा। और मासूम बच्चों को उठा ले जाता था। फिर बच्चों को मारकर उनका खून अपने खेत में डालता था। और सुबह होते ही घर-घर से बस चीखें की आवाज आने लगती थी। मां-बाप अपने बच्चों को ढूंढते रहे लेकिन उनको बस सिर्फ खाली गोद मिलते थे। तब पूरे गांव में हंगामा मच गया था। किसी को समझ नहीं आया था बच्चे गायब कैसे हो रहे हैं। लेकिन ये सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा था। लगातार हर दिन कोई ना कोई बच्चा गायब हो रहा था। फिर एक रात लगभग 2:00 बजे गांव का एक आदमी कहीं जा रहा था। तभी उसे एक घर से एक बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी वो चौक गया। सोचने लगा यहां तो कोई नहीं रहता फिर ये बच्चे के रोने की आवाज कैसे फिर वह चुपचाप उस घर के अंदर घुसा और जो उसने देखा उसकी रूह कांप गई। थमथम एक बच्ची को मारने ही वाला था तभी उस आदमी की नजर एक कोने में पड़े डंडे पर पड़ी। उसने डंडा उठाया और सीधा थुमथुम के सिर पर मारा। थुमथुम जमीन पर गिर पड़ा। फिर सुबह उस आदमी ने गांव वालों को पूरा सच बता दिया। सच सुनते ही गांव वाले भड़क उठे। उन्हें यकीन भी हो गया था क्योंकि थुमथुम अपनी फसल के लिए कुछ भी कर सकता था। इससे पहले भी बारिश के लिए सबके सामने वो जानवरों की बलि करवा चुका था। इसलिए सब ने फैसला लिया। इसे दर्दनाक मौत मिलना चाहिए। हां हां दर्दनाक मौत इसे दर्दनाक मौत इसे भी दर्दनाक मौत मिलना चाहिए। फिर गांव वालों ने थुमथुम को उसके ही खेत में लकड़ी के खंभे पर बांध दिया। उन्हें लगा धूप और प्यास से वो तड़प-तड़प कर मर जाएगा लेकिन मरते-मरते थुमथुम ने एक शाप दिया था। तुम सबने आज मुझे धूप में सरने के लिए टांगा है लेकिन याद रखना जिसे तुम सबने सूखने के लिए छोड़ा है वही एक दिन तुम्हारा खून पीकर अपनी प्यास बुझाएगा। कोई जिंदा नहीं बचेगा। फिर थुमथुम मर गया और उसकी आत्मा वहीं एक बिजुके में कैद हो गई। लेकिन जब सुबह गांव वाले वापस आए तो उन्होंने देखा उसका शरीर पूरी तरह सूख चुका था और नारंगी रंग का हो गया था। और फिर गांव वालों ने उस लाश को नदी में बहा दिया। लेकिन हवलदार कहानी यहां खत्म नहीं हुई। थुमथुम के मरने के कुछ ही दिन बाद गांव में अजीब घटनाएं शुरू हो गई। एक रात रामू काका जो गांव के सबसे पुराने किसान थे अपनी भैंस ढूंढते हुए उस श्रापित खेत के पास आ गए। खेत में गहरा सन्नाटा था लेकिन रामू काका ने देखा खेत के बीच में खड़ा वो बिजुका अपनी जगह से गायब था। रामू काका ने मन में सोचा अरे यहां तो पुतला खड़ा था कहां गया तभी उन्हें सूखी घास पर चलने की आवाज सुनाई दी। रामू काका डरते हुए पीछे मुड़कर देखते हैं वहां थुमथुम खड़ा था। उसे देखकर रामू काका डर के मारे कांपने लगे लेकिन अगले ही पल थुमथुम ने अपने सूखे नारंगी हाथ से रामू काका को बीच से फाड़ दिया। जब सुबह गांव वाले आए तो सब कांप उठे। किसी को कुछ समझ नहीं आया यह कैसे हुआ। सबको लगा यह किसी जंगली जानवर का काम होगा लेकिन उस दिन के बाद से हर रात खेत के बीच से रोने की आवाजें आने लगी। और सुबह होते ही गांव के हर कोने में सिर्फ लाशें मिलती रही। फिर एक दिन गांव के पंडित ने सबको इकट्ठा करके कहा। ये ये किसी जंगली जानवर का काम नहीं है। यह थुमथुम का काम है। वह पिशाच बनकर वापस आ चुका है। हमें यह गांव छोड़ना पड़ेगा वरना एक-एक करके हम सब मिट जाएंगे। उसी दिन से लोगों ने सुखापुर छोड़ दिया और धीरे-धीरे यह गांव एक श्मशान बन गया। हवलदार ने डरते हुए कहा। सर तो वो पुतला अब कहां है। यह सुनकर राय स्टार ने खेत की तरफ देखा ही था कि तभी उसकी जीप के पीछे से एक अजीब सी हंसी की आवाज आई। राय स्टार जीप के पीछे देखता है। पीछे वही नारंगी रंग का बड़ी-बड़ी आंखों वाला इंसान खड़ा था। और अगले ही पल वह राय स्टार पर झपट पड़ता है और सब अंधेरा छा जाता है। तभी एक आवाज गूंजती है। बेटा बेटा कितना सोएगा दोपहर के 12:00 बज गए। जैसे ही अंधेरा हटता है राय स्टार होश में आता है। वह समझ जाता है कि वह सिर्फ एक सपना देख रहा था। घबराकर वह उठता है और बाहर निकल कर देखता है। सब कुछ ठीक था। गांव में हलचल थी। यह सब देखकर राय स्टार को थोड़ा सुकून मिलता है। राय स्टार ने खुद को तसल्ली दी कि सब ठीक है पर उसके कानों में वह हंसी अभी भी गूंज रही थी।

Shraap Full Story | Thung Thung Sahur | Raistar Ki Kahani
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