[0:00]जब महादेव ने तीनों लोकों भूत वर्तमान और भविष्य पर समान दृष्टि रखी, तब वे त्र्यंबकेश्वर कहलाए। त्रि यानी तीन, अंबक यानी नेत्र, ईश्वर यानी स्वामी। जिनकी तीन आंखें सिर्फ देखने के लिए नहीं, सत्य को जलाने के लिए हैं। यह नाम उन्हें तब मिला जब तीसरी आंख खुली और अहंकार, अज्ञान और असत्य भस्म हो गया। त्र्यंबकेश्वर हमें सिखाते हैं जो बीत गया उसे छोड़, जो आने वाला है उससे डर मत, वर्तमान को पूरी चेतना से जी। तीसरी आंख बाहर नहीं, अंदर खुलती है और जिस दिन वो जागती है, डर अपने आप राख बन जाता है।

महादेव का तीसरा नाम बना — त्र्यम्बकेश्वर 🔱 #Tryambakeshwar #Sanatan #ShivTattva
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