Thumbnail for संपूर्ण गीता सार 45 मिनट में | Bhagwat Geeta Saar In 45 Minutes | Best Krishna Motivational Speech by Anmol Sathi

संपूर्ण गीता सार 45 मिनट में | Bhagwat Geeta Saar In 45 Minutes | Best Krishna Motivational Speech

Anmol Sathi

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जय श्री कृष्ण साथियों श्रीमद् भगवत गीता में मनुष्य के जीवन की प्रत्येक समस्या का समाधान मिलता है। भगवत गीता ऐसे प्रेरणादायक संदेशों का मह...

[6:27]Section 2

लेकिन वास्तविकता में मुझे कोई नहीं जानता श्री कृष्ण कहते हैं जिस तरह प्रकाश की ज्योति अंधेरे में चमकती है ठीक उसी प्रकार सत्य भी चमकता है...

[18:38]Section 3

यही अहम भाव हमारे दुखों का पांचवा कारण है कान्हा कहते हैं कौन क्या कर रहा है कैसे कर रहा है और क्यों कर रहा है इन सब से आप जितना दूर रहें...

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इंसान इसलिए दुखी है क्योंकि वह ईश्वर की नहीं मानता समय आने पर सबको मिलता है समय से पहले की चाहत ही दुख का कारण बनती है वे मूर्ख हैं जो प्...

[35:44]Section 5

अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब करके घंटी को अल पर सेट कर लें और कमेंट बॉक्स में जय श्री राधे कृष्ण लिखकर परमात्मा को अ...

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[35:44]अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब करके घंटी को अल पर सेट कर लें और कमेंट बॉक्स में जय श्री राधे कृष्ण लिखकर परमात्मा को अपना आभार व्यक्त करना ना भूलें जय श्री राधे कृष्णा राधे राधे।
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[0:04]जय श्री कृष्ण साथियों श्रीमद् भगवत गीता में मनुष्य के जीवन की प्रत्येक समस्या का समाधान मिलता है। भगवत गीता ऐसे प्रेरणादायक संदेशों का महासागर है जो जीवन से निराश मनुष्य को आशाओं से भर देती है। मित्रों मुझे पूरा विश्वास है कि इस वीडियो को पूरा अंत तक देखने और शांत मन से इसकी बातों को सुनने और समझने के बाद न केवल आपके मन को असीम शांति का अनुभव होगा बल्कि आपके विचारों में और जीवन में भी बहुत ही सकारात्मक बदलाव अवश्य आएंगे। मैं यह गारंटी के साथ कह सकता हूं कि जो कोई भी इस गीता सार को पूरा अंत तक सुनेगा और इसके ज्ञान को अपने जीवन में उतारेगा उसे अपनी हर समस्या का हर परेशानी का समाधान अवश्य मिलेगा। उसे वह सब कुछ मिलेगा जो वह पाना चाहता है इसलिए इस भगवत गीता सार को आप हर रोज सुबह और रात में सोने से पहले अवश्य सुने। दोस्तों श्रीमद् भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं जो भी मनुष्य श्रद्धा से युक्त होकर और दोषों से रहित होकर इस गीता शास्त्र का अध्ययन श्रवण और मनन करता है। वह सभी पापों से मुक्त होकर मेरे परम धाम को प्राप्त होता है। साथियों इसीलिए कहा भी जाता है कि जिस घर में भी श्रीमद् भगवत गीता का पाठ हर रोज पढ़ा और सुना जाता है। उस घर में कभी कोई संकट या परेशानी नहीं आती भगवान श्री कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद हमेशा उस घर पर बना रहता है और जीवन सुख संपत्ति धन वैभव और आनंद से परिपूर्ण हो जाता है। मित्रों कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में हुए महाभारत के भीषण युद्ध के प्रारंभ में ही अर्जुन युद्ध भूमि में अपने चारों तरफ युद्ध की इच्छा से आए हुए अपने परिजनों भाई बंधुओं और गुरुजनों को देखकर घबरा जाता है निराश और हताश हो जाता है और बहुत ही दुखी होकर वह श्री कृष्ण के समक्ष अपने दुख और दुविधा को प्रकट करता है। अर्जुन कहता है हे केशव मैं कैसे यह युद्ध कर सकता हूं इस युद्ध भूमि में युद्ध के लिए एकत्रित हुए यह सब तो मेरे अपने ही हैं। मैं कैसे पितामह भीष्म और गुरु द्रोणाचार्य से युद्ध करूंगा क्योंकि ये दोनों तो मेरे पूजनीय गुरुदेव हैं इसलिए इन गुरुजनों को मारने से तो अच्छा है।

[2:42]मैं भिक्षा मांग कर जीवन यापन करूं हे मधुसूदन जिन कौरवों से मैं युद्ध करने जा रहा हूं वे सब धृतराष्ट्र के पुत्र मेरे भाई ही तो हैं मेरे अपने ही हैं। इन सबको मारने से तो अच्छा है कि मैं सन्यासी बन जाऊं अगर यह युद्ध हुआ तो करोड़ों लोग मारे जाएंगे। जो सैनिक और योद्धा इस युद्ध में मारे जाएंगे उनकी स्त्रियों का क्या होगा नहीं कृष्ण मैं यह युद्ध नहीं कर सकता। अपने ही कुल का विनाश करके मैं कैसे सुखी हो सकता हूं हे कृष्ण मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है मेरी बुद्धि भ्रमित हो रही है। मेरा सर फटा जा रहा है मेरे पैर कांप रहे हैं मेरी त्वचा जल रही है मेरा गांडीव धनुष मेरे इन हाथों से छूट रहा है। हे कृष्ण मेरा मार्गदर्शन करो मुझे ज्ञान दो मुझे बताओ कि मैं क्या करूं अर्जुन की इस दयनीय अवस्था को देखकर भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद् भगवत गीता का वह दिव्य और अलौकिक ज्ञान अर्जुन को दिया। जो न केवल अर्जुन के लिए बल्कि हजारों वर्षों से संपूर्ण मानव जाति के लिए और आज के आधुनिक युग में भी प्रत्येक मनुष्य के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है। श्रीमद् भगवत गीता एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो मनुष्य को जीने का सही तरीका बताती है। भगवत गीता जीवन में धर्म कर्म और प्रेम का पाठ पढ़ाती है इसलिए हमें नित्य प्रतिदिन श्रीमद् भगवत गीता का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। अर्जुन की दुविधा और संशय को देखकर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा हे अर्जुन तू बड़ी-बड़ी ज्ञानियों सी बातें करता है। लेकिन जो सच में ज्ञानी होता है वह इस तरह दुख और शोक नहीं करता है तेरे हाथ में कुछ है ही नहीं तू चाहकर भी कुछ नियंत्रित नहीं कर सकता। जीवन और मरण तो प्रकृति की नियति है यह सब लोग वास्तव में मेरे ही द्वारा मारे जाएंगे तू तो सिर्फ एक निमित्त मात्र है। इसीलिए जो ज्ञानी होता है वह किसी के मरने पर रोता नहीं है ज्ञानी जन नहीं बीते हुए कल का शोक करते हैं और ना ही आने वाले कल की चिंता करते हैं। इसीलिए जो होने वाला है वह होकर ही रहता है और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होगा ऐसा निश्चय जिसको समझ में आ जाता है जिसकी बुद्धि में आ जाता है उसे कोई दुख नहीं सताता उसे कोई चिंता नहीं सताती। हे अर्जुन तुम इस बात का शोक मत करो कि यहां कौन अपना है और कौन पराया है जो अधर्म करता है उसके साथ युद्ध करना एक क्षत्रिय का धर्म है और अपने धर्म का पालन करना तुम्हें मोक्ष और मुक्ति देगा। तुम अपने इस मन से मोह को त्याग दो नहीं तो सारा जग तुम्हारी निंदा ही करेगा आज अगर तुम युद्ध नहीं करोगे तो सारा संसार तुम्हें नपुंसक और डरपोक कहेगा। यहां बात अपने पराय की नहीं है यहां बात है धर्म और अधर्म की बात सही और गलत की है अगर तुम गलत को सहोगे उसका अंत नहीं करोगे तो गलत करने वाले को और अधिक बल मिलेगा वह और भी अधिक अधर्म करेगा। इसलिए अपने मोह को त्याग करके तुम युद्ध करो श्रीमद् भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे अर्जुन यह संसार मेरी ही माया है। यह संसार मुझसे ही उत्पन्न हुआ है मैं ही इसका पालन पोषण करता हूं और मैं ही इस सृष्टि का विनाश भी करता हूं मैं भूत, वर्तमान और भविष्य के सभी प्राणियों को जानता हूं।

[6:27]लेकिन वास्तविकता में मुझे कोई नहीं जानता श्री कृष्ण कहते हैं जिस तरह प्रकाश की ज्योति अंधेरे में चमकती है ठीक उसी प्रकार सत्य भी चमकता है। इसलिए मनुष्य को हमेशा सत्य की राह पर ही चलना चाहिए मृत्यु एक अटल सत्य है जिसे कभी बदला नहीं जा सकता है इस संसार का जब से निर्माण हुआ है। तब से जन्म मृत्यु का चक्र चलता आ रहा है जिस प्रकार मनुष्य अपने पुराने वस्त्रों को त्याग कर नए वस्त्र धारण करता है ठीक उसी प्रकार आत्मा पुराने व्यर्थ शरीर को त्याग कर नए शरीर को धारण करती है। यही प्रकृति का नियम है इस सत्य को स्वीकार करके भय मुक्त होकर आज में ही जीना चाहिए ज्ञानी व्यक्ति ना तो मरने वाले का शोक करते हैं और ना ही उनका मोह करते हैं जो अभी जीवित है। क्योंकि वह जानते हैं कि जो मर गया वह फिर से जन्म लेगा और जो जीवित है वह एक दिन अवश्य मरेगा हे अर्जुन मैं सभी प्राणियों के हृदय में स्थित सबका आत्मा हूं। संपूर्ण प्राणियों का आदि मध्य और अंत भी मैं ही हूं मैं ग्रहों में सूर्य हूं वेदों में सामवेद हूं देवों में इंद्र हूं इंद्रियों में मन हूं मैं ब्रह्मा हूं मैं विष्णु हूं मैं महेश हूं जलाशयों में मैं समुद्र हूं पर्वतों में मैं हिमालय हूं। इस संपूर्ण संसार में तुम जो कुछ भी देख पाते हो सब मैं ही हूं भगवान श्री कृष्ण कहते हैं मन की शांति से बढ़कर इस संसार में कोई भी संपत्ति नहीं है। जिस व्यक्ति ने अपने मन को शांत रखना सीख लिया है उससे ज्यादा धनवान इस संसार में कोई नहीं मनुष्य के दुखों का कारण उसका मोह है। जितना अधिक मोह करेगा उतना ही अधिक कष्ट भोगेगा श्री कृष्ण कहते हैं जो हुआ अच्छा हुआ जो हो रहा है अच्छा हो रहा है और जो होगा वह भी अच्छा ही होगा। तुम्हारा क्या गया जो तुम रो रहे हो तुम क्या लाए थे जो तुमने खो दिया तुमने क्या पैदा किया जो नष्ट हो गया है तुमने जो लिया यहीं से लिया और जो दिया यहीं पर दिया। जो आज तुम्हारा है वह कल किसी और का होगा क्योंकि परिवर्तन ही संसार का नियम है। श्रीमद् भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं मनुष्य को परिणाम की चिंता किए बिना निस्वार्थ और निष्पक्ष होकर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। अपने जीवन की चुनौतियों से भागना नहीं चाहिए और ना ही भाग्य को दोष देना चाहिए हे अर्जुन अपने आप को भगवान के प्रति समर्पित कर दो। यही सबसे बड़ा सहारा है श्री कृष्ण कहते हैं इंसान अपने जन्म से नहीं अपने कर्म से महान बनता है जब इंसान अपने काम में आनंद खोज लेते हैं तो वह पूर्णता प्राप्त करते हैं। हे अर्जुन आसक्ति से ही कामना का जन्म होता है सदैव संदेह करने वाले इंसान के लिए प्रसन्नता ना तो इस लोक में है और ना ही परलोक में। जो अपने मन को नियंत्रण में नहीं रखता उसके लिए वह शत्रु के समान काम करता है अशांत मन को नियंत्रित करना कठिन है। लेकिन अभ्यास के द्वारा इसे वश में किया जा सकता है भागवत गीता में श्री कृष्ण बताते हैं कि पृथ्वी पर जिस प्रकार मौसम का बदलाव होता रहता है। उसी प्रकार हमारे जीवन में भी सुख दुख आते रहते हैं इनसे हमें विचलित नहीं होना चाहिए हे अर्जुन समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता। जैसे दीपक की बाती को दीपक तले छुपा अंधेरा दिखाई नहीं देता वैसे ही मनुष्य को जवानी के पीछे छुपा बुढ़ापा और कमजोरी दिखाई नहीं देती। किसी भी प्राणी को उसका मन जीवन के अंत तक अपने जाल से निकलने नहीं देता रस्सी में बांधकर उसे तरह-तरह के नाच नचवाता रहता है।

[10:41]वह जीव को इतनी फुर्सत ही नहीं देता है कि वह अपने अंतर्मन में झांक कर अपनी आत्मा को पहचाने और आत्मा के अंदर जिस परमात्मा का प्रकाश है उस परमात्मा का साक्षात्कार करें उसे देख सके। जब भगवान श्री कृष्ण से अर्जुन पूछते हैं कि हे केशव यह सब मानकर भी कि आत्मा नित्य सनातन और अजन्मा है उसे शस्त्र नहीं काट सकते आग नहीं जला सकती फिर भी प्राणी की आत्मा को दुख सुख शोक खुशी मान अपमान पीड़ा और आनंद का एहसास क्यों होता है। तब भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे पार्थ मैंने पहले ही तुम्हें बताया कि सुख दुख का आभास करना आत्मा का काम नहीं शरीर का काम है। तब अर्जुन कहते हैं हे केशव शरीर को दुख और पीड़ा तभी होगी जब शरीर को कोई चोट लग जाए या उसका कोई अंग कट जाए। जैसे शरीर आग में जल जाए उससे जो पीड़ा होती है वह तो शरीर की पीड़ा है परंतु मानहानि होने से जो दुख होता है या मान होने से जो आनंद आता है उसमें तो शरीर को कोई चोट नहीं पहुंचती। वह मानहानि का दुख वह अपकीर्ति की पीड़ा तो आत्मा को ही होती है ना तब भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं नहीं अर्जुन। यह कीर्ति अपकीर्ति मान अपमान यह लाभ हानि यह जीतने का आनंद अथवा हारने की पीड़ा यह भी आत्मा को नहीं होती यह आत्मा का काम नहीं है यह तो मन की शरारत है। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे अर्जुन यह याद रखो कि प्राणी के शरीर का एक अदृश्य अंग है मन जो दिखाई नहीं देता लेकिन सबसे शक्तिशाली हिस्सा है। आत्मा से इसका कोई संबंध नहीं है आत्मा रथ में बैठा हुआ रथ का स्वामी है तो मन शरीर रूपी रथ का सारथी है यह मन ही इंद्रियों के घोड़ों को इधर-उधर भटका देता है और यौवन के आवेश में चंचल हो जाता है। कभी यौवन के आवेश में यही चंचल मन मनुष्य को इस भ्रम में डाल देता है कि वह सर्व शक्तिशाली है वह सब कुछ कर सकता है और वह यहां का राजा है जिसके आगे हर कोई झुक जाने को विवश है और जिसे हर कोई प्रणाम करता है। जब शरीर के दीपक में यौवन शक्ति का घी झलकर समाप्त हो जाता है और दीपक तले अंधेरा छा जाता है तो मनुष्य घबराकर चिल्लाने लगता है। मैं बीमार हूं मैं दुखी हूं मैं मर रहा हूं मुझे बचाओ यह रोने का नाटक भी मन ही करता है हे अर्जुन मनुष्य को मैं के घमंड की मदिरा पिलाकर मदहोश करने वाला पाखंडी केवल मन है। उसके हाथों में मोह माया का जाल है जिसे वह मनुष्य की इच्छाओं पर डालता रहता है और उसे अपने वश में करता रहता है यह मन शरीर से भी मोह करता है अपनी खुशियों से भी मोह करता है और अपने दुखों से भी मोह करता है। खुशी में खुशियों से भरे गीत गाता है और दुख में दुख भरे गीत गुनगुनाता है अपने दुखों में दूसरों को शामिल करके उसे खुशी मिलती है। हे पार्थ प्राणी के लिए आवश्यक है कि वह अपने मन को काबू में करके अपने अंतर्मन में झांक कर आत्मा को देखें तभी उस आत्मा के अंदर उसे परमात्मा का प्रकाश स्पष्ट दिखाई देगा। समय मनुष्य के बनाए मार्ग पर नहीं चलता मनुष्य को ही समय के दिखाए मार्ग पर चलना होता है इसी को नियति कहते हैं। जीवन कठिन तब लगता है जब हम स्वयं में बदलाव करने की बजाय परिस्थितियों को बदलने का प्रयास करते हैं जब समय आपके विपरीत चल रहा हो तो शांत रहना ही सबसे बेहतर होता है। जब भक्ति में मन लगने लगे तो समझ लेना आपने भगवान को नहीं भगवान ने आपको चुना है कोई कुछ भी बोले स्वयं को शांत रखो क्योंकि धूप कितनी ही तेज हो समुद्र सूखा नहीं करते कान भरने वालों से हमेशा सावधान रहें यह अच्छे-अच्छे रिश्तों को बिगाड़ देते हैं। योग्यताएं कर्म से पैदा होती हैं जन्म से तो हर व्यक्ति शून्य ही होता है इस जगत में सत्य से भी बड़ा सत्य प्रेम है। और जिसके प्रति प्रेम है उसके प्रति असत्य होना मुश्किल है पूरी दुनिया की सबसे खूबसूरत जोड़ी मुस्कुराहट और आंसू है इन दोनों का एक साथ मिलना मुश्किल है लेकिन जब यह दोनों मिलते हैं वह पल सबसे खूबसूरत होता है। कर्म ही सबसे बड़ा धर्म है भगवान श्री कृष्ण गीता में अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं कि व्यक्ति कर्म करने के लिए ही पैदा हुआ है। बिना कर्म किए कोई रह नहीं सकता मनुष्य को परिणाम की चिंता किए बिना अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए क्रोध मनुष्य को नरक की ओर ले जाने वाला द्वार है। क्रोध करने से व्यक्ति का मन अशांत हो जाता है वह आवेश में आकर कई बार अपना ही नुकसान कर बैठता है भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि मनुष्य को क्रोध करने से बचना चाहिए। कितना भी क्रोध क्यों ना आए स्वयं को शांत रखने का प्रयास करें इस संसार में आज जो तुम्हारे पास है वह कल किसी और का था परसों किसी और का होगा। तुम यहां खाली हाथ आए और खाली हाथ ही जाओगे मन पर नियंत्रण रखना जरूरी है मनुष्य का मन वायु की तरह चंचल होता है यह मन ही है जो मनुष्य को काम वासनाओं की तरफ भटकाता रहता है। अगर जीवन में सफल बनना है तो मन पर काबू करना बहुत जरूरी है मन को वश में करने से दिमाग की शक्ति केंद्रित होती है जिससे कार्यों में सफलता मिलने लगती है। गीता के अनुसार जिस व्यक्ति ने अपने मन पर काबू पा लिया वह मन में पैदा होने वाली बेकार की चिंताओं और इच्छाओं से भी दूर रहता है। साथ ही व्यक्ति अपने लक्ष्य को भी आसानी से प्राप्त कर लेता है अगर मन वश में नहीं करोगे तो वह तुम्हारा सबसे बड़ा शत्रु बन जाएगा। हमेशा शक करने वाला व्यक्ति कभी शांति प्राप्त नहीं कर पाता इसलिए संदेह करने से बचें अधिक संदेह करने से मन की शांति भंग हो जाती है और व्यक्ति भ्रमित होकर अपने संबंधों को नष्ट कर डालता है। मनुष्य के कर्म ही उसके जीवन का आधार है वह जैसा कर्म करता है वैसा ही फल उसे मिलता है अगर वह अच्छे कर्म करेगा तो उसे अच्छा परिणाम प्राप्त होगा। और अगर वह बुरा कर्म करेगा तो उसे बुरा परिणाम ही भोगना होगा इसलिए व्यक्ति को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए हमारे दुखों के पांच कारण हैं एक। जो व्यक्ति अपना मनचाहा प्राप्त होने पर कहते हैं प्रभु की कृपा है पर मन के विरुद्ध होने पर उदास हो जाते हैं यही प्रभु की कृपा का अधूरा दर्शन दुख का पहला कारण है टू। दूसरे व्यक्ति का कुछ भी हो उसका चाहे अहित हो वह चाहे दुखी हो पर हमारा भला होना चाहिए हमारा यह मलिन स्वार्थ हमारे दुख का दूसरा कारण है तीन। हमें वर्तमान में जो वस्तुएं प्राप्त हैं या अभिलाषाएं हैं उनके छिन जाने या ना मिल पाने का निरंतर बने रहने वाला भय हमारे दुखों का चौथा कारण है पांच। जो हमें करना चाहिए वह ना करना और जो नहीं करना चाहिए उसे करना यह प्रमाद भरी आदतें हमारे दुखों का पांचवा कारण है बनाकर कहीं कोई सुंदर घटना हो जाने पर उसका सारा श्रेय हम अकेले ही ले लेना चाहते हैं।

[18:38]यही अहम भाव हमारे दुखों का पांचवा कारण है कान्हा कहते हैं कौन क्या कर रहा है कैसे कर रहा है और क्यों कर रहा है इन सब से आप जितना दूर रहेंगे उतना ही खुश रहेंगे। तन की सुंदरता मन को आकर्षित करती है जबकि स्वभाव की सुंदरता हृदय को आकर्षित करती है इसलिए मनुष्य का स्वभाव हमेशा निर्मल होना चाहिए जिंदगी में हम कितने सही हैं और कितने गलत हैं यह सिर्फ दो लोग जानते हैं।

[19:11]एक परमात्मा और दूसरा हमारा अंतरात्मा भगवान श्री कृष्ण कहते हैं जिस मनुष्य के अंदर ज्ञान की कमी होती है और ईश्वर में श्रद्धा नहीं होती वह मनुष्य जीवन में कभी भी आनंद और सफलता को प्राप्त नहीं कर पाता। मोह विनाश का कारण होता है मनुष्य के दुखों का मूल कारण उसका मोह ही होता है वह जितना अधिक मोह करेगा उतना ही अधिक कष्ट भी भोगेगा। पछतावा अतीत नहीं बदल सकता और चिंता भविष्य नहीं संवार सकती इसलिए वर्तमान का आनंद लेना ही जीवन का सच्चा सुख है श्री कृष्ण कहते हैं जो तुम्हारा साथ देता है तुम उसका साथ दो और जो तुम्हें धोखा देता है तुम उसे त्याग दो। जिस जगह आपका सम्मान ना हो वहां पर कभी जाना नहीं चाहिए वरना लोग आपको कमजोर और मूर्ख समझेंगे जहां बारिश ना हो वहां फसल खराब हो जाती है। और जहां संस्कार ना हो वहां नस्ल खराब हो जाती है इतनी जल्दी दुनिया की कोई चीज नहीं बदलती जितनी जल्दी इंसान की नियत और नजर बदल जाती है। इस संसार में वही सुखी है जो दुख में ज्यादा दुखी ना हो और सुख में ज्यादा उछले नहीं सुख दुख मान अपमान जय पराजय खोना पाना आना जाना हानि लाभ यह सब लगे ही रहेंगे। जीवन में अगर एक जैसी स्थिति सदा बनी रहे तो मनुष्य का जीना मुश्किल हो जाएगा जिन्हें दूसरों की थाली में घी ज्यादा दिखता है वे खुद कभी चैन से नहीं रह पाते। व्यक्ति को हमेशा वह चाहिए जो उसके पास नहीं है और वह मिल जाए तो नई महत्वाकांक्षा उसकी जगह ले लेती है इस तरह पूरा जीवन असंतोष में ही बीत जाता है। संतुष्टि ही जीवन का मूल मंत्र है अगर इंसान में संतोष है तो कोई दुख उसे तोड़ नहीं सकता यही है जीवन का रहस्य अहंकार की वजह से हम कितने रिश्तों से दूर हो जाते हैं। समय बड़ा बलवान होता है जो व्यक्ति को कभी मगरूर तो कभी मजबूर बना देता है मित्र यदि तुम्हारा समय बलवान है तो अहंकार से बचो यदि समय खराब है तो बुरी संगति से बचो। यह चार बातें मनुष्य को जीवन भर याद रखनी चाहिए वन त्याग के बिना मनुष्य का भाग्य नहीं बन सकता टू कुछ छोड़े बिना कुछ पाया नहीं जा सकता थ्री। जो देता नहीं वह लेने का भी अधिकारी नहीं फोर मनुष्य बिना बीज बोए फल खाने की आस में जीवन बर्बाद करता है कभी किसी के सामने अपनी सफाई पेश मत करना। क्योंकि जिसे तुम पर विश्वास है उसे सफाई की कोई जरूरत नहीं और जिसे तुम पर विश्वास नहीं है वह तुम्हें कभी समझेगा ही नहीं बुद्धिमान लोग चुप रहते हैं समझदार लोग बोलते रहते हैं और मूर्ख लोग हमेशा बहस करते रहते हैं। सपनों और लक्ष्य में एक ही अंतर है सपनों के लिए बिना मेहनत की नींद चाहिए और लक्ष्य के लिए बिना नींद की मेहनत सोच अच्छी होनी चाहिए क्योंकि नजर का इलाज तो संभव है लेकिन नजरिए का नहीं। आप स्वयं को अच्छा बना लीजिए दुनिया से एक बुरा इंसान स्वतः ही कम हो जाएगा साथ छोड़ने वाले को तो सिर्फ एक बहाना चाहिए वरना साथ निभाने वाले तो आखिरी सांस तक साथ नहीं छोड़ते। जिंदगी में एक बात जरूर याद रखना कोई हाथ से छीन कर जरूर ले जा सकता है लेकिन कोई भाग्य से छीन कर नहीं किसी को कुछ देकर घमंड मत कर क्या पता तू दे रहा है या पिछले जन्म का कर्ज चुका रहा है। घमंडी मनुष्य का वंश वैभव और प्रतिष्ठा तीनों ही चले जाते हैं विश्वास ना हो तो रावण कौरव और कंस को देख लो किसी पर विश्वास करना हो तो उसकी बातों पर नहीं उसकी हरकतों पर ध्यान दो। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं जो मनुष्य मुझे जान लेता है वह जन्म मरण के बंधनों से मुक्त हो जाता है जो मनुष्य भगवत गीता को पढ़कर उस पर अमल करता है उसके सारे दुष्कर्मों का प्रभाव समाप्त हो जाता है। जो भाग्य में है वह भाग कर आएगा और जो भाग्य में नहीं है वह आकर भी भाग जाएगा जैसे हवा के झोंके नाव को भटका देते हैं वैसे ही मनुष्य की इच्छाएं बुद्धि को भटका देती हैं। जो मनुष्य सुख और दुख में मान और अपमान में शांत रहता है वह मनुष्य मुझको अति प्रिय है अपनी परेशानी की वजह दूसरों को मानने से आपकी परेशानियां कभी कम नहीं हो सकती हैं। जब भी अचानक आपके प्रति किसी व्यक्ति का व्यवहार बदल जाए तो समझ लीजिए कि वह व्यक्ति आपसे कुछ चाहता है विज्ञान कहता है जीभ पर लगी चोट सबसे जल्दी ठीक होती है। लेकिन ज्ञान कहता है कि जीभ से लगी चोट कभी ठीक नहीं होती रात की मुट्ठी में एक सुबह भी है शर्त यह है कि पहले जी भर के अंधेरा तो देख लो याद रखिए सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है। इंसान दो वजह से बिल्कुल बदल जाता है या तो कोई खास उसकी जिंदगी में आ जाए या कोई बहुत खास उसकी जिंदगी से चला जाए दुनिया के चार स्थान कभी नहीं भरते। समुद्र शमशान तृष्णा का घड़ा और मनुष्य का मन समझदार व्यक्ति जब संबंध निभाना बंद कर देता है तो समझ लेना चाहिए कि उसके आत्मसम्मान को कहीं ना कहीं ठेस अवश्य पहुंची है। प्रेम सदैव माफी मांगना पसंद करता है और अहंकार सदैव माफी सुनना पसंद करता है भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कर्म ही तुम्हारी पहचान है वरना एक नाम के तो यहां हजारों इंसान हैं। अच्छे कर्म करने के बावजूद भी लोग केवल तुम्हारी बुरी बातें ही याद रखेंगे इसीलिए लोग क्या कहते हैं इस पर कभी ध्यान मत दो किसी को धोखा देना एक कर्ज है जो आपको किसी और के हाथों एक दिन जरूर मिलेगा। एक अच्छी नजर वही है जो सिर्फ अपनी कमियों और दूसरों के गुणों को तलाश करती है कभी उस व्यक्ति पर भरोसा मत करो जो वक्त के साथ स्वभाव बदल लेता है। लोग दर्पण कभी भी ना देखते अगर दर्पण में चित्र की जगह चरित्र दिखाई देता आप किसी की तारीफ कितनी भी कर सकते हो लेकिन अपमान हमेशा नापतोल कर करना। क्योंकि यह वह उधार है जो हर कोई ब्याज सहित चुकाने के लिए तैयार रहता है जिंदगी में हद से ज्यादा खुशी और हद से ज्यादा गम किसी को मत बताना। क्योंकि यह दुनिया हद से ज्यादा खुशी पर नजर और हद से ज्यादा गम पर नमक लगाती है जीवन में कभी किसी से अपनी तुलना मत करो तुम जैसे भी हो सर्वश्रेष्ठ हो इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। पहले वो जो छोटी सी मुसीबत आने पर डर जाते हैं घबरा जाते हैं और दुखी हो जाते हैं और दूसरे वे लोग चाहे उनकी जिंदगी में कितनी भी बड़ी मुश्किलें आ जाएं लेकिन वह हमेशा खुश रहते हैं हर मुसीबत में खुद को संभाल लेते हैं। एक वह होते हैं जिनके पास सब कुछ होता है लेकिन फिर भी हमेशा दुखी दिखते हैं और दूसरे वह जिनके पास चाहे कुछ भी ना हो लेकिन फिर भी वह प्रभु का नाम लेते हैं और हमेशा मुस्कुराते रहते हैं। सबको अपना जीवन बदलने के लिए समय मिलता है परंतु समय बदलने के लिए दोबारा जीवन नहीं मिलता श्री कृष्ण कहते हैं जो होने वाला है वह होकर रहता है और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता। ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता है उन्हें चिंता कभी नहीं सताती है हे अर्जुन तुम इस दुनिया में अकेले ही आए थे और अकेले ही जाओगे वास्तविकता में यहां कोई आपका अपना है ही नहीं। एक दिन जो मां-बाप हमें जन्म देते हैं वह भी हमें छोड़कर चले जाते हैं तो औरों से तो क्या उम्मीद करना और यदि कोई आपका साथ छोड़ दे तो याद रखना वह ईश्वर सदा आपके साथ है वह आपका साथ कभी नहीं छोड़ता। श्री कृष्ण कहते हैं चाहे कोई मनुष्य मुझे माने या ना माने लेकिन मैं उसका साथ कभी नहीं छोड़ता क्योंकि यह सब मेरी ही संताने हैं इसीलिए जो इंसान खुद को अकेला समझकर दुखी हो जाता है उसे अकेलेपन से डरने और दुखी होने की कोई जरूरत नहीं है। जीवन में जब भी कोई मुश्किल आए तो हिम्मत मत हारो बस थोड़ा धीरज रखो जो लोग मुश्किल वक्त में खुद को थोड़ा संभाल कर धीरज रख लेते हैं वे हर मुश्किल को आसानी से पार कर जाते हैं। लेकिन जो लोग मुश्किलों से डर जाते हैं उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं और जो लोग मुश्किल में अपनी हिम्मत को संभाल लेते हैं वे बड़ी से बड़ी मुश्किल को भी आसानी से पार कर जाते हैं। जीवन में सबसे बड़ी गलती वही होती है जिस गलती से हम कुछ सीख नहीं पाते हैं तुम आज जो भी काम कर रहे उसका फल तुम्हें कल प्राप्त होगा। और आज जो तुम्हारे पास है वह तुम्हारे द्वारा किए गए पिछले कर्मों का ही फल है भगवान श्री कृष्ण कहते हैं जो मनुष्य श्रद्धा भाव से मेरी भक्ति करता है। मैं उसे वही चीज देता हूं जो उसके पास नहीं है और जो उसके पास है मैं उसकी रक्षा भी करता हूं किससे कब और कितना बोलना है। अगर तुमने यह समझ लिया तो तुम अपनी जिंदगी के सार्थक बन चुके हो कान्हा कहते हैं जीवन में कभी मौका मिले तो किसी के लिए सारथी बनना स्वार्थी नहीं। धर्म से भरा हृदय धर्म का परामर्श देता है और अधर्म से भरा हृदय अधर्म का परामर्श देता है इंसान इसलिए दुखी नहीं है कि वह ईश्वर को नहीं मानता।

[29:27]इंसान इसलिए दुखी है क्योंकि वह ईश्वर की नहीं मानता समय आने पर सबको मिलता है समय से पहले की चाहत ही दुख का कारण बनती है वे मूर्ख हैं जो प्रेम को बकवास कहते हैं प्रेम इस संसार की मूल है और इसी से संसार बना है। रिश्तों में नियमित दूरियां रिश्तों को जोड़ती हैं और अनियमित दूरियां रिश्तों को तोड़ती हैं मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है जैसा वह विश्वास करता है वैसा ही वह बन जाता है। इस संसार में भाग्य से अधिक और समय से पहले ना किसी को मिला है और ना ही कभी मिलेगा जीवन में वाणी को संयम में रखना अनिवार्य है क्योंकि वाणी से दिए हुए घाव कभी भरे नहीं जा सकते। श्री कृष्ण कहते हैं धर्म के लिए लड़ना सीखो अधर्मी का काल बनना सीखो और अपनों के लिए त्याग करना सीखो सत्य हमेशा पानी पर तेल की एक बूंद के समान होता है। उस पर कितना भी असत्य का पानी डालो वह हमेशा ऊपर ही तैरता है उस व्यक्ति पर कभी विश्वास मत करना जो आपको दूसरों के राज बताता है। बुद्धि सबके पास है अब चालाकी दिखानी है या ईमानदारी यह तो हमारे संस्कारों पर निर्भर करता है लेकिन चालाकी चार दिन ही चमकती है और ईमानदारी जीवन भर चमकती रहती है। अपनी आर्थिक स्थिति को राज रखना चाहिए अगर आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी है तो लोग आपसे उधार मांगने लगेंगे और अगर आपकी आर्थिक स्थिति बुरी है तो लोग आपका सम्मान नहीं करेंगे और आपका साथ नहीं देंगे। इसलिए अपने सुख और दुख को अपने तक ही सीमित रखना चाहिए फलों से सीखें नमक लगने पर भी स्वाद बढ़ाते हैं और एक इंसान है जो मीठा खाने पर भी जहर ही उगलता है। अपने जीवन में कभी भी ना किसी को आनंद में वचन दो और ना क्रोध में उत्तर दो और ना ही दुख में कभी निर्णय लो कोई व्यक्ति चाहे लाख चीजें जान ले चाहे वह पूरे जगत को जान ले। लेकिन अगर वह स्वयं को नहीं जानता तो वह अज्ञानी है अगर कोई आपको ठुकरा दे तो बुरा मत मानना क्योंकि वे वास्तव में आपकी कीमत नहीं जानते हमेशा शांत रहें। इससे आप जीवन में खुद को बहुत मजबूत पाएंगे क्योंकि लोहा ठंडा होने पर ही मजबूत होता है मगर गर्म होने पर उसे किसी भी आकार में ढाला जा सकता है किसी विपत्ति के समय आपको यह सात गुण बचाएंगे। आपका ज्ञान आपकी विनम्रता आपकी बुद्धि आपके भीतर का साहस आपके अच्छे कर्म सच बोलने की आदत और ईश्वर में विश्वास मुश्किल समय में व्यक्ति अकेला हो जाता है। लेकिन मुश्किलों की वजह से वही व्यक्ति मजबूत हो जाता है भगवान पर विश्वास उस बच्चे की तरह करो जिसे हवा में उछालो तो वह हंसता है। वह डरता नहीं है क्योंकि वह जानता है कि आप उसे कभी गिरने नहीं देंगे कान्हा कहते हैं तू मन छोटा मत किया कर जहां तेरे अपने मुंह फेर लेंगे वहां मैं तुम्हारा साथ दूंगा।

[32:40]तू किसी के आगे इतना भी मत झुक कि वह तुम्हें गिरा हुआ समझने लग जाए लोग तुम्हारी कदर तभी करेंगे जब तुम उन्हें उन्हीं की तरह नजरअंदाज करना सीख जाओगे। जो रिश्ता हमें रुला दे उससे गहरा कोई रिश्ता नहीं होता और जो रिश्ता हमें रोता हुआ छोड़ दे उससे कमजोर कोई रिश्ता नहीं और बुरे वक्त में भी जो साथ निभाए उससे बड़ा कोई रिश्ता नहीं कान्हा कहते हैं। जो भावनाओं को समझे वह अपना और जो भावनाओं से परे हो वह पराया जो दूर रहकर भी पास हो वह अपना और जो पास रहकर भी दूर हो वह पराया। मनुष्य हमेशा अपने भाग्य को कोसता है यह जानते हुए कि भाग्य से भी ऊंचा उसका कर्म है जो स्वयं उसके हाथों में है एक समझदार व्यक्ति वही है जो दूसरों को देखकर उनकी विशेषताओं से सीखता है उनसे तुलना या ईर्ष्या नहीं करता इस दुनिया में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता। लाश को शमशान में रखकर अपने ही पूछते हैं और कितना वक्त लगेगा दुख आना भी जरूरी है तभी इनसे जिंदगी पूरी होती है खाली खुशी इंसान को मजबूत नहीं बनाती और ना ही जिंदगी के दोनों पहलुओं से रूबरू कराती है। दुनिया में केवल माता और पिता ही ऐसे इंसान हैं जो चाहते हैं कि आप उनसे भी ज्यादा कामयाब बने वक्त दोस्त और रिश्ते यह वह चीजें हैं जो हमें मुफ्त में मिलती हैं। मगर इनके बेशकीमती होने का एहसास हमें तब होता है जब यह कहीं खो जाते हैं जिंदगी में कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो हमें जीने नहीं देते और कुछ फर्ज ऐसे होते हैं जो हमें मरने नहीं देते। आप चाहे कितने भी अच्छे कर्म कर लो लेकिन आपकी तारीफ सिर्फ शमशान में ही होगी अगर आप किसी को एक बार माफ करते हैं तो आप समझदार हैं। अगर आप उस व्यक्ति को दूसरी बार भी माफ करते हैं तो आप बहुत नरम दिल हैं लेकिन अगर आप उस व्यक्ति को तीसरी बार भी माफ करते हैं तो आप दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख हैं। जीवन की सबसे महंगी चीज है आपका वर्तमान जो एक बार चला जाए तो फिर पूरी दुनिया की संपत्ति देकर भी उसे हम खरीद नहीं सकते ईश्वर से कुछ मांगने पर ना मिले तो उससे नाराज ना होना क्योंकि ईश्वर वह नहीं देता जो आपको अच्छा लगता बल्कि वह वही देता है जो आपके लिए अच्छा होता है। कान्हा कहते हैं जो व्यक्ति मृत्यु के समय मेरा स्मरण करते हुए अपना शरीर त्याग है वह मेरे परम धाम को प्राप्त होगा इसमें कोई संदेह नहीं है जो मनुष्य गीता के इस रहस्य को भक्तों को धारण करवाता है उनमें इसका विस्तार एवं प्रचार करता है वह मनुष्य मुझे अत्यधिक प्रिय है। इसीलिए दोस्तों आप भी इस गीता ज्ञान को दूसरों के साथ शेयर करके भगवान श्री कृष्ण के इस ज्ञान का प्रचार एवं प्रसार अवश्य करें जिससे आपको भी भगवान श्री कृष्ण की असीम कृपा प्राप्त हो सके। मित्रों आशा है आपको हमारा यह प्रयास अवश्य पसंद आया होगा आपसे अनुरोध है कि आप इस वीडियो को लाइक करें और अपने अधिक से अधिक परिजनों के साथ इसे शेयर करें।

[35:44]अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब करके घंटी को अल पर सेट कर लें और कमेंट बॉक्स में जय श्री राधे कृष्ण लिखकर परमात्मा को अपना आभार व्यक्त करना ना भूलें जय श्री राधे कृष्णा राधे राधे।

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