[0:00]वह औरत जोर-जोर से हंसने लगी। उसका मुंह खुला का खुला रह गया। हर दिन वह अपने खेतों में जाकर उस भरी गर्मी में कुएं से पानी की बाल्टियों खींच कर एक-एक पौधे को सींचना ही उसका रोज का काम था। वह एक पुरानी झोपड़ी में रहती थी और खेती के अलावा उसके पास कोई दूसरा काम नहीं था। कुछ दिनों बाद फसल बहुत अच्छी हुई और वह बहुत खुश थी। लेकिन तेज बारिश ने अगले ही दिन उसकी सारी फसल बर्बाद कर दी। वह टूट चुकी थी, मगर हार नहीं मानी। एक दिन जैसे रोज की तरह वह कुएं से पानी खींच रही थी। तभी उसकी बाल्टी में एक सोने जैसी चमकती हुई मछली दिखी। औरत उसे घर ले आई और एक तरफ रख दिया और थकी हुई सो जाती है। सुबह जब उसने देखा तो बाल्टी पूरी तरह सोने के अंडों से भरी थी। औरत बहुत खुश हो गई।
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