[0:04]Koo Koo TV एक गांव शिमला में एक लड़का रहता था। सूरी। सूरी के अब्बू की चाय की दुकान थी। वो सुबह उनकी मदद करता और फिर स्कूल चला जाता। स्कूल में सूरी से कोई ठीक से बात नहीं करता था। क्योंकि वो चाय बनाने वाले का बेटा है। वो सबसे बात करने की कोशिश करता है। दोस्तों के ग्रुप में शामिल होना चाहता है। लेकिन कोई भी उससे बात नहीं करता। और अगर वह बात करने की कोशिश भी करता तो सारे लोग उसका मजाक उड़ाने लगते। हे कोई मेरे साथ वीडियो गेम खेलेगा? हां, मैं खेलूंगा। अरे चाय बनाने के लिए नहीं गेम खेलने के लिए बुला रहा हूं। तो रहने दे। सूरी को बहुत बुरा लगता है। वो घर आते ही मुंह फुलाकर बैठ जाता है। सूरी के अब्बू यह देखते हैं और उसके लिए खाना लेकर आते हैं। अरे क्या हुआ सूरी? तू मायूस क्यों है आज? ले खाना खा ले। तुझे अच्छा लगेगा। ले। पापा, कोई और काम क्यों नहीं करते? आपको इतने सारे कामों में से यही काम मिला? चाय बनाने में क्या बुराई है? दिन में सबसे ज्यादा लोग इसी के बारे में सोचते हैं। नहीं, मेरे दोस्त तो मजाक उड़ाते हैं। मुझे अपने साथ खेलने में भी शामिल नहीं करते। बोलो कौन सा खेल खेलना है? अभी खेलते हैं। आपके साथ नहीं, उनके साथ खेलना है। यह कहकर वो वहां से चला जाता है। बिना खाना खाए। सूरी के अब्बू को यह देखकर बहुत बुरा लगता है। कि उनकी वजह से उनके बच्चे के दोस्त बहुत दूर जा रहे हैं। उसके पिताजी चाय बनाने के साथ दूसरा काम भी ढूंढने लगते हैं। वही स्कूल में बच्चों को ट्रिप पर ले जाने का प्रोग्राम बनता है। कुछ दिन बाद आप सभी बच्चों को एक जंगल ट्रिप पर ले जाया जाएगा। सभी बच्चे उसी तैयारी के साथ आएंगे। हम्म सारे बच्चे खुश हो जाते हैं। सूरी घर आकर यह बात अपने अब्बू को बताता है। पापा मुझे स्कूल की तरफ से जंगल के ट्रिप पे ले जाया जा रहा है। मुझे जरूरी सामान पैक करके दे दीजिएगा। अरे वाह! यह तो बहुत अच्छी बात है। अपने सामान में एक छोटा बर्तन जरूर लेकर जाना। वहां अगर कुछ पकाना हो तो काम आ सकता है। ठीक है? जी पापा, जरूर। और हां, तुम्हें एक और बात बतानी थी। मैं नई नौकरी ढूंढ रहा हूं। तुम्हें अब अपने दोस्तों के सामने शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा। और वह तुमसे बात भी करेंगे। सच पापा। हां। सूरी खुशी से पिताजी के गले लग जाता है। कुछ दिन बाद उस जंगल ट्रिप पर जाने का दिन आ जाता है। सब उस जंगल में पहुंचने के बाद ट्रैकिंग शुरू कर देते हैं। मैं सबको चार ग्रुप में बांटूगा, जिसमें एक लीडर भी होगा। वह सब एक साथ में रहेंगे और अपना काम करेंगे। सब अपने लीडर की बात मानेंगे, समझ गए ना। सब अपना बैग लेकर ट्रैकिंग शुरू करते हैं। अरे किस को लीडर बना दिया इसको तो? चाय के अलावा कुछ नहीं आता। सब हंसने लग जाते हैं। सूरी को बहुत बुरा लगता है। कुछ दूर चलने के बाद वो थक जाता है। चलो, यहां रुक जाते हैं। थोड़ा खा-पी भी लेते हैं। बाकी सभी मान जाते हैं और रुक जाते हैं। नहीं, हम नहीं रुक सकते। अगर हम रुके तो लेट हो जाएंगे और कुछ ही देर में अंधेरा भी होने वाला है। लो लीडर बना दिया तो अब हम पर हुकुम चला रहा है। हम्म नहीं, हम नहीं चलेंगे। तुझे जाना हो तो जा। हम थोड़ा नाश्ता करने के बाद ही ट्रैकिंग शुरू करेंगे। तो जा। सूरी के मना करने के बाद भी वह वहीं रुकते हैं। लेकिन फिर भी सूर्य उन्हें नहीं छोड़ता और उनके साथ वहीं रुक जाता है। कुछ ही देर में टीचर और बाकी के बच्चे आगे निकल जाते हैं। और वह वहीं रह जाते हैं। थोड़ी देर आराम और नाश्ता करने के बाद वह अपने ट्रैकिंग शुरू करते हैं। लेकिन जल्दी ही सूरज डूब जाता है और अंधेरा हो जाता है। अरे यह तो अंधेरा हो गया। अब तो रास्ता भी समझ में नहीं आ रहा। बाकी बच्चे भी डरने लग जाते हैं। कुछ ही वक्त में ऐसा मोड़ आ जाता है, जहां से रास्ता पता करना मुश्किल हो जाता है। और उन्हें वहीं ठहरना पड़ता है। अब तो मुझे भी रास्ता नहीं पता। मेरे ख्याल से हमें आवाज लगानी चाहिए। तुरंत ही वो चारों टीचर और अपने क्लास के विद्यार्थियों को आवाज लगाते हैं। लेकिन बात नहीं बनती। हम्म टीचर टीचर अरे कोई हमें सुन रहा है? हम खो गए हैं। कोई है? सब चिल्लाते हैं लेकिन कोई भी जवाब नहीं आता। लगता है हम बहुत पीछे रह गए हैं। हमें आगे का रास्ता नहीं पता। इसीलिए हमें यहीं रुक जाना चाहिए। हो सकता है अगर आगे गए तो रास्ता भटक जाएं। नहीं हमें कोशिश करनी चाहिए। क्या मालूम हम सही जगह पहुंच जाएं। रात बहुत हो चुकी है। जानवरों का भी डर है। टीचर थोड़ी देर में हमें खोजते हुए आ ही जाएंगे। हमें यहीं रुकना चाहिए। सबको उसकी बात ठीक लगती है और वह लोग वहीं रुक जाते हैं। कुछ ही देर में रात हो जाती है। और तेज ठंडी हवा बहने लगती है। और उनके पास बचा खाना भी खत्म होने लगता है। हा हा अब तो अब तो हमारा खाना भी खत्म हो जाएगा और पानी भी खत्म हो जाएगा। अब भी कहता हूं मैं हमें चलना चाहिए। अरे लेकिन जाएंगे कहां? रास्ता तो बंद है। मुझे तो बहुत डर लग रहा है। कहीं कोई जानवर ना हमें खा जाए। उह मुझे तो बहुत ठंड भी लग रही है। हां मुझे भी, मैं आग जलाता हूं। और सब लोग आग जलाते हैं। कुछ देर जलने के बाद आग कम होने लगती है। हम क्या करेंगे इतनी ठंड है। आग भी खत्म हो रही है। जानवर से नहीं तो ठंड से ठिठुरकर मर जाएंगे। सूरी कुछ सोचता है और कहता है। मेरे पास एक आइडिया है। मेरे पास बर्तन और चाय की पत्ती रखी हुई है बैग में। वो आग बुझने के बाद तक गरम रहेगी। तो हमें भी गरम रखेगी। सूरी तुरंत वह बर्तन निकालता है। और सब उसे अपना पानी दे देते हैं। लेकिन फिर भी पानी कम पड़ता है। वहीं पास में जमीन पर बर्फ पड़ी होती है। वो उसे उठा लेता है। जैसे ही काली चाय बनती है, आग खत्म हो जाती है। सबको बहुत अच्छा लगता है। उसे पीने के बाद सब तारीफ भी करते हैं। लेकिन अयन सिर्फ चुपचाप चाय पीता है। कुछ ही देर में उन्हें पत्तियों की आवाज आती है। और वो अपने पीछे की तरफ देखते हैं। वो देखते हैं कि उनके टीचर आ रहे हैं। सब राहत की सांस लेते हैं। कैंप में पहुंचने के बाद जब टीचर उनकी तारीफें करते हैं तो अयन कहता है कि वो महफूज उनके लीडर सूरी की वजह से है। यह सुनकर सूरी को बेहद खुशी होती है। सूरी की कहानी सुनकर सब उससे दोस्ती करने आते हैं। अगर आज सूरी को चाय बनानी नहीं आती तो शायद सब उसके दोस्त नहीं बनते। आज पहली बार उसे चाय वाला होने पर खुशी हो रही थी। अगले दिन वह खुशी-खुशी अपने पिताजी के पास गया। और उन्हें सारी बातें बता दी। अरे यह तो बहुत खुशी की बात है। एक बात तो मेरे पास भी है। मैंने अच्छी नौकरी ढूंढ ली है। सूरी यह सुनकर हैरान और उदास हो जाता है। नहीं पिताजी, आपको काम बदलने की कोई जरूरत नहीं है। आप जो भी काम करते हैं वह अच्छा ही होता है। और कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। यह मुझे अब समझ आ गया है। सूरी के पिता यह सुनकर खुश हो जाते हैं। और अगले दिन वह खुशी-खुशी अपने दुकान में अपने अब्बू की मदद करने लगा। और जैसे ही वह स्कूल पहुंचा तो सब उससे मिलकर उससे बातें करने लगे। और उसके साथ खेलने लगे। Koo Koo TV

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