[0:00]हां, मैं जानता हूं तूने सदा अपनों का भला ही चाहा। दिल से उन्हें अपना माना।
[0:11]तूने प्रेम किया... विश्वास किया... अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। पर एक दिन वही लोग तुझे अकेला छोड़ गए। जिसे तूने सबसे अधिक अपना माना, उसी ने तुझे अपमानित किया। तुझे नीचा दिखाया और तू उस कड़वे घूंट को भी पी गया। फिर तूने मुझसे पूछा- मैंने कभी किसी का बुरा नहीं किया। फिर तेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? जो तू देख रहा है वह पूरी कथा नहीं है। तू यह समझ ही नहीं पा रहा कि मैं तुझे कितनी बड़ी विपत्ति से पहले ही बाहर निकाल चुका हूं। जिसे तू अपना मान रहा था... शायद वही आगे चलकर तेरे जीवन को नर्क बना देता। कभी-कभी? मैं किसी को तेरे जीवन से दूर कर देता हूं। सजा देने के लिए नहीं तुझे बचाने के लिए। मेरा हाथ दिखाई नहीं देता पर मेरे निर्णय तेरे भाग्य की रक्षा करते हैं। तू जिसे खोना समझ रहा है... वो तेरी मुक्ति भी हो सकती है। जब मोह-माया की डोर बहुत कस जाती है, तब मैं स्वयं उसे तोड़ देता हूं। तू दुखी मत हो, जिसे मैंने दूर किया है, वो तेरे लिए कभी उचित नहीं था। विश्वास रख मैं तुझे खाली नहीं छोड़ता। मैं केवल गलत को हटाकर सही के लिए स्थान बनाता हूं। एक दिन तू पीछे मुड़कर देखेगा और समझ जाएगा... कि उस समय मेरा निर्णय ही वही तेरे लिए सबसे बड़ा वरदान था। और मैं तेरे साथ हूं - हर उस पल में, जब तू खुद को अकेला समझता है।



