[0:00]एक बाप ने अपने बेटे से कहा है कि बेटा मन लगा के पढ़ाई करो इस बार टॉप करना है तुमको। बेटा बोला जी पिताजी जैसे ही आप मुझे एक स्पोर्ट्स बाइक दिला देंगे मैं वैसे ही मन लगाकर पढ़ाई शुरू कर दूंगा। बाप बोला भाई पढ़ाई करने से इस स्पोर्ट्स बाइक का क्या लेना देना है। बेटा बोला मैं समझ गया आप नहीं चाहते कि मैं मन लगाकर पढ़ाई करूं और अब कल से वह नालायक बेटा पूरे मोहल्ले में गला फाड़-फाड़ कर गाता फिर रहा है कि उसका बाप शिक्षा विरोधी है। ठीक यही काम इस देश में नरेंद्र मोदी कर रहा है वह भी सरकारी खर्चे पर। और इस गला फाड़ने को उसने बहुत खूबसूरत नाम भी दे दिया है देश के नाम संबोधन। प्रधानमंत्री को यह विशेष अधिकार होता है कि वह जब चाहे राष्ट्र को संबोधित कर सकता है लेकिन यह संबोधन राष्ट्र से जुड़े किसी संकट किसी उपलब्धि या किसी आपदा पर होता है। यह पहली बार हुआ है इतिहास में कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन के नाम पर ऑपोजिशन पार्टियों को गालियां देने के लिए इस विशेष अधिकार का दुरुपयोग किया है। टेलीप्रॉम्पटर लगाकर अगर विपक्ष को कोसना ही था तो डायरेक्ट खड़गे अखिलेश यादव स्टालिन को ही फोन करके गाली दे लेते। देश के करोड़ों रुपए क्यों फूंके। लेकिन इरादा तो चुनावी भाषण देना था वह भी सरकारी खर्चे पर। मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट की वजह से चुनावी भाषण तो दे नहीं सकते थे तो आपने इस विशेष अधिकार का दुरुपयोग किया। और अगर ऑपोजिशन को कोसना भी था इसमें तो कम से कम थोड़ी फैक्चर बातें तो कर लेता। पूरा भाषण एक झूठ का पुलिंदा था बिना सिर पैर की बातें थी और अनर्गल छाती पीटना था। ठीक है आपके बिल गिर जाने से आपको गहरा सदमा लगा है लेकिन इस कदर पागलपन भी कितना ठीक है। महिलाओं को आरक्षण देना तो आपकी मंशा कभी थी ही नहीं क्योंकि महिलाओं को आरक्षण देने का बिल तो 20 सितंबर 2023 को ही पास हो चुका था। ना देश का संविधान कहता है और ना ही संसदीय कार्यप्रणाली कहती है कि किसी भी पहले से पास बिल को फिर से पास कराना पड़े। असल में यह पूरा अडंबर आपने चल रहे चुनावों में बीजेपी के लिए बिसात बिछाने के लिए रचा है। अगर महिलाओं की इतनी ही चिंता थी तो सबसे पहले अंकिता भंडारी को न्याय दिलवाओ। अपनी पार्टी के उस वीआईपी को पकड़वाओ। आपने झूठ बोला है प्रधानमंत्री आपके गृहमंत्री ने झूठ बोला है आप एक पथोजेनेसिस आपकी मंशा महिलाओं को अधिकार देने की नहीं बल्कि आपकी मंशा तो महिलाओं को आरक्षण देने के नाम पर उनको बरगला के उनको बहला के बस उनका वोट हासिल कर लेना है। और आपके लिए एक बुरी खबर है कि इस देश की महिलाएं यह सब समझ चुकी हैं। आपकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और कितनी शुभ बात है कितनी सटीक बात है कि आपके इन अडंबरों का अंत महिलाओं से ही शुरू होना चाहिए था। जय हिंद।

Women’s Reservation: Empowerment or Election Stunt?
Vipin Saroha
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