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99% लोग सुबह ये गलती करते हैं | 5 Morning Habits That Change Your Life (Science Based)

Sharp Mastery

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[0:00]एक कड़वा सच सुनो अगर तुम्हारी सुबह तुम्हारे कंट्रोल में नहीं है तो तुम्हारी लाइफ भी तुम्हारे कंट्रोल में नहीं है। तुम खुद को लाख बार समझाओ, मोटिवेशनल वीडियोस देखो, रूटीन सेव करो। लेकिन अगर अलार्म बजने के बाद भी तुम बिस्तर में पड़े रहते हो और उठते ही फोन पकड़ लेते हो, तो तुम हर दिन खुद को एवरेज बनने की ट्रेनिंग दे रहे हो। याद रखो, जिंदगी एक दिन में खराब नहीं होती। वह हर सुबह थोड़ा-थोड़ा करके फिसलती जाती है। और सबसे बुरी बात ज्यादातर लोगों को यह बात पता भी नहीं होती। सच तो यह है कि ज्यादातर लोग फेल इसलिए नहीं होते क्योंकि वह वीक है बल्कि इसलिए क्योंकि उनकी मॉर्निंग रूटीन वीक होती है। मैं तुम्हें पांच ऐसी मॉर्निंग हैबिट्स बताऊंगा जो तुम्हारे फोकस, कॉन्फिडेंस और सेल्फ रिस्पेक्ट को पूरी तरह रिसेट कर देंगी और पूरे दिन को तुम्हारे कंट्रोल में ले आएंगी। लेकिन ध्यान से सुनो फिफ्थ वाली सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट है इसलिए उसे बिल्कुल भी मिस मत करना। नंबर वन एक ही टाइम पर उठो। एक फिक्स्ड वेकअप टाइम बनाओ और उसे अपना नियम बना लो। ऑप्शन नहीं। हर रोज उसी टाइम पर उठो। मैटर नहीं करता कि तुम लेट सोए हो, मैटर नहीं करता कि तुम थके हुए हो। अलार्म बजा और तुम उठ गए बस कोई सोचने का टाइम नहीं, कोई स्नूज नहीं, क्योंकि जिस पल तुम स्नूज दबाते हो, उसी पल तुम अपने दिमाग को सिखाते हो कि डिसिप्लिन ऑप्शनल है। और दिमाग पैटर्न बहुत जल्दी सीखता है। अगर तुम बार-बार खुद को परमिशन देते हो तो धीरे-धीरे तुम्हारा ब्रेन हर मुश्किल काम से बचने की आदत बना लेता है। लेकिन जब तुम रोज एक ही टाइम पर उठते हो तुम्हारी बॉडी उसी हिसाब से एडजस्ट हो जाती है। रात को नींद जल्दी आने लगती है और तुम्हारा सरकेडियन रिदम खुद रिसेट होने लगता है। एक बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह रात को ठीक करने की कोशिश करते हैं। लेकिन असली कंट्रोल रात से नहीं सुबह से शुरू होता है। अपना वेकअप टाइम फिक्स करो सुबह को कंट्रोल करो और देखना धीरे-धीरे तुम्हारी पूरी लाइफ उसी रिदम में आ जाएगी। क्योंकि सच्चाई यही है कि डिसिप्लिन की शुरुआत अलार्म बजने के बाद के पहले 10 सेकंड में होती है। नंबर टू उठते ही अपने बॉडी को एक्टिवेट करो। जैसे ही तुम उठो सबसे पहले एक फुल ग्लास पानी पियो। पूरी रात सोने के बाद तुम्हारी बॉडी हल्की डिहाइड्रेट हो जाती है और पानी तुम्हारे सिस्टम को तुरंत एक्टिवेट करता है। लेकिन एक बहुत बड़ा रूल याद रखो बेड पर मत रुको। फोन मत उठाओ। रील्स मत स्क्रॉल करो क्योंकि अगर तुम्हारी सुबह स्क्रीन से शुरू होती है तो तुम्हारा दिमाग पूरे दिन रिएक्टिव मोड में चला जाता है। इसके बजाय तुरंत अपनी बॉडी को मूव करो। सबसे अच्छा तरीका है हल्की रनिंग या फास्ट वॉक। रनिंग तुम्हारी हार्ट रेट बढ़ाती है, ब्लड फ्लो तेज करती है और तुम्हारे ब्रेन में ऑक्सीजन पहुंचाती है जिससे तुम्हारा माइंड ज्यादा अलर्ट और फोकस्ड हो जाता है। शुरुआत में ज्यादा मत सोचो। 5 मिनट दौड़ो। 10 मिनट दौड़ो जितना हो सके उतना करो। उसके बाद कुछ बेसिक एक्सरसाइज ऐड करो जैसे पुश अपस, स्क्वाट्स, स्ट्रेचिंग। सिर्फ 20 से 30 मिनट की मूवमेंट भी तुम्हारी पूरी एनर्जी बदल सकती है। क्योंकि जब तुम सुबह अपने बॉडी को एक्टिव करते हो तो तुम्हारा दिमाग एक सिग्नल लेता है। आज का दिन कंट्रोल में है। इसीलिए ज्यादातर हाई परफॉर्मेंस लोग अपने दिन की शुरुआत मूवमेंट से करते हैं मोटिवेशन से नहीं। क्योंकि जो लोग सुबह अपने शरीर को कंट्रोल कर लेते हैं, वह पूरे दिन अपने दिमाग को भी कंट्रोल में रख पाते हैं। नंबर थ्री अपने दिमाग को सही फ्यूल दो। फिजिकल मूवमेंट के बाद तुम्हारी बॉडी पूरी तरह एक्टिव हो चुकी है। अब सवाल यह है तुम उसे क्या फीड कर रहे हो? ज्यादातर लोग यहीं गलती करते हैं। सुबह उठकर चाय, बिस्किट, मीठा या पैकेग्ड फूड खा लेते हैं और फिर कहते हैं कि दिन भर फोकस क्यों नहीं रहता। याद रखो, तुम्हारा ब्रेन उसी फ्यूल पर चलता है जो तुम सुबह उसे देते हो। इसलिए अपना ब्रेकफास्ट सिंपल और क्लीन रखो। हाई प्रोटीन और रियल फूड खाओ जैसे फ्रूट्स, वेजिटेबल्स, ओट्स या कोई भी नेचुरल फूड। एक और इंपोर्टेंट रूल जहां तक हो सके अपना ब्रेकफास्ट खुद तैयार करो। क्योंकि जब तुम अपना खाना खुद बनाते हो तो तुम सिर्फ खाना नहीं बना रहे होते। तुम अपने लाइफस्टाइल पर कंट्रोल लेना सीख रहे होते हो। बाहर का और पैकेग्ड फूड आसान जरूर लगता है। लेकिन वह धीरे-धीरे तुम्हें केयरलेस बना देता है। घर का सिंपल खाना तुम्हें डिसिप्लिन्ड रखता है। और याद रखो ब्रेकफास्ट सिर्फ टेस्ट के लिए नहीं खाया जाता। ब्रेकफास्ट तुम्हारे दिमाग को दिन भर फोकस और एनर्जी देने के लिए खाया जाता है। तो सुबह पेट भरने के लिए मत खाओ। परफॉर्म करने के लिए खाओ। नंबर फोर सबसे मुश्किल काम सबसे पहले करो। मूवमेंट और हेल्दी ब्रेकफास्ट के बाद तुम्हारा दिमाग अपनी पीक फोकस स्टेट में होता है। यही वह टाइम है जब ज्यादातर लोग सबसे बड़ी गलती करते हैं। वो इस गोल्डन टाइम को फोन, मैसेज या छोटे-छोटे कामों में बर्बाद कर देते हैं। लेकिन डिसिप्लिन्ड वाले लोग एक अलग रूल फॉलो करते हैं। सबसे मुश्किल काम सबसे पहले करते हैं। जिस काम को तुम सबसे ज्यादा टालते हो जिसे सोचकर तुम्हारा दिमाग बचने की कोशिश करता है, उसी काम से दिन की स्टार्टिंग में करो। एक सिंपल रूल बना लो। अपना सबसे इंपोर्टेंट टास्क 11:00 बजे से पहले खत्म करना है। इस दौरान कोई फोन नहीं, कोई सोशल मीडिया नहीं, कोई मल्टीटास्किंग नहीं। एक टाइम पर सिर्फ एक काम। अगर तुम स्टूडेंट हो तो सुबह का यह टाइम डीप स्टडी के लिए यूज करो। सबसे डिफिकल्ट सब्जेक्ट, सबसे वीक टॉपिक और ऐसे कॉन्सेप्ट जिनमें असली सोच और फोकस चाहिए। 60 मिनट का डीप फोकस सेशन भी काफी है। याद रखो, आसान काम पहले करने से तुम्हें बस बिजी होने का फील होता है। लेकिन हार्ड काम पहले करने से तुम्हें असली प्रोग्रेस मिलती है। और जब दिन की शुरुआत में ही सबसे मुश्किल काम खत्म हो जाता है तो पूरा दिन हल्का लगने लगता है। क्योंकि सच यह है जो लोग सुबह अपने सबसे बड़े टास्क जीत लेते हैं वही अपने दिन को भी जीत लेते हैं। नंबर फाइव अपने दिन का ब्लूप्रिंट बनाओ। सुबह का आखिरी काम अपने पूरे दिन का ब्लूप्रिंट बनाना। सिर्फ 10 मिनट लो और एक पेपर पर लिखो कि आज क्या-क्या करना है। लेकिन सिर्फ लिस्ट मत बनाओ। प्रायोरिटी सेट करो। सबसे जरूरी काम ऊपर लिखो, कम जरूरी काम नीचे। एक सिंपल रूल फॉलो करो रूल ऑफ थ्री। पूरे दिन में तीन सबसे इंपोर्टेंट काम चुनो जो आज हर हालत में पूरे होने चाहिए। बाकी सब सेकेंडरी है क्योंकि जब तुम्हारे पास क्लियर प्रायोरिटी होती है तो तुम्हारा दिमाग कंफ्यूजन में एनर्जी वेस्ट नहीं करता है। और एक बात याद रखो, अगर तुम अपने दिन को प्लान नहीं करते तो दुनिया तुम्हारे लिए प्लान कर देती है। नोटिफिकेशंस तुम्हें खींच लेंगे, लोग तुम्हारा टाइम ले लेंगे और शाम तक तुम्हें लगेगा कि पूरा दिन ऐसे ही निकल गया, लेकिन कुछ खास हुआ ही नहीं। यही फर्क है रिएक्टिव और प्रोएक्टिव लाइफ में। जो लोग सुबह अपने दिन को डिजाइन करते हैं, वह दिन को कंट्रोल करते हैं और जो प्लान नहीं करते वो बस पूरे दिन हालात के हिसाब से रिएक्ट करते रहते हैं। तुम्हें किसी फैंसी ऐप या प्लानर की जरूरत नहीं है बस एक प्लेन पेपर और एक पेन काफी है। लिखो फॉलो करो और रात में चेक करो क्या पूरा हुआ क्या नहीं। धीरे-धीरे यह छोटी सी आदत तुम्हारी लाइफ में क्लेरिटी, कंट्रोल और स्ट्रक्चर ले आएगी। अब एक बात ध्यान से सुनो। यह हैबिट्स मुश्किल नहीं है, लेकिन यह तभी काम करती हैं जब तुम इन्हें डेली फॉलो करते हो। क्योंकि सच यह है तुम्हारी जिंदगी बड़े-बड़े फैसलों से नहीं बदलती। वो उन छोटे फैसलों से बदलती है जो तुम हर सुबह लेते हो। जब अलार्म बजता है और तुम उठने का फैसला करते हो, जब फोन की जगह तुम अपने दिन को चुनते हो, यहीं से फर्क शुरू होता है। तुम्हारी सुबह तुम्हारी डिसिप्लिन बनाती है और तुम्हारी डिसिप्लिन तुम्हारी पूरी लाइफ का डायरेक्शन तय करती है। यह परफेक्ट होने के बारे में नहीं है। यह कंसिस्टेंट होने के बारे में है। इट्स नॉट अबाउट बीइंग परफेक्ट इट्स अबाउट बीइंग कंसिस्टेंट। क्योंकि जब तुम अपनी सुबह को कंट्रोल करना सीख जाते हो तो धीरे तुम्हारे दिन और तुम्हारी जिंदगी भी ट्रैक में आने लगती है। इसलिए किसी परफेक्ट दिन का इंतजार मत करो। बस एक डिसीजन लो। कल सुबह जब अलार्म बजेगा तो तुम उठोगे क्योंकि कभी-कभी जिंदगी बदलने के लिए बस एक मॉर्निंग डिसीजन ही काफी होता है। तुम्हारी जिंदगी बड़े फैसलों से नहीं बदलती। वह तब बदलती है जब अलार्म बजता है और तुम तय करते हो कि तुम वही या नया इंसान बनोगे। फर्क सिर्फ 10 सेकंड का है। अगर तुम सच में अपनी लाइफ बदलना चाहते हो तो कल से इस रूटीन को फॉलो करना शुरू करो और चैनल को अभी सब्सक्राइब करो।

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