[0:00]कहानी शुरू होती है 2022 के सितंबर महीने में। तीन दोस्त रोहन, अंकित और पियूष एक बजट ट्रिप पर निकलते हैं। तीनों कॉलेज के दोस्त हैं और एडवेंचर के दीवाने। उन्होंने प्लान बनाया था वाराणसी जाने का। मगर वाराणसी के आस पास एक ऑफबीट लोकेशन ढूंढने के चक्कर में, उनका ध्यान गया एक छोटी सी जगह पर जिसका नाम होता है काली घाटी। यह घाटी वाराणसी के 60-70 किलोमीटर दूर ही है। एक ऐसी जगह जिसके बारे में शायद बहुत सारे लोगों ने सुना है, काली घाटी। काली घाटी, काली घाटी एक बहुत बड़ी जगह है। ठीक है। तो एक ऐसी जगह जाते हैं जहां पर कुछ तो अजीब सा था। मतलब वहां के लोग उनको वहां की कहानियां सुनाते हैं। जिनमें से एक कहानी होती है जो बड़ी फैसिनेटिंग होती है, जो इन तीनों को अपनी तरफ अट्रैक्ट करती है। यह कहानी थी एक ऐसे, एक ऐसे अघोरी की जिसकी आत्मा आज भी वहां पर भटक रही है। लोगों का बताना था कि वहां पर एक पुराना अघोरी का आश्रम है। जहां अब कोई नहीं जाता। अगर गूगल में आप कहीं पे भी सर्च करोगे तो इस बारे में किसी को भी कुछ भी नहीं मिलेगा। और इन तीनों को जब वहां के एक दो नहीं बल्कि कई लोकल्स ने यही सेम चीजें बताई, तो इनका तो भाई दिमाग घूम गया। इन्होंने कहा अब जाना है तो यहीं जाना है। रोहन जो कि इन सब में सबसे ज्यादा एडवेंचरस था। उसने कहा मजा तो वहीं जाने में आता है जहां पर कोई नहीं जाता। और अब यह तीनों निकल पड़ते हैं वो आश्रम ढूंढने। इन्हें आते-जाते जो लोकल मिल रहा था उनसे उसी आश्रम के बारे में पूछे जा रहे हैं। और जिस भी लोकल से पूछ रहे थे सबका मतलब दिमाग ऐसा हो रहा था कि भाई यह पागल लोग है क्या? यह वहां क्यों जाना चाहते हैं? वह उन्हें बताते भी है, बोलते भी है कि वहां मत जाओ बेटा वहां कुछ नहीं रखा, वहां मत जाओ। कोई वहां की असलियत बता देता है कि वहां पर एक आत्मा है, अघोरी की आत्मा है ऐसा-ऐसा। कोई नहीं बताता नहीं है बोलता है वहां ऐसा कुछ है ही नहीं, घूमने लायक क्या है, क्या करोगे वहां जाकर? उससे अच्छा वहां चले जाओ, यहां चले जाओ ऐसे-ऐसे बात घुमा देते हैं। बट इन तीनों को जाना तो एक ही जगह था। उस अघोरी के आश्रम में। ऐसे चलते हुए इन्हें एक बूढ़ी दादी मिलती है। यह उन दादी को रोककर उसी आश्रम का रास्ता पूछते हैं। दादी उन सब से बोलती है कि बेटा वहां मत जाओ। वहां अभी भी रक्तक अघोरी की आत्मा भटकती है। रक्तक उस अघोरी का नाम था। आगे वह बूढ़ी दादी बताती है कि वो आत्मा किसी को मारती नहीं है पर किसी को चैन से जीने भी नहीं देती। अंकित दादी से वापस ना पूछता है कि रक्तक, यह कैसा नाम हुआ? जो पियूष होता है वो आगे पूछता है कि दादी जी यह ऐसा क्या था इसमें कि इतना खौफ इसका? दादी जी बताती है कि यह आदमी सौ में से एक था। इसकी तंत्र विद्या में इतना माहिर कि कोई भी इसके टक्कर का ना हो। और यह यह आदमी खुद को पावरफुल बनाने के चक्कर में इस कदर डूब चुका था कि इसने खुद का ही विनाश कर दिया। आज भी इसके आश्रम में जो इसने तंत्र कर रहे थे उसके निशान पाए जाते हैं। और यह सुनकर पियूष हंसने लग जाता है और बोलता है दादी जी क्या आप भी सारी चीजें यह सब ऐसा कुछ नहीं होता। और आप जो यह सब कह रहे हो कि उसके आश्रम में निशान मिलेंगे तब तो यह और ज्यादा मतलब इंटरेस्टिंग लग रहा था। तो वहां जाना ही पड़ेगा। दादी जी समझ गई थी कि इन तीनों को वहां जाने से कोई नहीं रोक सकता। यह आए ही इस मकसद से है कि वहां पर जा पाए। वह कुछ देर के लिए शांत होती है और फिर उन तीनों को बोलती है कि देखो चाहे तो चले जाओ पर कुछ चीजें मैं तुम्हें बता देती हूं उनको हमेशा ध्यान में रखना। मंदिर के अंदर कभी भी सूरज डूबने के बाद मत जाना। जो भी मिले उसे आंख में आंख डालकर मत देखना। अगर कोई तुमसे तुम्हारा नाम पूछे तो झूठ बोलना। वह बातें जब दादी जी बता रही थी तो वह बहुत सीरियस थी। दो मिनट के लिए तो इन तीनों को भी डर लग गया था। इसके बाद यह तीनों दादी को ऐसे ही झूठ बोल देते हैं कि अरे दादी आप टेंशन मत लो हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे नहीं जाएंगे वहां हम तो ऐसे ही मजे ले रहे हैं यह वह यह वह करके वहां से निकल पड़ते हैं। जंगल के बीच एक रास्ता था जहां से 2 घंटे की ट्रैकिंग के बाद उन्हें एक पत्थर से बने हुए आश्रम का दरवाजा दिखाई देता है। यह लोग उस आश्रम को बड़े गौर से देखते हैं। उस आश्रम की वाइब बहुत अलग थी इस दुनिया से ही अलग। तीनों ने एक्सप्लोर करना शुरू किया। गुफा के अंदर उन्हें एक हवन कुंड दिखाई दिया। अब यह उस गुफा के अंदर जाते हैं तो वहां पे इन्हें कुछ ऐसी चीजें मिलती है जो हवन में यूज करी जाती है। जैसे कुछ लकड़ियां, कुछ राख, कुछ अजीब-अजीब चीजें। और यह जो राख थी ना इसे छू के ऐसा लग रहा था जैसे अभी भी गर्म है। मतलब कि जैसे अभी-अभी यह राख निकली हो लकड़ी से और इस राख को उस गुफा में डालते हो या फिर उसी गुफा में लकड़ी जलाई हो और वह उसी की राख हो। इन तीनों को ऐसा लगता है जैसे कि मानों यह अभी-अभी यूज करी गई है। अब जो पियूष वहां पर होता है वह वहीं पर बगल में पड़ी हुई एक छोटी सी मिट्टी की पुतली उठाता है। वह मिट्टी की पुतली थोड़ी इंसान टाइप ही बनी थी और ऐसा लग रहा था जैसे उसका जो सर था मिट्टी की पुतली का वह किसी इंसान का सर था। लेकिन आंखों का स्पेस खाली था। मतलब कि उस पुतली में आइब्रोज बनी हुई थी, नाक बना था, कान सब बने थे लेकिन आंखें नहीं बनी थी। अब अंधेरा होने लगा था और इन तीनों को एक ऐसी जगह ढूंढनी थी जहां पर यह अपना टेंट लगा सके। अब यह तीनों सोचते हैं कि यहां पर तो यार लग नहीं रहा कहीं सेफ सी जगह थोड़ा नीचे चलते हैं और वहां देखते हैं कुछ अच्छा मिल जाए। तीनों जाने ही वाले थे कि तभी रोहन बोलता है कि एक बार फिर से आश्रम को अच्छे से देख लें। मतलब अभी तक तो हमें ऐसा कुछ दिखा नहीं जितना लोग इतना हाइप अप कर रहे थे यू नो वहां जाओ मत यह होता है वो होता है हमें तो कुछ भी नहीं दिखा ऐसा। एक बार फिर अंदर चलते हैं कुछ निशान दादी बता भी रही थी ना कि अंदर वो रिचुअल्स एंड ऑल के निशान भी दिखेंगे। वो भी देख लेते हैं। तो ये तीनों चल पड़ते हैं सीधा आश्रम के अंदर। चलते-चलते पियूष थोड़ा डर भी रहा था। वह कह रहा था कि यार देख दादी ने कहा था यार सूरज डूबने के बाद आश्रम के अंदर नहीं जाने को। लेकिन वहां दूसरा जो रोहन होता है वह बोलता है कि अबे चलना यार 10 मिनट की तो बात है कुछ नहीं होता चल। और ऐसे ही एक दूसरे से आर्गुमेंट करते-करते यह तीनों आश्रम के अंदर एंटर कर चुके थे। अब तीनों उस आश्रम के अंदर है। अंदर एक बड़ी सी शिवलिंग की मूर्ति थी। और शिवलिंग के जो रंग था वह काफी लाल सा था। जैसे उस मूर्ति के ऊपर किसी ने खून डाला हो। उसी वक्त अचानक से हवा तेज चलने लगती है। आश्रम के दरवाजे एकदम से बंद हो जाते हैं। और एकदम से चारों तरफ सन्नाटा फैल जाता है। और उसी सन्नाटे में एक तेज आवाज गूंजती है। जो की थी कि कौन आया है मेरे स्थल में? रोहन अपनी टॉर्च से लाइट ऑन करता है और आगे उन्हें कुछ धुंधला सा दिखता है। मतलब व्हाइट कलर का स्मोक टाइप होता है और ऐसा लगता है कि वह किसी इंसान है बट बट वह समझ नहीं आ रहा था कि कोई इंसान है इंसान की परछाई है वह क्या है? लेकिन ऐसा धुआं सा था। यह तीनों उसे देखते हैं और थोड़ा सा इन्हें भी अजीब लगता है। वो धुआं एकदम से गायब हो जाता है। अब यह तीनों बोलते हैं कि यार चलो भाई यह कुछ तो गलत है यहां पर और हो गया जितना देखना था देख लिया। तीनों मुड़ते हैं और आश्रम का जो मेन गेट होता है उसे खोलने की कोशिश कर रहे हैं बट ऐसा लग रहा है कि वो गेट खुल ही नहीं रहा जैसे कि मानो बाहर से किसी ने कुंडली लगा दी हो। यह तीनों ऐसे पूछ ही रहे हैं कि पीछे से एक और आवाज आती है कि मतलब वो आवाज जो थी वो इनसे इनका नाम पूछ रही थी। तीनों अपना नाम बताना शुरू करते हैं। तीनों पीछे मुड़ के देख ही नहीं रहे क्योंकि दादी ने बोला था आंखों में आंख मत डालना और इनकी हिम्मत भी नहीं हो रही थी कि पीछे मुड़ के देख सके। ये गेट को खोलने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे ही गेट की तरफ देखते हुए अपना नाम भी बताते हैं। रोहन बोलता है कि मेरा नाम श्याम है। पियूष बोलता है मेरा नाम रमेश है। और अंकित। अंकित ने अपना असली नाम बता दिया। अंकित बोलता है कि मेरा नाम अंकित है। जो अभी तक आवाज गूंज रही थी वो एकदम से शांत हो चुकी थी। सब कुछ नॉर्मल लग रहा था पर अंकित वो थोड़ा अजीब लग रहा था। जहां अभी तक उसके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। वहां अब वह एकदम नॉर्मल था। जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। कुछ देर बाद यह तीनों वह दरवाजा खोलकर वहां से चले जाते हैं। एक अच्छी सी जगह ढूंढते हैं टेंट लगाते हैं और वहां पर बैठ जाते हैं। पूरी रात थोड़े से डर में थे बट सुबह होते-होते इनका डर चला गया था। इन्हें लगता है कि ऐसे कोई मजाक कर रहा होगा कोई वहां आदमी आ गया होगा और बहुत से इन्होंने ऐसे किस्से सुने हैं जहां लोग हाइप अप करते हैं कि भाई यह यह इंसान यहां मत जाना वहां मत जाना वहां जाते हैं तो वो प्रैंक कर रहे होते हैं। मतलब लोग वहां पर खुद ही यह सारी चीजें क्रिएट करते हैं और वहां इन सब लोगों से मजे लेते हैं। तो ऐसे भी इन्हें लग रहा था कि ऐसा भी हो सकता है। अब ऐसे ही सुबह हो जाती है। तीनों इस समय चुप थे। अंकित थोड़ा सा बदला-बदला सा लग रहा था। ना ज्यादा बात कर रहा था ना हंस रहा था। उसकी आंखें कभी-कभी ब्लैक भी हो जा रही थी। पियूष ने अंकित को देखकर बोला भाई तू ठीक है ना। अंकित सिर्फ मुस्कुराता है और बोलता है कि मैं बिल्कुल ठीक हूं। अब मैं अब मैं भी उसे समझ चुका हूं। रोहन और पियूष कंफ्यूज थे। शाम को उन्होंने डिसाइड किया कि वापस निकलते हैं पर रास्ता वापस मिल ही नहीं रहा था। यह लोग उन्हें डिसाइड किया कि यह रुकेंगे पर आश्रम से दूर। अब यह तीनों वहीं पर थे। थोड़ा सा बोलते हैं कि यार चलो अब निकलने का टाइम हो रहा है। निकलते हैं कहीं और घूमते हैं। यह देख लिया आश्रम अपने अंदर का भी जो देखने का भूत था वो भी उतर चुका है। ठीक है तीनों निकलने के लिए तैयार हो रहे हैं कि देखते ही देखते अब ये दोनों रोहन और पियूष अपने में ही कहीं कंफ्यूजड है। मतलब पियूष नहाने चला गया है। जो रोहन है वो अपना काम कर रहा है और दोनों का ध्यान अंकित पे है ही नहीं। और जब इनका अंकित पर ध्यान जाता है तो यह देखते हैं कि अंकित कहीं गायब हो चुका है। वह टेंट में था ही नहीं। अब यह दोनों अंकित को आगे पीछे हर जगह ढूंढते हैं। उसे पुकारते हैं जब अंकित का कहीं से भी कुछ भी आंसर नहीं आता तो यह वापस उस आश्रम के पास पहुंच जाते हैं कि हो ना हो अंकित वहीं गया होगा। ऊपर ही गया होगा नीचे तो इतने आराम से जा नहीं सकता और नीचे साइड इन्होंने ढूंढ भी लिया था जितना उन्हें लग रहा था कि अंकित जा सकता था। वे आश्रम के पास पहुंच जाते हैं। आश्रम के भी आस पास हर जगह ढूंढने के बाद भी इन्हें अंकित कहीं नहीं मिलता। जिसके बाद अब यह दोनों बहुत ज्यादा घबरा जाते हैं। क्योंकि इनका दिमाग वो भूत, आश्रम, तांत्रिक वहां तक था ही नहीं। मतलब ये एक घाटी में है। मतलब समझ रहे हो आप एक पहाड़ है यहां पर यह टेंट लगाए बैठे हुए हैं। जहां पर जानवरों का खतरा होता है। यहां पर खतरा होता है अगर आप कहीं चल रहे हो पैर फिसला सीधा नीचे। तो बहुत सारी चीजें होती है जो यहां पर मतलब आपको ध्यान में रखनी पड़ती है और इनको सबसे ज्यादा डर यही था कि अंकित का कहीं मतलब वह कहीं कोने में चल रहा हो घाटी के, पैर फिसल गया और नीचे चला गया हो। तो ऐसा कैसे हो सकता है कि अंकित गायब हो गया है। एक अच्छा खासा हमारे जितना हमारा दोस्त जिसका दिमाग एकदम सही है वह गायब कैसे हो सकता है। घूमते-फिरते आगे पीछे चला गया होगा लेकिन वापस भी तो आ जाता है ना इंसान अनलेस और अंटिल उसके साथ कुछ बुरा हुआ हो। अब ये दोनों भागते हुए बस्ती के पास पहुंच जाते हैं। बस्ती जहां जब ये ऊपर आ रहे थे तो हर किसी से पूछ नहीं रहे थे कि हम तो वहां जा रहे हैं बताओ उसके बारे में यह बताओ वो बताओ। वापस वहीं पहुंच गए क्योंकि वहीं पर ही लोग थे। जैसे वहां पहुंचते इन्हें वापस से वही दादी मिलती है जो इन्हें पिछले दिन मिली थी जिन्होंने वार्निंग भी दी थी कि यह तीन चीजें अपने दिमाग में रख लेना। जब ये दादी के पास पहुंचते हैं तो ये बहुत घबराए हुए थे। और दादी इन्हें देखकर बोलती है कि क्या हुआ तुम सबको और वो तीसरा कहां है? क्या हुआ उसके साथ? अब ये दोनों रोते हुए दादी को बोलते हैं कि हमें हमारे दोस्त का कुछ पता नहीं मिल रहा। हमें नहीं पता वो कहां पर है। आप प्लीज हमारी हेल्प करें। आप आप लोगों को बताएं कि वह यहां नहीं है। आप लोगों को बताएं कि उन्होंने अगर अंकित को देखा है तो प्लीज प्लीज हमें बताएं। मतलब कुछ कुछ भी करें बट हमारे दोस्त को ढूंढ लें। दादी जो होती है वह बोलती है कि आखिर हुआ क्या था। मुझे मुझे पूरी बातें बताओ। यह दोनों सारी बात बताते हैं कि ऐसा ऐसा हुआ था। हम वहां गए थे हमें किसी ने नाम पूछा हमने अपने नाम गलत बताए। दादी पूछती है और अंकित ने। और तब जाके इनका दिमाग एकदम से ऐसे खनकता है कि शिट इस चीज पर तो हमने ध्यान ही नहीं दिया था। अंकित ने तो अपना असली नाम बताया था। अंकित ने कहा था कि उसका नाम अंकित है। एंड इट वाज दैट मूमेंट जहां इन्हें रियलाइज होता है कि ना तो कोई जानवर का खतरा है ना अंकित के पैर फिसलने का, ना कोई एक्सीडेंट है ना कुछ और बल्कि यह पूरा मामला है उस तांत्रिक का। उस तांत्रिक की आत्मा का। अब ये दोनों एकदम से डर गए थे। क्योंकि हर किसी ने कहा था वहां मत जाना जो जाता है वो वापस नहीं आता। यह दोनों रोने लग जाते हैं। दादी इन्हें बोलती है कि ठीक है। चुप करो और मेरे साथ चलो। दादी जी इन्हें एक एक बाबा जी के पास ले जाती है जो कि बहुत बूढ़े से थे। मतलब कि उनकी उम्र देखने में 80 साल की लग रही थी। वह बाबा वहां पर बैठे हुए थे जैसे ही ये दोनों वहां जाते हैं अपनी कहानी पूरी बताते हैं तो बाबा बताते हैं कि तुम्हारे दोस्त के ऊपर उस तांत्रिक ने कब्जा कर लिया है। वह तांत्रिक किसी को मारता नहीं है पर सामने वाले को जीने भी नहीं देता। उसकी आत्मा पर कब्जा बनाकर उसे हमेशा के लिए अपना बना लेता है। क्योंकि उस आत्मा को एक ऐसी बॉडी चाहिए एक ऐसा जिंदा मीडियम जिस पर वह कब्जा करके अपनी पूरी क्रियाएं पूरी कर सके, कंप्लीट कर सके। रोहन तभी बाबा जी से पूछता है कि क्या हम उसे रोक नहीं सकते? क्या हम कुछ ऐसा कर नहीं सकते जिससे कि हमारा अंकित वापस आ सके? बाबा उन्हें देखकर कहते हैं सिर्फ एक क्रिया है। आत्म द्वंद तुम्हें उसी जगह जाकर उसी आत्मा से सवाल करने होंगे। और अपने असली नाम से उसे हराना होगा। रोहन कंफ्यूज हो जाता है कि यह सब क्या बोल रहे हो? दादी बोलती है कि अपने नाम मत बताना आप बता रहे हो कि अपना नाम बताना होगा उसे हराना होगा नाम से कैसे किसी को हरा सकते हैं? जिस पर बाबा उन्हें बोलती है कि जीवन बचाने के लिए झूठ जरूरी था। अब उसे मुक्ति देने के लिए सच जरूरी है। रोहन और पियूष फिर से आश्रम की तरफ बढ़ते हैं। रात का समय था लेकिन यह रोहन और पियूष अकेले नहीं थे। इनके साथ वह बाबा भी थे जो इन्हें बता रहे थे कि कैसे उसे हराया जाता है। यह तीनों मिलकर उस गुफा में चले जाते हैं जिसमें इन्होंने इन्होंने देखा था ना कि जो जो राख थी वो गर्म थी वो लकड़ी थी। इन्हें लग रहा था कि ये तो अभी यूज हुई है उसी गुफा में ये तीनों चले जाते हैं और वहां पर बाबा जाप करना शुरू कर देते हैं। यह दोनों भी उन्हीं के बगल में बैठे हुए हैं। दोनों बहुत ज्यादा डरे हुए हैं। क्योंकि पिछली बार जब आए थे तो इन्हें किसी भी चीज पर विश्वास नहीं था। लेकिन इस समय इन्हें हर एक चीज पर विश्वास है। इन्हें डर है कि आगे जो भी होगा वह क्या होगा। और तभी एकदम से उस गुफा में एंट्री होती है अंकित की। अंकित बहुत जोर-जोर से गुर्रा रहा था। जैसे कि कोई जानवर सांस ले रहा हो। और अंकित की जो भी आवाज की मतलब जो भी साउंड था वह वह अंकित जैसा था ही नहीं। क्योंकि वह था उस तांत्रिक रक्तक का। अब अंकित जिसके अंदर रक्तक था वो बहुत बहुत गंदी आवाज में रोहन से पूछता है। उसकी आंखों में देखकर बोलता है कि तेरा नाम क्या है? रोहन सीधा-सीधा बोल देता है कि मेरा नाम रोहन है। और तेरा? और सामने से अंकित बोलता है कि मैं रक्तक हूं। और तू मुझे नहीं हरा सकता। यह यह बॉडी मेरी है, यह शरीर मेरा है और अब तुम सब भी मेरे ही होंगे। बाबा अपने ही मंत्र पढ़ने में लगे हुए हैं, उच्चारण करने में लगे हुए हैं और यहां पर जो उसी समय पियूष होता है वो जोर से अंकित को पकड़ लेता है। वो वो सोच रहा था कि मैं ऐसे पकड़ के मतलब ठीक कर दूंगा। पता नहीं उसे क्या लग रहा था मतलब उसे बोलना भी नहीं था किसी ने यह सब करने को लेकिन ठीक है भाई उस समय वह भी ज्यादा सोचता नहीं। वो अंकित को ऐसे जोर से पकड़ लेता है और अंकित उसी समय उसे बहुत जोर से धक्का देता है। वह सीधा आकर रोहन के पास गिर जाता है। जो रक्तक होता है वह बहुत गुस्से में आ जाता है। मतलब इतने गुस्से में जैसे वह तीनों का कत्ल कर दे उसी समय। वो बहुत जोर से चिल्ला-चिल्ला के बोल रहा था कि तुम मुझे नहीं हरा सकते। तुम तुम सब बहुत छोटी सी चीज हो और मैं मैं तुम्हें मसल के रख दूंगा मैं तुम्हें खत्म कर दूंगा। तभी जो बाबा जी होते हैं वो रोहन को एक रुद्राक्ष देते हैं। वो रुद्राक्ष में एक धागा भी लगा हुआ था काले रंग का। रोहन और पियूष कैसे तो करके उसे अपनी बातों में उलझा रहे हैं, उससे बात कर रहे हैं कि तू तूने इसे क्यों पकड़ा है तू उसे जाने दे। आखिर तुझे चाहिए क्या ये वह बोलते-बोलते पियूष होता है वो चालाकी से उसके पैरों पे वह रुद्राक्ष बांध देता है। जैसे वो रुद्राक्ष बांधता है, अंकित का ध्यान जाता है। अंकित अभी रोहन से बात कर रहा था तो उसका पियूष की साइड इतना ध्यान था नहीं।
[14:02]जैसे ही उसका पियूष की तरफ ध्यान जाता है वो रुद्राक्ष उसके पैरों पे बंध चुका था। और अंकित बहुत जोर-जोर से चिल्लाने लग जाता है। जैसे वो चिल्ला रहा था बाबा जो होते हैं वो एक जो वो राख होती है उसे उठाकर वापस से अंकित की ओर फेंक देते हैं। जैसे उसके ऊपर फेंकते हैं अंकित जैसे कि मानो गुफा से भागने लग जाता है। वह भागने की कोशिश तो करता है लेकिन पैर में बंधे रुद्राक्ष की वजह से वह भाग ही नहीं पाता। ऐसा लग रहा था जैसे कि वो अपना पैर उठा ही नहीं पा रहा था। एक पैर उसका जम चुका था पूरी तरीके से जमीन की ओर और वह वहीं पर गिर जाता है। जिसके बाद जो बाबा होते हैं वह वापस उस राख को लेते हैं वो मंत्र उच्चारण कुछ अलग सा ही मंत्र होता है जो कि अभी तक उन्होंने एक बार भी नहीं पढ़ा होता। वह मंत्र पढ़ते हैं और उस राख को अंकित के ऊपर ऐसे एकदम रख देते हैं और उसकी पूरी बॉडी उस राख से भर देते हैं। मतलब भरने इन द सेंस कि राख लिया उसके माथे पे लगा दी उसके चेहरे पे पूरी लगा दी उसके बाजू में उसके पैरों में हर जगह राख लगा दी। जिसके बाद अंकित बहुत जोर-जोर से चिल्लाता है। अब यह अंकित था या वह रक्तक था पता नहीं पर वह चिल्लाने की आवाज बहुत ज्यादा खौफनाक थी। पूरा जंगल उस आवाज से पूरा दहल जाता है। गांव में हर किसी को वह आवाज सुनाई दे रही थी लेकिन एक समय बाद वह आवाज आना बंद हो जाती है। और उसके बाद अंकित जो कि एक समय पर चिल्ला रहा था तड़प रहा था यहां-वहां जाने की कोशिश कर रहा था वो एकदम नम पड़ जाता है। मतलब कि बेहोश हो जाता है। पियूष और रोहन अंकित को उठाते हैं बाहर लेकर आते हैं। बाबा भी बाहर आ जाते हैं। अब बाबा बताते हैं कि जो वो रक्तक था वो इसकी बॉडी को छोड़कर जा चुका है। वह ऐसा नहीं है कि वह हमेशा के लिए चला गया वो अभी भी यहीं पर है। लेकिन एटलीस्ट इस बॉडी को छोड़कर चला गया क्योंकि यह बॉडी यह बॉडी में हमने रुद्राक्ष लगा दिया था। वह जो वो जो राख थी वह लगा दी थी जिसकी वजह से वह इस बॉडी में नहीं रह पाया। अब रक्तक कुछ समय के लिए मतलब शांत है लेकिन उसके बाद वह वापस आएगा। तो जब वो समय है जो यह समय है जब वह शांत है निकलो यहां से। बाबा अंकित पियूष और रोहन चारों वहां से चले जाते हैं और यह मतलब भागते-भागते तब तक भागते हैं जब तक यह पूरे नीचे तक पहुंच नहीं जाते जहां यह पूरा गांव था। बाबा भी वहां पहुंच गए। तीनों भी वहां पहुंच गए जिसके बाद यह तीनों बाबा को कैसे तो उनके पैर पकड़ के बोलते हैं कि थैंक यू बाबा जी हमें बचाने के लिए। मतलब आप ना होते तो अंकित के साथ पता नहीं क्या होता यह वह सब कुछ मतलब उनका है कि बाबा ही हमारे भगवान है उन्होंने हमें बचा लिया। और यह बोलने के बाद यह तीनों वापस वहीं से निकल जाते हैं। मतलब रात को ही निकल जाते हैं। यह सुबह होने का भी वेट नहीं करते। बाबा इन्हें बोलते हैं कि सुबह तक रुक जाओ बस आ रही है तब चले जाना यह वह नहीं निकल गए हैं तीनों। इसके बाद यह अपने घर वापस आ जाते हैं। तीनों का यह जो एक्सपीरियंस था बहुत ज्यादा डरावना था। घर पहुंचने के तीन-चार दिन तक यह पूरे टाइम ट्रॉमा में है। मतलब ये इन्हें ऐसे लग रहा है कि वो रक्तक अभी यहां आ जाएगा। कोई इनसे नाम पूछा है तो नाम नहीं बता रहे। इन्हें अब डर लग रहा है। मतलब ऑब्वियसली आपके साथ कुछ ऐसा इतना भयानक चीज हो तो आपको भी टाइम लगेगा ओवरकम करने में। करीबन तीन-चार दिन बाद एक हफ्ते बाद जब यह चीजें पुरानी हो जाती है ये इस चीजों से ओवरकम कर जाते हैं तब तीनों बैठे हुए थे और और कुछ चीजें थी जो तब इनके दिमाग में आना चालू हुई। पहली चीज यह थी कि अगर वो बाबा सही में इतने शक्तिशाली थे। इस पूरे गांव में इतना ऐसा क्या था कि तुम उससे लड़ ही नहीं सकते। मतलब वहां जो गया है वो वापस नहीं आया जबकि बाबा भी इसी गांव के थे तो बाबा जाकर उन्हें हरा भी तो सकते थे, राइट? दूसरी चीज यह थी कि वो सीधा उसी गुफा में कैसे गए जिस गुफा में पहले भी वो सब चीजें हो चुकी है। मतलब आप समझ रहे हो शुरू में क्या हुआ था कहानी की शुरुआत में जब यह गुफा में गए थे तो इन्हें लगा था कि इस जगह पर मंत्र जाप हुए हैं। इस जगह पर हवन हुआ है और वो राख इतनी गर्म लग रही थी और फिर वो बाबा भी सीधा वहीं घुसते हैं। सीधा वहीं पर मंत्र करना शुरू करते हैं इसका मतलब इनका जब दिमाग चलता है तो इन्हें लगता है कि बाबा यहां पहले भी आए हैं। उन्होंने पहले भी इसी जगह पर मंत्र वो रिचुअल वो सब परफॉर्म करा है और अचानक से इन्हें जो लग रहा था कि बाबा जो इन्हें बचा रहे थे। कहीं वहीं तो मेन कल्प्रिट नहीं है। कहीं ऐसा भी हो सकता है कि रक्तक नाम का कुछ हो ही नहीं। बाबा ही हो जो यह सारी चीजें कर रहे हो। मारूंगा भी मैं, बचाऊंगा भी मैं, मेरा नाम हो जाएगा सब मुझे मानने लग जाएंगे। और शायद कहीं ना कहीं यह था। गांव वालों को जब यह चीजें पता चली होंगी कि अंकित को उन्होंने बचा लिया। वह रक्तक से जाकर बचा आए तो कहीं ना कहीं उनका नाम तो हुआ होगा ना। कहीं ना कहीं गांव वालों ने उनको पूजना तो शुरू करा होगा। अब यह तीनों जो थे ये दिमाग वाले लोग थे ये अंकित, रोहन, पियूष तो ये आंख बंद करके ये नहीं बोल सकते कि अरे बाबा ने ही हमें बचाया है यह वो क्योंकि जो इनके क्वेश्चंस थे वो वैलिड थे। और आजकल आप बहुत सारे ऐसे न्यूज भी देखते होंगे जहां पे कई बाबा ऐसे कुछ चमत्कार करके ऐसे भगवान से बन जाते हैं। लोग उन्हें पूछना शुरू कर देते हैं और उसके बाद उसके बाद वो क्या-क्या करते हैं आप सबको पता है। तो क्या यह सही में एक एक कोई ऐसे बाबा थे जिन्होंने इन्हें बचाया या फिर कोई ऐसे बाबा जो एक ट्रैप रच रहे थे। या फिर एक ऐसे बाबा जिनके बारे में हमें आए दिन सुनने को मिलता है। इनका गेटअप, इनके बोलने का तरीका मतलब कहीं ना कहीं इन तीनों को शेडी तो लगा था। अब यह इन तीनों का मानना है। मेरा क्या मानना है मैं कुछ नहीं बता सकता। क्योंकि यह स्टोरी इन तीनों की है। इन्हें उन बाबा के बारे में ज्यादा अच्छे से पता है। क्योंकि मैंने तो दोनों साइड की स्टोरीज देखी है। मतलब ऐसे बाबा भी देखे जो सच में इतने अच्छे होते हैं जो आपको मतलब यू नो किसी भी चीज से बचाने के लिए रेडी रहते हैं। जब आपके ऊपर यह चीजें हावी होती है तो बाबा ही होते हैं जो आपको बचाते हैं बाबा मौलवी जी। यह सब लोग ही होते हैं जो आपको इन बुरी शक्तियों से बचाते हैं और दूसरी साइड कुछ ऐसे बाबा भी होते हैं जो शायद बाबा होने का ढोंग रचते हैं। जो शायद फेमस होने के लिए कुछ भी चीजें करते हैं और एक बार फेमस हो जाते हैं फिर उसके बाद वह कई ऐसी चीजें करते हैं जो शायद आपने कभी सोची भी ना हो। तो यह थी रोहन की कहानी, यह थी अंकित की कहानी, यह थी पियूष की कहानी। यह थी इन तीनों की कहानी और इन दी एंड यह सिर्फ कुछ सवालों के साथ ही रह गए हैं। क्या सही में वो बाबा अच्छे थे? क्या सही में इनके अंदर वो रक्तक था? सही में वहां पर आज भी एक ऐसे अघोरी की आत्मा भटकती है जो इतनी खतरनाक है कि पूरा गांव उनसे डर के रहता है। आखिर ये वहां गए थे कई सारे जवाब ढूंढने लेकिन वहां से लौटे हैं और कई सारे सवालों के साथ। और आपको इस बारे में क्या लगता है आप कमेंट में बता सकते हैं। दैट्स इट फॉर टुडे। फिर मिलते हैं किसी और टॉपिक के साथ तब तक के लिए बाय बाय एंड टेक केयर।



