[0:00]डोनाल्ड ट्रंप पीठ दिखा के जंग में से भाग रहा है हो सकता है आपको कुछ देर में ये प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुनने को मिल जाए। वॉल स्ट्रीट जर्नल का ये कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने मन बना लिया है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस चाहे ओपन हो या ना हो वो जंग में से निकल रहा है।
[0:10]अगर वो बाय फोर्स इसको ओपन कराने चलेगा तो चार से आठ हफ्ते लग जाएंगे और चार से आठ हफ्ते में तो इकोनॉमी पूरी तरीके से कोलैप्स हो जाएगी। डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर इस टाइम मैसिव लेवल पर प्रेशर है।
[0:20]सबसे बड़ा जो प्रेशर है वो ये है कि वहां पर 70 लाख लोग जो है वो सड़कों पर उतरे हुए हैं और प्रोटेस्ट कर रहे हैं। 3000 शहरों में बहुत मेजर लेवल पर प्रोटेस्ट चल रहा है अमेरिका में मेनस्ट्रीम मीडिया आपको कभी दिखाएगा नहीं ये चीज।
[0:30]और दूसरी चीज ये है कि डोनाल्ड ट्रंप को ना डेड को रिफाइनेंस करना है 8 से 10 ट्रिलियन 2026 के अंदर 8 से 10 8 से 10 ट्रिलियन यूएस डॉलर उसको रिफाइनेंस करना है मतलब डेड मैच्योर हो रहा है।
[0:41]और रिफाइनेंस का मतलब ये है कि उसको हाई रेट ऑफ इंटरेस्ट पर रिफाइनेंस करना पड़ेगा। कहां तो डोनाल्ड ट्रंप ये चाह रहा था कि रेट कट करना चाहता था ना तभी तो जेरेमी पावेल ऑफ फेडरल रिजर्व के चेयरमैन को वो गाली देता था।
[0:51]इसको हटाओ और अपना बंदा लेकर आने की कोशिश कर रहा था अब लेकिन क्योंकि वहां पर फेडरल रिजर्व ने जैसे ही हिंट दिए कि वहां पर रेट कट नहीं होंगे रेट हाई हो सकते हैं तो भैया उसने कहा कि मैं तो इस वॉर में से निकल रहा हूं।
[1:00]कहीं लेने के देने ना पड़ जाएं और मैं फिर इस सिचुएशन से कभी निकल नहीं पाऊंगा। डोनाल्ड ट्रंप की को एक्चुअली क्लियर दिख रहा है कि इजराइल ने कहीं ना कहीं उसको पुश किया इजराइल ने उसको कहानी सुनाई कि चार दिन के अंदर निपटा देंगे।
[1:10]जैसे कि वो क्यूबा को निपटाते थे, वियतनाम को निपटाते थे, अफगानिस्तान को निपटाते थे, लीबिया को निपटाते थे, इराक को निपटाते थे लेकिन उनका जो सामना पड़ गया वो उनके बाप से पड़ गया।
[1:20]आज तक अमेरिका की ये कहानियां जो आपको टेक्स्ट बुक में सुनने को मिलती है ना अमेरिका इज दिस सुपरपावर। ये डराया जाता है ना आपको एक्चुअली क्या है कि अमेरिका का कभी भी ना किसी से पाला नहीं पड़ा।
[1:29]अमेरिका का चाइना से पाला नहीं पड़ा, अमेरिका का रशिया से पाला नहीं पड़ा, अमेरिका का नॉर्थ कोरिया से पाला नहीं पड़ा। अमेरिका का फाइनली एक बराबर के बंदे से जैसी पाला पड़ा, बराबर का तो मैं नहीं कहूंगा लेकिन फिर भी आप देख रहे हो कि थोड़ा सा बड़ा देश उनके सामने आया और अमेरिका की जो है हालत खराब हो गई, हालत पतली हो गई और वो यहां से निकलने की कोशिश कर रहा है।
[1:44]बेसिकली क्या है कि अमेरिका यहां से निकल जाएगा आपको लग रहा होगा सब कुछ ठीक हो जाएगा। ठीक कुछ नहीं होना है यही तो प्रॉब्लम है।
[1:50]बेसिकली क्या है कि अमेरिका जाते-जाते ईरान को मजबूत कर गया। ईरान हर महीने एक एप्रोक्सीमेटली 800 मिलियन यूएस डॉलर कमाएगा अब कैसे टोल लगाने जा रहा है।
[2:00]उसकी पार्लियामेंट में उसने बिल प्रपोज कर दिया है ईरान के अंदर कि भैया हम यहां पे एक परमानेंट टोल आएंगे जितने भी जहाज यहां से निकलेंगे। महीने का एप्रोक्सीमेटली 800 मिलियन यूएस डॉलर जब वो कमाएगा तो होगा क्या तेल जो है महंगा होगा, गैस महंगी होगी, हीलियम महंगा होगा, फर्टिलाइजर महंगे होंगे।
[2:14]पूरी दुनिया जो झेलने वाली है वो देश झेलेंगे जो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस में ज्यादा डिपेंड करते हैं। उन देशों में सबसे पहले चाइना आता है, इंडिया आता है, फिलिपींस आता है, एशियन कंट्रीज आती हैं।
[2:24]तो इन कंट्रीज को ज्यादा इसमें उनको इफेक्ट पड़ेगा। वहां पे ज्यादा इंफ्लेशन बढ़ेगी तो बेसिकली अमेरिका ने क्या करा वो तो जंग में आने से पहले ही अपना इंतजाम कर लिया था।
[2:32]वेनेजुएला को कैप्चर करके उसने तो अपना तेल का इंतजाम कर लिया था। अधर में छोड़ गए हम सबको और इसका सबसे बड़ा जो फायदा हुआ है ना वो इजराइल को हुआ है।
[2:41]पीछे से बैठ के उसने पूरा खेल रचा प्लानिंग करी अमेरिका को आगे किया उसके उसके उसके जं जंगी जहाज उसको आगे भेजे उसके सोल्जर्स को 50000 सोल्जर्स को वहां भेज दिया है कि भैया इनको इनकी भी एंट्री करा दो।
[2:51]तो पूरी प्लानिंग उसकी थी जीसीसी कंट्रीज कमजोर हुई है। आपस में लड़ गई, कमजोर हो गई उनकी डोमेस्टिकली उनकी इकोनॉमी हिट हो गई है और सबसे बड़ा फायदा जो इसमें इजराइल को हुआ है।
[2:59]आपका क्या कहना है इस पूरे सिनेरियो में



