[0:05]मुझे आपसे बात करनी है। क्या हुआ दामाद जी? क्या हुआ दामाद जी? सब ठीक तो है? मेरे जाते ही वह रस को बुलाती है। मैंने खुद देखा है।
[0:19]ये क्या कह रहे हैं आप? हमें माफ कर दीजिए। हम चाय को समझा देंगे। गलती हो गई हमसे। इसमें आपकी भी गलती नहीं है। चाय का स्वभाव ही ऐसा है। सबकी फेवरेट। पर अब हमारा कुछ नहीं हो सकता। रुकिए दामाद जी। अब रुकने का कोई मतलब नहीं।



