[0:07]चलिए हम्म वापस से पल्लू ध्यान देगा ना चलो नींद में लग रहा है। इंट्रोडक्शन किसका इंट्रोडक्शन कंपनी लॉ का इंट्रोडक्शन। चलो इंट्रो में सबसे पहले उन्होंने क्या बोला? ज्यूरिसप्रूडेंस मतलब स्टडी ऑफ लॉ। किसकी स्टडी कर रहे हैं? कंपनी लॉ की। तो स्टार्टिंग के लाइन जस्ट जनरल बातें कि भाई आर वेरियस कंपनीज एक्ट हैज बीन मॉडल किसने बनाया था? अंग्रेजों ने। ठीक है। पुराने-पुराने अगर तुम पास में जाओगे तो अंग्रेज ही है जिन्होंने क्या किया? हमारी इंडिया में पहली बार कंपनीज एक्ट लेकर आए थे। क्या कुछ याद है तुम्हें ईयर? कब लेकर आए थे? 1850 1850 तो यहां पे बस इन्होंने यही बताया है कि जॉइंट स्टॉक कंपनीज एक्ट 1844 1844 इंग्लैंड में फर्स्ट टाइम आया मतलब कि जब अंग्रेज इंडिया में आए तो वह सबसे पहले यह जो एक्ट है अपनी कंट्री में लेकर आए। कब लेकर आए? 1844 में अपनी कंट्री इंग्लैंड में। फिर उन्हें लगा कि हमें इंडिया में भी लेकर आना चाहिए। तो इंडिया में जो आया दैट वाज 1850 तो आपके लिए रेलीवेंट क्या है? 1850 कि भाई इंडिया में फर्स्ट टाइम। हमको क्या जानना है कि भाई वहां पे क्या है कैसा है? और यह भी हिस्ट्री है। और एग्जाम में यह कोई एमसीक्यू तो एग्जाम है नहीं कि आपसे बिल्कुल क्वेश्चन पूछा जाएगा कि किसकी ईयर में आया? तो यह बस आपके लिए हिस्ट्री है। लेकिन हां इंपोर्टेंट आपकी फिर भी किसकी रहेगी? 1850 की। चलिए अब यह क्या लिखा है? हिस्ट्री डेवलपमेंट। पूरी हिस्ट्री, पूरी डेवलपमेंट बताया जाएगा। तो बस मैं थोड़े से अच्छे प्रेजेंटेशन में बताऊंगी पूरी हिस्ट्री। फिर हम उसे फटाफट रीड करेंगे आपकी बुक से। चलिए सबसे पहला 1850। 1850 से सबसे पहला क्या क्लिक होता है? सबसे पहला लॉ। सबसे फर्स्ट लॉ इन इंडिया। चलिए रजिस्टर्ड ओनली। जब सबसे पहली बार इंडिया में कंपनीज एक्ट आया 1850 वाला आया तो यह क्या बोलता था कि भैया रजिस्ट्रेशन बस कहां होगा? बॉम्बे में होगा। देन कलकत्ता में होगा और मद्रास। मतलब बाकी सारी जगहों पे रजिस्ट्रेशन नहीं होता है। आज जो भी तुम थोड़ा बहुत कंपनीज एक्ट जानते हो उसमें क्या होता है बताओ? आरओसी हर स्टेट का अपना क्या बना हुआ है? आरओसी। तो वहां पर जब आया तो यार आज जो देख रहे हो ना वह बहुत अपडेटेड वर्जन देख रहे हो तुम। लेकिन जब स्टार्टिंग में जब नया लॉ आया था तो साफ बोलते थे रजिस्ट्रेशन बस इन तीन जगहों में होगा इसके अलावा कहीं और रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। और ऑनलाइन सिस्टम होते थे क्या? एक ऑफिस होगा तो प्रॉपर इन तीन जगहों में ऑफिस होगा। ओनली क्या लिखा है? अनलिमिटेड लायबिलिटी ऑफ द कंपनीज अलाउड। मतलब आज जो तुम कंपनीज एक्ट जानते हो वह कौन सा होता है? लिमिटेड लायबिलिटी। लेकिन जब पहली बार आया था तो क्या बोल दिया था? अनलिमिटेड। जैसे पार्टनरशिप एक्ट में भी है। पार्टनरशिप एक्ट में क्या है? अनलिमिटेड लायबिलिटी। तो उस टाइम जब आया था तो बोला था भैया कंपनी जो भी होगी उसकी लायबिलिटी क्या होगी? अनलिमिटेड। ठीक है? तो दो तीन बातें। पहला क्या? 1850 में पहली बार आया। दूसरा पॉइंट। तीन जगह नाम बताओ बॉम्बे, कलकत्ता और मद्रास। तीसरी बात क्या है? अनलिमिटेड लायबिलिटी। बस यह अच्छा प्रेजेंटेशन है और यह है तुम्हारा। यह इंग्लैंड का बता दिया उन्होंने रजिस्ट्रेशन कहां पर है? इन तीन जगहों में और लिमिटेशन बुराई करी है। क्या बुराई करी है? कि भैया अनलिमिटेड लायबिलिटी उस टाइम पर कंपनी हुआ करती थी। ठीक है? चलिए बातें एकदम सेम है कुछ भी इधर-उधर नहीं है। फिर अमेंडमेंट आया। 1857 में फिर दोबारा से एक्ट को बदला। फिर क्या बोला कि हम दो टाइप की कंपनीज बनाएंगे। लिमिटेड लायबिलिटी वाली भी और अनलिमिटेड लायबिलिटी वाली भी। बैंक और इंश्योरेंस कंपनी को बोला। कौन-कौन सी कंपनी? बैंक वाली कंपनीज और इंश्योरेंस कंपनीज। स्टिल यह लोग क्या करेंगे? अनलिमिटेड लायबिलिटी रहेंगे। भैया तुम तो बैंक हो। तुम तो इंश्योरेंस कंपनी हो। तुम अनलिमिटेड ही रहोगे। फिर अमेंडमेंट आता है कब? 1860 में। फिर बोलते कि ठीक है ठीक है। बैंकिंग कंपनी, इंश्योरेंस कंपनी तुम्हें भी हमने अब अलाउ कर दिया कि तुम भी क्या कर सकते हो? लिमिटेड लायबिलिटी। तुम्हें थोड़ा बहुत सीएसईटी का नॉलेज याद आ रहा होगा जब वहां पे आपको हिस्ट्री पढ़ाई जाती थी। तब मैं आपको बोलती थी भैया आपको बस तीन एक्ट याद रखने है। तीन ईयर याद रखना है। पहला 1850। दूसरा 1956। तीसरा 2013। ठीक। यह दो तो इंडिया के बने हुए इंडियन गवर्नमेंट ने बनाए लेकिन यह किसने बनाया है? अंग्रेज ने। बीच में भी बहुत सारी चीजें हैं जो कि पूरी हिस्ट्री इन्होंने यहां पर बताई। नेक्स्ट उन्होंने बोला कब? 1866। फिर से इंट्रोड्यूस न्यू अमेंडमेंट आया। क्या बोला कि इनकोर्पोरेशन करना पड़ेगा हमें रजिस्ट्रेशन। हमें रेगुलेशन और कंपनी की क्या डिसाइड करनी पड़ेगी? वाइंडिंग अप की प्रोसेस। फिर दोबारा से आता है 1930 में और क्या बोलता है कि भाई अभी तक कंपनी कौन सी नेचर की होती थी? पब्लिक। अब एक और सिस्टम लेकर आई कि कंपनी क्या हो सकती है? प्राइवेट भी हो सकती है। इंक्लूड कमर्शियल ऑर्गनाइजेशन फंक्शन। मतलब इन्होंने क्या बोल दिया? अब कमर्शियलाइजेशन करेंगे क्योंकि प्राइवेट सेक्टर को भी हम करें।
[5:04]पहले तुम जानते हो सारी चीजें सरकार के कंट्रोल में रहती थी। अगर तुम्हें थोड़ी बहुत अपने हिस्ट्री याद हो तो जब भी कुछ नहीं होता तो गवर्नमेंट अपने कंट्रोल में सारी चीजें रखती है। फिर उन्हें लगता है कि नहीं प्राइवेट सेक्टर थोड़ा सा आगे बढ़े। तो चीजों को हम कमर्शियलाइज करें। फिर दोबारा से 1936 में क्या हुआ? अपडेटेड वर्जन। इसमें क्या बोला कि हमें डायरेक्टर्स बिठाने हैं और डायरेक्टर के रोल डिसाइड करने हैं। उनकी रिस्पांसिबिलिटी डिसाइड करनी है। मैनेजिंग एजेंट्स रखने हैं। देन फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन, एम्प्लॉय प्रोविडेंट फंड। यह सारी नई-नई चीजें डेवलप हुई। अब मुझे यह बताओ फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन क्या होगा? खुद से सोचो। कंपनी में कुछ भी फ्रॉड हो रहा है तो उसका इन्वेस्टिगेशन का तरीका क्या होगा? प्रोविडेंट फंड क्या होता है? एम्प्लॉय प्रोविडेंट फंड। बताओ। आज तक चलता है प्रोविडेंट फंड। पीएफ होता है। एम्प्लॉयज के लिए होता है कि भाई तुम जब रिटायर हो जाओगे तो रिटायर होने के बाद तुम तो पूरा पैसा खत्म कर चुके होगे। तो तुम्हारा धीरे-धीरे-धीरे हम एक छोटा-छोटा फंड इकट्ठा कर रहे हैं ताकि रिटायरमेंट के बाद हम एक आपको एक मोटा अमाउंट दे सके। तो यह सारे प्रोविजन कंपनीज में लेकर आए और क्या बोला कि बस गवर्नमेंट सेक्टर को ही नहीं मिलेगा। नॉर्मल एम्प्लॉयज भी इन फैसिलिटीज को यूज कर पाएगा। नेक्स्ट अब फाइनली यहां पर अब हमारा देश आजाद होता है। कब होता है? 1947। अब फाइनली इंडियन गवर्नमेंट ने जो सबसे पहला एक्ट बनाया। 1956 यह 1956 ऑल ओवर इंडिया में लगता है लेकिन विद फ्यू एक्सेप्शन। अगर आपकी बुक में आएंगे तो कंपनीज एक्ट 1956 वेरी वेरी वेरी इंपोर्टेंट। साफ-साफ यहां पे बोला कि कब ये आया था? आफ्टर वर्ल्ड वॉर सेकंड। कब आया था? 1944 ठीक है? देश को आजादी मिली 1947 में। ठीक है? यहां पर एक कमिटी थी दैट वाज सीएच बाबा कमिटी। ठीक है? बुक में एचसी लिखा है प्लीज इसे सीएच करो। यह जो एक्ट है कहां लगता है? होल ऑफ द इंडिया। लिखा है। लेकिन एक्सेप्ट कहां? नागालैंड, देन जम्मू एंड कश्मीर, देन गोवा, देन दमन एंड दीव सब्जेक्ट टू सम एक्सेप्शन। जब स्टार्टिंग में आया था तब यह एक्सेप्शन थे। लेकिन जब 1956 धीरे-धीरे-धीरे आया तो बस एक एक्सेप्शन बचा था। दैट वाज जम्मू एंड कश्मीर बाकी सब में इंप्लीमेंट हो रहा था। फिर आज की डेट में आज की डेट में इसको बदला। इसको बदला और कंपनीज एक्ट 2013 आया और इसमें तो कुछ भी एक्सेप्शन नहीं है। आज की डेट में कंपनीज एक्ट तो जम्मू कश्मीर में भी लगता है। देखो जम्मू कश्मीर के साथ 370 आर्टिकल थोड़े हमारे साथ एग्रीमेंट कुछ डिफरेंट टाइप के हो रखे थे। क्योंकि जम्मू कश्मीर थोड़ा सा सेंसिटिव मैटर है। आप लोग जानते हो। है ना? पाकिस्तान वहां से उसे खींच रहा था आओ हमारे साथ इंडिया यहां से खींच रहा था। उसने कहा था भैया मुझे किसी के साथ नहीं रहना। लेकिन मुझे मदद जरूर चाहिए इंडिया से। क्यों? क्योंकि आज नहीं तो कल कोई और मुझे टेकओवर कर लेगा। किसने कर दिया टेकओवर? इंडिया ने कर लिया। इतने सालों से रखा हमने इतनी फैसिलिटीज यूज कर ही रहे थे। ठीक है? चलो जो का पार्ट वो तो डिफरेंट थिंग है। लेकिन हां एग्रीमेंट के कुछ रूल्स रेगुलेशन थे। स्टार्टिन से नहीं थे ना। तुम तो आज की बात कर रही हो। लेकिन क्या स्टार्टिंग से थे क्या यह? नहीं। स्टार्टिंग में हर किसी के साथ अपना-अपना डिस्प्यूट चल रहा था। जब सोचो जब हमारी देश को आजादी मिली तो क्या आज जो तुम मैप देखते हो क्या एज इट इज वही था? नहीं। आज जो तुम स्टेट देखते हो क्या एज इट इज था? नहीं। उस टाइम पे तो डिवीजन हुआ। बड़ी मुश्किल से हमने अपने आप को संभाला। धीरे-धीरे चीजें डेवलप हुई। तो उस टाइम पे इन सब लोगों ने अपने आप को थोड़ा सा अलग ही ट्रीटमेंट करके रखा था। फिर उनको समझ में कि नहीं भैया इंडिया के साथ रहना ही ज्यादा बेटर है। लेकिन स्टिल जम्मू कश्मीर फिर भी अलग-धलग था। जम्मू कश्मीर तो काफी समय तक अलग था आपको मालूम है। तुम्हारे रिसेंटली तुम्हारे आंखों के सामने 370 आर्टिकल हटा है और जम्मू कश्मीर को इंडिया का पार्ट बनाया है। और यह बस कंपनीज एक्ट की बात नहीं है। इंडिया में ऐसे बहुत सारे लॉज थे। बहुत सारे क्या? ऑलमोस्ट सब थे जो जम्मू कश्मीर में नहीं लगते थे। ठीक है? तो यह पूरी हिस्ट्री है। लेकिन यह हिस्ट्री जस्ट फॉर नॉलेज। यह एग्जाम में पूछे जाने वाली चीजें नहीं है। यह नॉलेज के लिए आपको पता होना चाहिए कि कोई भी नया लॉ आता है तो उसमें भी कैसे क्या होते हैं। वह भी इन्हीं प्रोसेस से गुजर के एक अच्छा वर्जन उसका बनता है। ठीक है? चलो फिर क्या बोला? बेस्ड ऑन सोशली और इकोनॉमिक नीड्स ऑफ द कंपनी के हिसाब से था। फिर उसके बाद फाइनली हमारा कंपनीज एक्ट आया। इसने क्या इनकरेज किया? ज्यादा से ज्यादा ट्रांसपेरेंसी रखी। हाई स्टैंडर्ड रखा किसका? कॉर्पोरेट गवर्नेंस। तो कुल मिलाकर यह थी पूरी की पूरी हिस्ट्री। वापस से बोलूंगी अभी भी आपके लिए तीन ही इंपोर्टेंट होने चाहिए। 1956 2013 डन। ठीक है? लेकिन हां पढ़ेंगे हम सब कुछ। क्योंकि आपका जो आईसीएएसआई का जो सिलेबस है ना जो आपका एग्जाम होता है ना इसमें इंपोर्टेंट भले कुछ हो लेकिन एग्जाम में क्या होता है? अनइंपोर्टेंट भी चीजें पूछी जाती है। पढ़ेंगे सब। पढ़ना सब है। लेकिन इंपोर्टेंट बता दूं। इंपोर्टेंट क्यों है?
[10:52]सबसे पहले यह जो बाबा कमिटी है मुझे ईयर बताओ क्या ईयर लिखा है? 1952। देश आजाद हो गया था। हो गया था? पक्का कब हुआ था?
[11:18]1947। समझो अब। 1947 में हमें आजादी मिलती है। अब हम अंग्रेजों के बनाए हुए कंपनीज एक्ट को क्यों फॉलो करेंगे? ठीक है? हमको बनाना था। अभी तो तुम्हें डेटा पता है ना। क्या बना हमारे सामने? 1956। दैट मीन्स कि जब देश आजाद हुआ तो एक कमिटी बनाई गई और उस कमिटी को क्या बोला? भैया इंडिया का कंपनीज एक्ट बनाओ। तो बाबा कमिटी यह बाबा कमिटी वह कमिटी थी जिसने यह बनाया। तो अभी फटाफट शॉर्ट में सबसे पहले इन्होंने कहा 1950 से लेकर 1970 तक। 1950 से लेकर 1970 तक कुछ अर्ली रिफॉर्म्स चल रहे थे जो कि सबसे पहले बाबा कमिटी जो कि फर्स्ट मेजर रिव्यू ऑफ द कंपनीज एक्ट जो पुराना चल रहा था अंग्रेजों का बनाया हुआ सबसे लेटेस्ट वह क्या था? 1930। फिर देश आजाद होता है। इस कमिटी को बनाया जाता है ताकि इसे हम क्या कर सके? खत्म कर सके। तो क्या यह बोल सकती हूं 1930 को खत्म करने के लिए। मार्क करने का टाइम दूंगी ठीक है? अभी रुक जाओ ध्यान दो इधर। 1930 को खत्म करने के लिए आया। ठीक है? फिर 1930 को खत्म करकर बाबा कमिटी क्या लेकर आ गई? 1956। इसलिए इसकी इम्पोर्टेंस है बाबा कमिटी। फिर बाकी सब अवई वाली कमिटी है। अवई नहीं बोलूंगी मतलब उनका रोल इतना ज्यादा नहीं है किसी एक्ट को लेकर देखा लेकिन अपने आप में छोटे-छोटे रूल्स तो थे। जैसे शास्त्री कमिटी ने क्या एड्रेस किया? क्या एड्रेस किया? जितने भी ड्राफ्टिंग डिफेक्टस थे। ड्राफ्टिंग डिफेक्टस मतलब क्या? बनाते वक्त प्रैक्टिकली उसे इंप्लीमेंट करते वक्त जो भी दिक्कतें आ रही थी उन्हें हटाया जो 1956 एक्ट बन चुका था। अब देखो होता है क्या कानून तो बना दिया जाता है लेकिन जब आप इसे इंप्लीमेंट करते हो जब उसके बारे में थोड़ा सा सोचते हो तो तुम्हें लगता है कि भाई बनाते वक्त हमने यह दिक्कतें कर दी है। तो इसे थोड़ा सा हटाना चाहिए। तो छोटे-छोटे अमेंडमेंट्स आते हैं एक्ट नहीं बदला पूरा का पूरा। 1956 के बाद सीधा एक्ट कौन सा आया? 2013। लेकिन इतने बीच में जो यह साल है। एप्रोक्स कितने साल है? 2013 तक बताओ। एप्रोक्स 50 बोल रही हूं। 40-50। ठीक है? एप्रोक्स इन 40-50 में क्या कोई अमेंडमेंट नहीं होगा? 40-50 साल बहुत ज्यादा टाइम होता है। तो बीच-बीच में छोटे-छोटे अमेंडमेंट आते हैं। अब अपडेट किया जाता है। तो भाई शास्त्री कमिटी ने बोला कि भैया 1956 का एक्ट जो बन गया उसमें कुछ छोटे-छोटे डिफेक्ट है उसे हमें रिमूव करना है। चार कमिटी बोलता है कि 1956 को हमें क्या करना है? सिंपल करना है। सिंपलफाइड। थोड़ा सा मॉडर्नाइज करना है। क्यों? क्योंकि दुनिया बदल रही है। 1956 में आया था और 78 में 78 में इन लोगों ने रिकमेंड किया कि भैया इसे चीजों को सिंपल करो। लोगों को समझ नहीं आ रहा है। लोग इसे इंप्लीमेंट नहीं कर पा रहे हैं। तो यह अर्ली रिफॉर्म्स है जो तीन थे। उसके बाद लिबरलाइजेशन आता है। आपको मालूम है यह लिबरलाइजेशन कब आया? 1991। उसके बाद थोड़ा सा हम ग्लोबलाइज होते हैं। आपको याद होगा एलपीजी पढ़ाया जाता था आपको। है ना? मनमोहन जी। अब हुआ क्या? हम थोड़ा सा और कमर्शियलाइज होने का सोच रहे थे। तो उसके बाद 1997 में चंद्रेश कमिटी आती है और यह बोलती है कि भैया ड्राफ्ट करना पड़ेगा न्यू एक्ट ताकि हम क्या हो सके? हमारी इकोनॉमी क्या हो सके? ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो सके। फिर इरादी कमिटी आती है। वह बोलती है भाई कंपनी बना तो ली लेकिन कंपनी को स्मूथली वाइंड अप भी करना है। मतलब ओपन करना तो हमने रूल रेगुलेशन के साथ किया लेकिन वाइंडिंग अप का क्या? फिर उन्होंने बोला जोशी कमिटी। जोशी कमिटी ने बोला कि भैया जो बिल पास हुआ है। 1997 में जो बिल पास हुआ है उसको रिव्यू किया। उसकी गलतियां निकाली। नरेश कमिटी ने क्या बोला? प्राइवेट कंपनी और पार्टनरशिप के भी रूल्स रेगुलेशन और बेटर बनाने चाहिए। ईरानी कमिटी मैंने आपको तीन इंपोर्टेंट कमिटी बोली थी। पहला बाबा। क्यों उसको इम्पोर्टेंस दी जा रही है? क्योंकि इसके दम पर 1956 आया। ठीक है? अब किसकी बात हो रही है? ईरानी कमिटी। ईरानी कमिटी का मेन काम क्या था? पेव वे। मतलब कंपनीज एक्ट शिफ्ट टू दी डिस्क्लोजर बेस्ड गवर्नेंस। हम चाह रहे थे इस ईरानी कमिटी ने बहुत सारे चेंजेज करें जिससे समझ में आए कि अब पूरा का पूरा एक नया एक्ट आना चाहिए। तो ईरानी कमिटी वह इनिशिएटर थी जो कंपनीज एक्ट 2013 के फेवर में थी। देखो बनकर तैयार हुआ 2013 में। लेकिन कहानी कब से चालू हो गई थी? 2005 से। कोई भी लॉ बनता है ना तो बनते-बनते बहुत समय लग जाता है। इन्होंने शिफ्ट करवाया। इन्होंने रिकमेंड किया कि भैया अब पूरा लॉ बदलने की जरूरत है। अब उसे बनते-बनते इतना टाइम लगा। फिर फाइनली बीच में और आती है 2005 में कौन सी कमिटी? वैश कमिटी जो स्ट्रीमलाइन करती है प्रोसीक्यूशन मैकेनिज्म। व्हाट डू यू मीन बाय प्रोसीक्यूशन? कोर्ट-कचहरी। अब पहले तो कोर्ट में केसेस आते थे। 2013 जब से आए तो हमने अपना क्या बना लिया? एनसीएलटी। अपने खुद के सिस्टम्स बनाए कि हमारे केसेस फटाफट डिसॉल्व हो। तो प्रोसीक्यूशन मैकेनिज्म को लेकर उन्होंने बोला। फिर फाइनली सबसे अपडेटेड आया दैट वाज कंपनी लॉ कमिटी जो पूरे से इंप्लीमेंट करता है। किसको? कंपनीज एक्ट को भी 2013 और एलएलपी फुल फॉर्म बताओ। लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप। तो कुल मिलाकर इन दोनों को लाने वाला कंपनी लॉ कमिटी है। तो मैंने आपको तीन इम्पोर्टेंट कमिटी बताया। पहला लॉजिक क्या है? 1956 आया। देन उसके बाद ईरानी कमिटी। क्योंकि यह कंपनीज एक्ट 2013 को शिफ्ट करने की बात कर रही और फाइनली कंपनीज एक्ट 2013 को लाने वाला कौन था? कंपनी लॉ कमिटी। अब मैंने यह सिंपल शॉर्ट में बता दिया। आपकी बुक थोड़ा सा ज्यादा-ज्यादा लिखती है। है ना? तो बस यह फटाफट यह बस मार्क कर लो तो आपको सारे शॉर्ट वर्जन कंप्लीट हो जाएंगे। बताओ। जितने नाम है ना वह सब चेयरमैन है। मतलब आज मैं एक कमिटी बनाती हूं तो इस कमिटी का नाम क्या होगा? पिंकी कमिटी। दैट मीन्स चेयरमैन कौन है? पिंकी। अगर कमिटी का नाम क्या है? बाबा कमिटी। दैट मीन्स वह बाबा कौन है? चेयरपर्सन है। शास्त्री जी कौन है? चेयरपर्सन है। सचहार ये सब नाम है उन लोगों के जो चेयरपर्सन है। अच्छा तुम उस लास्ट वाले की बोल रही हो। ठीक है। इसमें नाम बताया है क्या? नाम नहीं बताया तो इतनी इम्पोर्टेंस भी नहीं। लेकिन हां बट ओब्वियस है उसका भी कोई ना कोई चेयरपर्सन होगा। एक बार गूगल सर्च करके देख लेंगे। ठीक है?
[17:57]देखो वापस से सबसे पहली कमिटी कौन सी है? 1952 बस यही इकलौती है जो ब्रिटिश वाले को क्या कर रही थी? खत्म करके क्योंकि 1913 क्या था? ब्रिटिश वाला था। बस यह ब्रिटिशर को कर रही थी। एक बार यहां पर अब क्या आ गया? 1956 आ गया। बाकी जितनी कमिटी है वह इंडियन गवर्नमेंट ने जो कंपनीज एक्ट 1956 बनाया वो उसको मॉडिफाई कर रही थी। लेकिन बस बाबा कमिटी 1930 ब्रिटिशर वाला कर रहा था बाकी कोई नहीं कर रहा था। बाकी तो जो बन चुका है उसका ही कर रहा था। ठीक है? चलो मार्किंग करते चलेंगे। यह तुम्हें कोर बातें बताएंगे। क्यों बच्चों? क्योंकि इतनी सारी बातें उतनी रेलेवेंट नहीं है। ठीक है? लेकिन एक बार रीड करोगे तो बस नॉलेज इंप्रूव होता है। उस सेंस में एक बार रीडिंग जरूरी है। अदरवाइज कोर कोर कोर बातें हैं। मतलब ये चीजें आती नहीं है। लेकिन स्टिल आती है तो आपको बस कोर बातें उसकी पता होनी चाहिए। मतलब कि जैसे मैं बोलूं ना कि इरेलेवेंट पार्ट भी एग्जाम में आ जाता है तो इरेलेवेंट पार्ट मैं आपको पढ़ा रही हूं और उसमें इतना ही याद करना है। बाकी चीजें याद करने की जरूरत नहीं है। क्योंकि कंपनीज एक्ट में इतनी इम्पोर्टेंट इम्पोर्टेंट बातें हैं। यह इतना भाव नहीं देना है। जितना देना है जितना मैंने बस मार्क करा है। डन। यह हो गया इरादी कमिटी तक मार्क हो गया। करो फटाफट। वह मैं ग्रुप में ना शेयर करती जाऊंगी ताकि नोट्स बनाने में आपको थोड़ी सी और आसानी हो जाए। हो गई यह सारी मार्किंग।
[19:28]रिमेनिंग पार्ट। बचा-कुचा पार्ट जो भी है। एग्जामिन किया उन्होंने।
[19:50]अभी पूरा हिस्ट्री चल रहा है। ठीक है? अभी कोई कोर बातें नहीं पढ़ रहे तुम।
[20:34]ओनली पार्टनरशिप। पार्टनरशिप एक्ट मुझे बताओ कि किसी ईयर का था? ईयर। 1932। 1932 मतलब क्या? अंग्रेज। ठीक है? अब सीधा 2008 में नीड समझ में आई एलएलपी की। मतलब हमेशा से क्या था अंग्रेजों के जमाने से? पार्टनरशिप एक्ट। एलएलपी उनको लगा कि भाई जैसे फॉर एग्जांपल अभी कंपनी का क्या पढ़ा हमने बताओ? पहले अनलिमिटेड ही था। धीरे-धीरे नीड समझ में आई भैया लिमिटेड हो जाए। ऐसे ही पार्टनरशिप हमेशा से क्या था? अनलिमिटेड। 2008 में नीड समझ में आई कि क्या हो जाना चाहिए? लिमिटेड हो जाना चाहिए। मतलब पार्टनरशिप में तो बहुत लेट सोचा है। 2008 मतलब कि 2000 में जंप हो गए ना। तुम लोग तो बोर्न हो ही चुके होगे ना। कब हुए थे बोर्न? 2007 में। जस्ट बच्चे। है ना? ठीक है? तो बहुत लेट सोचा। ठीक है? तो पहले से नहीं था। इसने इनिशिएट किया बातें चल रही थी ना देखो। 2005 से बातें चलनी चालू हो गई थी ना। कौन सी कमिटी? ईरानी 2005 से बातें चालू हो गई थी। कि भाई कंपनीज एक्ट 2013 भी होना चाहिए और क्या होना चाहिए? एलएलपी एक्ट। मतलब कि कमिटी का रिकमेंडेशन बहुत टाइम से चालू हो जाता है। कंपनीज एक्ट को बनने में समय लगा। क्यों? क्योंकि देखो प्रोसेस तुम्हें पता है। प्रोसेस क्या है? लोकसभा, राज्यसभा, प्रेसिडेंट। तो इस प्रोसेस में बहुत टाइम लगा। एलएलपी को मंजूरी जल्दी मिल गई इसलिए वह 2008 में आ गया। ठीक है? चलो। यह तक क्लियर है। बढ़े आगे। बढ़ते हैं आगे। मैंने आपको बताया कि तीन चीजें इंपोर्टेंट है। ठीक है? यहां पे कौन सी वाली रिपोर्ट की बात हो रही है? ईरानी कमिटी। है ना? तो ईरानी की रिपोर्ट। पूरा नाम जेजे ईरानी है। अब देखो यहां पूरी ना वही हिस्ट्री बताई है। कौन सी वाली हिस्ट्री बताई है? जनरल हिस्ट्री। जेजे ईरानी रिपोर्ट। यह जो कमिटी है इसके चेयरमैनशिप में चेयरमैन कौन थे उसके? डॉक्टर जेजे ईरानी। हू वाज दी क्या थे? फॉरमर एमडी। एमडी का फुल फॉर्म मैनेजिंग डायरेक्टर। किसके? टिस्को। जानते हो टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड। कब ये कमिटी बनी थी? 2004 में। 2004 में बनी है और इन्होंने अपनी रिपोर्ट कब दी है बनाकर? 2005 में। इन्होंने ही रिकमेंडेशन दिया कि भैया अब नया लॉ लाने की जरूरत है। इन्होंने ही बोला कि भैया 1956 को अब क्या करो? रिवाइज करो। अब इसको चेंज करो। इन्होंने अपनी कुछ बातें रखे। क्या-क्या बातें रखें? कि हमें क्या करना चाहिए? फ्लेक्सिबिलिटी फॉर दी प्राइवेट कंपनी एंड स्मॉल कंपनी। एक बार सोचो। पहले क्या होता था? 1956 का लॉ क्या होता था कि कंपनी में कोई भी रूल्स रेगुलेशन लग रहे हैं ना तो पब्लिक कंपनी में भी सेम। प्राइवेट कंपनी में भी सेम और स्मॉल कंपनी में भी सेम। अब क्या फीलिंग आ चुकी है? भैया छोटी कंपनी है और प्राइवेट कंपनी में कहीं ना कहीं छोटी होती है। अगर पब्लिक कंपनी से कंपेयर करोगे तो प्राइवेट कंपनी में छोटी है और स्मॉल कंपनी तो स्मॉल कंपनी छोटी है। तो भाई इनको क्यों ज्यादा रूल्स रेगुलेशन आप फॉलो कर रहे हो? तो प्लीज इनके लिए थोड़ी सी क्या रखो? फ्लेक्सिबिलिटी रखो। यह जेजे ईरानी ने रिकमेंड किया। इनकी रिपोर्ट में यह बातें लिखी थी। पहला पॉइंट समझ में आया? दूसरा इन्होंने क्या बोला? और स्ट्रिक्ट गवर्नेंस करना है। स्ट्रिक्ट गवर्नेंस। फॉर दी हाई इंपैक्ट कंपनी। मतलब वह कंपनी जिसका अच्छा खासा इंपैक्ट पड़ता है। उसमें हमें ज्यादा से ज्यादा रूल्स रेगुलेशन लगाने है। मतलब उन्हें स्ट्रिक्ट करो। मतलब छोटी-मोटी कंपनी है इनको थोड़ा सा सिंपल करो। और जो ज्यादा इफेक्ट पहुंचाती है जैसे कि हमारी पब्लिक कंपनीज है, लिस्टेड कंपनी है इनको ज्यादा रूल्स रेगुलेशन लगाओ। हम क्या पढ़ रहे हैं अभी? हमारी जेजे ईरानी की कमिटी थी। हमने यहां इस कमिटी के रिपोर्ट में मार्केट को एनालाइज किया। ठीक है? और उस एनालाइज कर के हमें यह समझ में आया कि हमें यह-यह करना चाहिए। तो यह रिकमेंडेशन किसको दिया जाता है? सरकार को दिया जाता है। लेजिस्लेचर को दिया जाता है कि भैया लॉ में यह चेंजेज करो। रिकमेंडेशन है। सजेशन है। मान लोगे तो अच्छी बात। नहीं मानोगे तो हम कुछ नहीं क्योंकि हम तो रिसर्च करके बता रहे हैं कि यह बेटर होगा यह अच्छा होगा। तो इसीलिए यह रिकमेंड बोला जाता है। यह सारी बातें इंप्लीमेंट हो यह जरूरी नहीं है। लेकिन हां यह इंप्लीमेंट हुई थी यह बातें। तुम जैसे-जैसे अभी कंपनी लॉ पढ़ोगे तो आपको समझ में आएगा कि प्राइवेट कंपनी में देखना रूल्स रेगुलेशन बहुत कम है। आपको बहुत सारी जगहों पे देखोगे प्राइवेट कंपनी एग्जेंप्ट है। प्राइवेट कंपनी एग्जेंप्ट है। उनको यह करने की जरूरत नहीं है। दैट मीन्स रूल्स रेगुलेशन कम है। नेक्स्ट यूनिफॉर्म स्टैंडर्ड्स किसके लिए? गवर्नमेंट एंटिटीज के लिए। गवर्नमेंट एंटिटीज मतलब जितनी भी गवर्नमेंट कंपनीज है उनको बोला भैया एक जैसा यूनिफॉर्म स्टैंडर्ड रखना है। देन सिंपलफाइड करना है रेगुलेशंस को और एनहेंस करना है। ज्यादा से ज्यादा डिस्क्लोजर जितना डिस्क्लोजर उतनी ट्रांसपेरेंसी। तो ट्रांसपेरेंसी को हमें ज्यादा सामने प्रमोट करना चाहिए। अलाइनमेंट विद दी क्या लिखा है? भाई वर्ल्ड लेवल में हमें एग्जिस्ट करना है। यहां इंडिया में तुम कुछ भी कस्टमइज वर्जन कर लो इंडिया के अकॉर्डिंग इनकी पॉपुलेशन के अकॉर्डिंग लेकिन आपको वर्ल्ड लेवल में अगर एग्जिस्ट करना है उनसे अगर कॉम्पिटिशन करना है तो उनके साथ अलाइन करना पड़ेगा। तो ये जेजे ईरानी रिपोर्ट किसने बनाई? कौन चेयरपर्सन थे? इनकी कमिटी का मेन पर्पस क्या था? 1956 को रिवाइज करना। तो 1956 में उन्हें यह सारी गलतियां नजर आ रही थी जो उन्होंने रिकमेंड किया। अब यह आपकी बुक आपकी बुक में जो यह अभी हमने पढ़ा ना कि कौन थे ये? रिपोर्ट बनाई। यह देखो लिखा है पूरा टाटा सन जेजे ईरानी फॉरमर डायरेक्टर थे। इन्होंने प्रपोज किया। क्या प्रपोज किया? यह अंडरलाइन कर लो। कि हम रिवाइज करना चाहते हैं क्या? कंपनीज एक्ट 1956। फिर इनकी जो रिपोर्ट की रिकमेंडेशन थी जो मैंने आपको शॉर्ट में बताया कि भैया क्या था ये? पहला पॉइंट। पहला पॉइंट मैंने शॉर्ट में क्या बताया? प्राइवेट और स्मॉल कंपनी को क्या करना? सिंपलफाइड को फ्लेक्सिबिलिटी दो। है ना? तो देखो इन्होंने क्या लिखा है? प्राइवेट स्मॉल कंपनी नीड टू गिव फ्लेक्सिबिलिटी एंड द फ्रीडम ऑफ द ऑपरेशन एंड कंप्लायंस एट अ लोवर कॉस्ट। लो कम से कम लगे। खर्चा कम हो। ताकि वह भी मोटिवेट हो कि भैया हां प्राइवेट कंपनी बना के हम बिजनेस चला सकते हैं। नेक्स्ट कंपनी विद दी हायर पब्लिक इंटरेस्ट जिसमें ज्यादा इंपैक्ट होता है मतलब कि पब्लिक कंपनी। पब्लिक कंपनी में जनता का इंटरेस्ट ज्यादा जुड़ा है तो भैया इनको थोड़ा सा स्ट्रिक्ट हो जाओ। क्यों? क्योंकि हम नहीं चाहते कि जनता को कहीं से कोई भी नुकसान हो। नेक्स्ट गवर्नमेंट कंपनीज पब्लिक फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन ये सब गवर्नमेंट कंपनी और पब्लिक फाइनेंसियल। ये पब्लिक फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन कौन से? गवर्नमेंट कंपनी तो समझ में आता है। पब्लिक फाइनेंसियल। अगर देखो ऐसे याद नहीं आता ना तो नाम से काम समझो। नाम क्या है? पब्लिक। और फिर यहां लिखा है? फाइनेंसियल। मतलब फाइनेंस प्रोवाइड करती है। बैंक्स एंड ऑल की बात हो रही है। जितने भी पब्लिक फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन है जिनका फाइनेंस से लेना देना है, लोन से लेना देना है। भैया गवर्नमेंट कंपनी और पब्लिक फाइनेंस शुड बी सब्जेक्ट टू क्या लिखा है? सिमिलर पैरामीटर्स। क्यों? क्योंकि भैया गवर्नमेंट एंटिटीज से जनता को फर्क पड़ता है और पब्लिक फाइनेंस से जितनी भी चीजें जुड़ी हुई है। भैया जनता इफेक्ट होगी ना। तुम रेट वगैरह इंटरेस्ट रेट ऊपर नीचे कर दो तो दिक्कत हो जाती है। तो बोला भैया इनका ना पैरामीटर सेम ही रखना। हम चाहते हैं गवर्नमेंट इसमें थोड़ा सा ज्यादा सर्विलेंस रहे। ज्यादा नजर रखे। नेक्स्ट क्या करना है? सिंपलफाइड रेगुलेटरी रेजीम बैक बाय दी डिस्क्लोजर मतलब हमें ज्यादा से ज्यादा डिस्क्लोजर को फोकस करना है ताकि ट्रांसपेरेंसी रहे। नेक्स्ट अट्यून मतलब होता है अवेयर ऑफ दी इंडियन कंपनी लॉ विद दी ग्लोबल रिफॉर्म। हमें हमारा इंडिया का लॉ ऐसे बनाना है जो ग्लोबली एग्जिस्ट कर सके। कॉम्पिट कर सके। कुल मिलाकर। क्या यह बातें समझ में आ रही है? अभी हमने स्टार्टिंग से तीन चीजें पढ़ी। सबसे पहले क्या पढ़ा? पूरी की पूरी हिस्ट्री।
[28:30]कब कैसे इवॉल्व हुई। ठीक है? फिर हमने क्या पढ़ा? पूरी की पूरी कमिटीज। जो इवॉल्व हुई। उन्होंने कहा भैया हम अंग्रेजों की कमिटीज नहीं बताएंगे। हम इंडियन कमिटीज बनाएंगे जिन कमिटीज ने हमारे दो एक्ट पर बहुत अच्छे से काम किया। ठीक है? चलो उसके बाद जेजे ईरानी रिपोर्ट को थोड़ी ज्यादा इम्पोर्टेंस। उनके रिकमेंडेशन को हमने पढ़ा क्योंकि उनका इम्पोर्टेंस 2013 में बहुत ज्यादा था। फिर उसके बाद हमने क्या पढ़ा? कंपनीज एक्ट 2013। इसकी इन्होंने ब्रीफिंग दी और कभी पॉइंट वाइज बताई और कभी पैराग्राफ में बताई गिजपीटी बातें।
[29:18]अब इसके बाद जनरल बातें खत्म बिल्कुल स्पेसिफिक बातों से स्टार्ट करेंगे नेक्स्ट क्लास में तो आज की सभा समाप्त क्लियर है बच्चों?



