[0:00]हर एक अक्षर जिस तरीके से लिखा जाता है तो वो मूवमेंट भी अपने आप में इज इन हार्मोनी इन अलाइनमेंट विद द यूनिवर्सल रिदम ट में आपने दंड डाला दंड से फिर आप नीचे की ओर उसका मूवमेंट होता है इसीलिए तल शब्द जो है अटल वितल सुतल तलातल पाताल जो तल शब्द है वो नीचे की ओर नीचे की ओर है ई से गति ई के गति में चांचन ले ई को जब लिखा भी जाता है उसको भी इतने कॉन्शियसली वल्व किया गया है हम कहते हैं ना कि शिवजी के डमरू से शब्द जन्म लिया जस्ट डमरू बजता है तो एक ऐसे चंद्र बनता है अर्ध चंद्र एक ऐसे बनता है ये दोनों अर्ध चंद्र लिपियों में प्रयोग होता है आज विज्ञान में 100 से ऊपर हमारे पास फंडामेंटल पार्टिकल्स हैं जो हमारे अक्षर हैं वर्णमाला में अगर वो भी फंडामेंटल ध्वनियां हैं तो उनका विज्ञान क्या है द से जितने भी शब्द बने हैं तो वहां पर हम देखेंगे कि एक फोर्सफुल मोशन व्हिच स्प्लिट्स द से द्वार द्वि द्विधा इवन आप अंग्रेजी में आप देखो डुल ड्यू इट डिवीजन डिफरेंशिएट इसी प्रकार प्रत्येक अक्षर का अलग-अलग अर्थ और उसके पीछे भी एक विज्ञान और तंत्र उसको मात्र का विज्ञान के नाम से जानता है तब तो प्रत्येक ध्वनि में कुछ ना कुछ अर्थ होगा कुछ भी निरर्थक नहीं है ऐसा कोई भी अक्षर नहीं है जो मंत्र नहीं है
[1:25]साथियों इस महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हमने निर्णय किया कि संस्कृत के अक्षरों में जो छुपा आध्यात्म है जो रहस्य है उसको डिकोड किया जाए क्योंकि हम सभी को पता है कि भगवान शिव के डमरू से माहेश्वर सूत्रों का जन्म हुआ और अगर आप इसका दर्शन देखें तो भगवान शिव परम तत्व हैं उन्हीं की चेतन शक्ति से हम मनुष्यों को प्रत्येक जीव को एक चेतना मिली है और उस चेतना में अक्षरों का ध्वनियों का जन्म होता है हमने इस पॉडकास्ट में कठिन प्रश्न किए हैं कि ध्वनि जन्म कैसे लेती है जब जन्म लेती है तो अर्थ को कैसे ग्रहण करती है जब अर्थ बनते हैं तो वही अर्थ क्यों बनते हैं और अगर हमारे संस्कृत की जो वर्णमाला है वो फंडामेंटल साउंड्स हैं तो उनमें जो क्रम है वो क्रम क्यों है आ के बाद इ ही क्यों आता है तो ऐसे बहुत ढेर सारे गहरे प्रश्नों पर इस पॉडकास्ट में चर्चा है और इसीलिए आपको आज बहुत आनंद आने वाला है और इस महाशिवरात्रि पर स्वर के इस विज्ञान से जिसको तंत्र में मात्र का विज्ञान कहा गया है आपको ये बात जानकर हैरानी होगी कि हर एक अक्षर के सैकड़ों अर्थ होते हैं प्रत्येक अक्षर पर पुस्तकें हैं और यह सभी अर्थ आपको ध्यान की अवस्था में आपके अंदर जागृत होते हैं तो हमने यह प्रयास किया है कि इस महाशिवरात्रि पर आपको शिव स्तोत्र से जोड़ा जाए जो 11 प्रमुख शिव स्तोत्र हैं जो सबसे दार्शनिक आध्यात्मिक और शक्ति दाई हैं आप हमारे शिक्षणम प्लेटफार्म पर इन सभी शिव स्तोत्र का लबध सस्वर पाठ सुन सकते हैं उसके साथ-साथ उच्चारण कैसे किया जाए यह भी हम इस प्रोग्राम में सिखा रहे हैं तो आप उच्चारण के साथ मीनिंग के साथ शिव और स्वर के बीच जो आध्यात्मिक संबंध है उससे जुड़ सकते हैं और अपनी चेतना को शुद्ध कर सकते हैं अगर आप महाशिवरात्रि के पहले जुड़ेंगे या आज जुड़ेंगे तो आपको अगले तीन महीने तक लाइव सपोर्ट भी मिलेगा प्रत्येक सोमवार को आपको लाइव सेशन भी मिलेंगे यहां पर आपको फर्द गाइड किया जाएगा इसके साथ-साथ प्री बुकिंग पर यह प्रोग्राम आपको कम से कम धनराशि में भी उपलब्ध होगा तो आप सभी पॉडकास्ट को देखें ज्ञान का संवर्धन करें और इस पॉडकास्ट को देखने के बाद इस महाशिवरात्रि हमारी शिव स्तोत्र साधना से जुड़ना ना भूलें अगर आपको कोई जानकारी चाहिए कोई क्वेरी है तो स्क्रीन पर आ रहे नंबर पर मैसेज करें आप सभी को महाशिवरात्रि की अनंत शुभकामनाएं आइए पॉडकास्ट को प्रारंभ करते हैं
[3:53]आचार्य जी प्रणाम बहुत सौभाग्य की बात है कि मैं फिर से टीम हमारी फिर से आपके साथ बैठ पा रही है जब जब मैं आपसे मिलता हूं तो हम लोग भारतीय ज्ञान परंपरा के किसी ना किसी विशिष्ट अंग पर बात करते हैं गहराई में जाने का प्रयास करते हैं संस्कृत भाषा के वैशिष्ट्य पर हमने बात की कि संस्कृत भाषा दूसरी भाषाओं से कैसे विशिष्ट है उसके बाद हमने अवधान पर चर्चा की कि किस तरह से हमारे ऋषि मुनि बहुत ढेर सारी चीजों को याद रख सकते थे अब जब हम प्रथम बार मिले थे और पॉडकास्ट किए थे तो उसमें एक बहुत ही सूक्ष्म विषय आपने छुआ था बहुत ज्यादा उस पर बात नहीं हो पाई थी लेकिन वो मेरे मन के बहुत बहुत प्रिय विषय है जिसको हम अब मैं उसमें जाना चाहता हूं जैसे व्युत्पत्ति होती है शब्द की या निरुक्त या शिक्षा उसका एक एक वेदांग में हम जाते हैं कि जो हमारे अक्षर हैं या छोटी-छोटी इकाई है ध्वनि की वो किस तरह से अर्थ बनाती है
[4:56]उसका क्या प्रभाव है विज्ञान में हम क्या करते हैं कि किसी भी ऑब्जेक्ट को देखते हैं तो उसकी सूक्ष्म स्थ स्तर पर जाते हैं कि कैसे वो बना हुआ है तो हम एटम्स तक जाते हैं और फिर उसके बाद सब एटॉमिक लेवल पर जाते हैं आज विज्ञान में 100 से ऊपर हमारे पास फंडामेंटल पार्टिकल्स हैं तो जो हमारे अक्षर हैं वर्णमाला में अगर वो भी फंडामेंटल ध्वनियां हैं तो उनका विज्ञान क्या है वो कैसे आपस में कंबाइन करते हैं कैसे अर्थ बनाते हैं पर प्रारंभ यहां से करेंगे कि संस्कृत वर्णमाला में जब हम जाते हैं तो हम या तो उन्हें अक्षर कहते हैं या वर्ण कहते हैं तो क्या दोनों में कुछ अंतर है और वर्ण माला क्यों कहते हैं वर्ण समूह क्यों नहीं कहे वर्ण धारा कह देते वर्ण का कुछ भी हम गुच्छा कह देते ये वर्णमाला क्यों है और इनको अक्षर कहने में क्या कुछ और दृष्टिकोण है इसके विषय में बताइए जैसे आपने बोला कि आपके हृदय के करीब है वर्णमाला एक ऐसा विषय है जिसको कोई भी व्यक्ति अगर सजगता के साथ
[6:10]इस विषय को लेकर अध्ययन करना प्रारंभ करें मेरा यह अनुभव है कि हम संपूर्ण जीवन एक जीवन ही पर्याप्त नहीं है इसके पीछे के रहस्य को उद्घाटन करने में अनेक तत्व अनेक रहस्य हर एक वर्ण के पीछे है उसमें निहित है गूढ़ है एक एक अक्षर का जो विज्ञान है जो रहस्य है जो तत्व है जो शक्ति उसमें निहित है उसको जानना और उसको प्रयोग में लाना और उसके प्रयोग से क्या लाभ होता है उसको भी जानना और लाभ उठाना भी यह बहुत ही एक सुंदर प्रक्रिया है
[7:05]अच्छी बात है कि आज हम इसके अलग-अलग पहलूओं को लेकर हम बात करेंगे जो प्रश्न आपने पूछा पहले कि जो छोटी इकाई है भाषा की सबसे छोटी इकाई जो वर्ण होते हैं ध्वनियां होती है कोई भी भाषा हो भाषा के हर एक छोटी इकाई को आइडेंटिफिकेशन के बाद एक व्यवस्थित रूप देना उसको एक व्यवस्थित रूप में उसको सजाना
[7:44]ये अपने आप में एक विज्ञान है एक कला है अंग्रेजी में हम सुनते हैं कि ये अल्फाबेट है
[7:56]इसको क्यों अल्फाबेट कहा जाता है उसके पीछे लोग ऐसे अल्फा बीटा ए बी इससे जोड़ के कुछ बताते हैं पर हमारे यहां पे इसको दो अलग-अलग नामों से जाना जाता है
[8:13]साधारण रूप से हम कहते हैं कि ये वर्णमाला है जो सर्व भारतीय भाषा में भी ये प्रचलित है वर्णमाला विशेष रूप से पानी के व्याकरण में हम आएंगे तो इसको वर्ण समाम नाय या अक्षर समाम नाय यह कहा जाता है जो आपने पूछा ना कि अक्षर समूह क्यों नहीं कहा गया है ये भी कहा गया है अक्षर समाम नाय मतलब उसको एक जगह इकट्ठा करना उसके पीछे अलग बात है कि क्यों इसको अक्षर समाम नाय कहा गया है कि एक एक जगह में एक व्यवस्थित रूप में उसको इकट्ठा किया गया है
[8:54]वर्णमाला जैसे माला में क्या होता है वह धारा या गुच्छा आप कहो पर माला में एक क्रम का अनुसरण होता है एक व्यवस्थित क्रम होता है फूलों को एक रीति से सजाया जाता है उसको तो देखे तो माला के रूप में और उसमें एक रिदम है ठीक है इसी प्रकार वर्णों को एक व्यवस्थित क्रम में यहां सजाया गया है यहां केवल एक अल्फाबेट के फॉर्म में डाल देना कि ये अक्षर है इन अक्षरों को बस एक जगह रख दो
[9:31]पर यहां पर जैसे अंग्रेजी में आप बोलो कि ए है बी है सी है डी है ई है तो ए से लेकर जड तक जितने अक्षर है उसको रख दिया गया है पर अगर पूछा जाए कि ए के बाद बी क्यों
[9:48]पहले बी क्यों नहीं आया फिर उसके बाद सी क्यों ए एक ववल है बी सी डी ये कंसोनेंट है फिर एक ववल है ई ववल है तो ऐसे कभी ववल कभी कंसोनेंट और इसको इस क्रम में ए टू जेड जिस क्रम में है इस क्रम में क्यों रखा जाता है मैं क्यों बोलूं ए बी सी डी
[10:13]उसके पीछे अगर मुझे लॉजिक को जानना है कोई छोटा बच्चा अगर पूछे हमें कि इसको ऐसे क्यों बोला जाता है हमारे पास कोई लॉजिकल आंसर नहीं होगा पर संस्कृत वर्णमाला में अगर कोई पूछे कि अ के बाद आ क्यों है अ आ के बाद ई ई क्यों है व्यंजन वर्ण में क ख ग घ ण ये क्यों आते हैं फिर उसके बाद तुरंत च छ ज झ य आते हैं फिर ट ठ ड ढ ण इस प्रकार क्रम में क्यों सजाया गया है अ से लेकर ह तक सारे ध्वनियों को सारे वर्णों को सारे अक्षरों को एक बहुत ही युक्त समत विज्ञान समत व्यवस्थित क्रम में रखा गया है
[11:09]वो उसके पीछे रहस्य क्या है उस बारे में हम चर्चा करेंगे और धीरे-धीरे एक है उसका जो ध्वनि गत मूल्य है उसको कैसे सजाया गया है उसके पीछे का विज्ञान क्या है दूसरा है उसका जो अर्थ गत जो रहस्य है हर एक अक्षर का हर एक वर्ण का एक स्वतंत्र अर्थ होता है और वह एक ही अर्थ में सीमित नहीं है अनेक अर्थ में फिर अनेक अर्थ उसमें समा हुए हैं
[11:44]एक एक अक्षर का अनेक अर्थ हमको मिलता है कैसे मिलता है कि हमारे प्राचीन मुनि ऋषि लोग एक एक अक्षरों को लेकर उसमें ध्यानस्थ होते थे
[11:57]उसको अपने सत्ता में उसकी उपस्थिति को अनुभव करते थे फिर उसके अर्थ क्या है वह भी उनके चेतना में अभिव्यक्त होता था उन अर्थों को वह फिर सजो के सजाकर रखते थे तो इसी प्रकार हमारे पास एकाक्षरी कोष मतलब एक एक अक्षर का जितने सारे अर्थ होते हैं सारे अर्थों को एक जगह रख के कोष ग्रंथ बनाया गया है
[12:28]एक नहीं दो नहीं तीन नहीं ती से अधिक एकाक्षर कोष जिसमें हर एक अक्षर का क्या अर्थ है कितने अर्थ है सबको इकट्ठा रखा गया है इसके बारे में हम आगे चलकर बात करेंगे पर जो हमारा प्रश्न था जिससे हम शुरू करना चाहते थे वो है कि इनको ये ये जो इकाई है छोटे-छोटे इकाई है अ है क है इनको वर्ण क्यों कहा जाता है इनको अक्षर क्यों कहा जाता है किसी और नाम से क्यों नहीं पुकारा है तो इस पर हम चर्चा करते हैं पहले हम चर्चा करेंगे कि इनको अक्षर क्यों कहा जाता है अक्षर विज्ञान अक्षर जो लेखन होता है जो प्रतीकात्मक रूप में उसका ध्वनि रूप भी है लिखित रूप में है दोनों को अक्षर कहा जाता है हालांकि लिखित जो स्क्रिप्ट होता है उसको लिपि कहते हैं पर उसका लिखित रूप को भी हम अक्षर ही कहते हैं अक्षर शब्द को ही हम अगर देखें ये एक ज्यादातर इसका प्रयोग हम उपनिषदों में जब ब्रह्म विद्या का प्रसंग आता है भगवान का सनातन का ध्रुव का अचल का सनातन का जब बात होती है तब अक्षर है ये अक्षर है अक्षय है अविनाशी है अक्षर शब्द का अर्थ है अविनाशी जिसका क्षरण नहीं होता है क्षरण मतलब विनाश नहीं होता है जिसका ठीक है मतलब ये जो परम सत्ता है चरम सत्ता है जो सुप्रीम है डिवाइन है उनके लिए इस शब्द का प्रयोग होए तो अच्छा है पर ध्वनियों के लिए क्यों है
[14:20]इसके पीछे का विज्ञान है कि जो आदि स्पंद के बारे में बात होती है इसको स्पंदन भी कहा जाता है जब हम कुछ उच्चारित करते हैं एक स्पंदन पैदा होता है एक वाइब्रेशन एक वाइब्रेशन और हर एक वाइब्रेशन जो है जो वो वाइब्रेशन अगर ये पूछा जाए फिजिक्स में भी आप जाओ अगर पूछे कि जब जैसे एक स्ट्रिंग इंस्ट्रूमेंट है वो स्ट्रिंग इंस्ट्रूमेंट को जब हम प्रेशर देते हैं तो एक स्पंदन का जन्म होता है ठीक है जब स्ट्रिंग हम हिट नहीं करते हैं उसको चालित नहीं करते हैं तो वो स्थिर रहता है या एक बार हमने स्ट्रिंग को दबाया तो एक स्पंदन एक ध्वनि उससे जन्म हुआ तो वो स्ट्रिंग जब उसमें जब स्पंदन बंद हो जाता है जो स्पंदन पैदा हुआ जिसको हम सुने उसका क्या हुआ वो कहां चला गया तो कई कई लोग यह मानते हैं कि इट डाइज इट गोज इट वैनिशेज उसके बाद कुछ नहीं नष्ट हो जाता है क्या वास्तव में नष्ट होता है
[15:38]तो फिजिक्स में भी अलग-अलग थ्योरीज है वैक्यूम थ्योरी है इसको एक्सपेरिमेंट किया जाता है कि शब्द उत्पन्न होने के बाद क्या शब्द रहता है या शब्द मर जाता है ये तो एक बहुत फंडामेंटल क्वेश्चन जो उपनिषदों में मिलता है ध्वनियों के बारे में मिलता है और मनुष्यों के आत्मा के बारे में भी मिलता है ठीक है जैसे नचिकेता यम को पूछता है कि क्या है रहस्य तो इस रहस्य को उद्घाटन करने के लिए विज्ञान में भी यह प्रश्न पूछा गया है उस पर भी एक्सपेरिमेंट हुआ है कि शब्द उत्पन्न होने के बाद क्या होता है शब्द का शब्द रहता है या शब्द नहीं रहता है मिट जाता है उसका उत्तर फिजिक्स अलग-अलग तरीके से देता है पर प्राचीन मुनि ऋषियों का ये जो प्रश्न था उसका जो समाधान उनको मिला वो समाधान में यह कहते हैं कि शब्द नित्य एक बार शब्द उत्पन्न होता है कोई विस्पंदन होता है वाइब्रेशन मैनिफेस्ट होता है वो कभी मरता नहीं शब्द नित्य वो अमर है अक्षर इसीलिए इसको कहा जाता है कहां रहता है आकाश में
[16:59]वह आकाश में अब्जॉर्ब होकर रहता है इसीलिए वह जो है अनभ व्यक्त ये अनअभ व्यक्त अवस्था में रहता है जब व्यक्त होने की इच्छा जागृत होती है जैसे एक को हम बहु श्याम तो उसको एक्सपेंशन होता है वो एक्सपेंशन जो है वो आ का शक्ति है आ आकाश आनंद आलाप आह्लाद इस प्रकार का जो शब्द बनता है उसमें आ का प्रयोग करा जाता है आ आलाप आलाप करन हां करन क्र धातु जो है वो बनता है और होना ये उ से परवे स्टेट ऑफ एक्जिस्टेंस से आता है ऑक्यूपाइंग स्पेस अगर उ में सीकिंग द स्पेस सीकिंग ये जो मीनिंग है कुछ चाहना ये अर्थ ई में आता है तो उ में उसको ऑक्यूपाइड करना ये अर्थ आता है ठीक है परवे सट ऑफ एेंस को रिप्रेजेंट करता है र जो है वो वाइब्रेंट स्टेट ऑफ एक्जिस्टेंस को रिप्रेजेंट करता है तो इसी प्रकार आप देखो क जो है क्रिएशन को रिप्रेजेंट करता है क के उच्चारण में भी आप देखो अल्प प्राण है वो मिनिमम एयर का रिलीज होता है तो क में एक कंसंट्रेशन की अवस्था हो जाए ख में खुलापन होता है क में कंसंट्रेशन होता है और क्रिएशन के लिए कंसंट्रेशन की बहुत आवश्यकता है ठीक है तो ये अ से आ आ से ई ई से ई और ई जो है क्योंकि वो निकट का प्रतीक बनता है जैसे अ सर्वोमत्व को दर्शाता है य नाई का चांचल्य का गति का बोधक है है ना गति मतलब का बोधक है गति का बोधक है गति का बोधक है ठीक है तो वो जो है वो परवे स्टेट ऑफ एक्जिस्टेंस को रिप्रेजेंट करता है र जो है वो वाइब्रेंट स्टेट ऑफ एजिस्टेंस को रिप्रेजेंट करता है तो इसी प्रकार आप देखो ख जो है क्रिएशन को रिप्रेजेंट करता है



