[0:08]बहुत पुरानी बात है। धौलपुर नामक गांव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम सुखीलाल था। वो बहुत धनवान था। उसका आलीशान घर और संपत्ति की कोई कमी नहीं थी। और दूसरे का भोला राम जो बहुत गरीब था, उसे दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से मिलती थी। फिर भी, भोला राम दयालु और नेक दिल था। वो रूखी सूखी रोटी खाकर ईश्वर का धन्यवाद करता और मेहमानों का अपना हैसियत से स्वागत करता। सुखीलाल इसके विपरीत कंजूस और घमंडी था। उसे मेहमान और गरीब रिश्तेदार बिल्कुल भी पसंद नहीं थे। वह गरीबों को तुष्ट समझता था और अपनी दौलत पर इतराता था। सुखीलाल की हवेली के चौड़े दरवाजे चमक रहे हैं। सामने उसका आंगन साफ-सुथरी हवेली। वहीं कुछ दूरी पर भोला राम का छोटा सा झोपड़ा। मिट्टी के बर्तन और एक तंग सा चूल्हा था। एक दिन एक बूढ़ी औरत गांव में आती है। बूढ़ी औरत की चाल थकी हुई पर आंखों में रोशनी थी।
[1:16]सुखीलाल के आलीशान घर का दरवाजा खटखटाती है।
[1:23]बेटा, मैं बहुत लंबे रास्ते से आई हूं। बहुत थक आई हूं। क्या मुझे एक रात का आसरा और थोड़ा सा खाना मिल सकता है क्या? मेरे पास कुछ भी नहीं है। बस तुम्हारी दया की उम्मीद है बेटा। मदद करो बेटा। अरे बुढ़िया, क्या तूने मेरी हवेली को कोई धर्मशाला समझ लिया है क्या? मुंह उठा के दरवाजा खटखटा दिया। अरे तुम जैसे गंदे कपड़े वाले यहां नहीं रुक सकते। मेरे पास तुम्हारी तरह भिखमंगों के लिए समय और जगह नहीं है। मेरी बात कान खोल के बुढ़िया सामने जो टूटा-फूटा घर दिख रहा है ना वहां मेरा दोस्त भोला राम रहता है। वो तुम जैसे गरीबों का स्वागत करता है। उसी के पास जाओ। चले आते हैं मुंह उठाकर किसी का भी दरवाजा खटखटाने। बूढ़ी औरत के चेहरे पर एक क्षण के लिए दुख और क्रोध भाव आया। उसने धीरे से सिर झुका लिया और बोली। ठीक है बेटा, मैं तुम्हारी बात मानती हूं। शायद भोला राम के पास मेरे लिए जगह हो। धन्यवाद बेटा, धन्यवाद। वो चुपचाप पलटी और अपने थके हुए कदमों से धीरे-धीरे भोला राम के घर की ओर बढ़ी। भोला राम का टूटा फूटा घर खपरेल की छत, टूटी दीवारें। बूढ़ी औरत ने दरवाजा खटखटाया।
[2:50]इसके बाद अंदर से भोला राम हंसते हुए बाहर आया। अरे माताजी नमस्ते। नमस्ते आप कैसे आई? अरे बाप रे बाप रे बाहर बहुत धूप है। एक काम करिए आप पहले अंदर आइए। अंदर आइए धूप में काहे खड़े हैं आइए ना। बेटा मेरी बात सुनो मैं बहुत थकी हुई हूं। लंबा रास्ता तय करके आई हूं। बस एक रात के लिए आसरा चाहिए बेटा। अरे माताजी ये तो आपका अपना ही घर है। पहले अंदर आइए। बैठ के पानी पीजिए। थोड़ा सांस लीजिए। बहुत थकी हुई हैं। फिर बाकी की बात बाद में करेंगे। आइए।
[3:39]रात का दृश्य, लालटेन टिमटिमा रही थीं। भोला राम ने अपने हिस्से की सूखी रोटी और पानी उनकी थाली में परोसा। माताजी हमारे पास यही है लेकिन दिल से दे रहे हैं। इसीलिए अब बिना संकोच रहिए। बेटा तुम्हारे पास तो खुद इतना कम है। फिर भी मुझे अपने हिस्से का खाना दे रहे हो। यह मैं कैसे ले लूं बेटा? माताजी मेहमान तो भगवान का रूप होता है। अब हमारे पास भले ही खाना कम हो लेकिन आपका स्वागत करने का मौका मिला। यही हमारे लिए अनमोल है। आप तो खाइए मन हल्का होगा। थक गई होगी ना खाइए खाइए। बुढ़िया की आंखों में आंसू आ जाते हैं। बेटा तुम्हारा दिल सोने से भी कीमती है। मैंने बहुत से घर देखे लेकिन तुम जैसा स्वागत कहीं नहीं मिला। आनंद आ गया। हां अब अच्छा लग रहा है। अच्छे तो देखो बेटा भोला राम तुमने मेरे साथ इतना प्यार दिखाया। मैं इस गांव में एक जरूरी काम से आई हूं। माताजी हम आपकी बात का मतलब नहीं समझे। मतलब आप कौन हैं? और यह कौन से काम की बात कर रहे हैं आप? बेटा, मैं कोई साधारण औरत नहीं हूं। 50 साल पहले मैं इसी गांव में रहती थी। मेरे पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी। सोने के सिक्के, कीमती जवाहरात सब कुछ था मेरे पास। मेरा एक भरा पूरा परिवार था। मेरे पति और दो-दो बच्चे थे।
[5:32]हां एक दिन की बात है मेरे पति और मेरे बच्चे बस से दूसरे गांव जा रहे थे। बस पलट गई और मैं उन्हें बचा ना सकी। मैं उस दिन उनके साथ नहीं थी बेटा। इसीलिए मैं बच गई। लेकिन वो हमेशा हमेशा के लिए मुझे छोड़कर चले गए। लेकिन उस दुख ने मुझे तोड़ दिया। मैंने दुनिया से नाता तोड़ लिया और यात्रा पर निकलने का फैसला किया। भोला राम की आंखें नम हो आई। उसने धीरे से एक गहरी सांस ली। आसपास का माहौल भी जैसे थम गया हो। फिर मैंने अपनी सारी दौलत को पास के एक जंगल में एक गुप्त जगह पर छुपा दी। सिर्फ एक सोने के कुछ जवाहरात अपने पास रखी ताकि उसे बेचकर यात्रा का खर्चा उठा सकूं। लेकिन जब मैंने एक सुनार को वो कीमती जवाहरात बेचना चाहा तो उसने लालच में आकर मुझ पर ही चोरी का इल्जाम लगा दिया और मुझे जेल में डलवा दिया। ओ माताजी ये तो बड़ा भयानक हादसा हुआ। फिर क्या किया आपने? आपकी बात क्या किसी ने ना सुनी? नहीं बेटा, कोतवाल ने सुनार की बात मानी और मुझे जेल में डाल दिया। कई सालों तक मैं जेल में रही। अब सजा पूरी करके मैं अपने गांव लौटी हूं और मैं अब उस छुपाए हुए खजाने को निकालना चाहती हूं। तो आप चाहती हैं कि हम उसमें आपकी मदद करें। हां बेटा, अगर तुम मेरे साथ जंगल चलो और खजाना निकालने में मदद करो तो मैं उसका आधा हिस्सा तुमको दे दूंगी। माताजी देखिए मुझे धन का लालच नहीं है लेकिन आपकी मदद करना मेरा धर्म है। तो मैं आपके साथ जरूर चलूंगा। हां हां तुम्हारा दिल सच्चा है भोला राम तुम जैसे लोग इस दुनिया में बहुत ही कम है। ठीक है। कल सुबह हम जंगल चलेंगे। माताजी आज रात यहीं रुकिए। सुबह भोला राम आपके साथ जाएगा। हमारी झोपड़ी छोटी है लेकिन आपका स्वागत करने के लिए जगह बहुत है। ठीक है बहू ठीक है। तुम लोग सचमुच अनमोल हो। चांदनी धीरे-धीरे फीकी पड़ रही थी और पक्षियों की हल्की चहचहाहट सुबह का संदेश ला रही थी। भोला राम और माताजी सूरज उगने से पहले जंगल की ओर निकल पड़े।
[8:14]माताजी यह जंगल तो बहुत बड़ा है। आपने खजाना कहां छुपाया? धैर्य रख बेटा धैर्य। हां वो देख वो वो पुराना बरगद का पेड़ उसी के पास एक गुप्त जगह है। मैंने सारी दौलत वहीं दबाई थी। अरे इतने सालों के बाद भी आपको सही जगह याद है। बेटा जब जिंदगी का हर पल उसी खजाने की याद में बीते तो भूल कैसे सकती हूं मैं। मेरे लिए यह सिर्फ धन नहीं। मेरे परिवार की आखिरी निशानी है। हां माताजी मैं आपका दुख समझ सकता हूं खैर। चलिए माताजी जल्दी से उस जगह को ढूंढते हैं। चलिए। दोनों बरगद के पेड़ के पास पहुंचे। पेड़ की विशाल जड़ें और मोटी डालियां पूरे इलाके में फैली थी। माताजी ने हाथ से जमीन पर एक छोटा सा गड्ढा दिखाया। हां यहीं है। यहीं खोदो भोला राम। थोड़ा नीचे संदूक मिलेगा। अच्छे से खोदो। हां ठीक है माताजी मैं अभी शुरू करता हूं। हां बेटा ये मेरी जिंदगी भर की कमाई है। इसमें मेरे परिवार की यादें हैं। बेटा इसका आधा हिस्सा अब तुम्हारा है। माताजी देखिए मुझे इतना धन नहीं चाहिए। हमारे परिवार के लिए दो वक्त की रोटी और थोड़ा सा सुख। बस इतना ही काफी है। बाकी सब आप रख लीजिए। बूढ़ी की आंखों में चमक थी। वह धीरे मुस्कुराई और बोली। बेटा भोला राम तुम्हारा दिल सोने से भी ज्यादा कीमती है। फिर भी कुछ सिक्के रख लो अपने परिवार के लिए। ठीक है माताजी आप इतना कह रही हैं तो मैं थोड़ा सा लूंगा लेकिन बाकी आपका है। मैं इसे आपके लिए संभाल लूंगा बस। भोला राम ने फावड़े से जमीन में हल्का सा खोदकर कुछ मोहरें अपने बैग में रख लिए। माताजी ने उनकी आंखों में संतोष देखा और धीरे से कहा।
[10:30]माताजी चिंता मत कीजिए आपके परिवार की यादें और यह खजाना दोनों सुरक्षित रहेंगे। लालच नहीं आने दूंगा। अब हम इसे सुरक्षित गांव ले जाएंगे। बूढ़ी की ने हाथ में बैग लिया और दोनों धीरे-धीरे जंगल से बाहर निकलने लगे।
[10:54]गांव में पहुंचते ही भोला राम की पत्नी ने उसे देखा और आश्चर्य से बोली। अरे ये क्या लाए हो? इतना सोना ये कहां से मिला आपको? अरे भाग्यवान ये पूरा का पूरा माताजी का खजाना है। मैंने तो बस थोड़ा सा लिया है। वह भी माताजी ने कहा इसीलिए बाकी माताजी का है। बहू यह खजाना मेरे ज्यादा काम का नहीं। मैं इसे गरीबों में बांटना चाहती हूं। भोला राम तुम इसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने में मेरी मदद करो। माताजी आप सचमुच महान है। हम आपकी बात मानेंगे।
[11:40]अगली सुबह बूढ़ी औरत चुपके से गांव छोड़ दे। लेकिन उसने भोला राम से वादा लिया कि वो खजाने का सही इस्तेमाल करेगा।
[11:54]भोला राम का घर पुरानी मिट्टी का था। दीवारें झुर्रीदार। लेकिन अब उसके हाथ में थोड़े सिक्के हैं और दिल में नेक इरादे।
[12:08]भोला राम ने छोटा व्यापार शुरू किया। उसके मेहनत और ईमानदारी से व्यापार धीरे-धीरे फैलने लगा। भोला राम तुम्हारी मेहनत और माताजी का आशीर्वाद रंग लाया। अब हमारे घर में सुख शांति है। हां सही कहा भाग्यवान। यह सब ईश्वर की कृपा और माताजी की दया से हुआ है। अब मैं इस ढंग से गांव वालों की मदद करूंगा। भोला राम अब पूरे गांव में लोगों की मदद कर रहा है। वह गरीबों को अनाज बांटता है। बीमारों की देखभाल करता है और बच्चों के लिए एक छोटा स्कूल खुलवाया। भैया भोला राम जैसा नेक इंसान तो इस गांव में कोई है ही नहीं। वो सबके लिए कुछ ना कुछ करता है। गजब आदमी है वह। हां पहले भोला राम के पास कुछ नहीं था। फिर भी उसने हमें खाली हाथ कभी नहीं लौटाया। अब वो हमारा भगवान है। अरे भगवान तो बस एक ही है। ऊपर वाले सबका मालिक एक है। और मैं तो देखो भाई अपना फर्ज निभा रहा हूं। अगर मेरे पास है तो दूसरों को बांटना मेरा धर्म है। भोला राम ने अपने टूटे-फूटे मकान को तोड़कर एक सुंदर घर बनवाया। अब वह मेहमानों का पहले से ज्यादा आदर करने लगा है। कभी-कभी असली दौलत सोने और जवाहरात में नहीं होती। असली दौलत होती है इंसानियत, नेक दिल और दूसरों की मदद करने का साहस। भोला राम ने दिखा दिया कि सच्चे दिल का सोना ही सबसे कीमती होता है।
[13:53]भोला राम की तरक्की की खबर अब सुखीलाल तक पहुंची थी। वो अपनी पत्नी के साथ भोला राम के नए घर में बहुत गुस्सा आता है।
[14:09]ए भोला राम ये तेरा नया घर इतने सारे नौकर-चाकर इतना सामान इतना पूरे गांव में सम्मान। ये बता तू इतना अमीर कैसे हो गया? पहले तो तेरे पास एक रोटी भी मुश्किल से थी। भैया सब ईश्वर की कृपा है। मेहनत और दया से जो भी मिलता है वही मेरे पास है। चाहे जितना अमीर हो जाओ भोला राम हमारी बराबरी नहीं कर सकता। हमारा घर, हमारी दौलत इस गांव में सबसे बड़ी है। तुम तो बस एक गरीब थे। अरे तुम्हें क्या लगता है हम कम है। हमारे पास तो अभी और भी खजाना है। उसे निकालकर हम तुमसे कहीं ज्यादा अमीर हो जाएंगे। तुम ये किस खजाने की बात कर रही हो? अरे कुछ नहीं, कुछ नहीं ये तो बस ऐसे ही बोल रही है कुछ भी। अरे तुम लोग इतनी जल्दी और अचानक से इतने अमीर कैसे हो गए? अरे दोस्त आप गलत सोच रहे हो। ये जो भी कुछ आज हमारे पास है सब भगवान की देन है। भोला राम उस वक्त बात को संभाल लेता है और सेठ और उसकी पत्नी घर से चले जाते हैं।
[21:50]भोला राम का मन अब पूरी तरह निर्णय कर चुका था। रात के अंधेरे को उसने अपने साथी की तरह चुना और कदम बढ़ा दिए उस जंगल की ओर जहां रहस्य और लालच दोनों दबे हुए थे। पेड़ के नीचे मिट्टी को हटाते हुए भोला राम की सांसें तेज हो गई। हर वार के साथ उसकी उम्मीद गहरी होती जा रही थी और आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई।
[22:16]भोला राम खजाने को निकालकर अपने घर की तरफ निकल जाता है।



