[0:00]ज्ञान घटे नर मूर्ध की संगत, बुद्धि घटे चित्त विषय भरमाए। तेज घटे पर नारी की संगत, बुद्धि घटे बहु भोजन खाए। प्रेम घटे नित ही कुछ मांगत, क्या दर्शन करिए रोज मांगने से प्रेम समाप्त। प्रेम घटे नित ही कुछ मांगत। मान घटे नित पर घर जाए। रोज दूसरा के द्वारी गयिला से मान सम्मान सब समाप्त। दयालु कहे सुन रे मन मूर्ख, पाप घटे हरि के गुण गाए।

ज्ञान घटे नर मूढ की संगत | Gyan ghate nar mud ki sangat #pujyarajanji #katha #bhaktisong #tranding
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