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[0:28]सिनेमा घर गोल्ड सिनेमा। शहर के सबसे पुराने और फेमस सिनेमा हॉल्स में से एक था। तरुण की वहां क्लीनिंग स्टाफ में नाइट शिफ्ट में ड्यूटी लग गई थी। सब कुछ अच्छा होते हुए भी उसे वहां की कुछ बातें बेहद अजीब लगती थीं। नाइट शिफ्ट की ड्यूटी के लिए वो एक इकलौता स्टाफ ही अपॉइंट हुआ था। और तो और उस शिफ्ट में रात में ज्यादा काम भी नहीं था। इसके बावजूद उसे ट्रिपल सैलरी मिल रही थी। इसलिए ज्यादा ना सोचकर उसने अच्छे पैसों के चलते उस नौकरी को ज्वाइन कर लिया। वहां हॉल में काम करते हुए उसे जब एक महीना हुआ तो 11:30 बजे के लास्ट शो के बाद उसका एक रूटीन बन चुका था। लास्ट शो खत्म होते ही टेक ऑपरेटर से कहकर वो पिछली मूवी रिप्ले करवा कर उसे अकेला हॉल में बैठकर देखा करता था। और साथ ही वो उस हॉल की सफाई भी कर देता था। लेकिन अपनी नाइट शिफ्ट के पहले दिन से ही तरुण के साथ अजीब इंसिडेंट्स हो रहे थे। कभी फिल्म के चलते-चलते बीच में किसी की चीख सुनाई पड़ती थी। तो कभी अचानक ही आगे की सीट्स अपने आप रिक्लाइन हो जाती थी। कभी-कभी तो तरुण को ऐसा लगता था जैसे उसकी आगे वाली सीट पर कोई उसके साथ बैठकर फिल्म देख रहा हो। शुरुआत में तरुण को शायद डर भी लगा पर फिर एक महीने में उसे इन सब की आदत हो गई थी। इन सब बातों पर कोई उसका मजाक ना उड़ाए। यह सोचकर उसने यह सब बातें किसी को भी नहीं बताई। ऐसी ही एक नाइट शिफ्ट पर डेढ़ बजे जब सब लोग निकल चुके थे। तब तरुण टेक ऑपरेटर के रूम में चाय लेकर गया पर वहां कोई नहीं था। तरुण ने उसे फोन भी लगाया पर किसी ने कॉल ही नहीं उठाया। तरुण वहीं लास्ट सीट पर चला गया और ऑपरेटर का वेट करने लगा। सीट पर बैठे-बैठे तरुण की आंख कब लग गई उसे खुद भी नहीं पता चला। कुछ ही देर बाद सिनेमा हॉल के अंदर एक चीख जोर से गूंजी। उस आवाज से तरुण की नींद अचानक ही टूट गई। लेकिन इस बार कुछ अलग बात थी। चीख की आवाज सामने चलती हुई स्क्रीन से आ रही थी। टेक ऑपरेटर ने कब मूवी चला दी उसे पता ही नहीं चला। तरुण ने सोचा कि ऑपरेटर शायद लौट आया है। उसने सोचा कि वो उस रात भी मूवी देखकर हर रोज की तरह वहां से निकल जाएगा। कुछ ही देर बाद मूवी देखते हुए तरुण को ऐसा फील हुआ जैसे उसे फिर वही चीख सुनाई दी। लेकिन अब तक तरुण को आदत हो चुकी थी तो उसने उस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया। लेकिन फिर उसे ऐसा लगा कि कोई उसके बाल नोच रहा है। उसे बहुत तेज एक दर्द महसूस हुआ। उसने जब पीछे मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था। तरुण को यह थोड़ा अजीब लगा। वो फिर से स्क्रीन की तरफ मुड़ा। तो उसे फ्रंट सीट पर कोई बैठा हुआ दिखा। और अचानक से फिल्म स्क्रीन बंद हो गई। यह देखते ही तरुण ने उस फ्रंट सीट वाले को कई बार आवाज लगाई। पर उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया। तरुण उसके कंधे को थपथपाने लगा। लेकिन जैसे ही तरुण ने उसे छुआ उसका हाथ उस आदमी के आर-पार हो गया। तरुण घबरा गया। तभी वह आदमी मुड़ा और तरुण की चीख निकल पड़ी। उस आदमी का चेहरा जला पड़ा था और वो बहुत ही ज्यादा डरावना लग रहा था। तरुण डर के मारे उठ खड़ा हुआ। वो उस हॉल से जल्द से जल्द निकलना चाहता था। लेकिन उसके पैर मानो एक ही जगह जम गए थे। उसने अपने पैरों की तरफ देखा तो उसके होश उड़ गए। हॉल के सीड्स के नीचे से रेंगते हुए हाथों ने उसके पैरों को जकड़ रखा था। वहीं उसके सर के ऊपर कई अजीब से दिखने वाले लोग उसके सर के बाल चबा रहे थे। जो चीखें तरुण को अक्सर सुनाई देती थी अब वो वापस उस हॉल में गूंजने लगी थी। उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वो सारी चीखें उसी की तरफ आ रही है। तरुण सुन पड़ गया था और उसके बुरी तरह पसीने छूटने लगे। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है। देखते ही देखते तरुण को उस हॉल में कई सारे लोग दिखने लगे। सब के सब वैसे ही भयानक लग रहे थे जैसे उसके आगे बैठा वो आदमी। वह सब लोग तरुण की तरफ बढ़ने लगे और उसके शरीर के अलग-अलग हिस्सों को नोचने लगे। तरुण कुछ भी नहीं कर पा रहा था। बस वो अपनी आंखें बंद करके जोर-जोर से मदद के लिए चीखे जा रहा था। तभी अचानक किसी ने उसका नाम पुकारा। तरुण ने आंखें खोली। तो उसके सामने हॉल का टेक ऑपरेटर खड़ा था। आसपास सब कुछ नॉर्मल था। वह सारे लोग जो तरुण को दिख रहे थे वो अब गायब थे। स्क्रीन पर एक फिल्म चल रही थी लेकिन तरुण बोखलाया हुआ, घबराया हुआ, पसीने में तर बस रोए जा रहा था। टेक ऑपरेटर ने उसे शांत करवाया और उसे बताया कि जब वह हॉल में आया तो तरुण अपनी सीट पर बैठा बुरी तरह छटपटा रहा था। तरुण ने उस टेक ऑपरेटर को सब कुछ बताया। लेकिन उस टेक ऑपरेटर ने तरुण से कहा कि उसने कोई बुरा सपना देखा होगा। तरुण ने भी यह मान लिया। लेकिन जब वह घर पहुंचा तो उसने देखा कि उसके पूरे शरीर पर किसी के नोचने के निशान थे। तरुण को विश्वास नहीं हो पा रहा था कि वो सब जो उसने देखा और महसूस किया है वो उसका कोई सपना है। और इसलिए वो फिर उसी रात गोल्ड सिनेमा में वापस गया। सुबह के 5:00 बज रहे थे। अक्सर उस सिनेमा के बाहर सुबह-सुबह एक बूढ़ा आदमी चाय बेचता था। तरुण ने उससे जाकर बात करने का सोचा। जब तरुण ने उसे अपने साथ हुआ पूरा किस्सा बताया तो वो चाय वाला सब कुछ समझ गया। उसने तरुण को बताया कि कुछ साल पहले उस हॉल में करीब 30-40 लोग रात का एक शो देख रहे थे। और अचानक उस रात हॉल में आग लग गई थी।
[7:34]जिसकी वजह से सब लोग मारे गए। तब से माना जाता है उन लोगों की आत्माएं उसी हॉल में भटक रही हैं। कई लोग जो तरुण से पहले ड्यूटी करने आए। वो इसी चक्कर में नौकरी छोड़कर चले गए। तरुण ये सुनते ही हैरान पड़ गया और उसने भी वो नौकरी छोड़ दी। तरुण को लगा कि उस रात वो मौत के मुंह से बाल-बाल बचा। लेकिन अपने साथ हुई इस दिल दहला देने वाली घटना को वह शायद ही कभी भूल पाएगा।
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