[0:00]नमस्कार दोस्तों, आप सभी का हमारे YouTube चैनल में फिर से एक बार स्वागत है। तो जैसा कि मैंने कल आपको इंफॉर्मेशन दी थी कि इस चैनल पर हम आपको इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक से संबंधित जितने भी प्रोजेक्ट हैं, प्लस जितने भी रिपेयरिंग का वर्क्स है, रिपेयरिंग का कार्य है, वह आपको सिखाएंगे। तो आज उस कोर्स की पहली क्लास है। तो आप लोग देख सकते हैं बेसिक इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स का ये रिपेयरिंग का पहला वीडियो है। तो चलिए वीडियो को स्टार्ट करते हैं। तो सबसे पहले हम बात करते हैं इंफॉर्मेशन की, इस कोर्स के बारे में सबसे पहले आपको इंफॉर्मेशन होनी चाहिए, पता होनी चाहिए कि आप यह कोर्स क्यों सीख रहे हैं, इसमें आपको क्या-क्या सीखने को मिलेगा? प्लस इसके आगे लाभ क्या है? आप इससे क्या कुछ कर सकते हैं? तो चलिए, सबसे पहले हम जान लेते हैं कि इस कोर्स में हम क्या-क्या सीखने वाले हैं। तो जैसा कि इस कोर्स का नाम है, बेसिक इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयरिंग कोर्स। तो दोस्तों, बेसिक इलेक्ट्रिकल में जितने भी इक्विपमेंट आते हैं, उन्हें हम रिपेयरिंग करना सीखेंगे। प्लस कई इक्विपमेंट, कई प्रोजेक्ट ऐसे होंगे जिसे हम बनाना सीखेंगे। अब यह आपको पता होना चाहिए कि बेसिक इलेक्ट्रिकल में कौन-कौन से इक्विपमेंट आते हैं और बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स में कौन से-कौन से इक्विपमेंट आते हैं।
[1:29]अगर नहीं भी पता है तो यह हमारी पहली क्लास है, इसमें मैं आपको सारा डिटेल में बताऊंगा। तो चलिए, हम स्टार्ट करते हैं। तो दोस्तों, सबसे पहले हमें बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स और बेसिक इलेक्ट्रिकल के मध्य में अंतर पता होना चाहिए कि इन दोनों में क्या अंतर है। कईयों को यह भी नहीं पता होता कि इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स में फर्क क्या है। तो चलिए, हम देख लेते हैं। तो अपने बात करते हैं सबसे पहले इलेक्ट्रिकल की। इलेक्ट्रिकल और एक तरफ अपने देखते हैं इलेक्ट्रॉनिक्स की। इलेक्ट्रॉनिक्स। देखिए दोस्तों, इलेक्ट्रिकल आपको सिंपल भाषा में मैं बता देता हूं। एक बात और मैं आपको बताना चाहूंगा कि इस कोर्स में अपने ज्यादा डीप में नहीं जाएंगे। जितनी थ्योरी की हमें आवश्यकता होगी, उतनी ही थ्योरी हम करेंगे। प्लस इसके साथ प्रैक्टिकल भी करेंगे, क्योंकि आज यह हमारी पहली क्लास है, तो हमें थोड़ा-बहुत तो थ्योरी सीखना पड़ेगा, उसके बाद में प्रैक्टिकल ही प्रैक्टिकल वीडियोस आएगी। प्लस उसके ऊपर जितनी भी थ्योरिटिकल वीडियोस बनेगी, वह भी आपको करनी पड़ेगी। तो सबसे पहले बात करते हैं हम इलेक्ट्रिकल की। तो देखिए दोस्तों, हमारे घरों में AC सप्लाई आता है। यह आप सभी को पता होगा। मोस्टली हमारे चैनल पर जो भी स्टूडेंट है, आईटीआई से संबंधित है, आईटीआई डिप्लोमा किए हुए हैं इलेक्ट्रॉनिक्स में। तो इतना तो सबको पता होगा कि हमारे घरों में AC सप्लाई ही आता है और जो AC सप्लाई होती है, वह होती है अल्टरनेटिंग करंट।
[2:51]अल्टरनेटिंग करंट। दोस्तों, जरा राइटिंग में आपको कंप्रोमाइज करना पड़ेगा हल्का-फुल्का मेरी राइटिंग जरा कुछ ऐसी ही है। तो चलिए, कोई बात नहीं। अल्टरनेटिंग करंट। यह हमारे घरों में आता है जो कि 220 से लेकर के 240 वोल्ट। ठीक है दोस्तों। हमारे घरों में अल्टरनेट अल्टरनेटिंग करंट आता है जो कि 220 से 240 के बीच में हो सकता है। 240 सर्दियों में जब लोड कम होता है तो 240 से थोड़ा ऊपर भी चला जाता है 250 तक। और जब बहुत गर्मियों में जब लोड ज्यादा होता है लोगों के घरों में एयर कंडीशनर चलते हैं। बहुत से कूलर पंखे वगैरह चलते हैं, तो उस टाइम में ये जो वोल्टेज है 220 से भी थोड़ा नीचे जा सकता है। कंफर्म नहीं है जाता है पर जा सकता है। तो देखिए दोस्तों, सीधी सी सिंपल सी भाषा में बता देता हूं कि जो भी इक्विपमेंट जो भी उपकरण डायरेक्ट इस वोल्टेज पर कार्य करें, वह इलेक्ट्रिकल के अंतर्गत आते हैं। जैसे कि मान लेते हैं लैंप। अब लैंप कौन सा, जिसके अंदर फिलामेंट लगा हो। फिलामेंट मीन्स जिसके अंदर अपने 100 वाट इसकी बल्ब में एक स्प्रिंग देखा होगा। तो उसे हम फिलामेंट कहते हैं। हिंदी में उसे तंतु कहते हैं। ठीक है, जो कि डायरेक्ट 220 वोल्ट पर जलता है। ठीक है, इसी तरह से हमारा फैन सीलिंग फैन जो सीलिंग फैन है, डायरेक्ट AC सप्लाई पर चलता है, वो भी इलेक्ट्रिकल के अंतर्गत आता है। और हीटर जो हमारा हीटर है, या फिर इमर्शन रोड है, इमर्शन रोड पानी गर्म करने के काम में आती है। इसी तरह के जो लोड है जो कि डायरेक्ट AC सप्लाई से चले, वो इलेक्ट्रिकल के अंतर्गत आते हैं। आई थिंक इसमें कोई आपको दिक्कत नहीं हुई होगी। जैसे कि और भी कई सारे उदाहरण हैं जैसे कि कूलर हुआ, पंखा हुआ, मिक्सी हुई, सिंगल फेज मोटरें हुई। ठीक है, जितने भी ऐसे उपकरण हैं, वो सारे इलेक्ट्रिकल के अंतर्गत आते हैं। बस आपको इतना ही पढ़ना है, ज्यादा डीप में अपने नहीं जाएंगे। ज्यादा डीप में आप हो सकता है आपने आईटीआई में पढ़ लिया हो, तो उस हिसाब से भी अपने करेंगे, बट वह अलग कोर्स होगा, उस कोर्स का नाम होगा, आईटीआई इलेक्ट्रिशियन थ्योरी। उसमें हम आपको पूरा एक-एक चीज थ्योरी में करवाएंगे, बट यह रिपेयरिंग का कोर्स है, तो उसमें थ्योरी थोड़ा सा कम ही रखेंगे। तो अब बात करते हैं इलेक्ट्रॉनिक्स की। इलेक्ट्रिकल के अंतर्गत आपको पता है जो डायरेक्ट AC सप्लाई से चलते हैं, वह इलेक्ट्रिकल के अंतर्गत आते हैं। और जो उपकरण डायरेक्ट AC सप्लाई से ना चल करके किस कौन सी सप्लाई से चले? DC सप्लाई से चले। DC सप्लाई क्या होती है? डायरेक्ट करंट। तो, डायरेक्ट करंट।
[5:47]अब देखिए दोस्तों, हमारे घरों में ऐसे बहुत से उपकरण हैं जो डायरेक्ट AC सप्लाई से चलते हैं, और ऐसे बहुत से उपकरण हैं जो डायरेक्ट DC सप्लाई से चलते हैं। एग्जांपल, एग्जांपल सबसे बड़ा एग्जांपल है, हमारा LED क्या? बल्ब।
[6:10]LED बल्ब। तो, ये जो LED बल्ब है, ये इसे हम 220 वोल्ट तो देते हैं, AC सप्लाई तो देते हैं, परंतु इसके अंदर एक सर्किट लगा होता है जो उस सप्लाई को DC में चेंज करता है, फिर LED के अंदर पैनल के अंदर DC सप्लाई जाती है। तो, LED बल्ब जो है, वो DC सप्लाई पर कार्य करता है। इस कारण, यह जो है, इलेक्ट्रॉनिक्स के अंतर्गत आता है। ठीक है, इसी तरह से और भी उपकरण है, LED टीवी। हमारा जो टीवी है, वो DC सप्लाई पर चलता है। इसी तरह से मोबाइल हुआ, लैपटॉप हुआ। और जितने भी ऐसे उपकरण हैं, जैसे मोबाइल चार्जर हुआ, मोबाइल हुआ, लैपटॉप हुआ, या फिर अपने बात करें टैबलेट की या फिर एम्पलीफायर मशीन की, जिसमें हम या फिर साउंड सिस्टम की। तो यह सारे सिस्टम जो है, वह इलेक्ट्रॉनिक्स के अंतर्गत आते हैं। तो, आई थिंक आपको इतना तो पता चल गया होगा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल में मेन डिफरेंस क्या है? जो डायरेक्ट AC सप्लाई पर चले, इलेक्ट्रिकल के अंतर्गत आते हैं। डायरेक्ट, सॉरी, जो DC सप्लाई पर चले, वो इलेक्ट्रॉनिक्स के अंतर्गत आते हैं। या फिर आप इसमें यह भी कह सकते हैं कि जिन उपकरणों में या फिर जिन सर्किट के अंदर सेमीकंडक्टर का यूज किया गया हो। सेमीकंडक्टर आप सभी को पता होगा अर्धचालक जिसे हम कहते हैं। सेमीकंडक्टर का यूज किया गया हो, वह सारे उपकरण किस में आते हैं? इलेक्ट्रॉनिक्स के अंतर्गत आते हैं। तो, अपने इस कोर्स में इन दोनों तरह के उपकरणों को रिपेयरिंग करना, बनाना सीखने वाले हैं।
[7:56]तो, आई थिंक इतना आपको समझ में आ गया होगा। अब कुछ और थोड़ा बहुत हम बेसिक सीख लेते हैं जो इस कोर्स में बिल्कुल ही बहुत ज्यादा इस कोर्स की नींव है, जिसके बिना आप कुछ भी नहीं कर सकते। ना आप किसी कंपटीशन फाइट कर सकते हैं, ना ही आप कोई प्रैक्टिकल समझ सकते हैं। तो चलिए देखते हैं। तो चलिए, हम कुछ बेसिक इसके बारे में जान लेते हैं जो कि बहुत ही जरूरी है। तो सबसे पहले हमें जानना पड़ेगा इलेक्ट्रिक करंट के बारे में। इसे हिंदी में धारा कहते हैं, क्या कहते हैं? धारा कहते हैं। इसे बिल्कुल बेसिक तरीके से हम समझेंगे और ज्यादा डीप में अपने नहीं जाएंगे, क्योंकि यह तो सिर्फ एक रिपेयरिंग कोर्स ही है। तो देखिए, करंट के बारे में सबसे पहले अपने एक एग्जांपल लेते हैं। अपने एग्जांपल लेते हैं, एक पाइप का। पानी वाली पाइप का। यह हमारी एक पानी वाली पाइप है और इसके अंदर पानी फ्लो हो रहा है। इसके अंदर पानी फ्लो हो रहा है, ठीक है। ये एक पॉइंट है, ये दो, ये एक नंबर पॉइंट है और ये दो नंबर पॉइंट है, जो पानी की दिशा है, वह कुछ इस तरफ की है। यानी कि इस पॉइंट से लेकर के इस पॉइंट तक पानी किस स्पीड से जा रहा है? यानी कि यहां से लेकर यहां तक जाते हुए पानी की स्पीड क्या है? बस आपको इतना सा ही याद रखना है। सेम इसी तरह से जो इलेक्ट्रिक वायर होती है या तार होती है या कंडक्टर आप मान लीजिए, कंडक्टर यानी कोई भी धातु। जैसे एक ये तार है। इस तार के अंदर क्या होता है कि फ्री इलेक्ट्रॉन्स होते हैं। जैसे कि पानी के अंदर, पानी के, सॉरी, जैसे कि पाइप के अंदर पानी फ्लो करता है। है ना, इसी तरह से तार के अंदर क्या फ्लो करता है? इलेक्ट्रॉन जिसे E से लिखते हैं। ये मैंने E लिखा और इसके ऊपर माइनस का चिन्ह लगाया। ठीक है दोस्तों, इसका मतलब क्या होता है? इलेक्ट्रॉन। और पानी हमें फ्लो करता हुआ दिखाई देता है, परंतु तार के अंदर इलेक्ट्रॉन जो है, फ्लो होता हुआ नहीं दिखाई देता। और इसके अंदर जो इलेक्ट्रॉन है, इसकी भी कोई ना कोई स्पीड होगी। अपने मान लेते हैं, यह A पॉइंट है और यह B पॉइंट है। इस A पॉइंट से B पॉइंट तक जाने के लिए कितना समय लगा या फिर क्या उसकी स्पीड थी? जैसे पानी के अंदर जितना, जितनी इसकी स्पीड थी, इसी तरह से तार के अंदर इलेक्ट्रॉन एक स्थान से दूसरे स्थान में जाने के लिए, उसकी स्पीड क्या थी? उसकी स्पीड को क्या कहते हैं? इलेक्ट्रिक करंट कहते हैं। इतनी सी बात है बस आपको इतना सा याद रखना है। आई थिंक आपको बहुत अच्छे तरीके से समझ में आ गया होगा। अब आपसे कोई पूछे कि करंट क्या चीज है, तो क्या बोलोगे? इलेक्ट्रॉन के फ्लो होने की जो स्पीड है या फिर फ्लो ऑफ इलेक्ट्रॉन्स इज़ कॉल्ड करंट। ठीक है।
[11:28]यानी कि इलेक्ट्रॉन के प्रवाह की दर, उसकी स्पीड क्या कहलाती है? करंट कहलाती है। क्या कहलाती है? करंट कहलाती है। ठीक है दोस्तों, आई थिंक इतना आपको समझ में आ गया होगा। अब इसके बारे में थोड़ा सा और जान लेते हैं। इसका मात्रक क्या है? मात्रक यानी कि इसको मापते किस में हैं? जैसे कि भार। भार को किलोग्राम में मापा जाता है, दूरी को मीटर में मापा जाता है। इसी तरह से करंट को किस में मापा जाता है? इसका मात्रक क्या है? तो वो है एंपियर। एंपियर, सॉरी, ये थोड़ा सा गलत लिखा गया। एंपियर। ये लो जी। आपने बहुत बार सुना होगा 5 एंपियर का करंट, 10 एंपियर का करंट, 15 एंपियर का करंट। इसी तरह से बस इसे एंपियर में मापते हैं। आई थिंक इतना आपको समझ में आ गया होगा। तो तो आप इसे नोट डाउन साथ-साथ करते रहिए।
[12:43]तो अब हम बात कर लेते हैं वोल्टेज की। दोस्तों, हिंदी में इसे कहते हैं विभव। इसे हिंदी में विभव कहते हैं। अब इसे भी हम एग्जांपल के थ्रू समझेंगे, देखिए। एक स्त्रोत है जहां पर बहुत सारा क्या पड़ा है? पानी पड़ा है, ठीक है। और इसे पाइप के थ्रू हमें हमें किसी ऊंचे स्थान पर पहुंचाना है। तो, क्या ये पानी अपने आप ऊंचे स्थान पर पहुंच पाएगा? तो, आपका आंसर होगा नहीं पहुंचेगा। तो, इसे ऊंचे स्थान पर पहुंचाने के लिए हमें किस चीज की आवश्यकता होगी? वो है पानी की मोटर या फिर पानी का पंप। तो, हम क्या करेंगे? इस पानी को पंप की सहायता से ऊपर तक पहुंचाएंगे। तो, हमने इस पानी को यहां तक पहुंचाने के लिए क्या यूज किया? पंप यूज किया, बिल्कुल यूज किया ना। और पंप ने क्या काम किया कि इस पानी को यहां से खींचा और ऊपर की ओर धकेला, यानी किसने एक फोर्स लगाया। इसने एक बल लगाया जिसके कारण जो पानी है, वह ऊपर की तरफ पहुंच गया। यानी कि इसने क्या किया कि पानी को फ्लो कराने के लिए इसने एक बल लगाया जिसके कारण इस पाइप के अंदर पानी फ्लो हुआ। सेम टू सेम इसी तरह से हम वोल्टेज को समझते हैं, जैसे कि यह एक तार है। और यह है एक बल्ब। ठीक है। और हमने क्या एक बैटरी यूज की है। यह सिंबल दोस्तों बैटरी का होता है, यह प्लस, यह माइनस। यह बैटरी है। और यह है एक लैंप। ठीक है। अब सपोज करो कि इसे हमने जोड़ दिया और यह लैंप जल रहा है। ठीक है। अब सपोज करो कि हमारे पास एक बैटरी, कुछ भी नहीं है, सिर्फ एक लैंप है और लैंप की दो वायर है। अब इन वायर के अंदर इलेक्ट्रॉन तो पड़े हैं, परंतु वह चल नहीं रहे हैं। इन इलेक्ट्रॉन को चलाने के लिए हमें किसी ना किसी बल की आवश्यकता पड़ेगी। जैसे कि यहां पर हमने पंप लगाया तो ही पानी फ्लो हुआ। इसी तरह से इन्हें चलाने के लिए हमें एक बल की आवश्यकता पड़ेगी और वह बल कौन प्रदान करेगी? बैटरी। बैटरी लगा सकते हो, सेल लगा सकते हो, कोई वोल्टेज सप्लाई कर सकते हो। तो आई थिंक आपको यह समझ में आ गया होगा कि यानी कि इलेक्ट्रॉन को फ्लो करवाने के लिए प्रदान किया गया बल क्या कहलाता है? वोल्टेज कहलाता है, विभव कहलाता है। तो बस इतनी सी बात आपको समझनी थी। कि इलेक्ट्रॉन को फ्लो कराने के लिए जो बल हमने लगाया, वह वोल्टेज कहलाया।
[16:01]तो चलिए, आई थिंक इतना आपको समझ में आ गया होगा। अब हम बात करते हैं इसके मात्रक की। तो, विभव का अगर मात्रक की बात करें, तो है इसका मात्रक है वोल्ट, बस। इसका मात्रक है वोल्ट, जैसे कि हमारे घरों में कितने वोल्ट आ रहे हैं? 200, 20। तो, वह जो 220 है, वह है इसका बल। इलेक्ट्रॉन को फ्लो कराने का वह बल है। तो चलिए, आई थिंक इतना आपको समझ में आ गया होगा। अब हम बात करते हैं रेजिस्टेंस की। रेजिस्टेंस को हिंदी में हम कहते हैं, प्रतिरोध।
[16:48]फिर से अपने वही एग्जांपल लेंगे कि एक पानी की पाइप है और इसमें पानी फ्लो हो रहा है और आपको एक समस्या आ रही है। और समस्या यह है कि पानी का जो फ्लो है, वह बहुत ज्यादा है। आप यह चाहते हैं कि इसके फ्लो को थोड़ा कम किया जाए। पानी हमें उतनी आवश्यकता नहीं है जितना आ रहा है। उसे कम करना है, तो आप क्या करोगे? यहां एक वाल्व लगाओगे। यहां क्या लगाओगे आप एक वाल्व लगाओगे, जिससे कि हम पानी के फ्लो को कंट्रोल कर सकते हैं। सेम टू सेम काम करता है रेजिस्टेंस। वाल्व ने क्या किया? वाल्व ने इस वाल्व ने क्या किया कि इसमें जो पानी बह रहा था, उसकी स्पीड को क्या कर दिया? कम कर दिया। और जैसे ही यह सर्किट है, इसके अंदर जो इलेक्ट्रॉन फ्लो हो रहे हैं, इसकी स्पीड को अगर कम करना हो, तो हम किस चीज का इस्तेमाल करते हैं? रेजिस्टेंस का इस्तेमाल करते हैं, प्रतिरोधातक का इस्तेमाल करते हैं। बस, तो प्रतिरोध क्या होता है? धारा के प्रवाह में उत्पन्न बाधा क्या कहलाती है? प्रतिरोध कहलाती है। और ये बाधा आप अपने तरफ से भी लगा सकते हैं। बहुत सारे प्रतिरोधक मार्केट में मिलते हैं, अलग-अलग तरह के रेजिस्टेंस मार्केट में मिलते हैं। तो, इतना यह था आज का बेसिक थोड़ा सा जो कि सभी को पता होना चाहिए। इसके बारे में हम प्रतिरोध को हम प्रैक्टिकली देखेंगे। अगली वीडियो में हम प्रतिरोध को पूरा प्रैक्टिकली देखेंगे और इसके बारे में थोड़ा प्रैक्टिकली ज्ञान हम प्राप्त करेंगे। तो, आज के लिए इतना ही। मैं उम्मीद करता हूं कि मेरे द्वारा बनाया गया यह लेक्चर आपको पसंद आया होगा। अगर यह वीडियो आपको अच्छी लगे, तो जितने भी आपके फ्रेंड्स सर्कल में हैं जो कि इस फील्ड में इंटरेस्ट रखता है, जो कि कुछ सीखना चाहता है, कुछ अपनी स्किल को उभारना चाहता है, तो उसे यह वीडियो जरूर-जरूर-जरूर शेयर करें। और इस वीडियो को लाइक तो करना ही है और आप हमें कमेंट में अवश्य बताइए कि आपको कैसा लगा यह वीडियो, समझ में आया कि नहीं। तो चलिए, नेक्स्ट वीडियो में मिलते हैं। तब तक के लिए जय हिंद, जय भारत।



