[0:00]ने कभी गौर किया है जैसे ही आप नहाने जाते हैं अचानक पेशाब का दबाव बढ़ जाता है कभी ऐसा लगता है कि अभी तक कुछ नहीं था लेकिन जैसे ही पानी शरीर को छूता है पेशाब की इच्छा जाग जाती है क्या यह बस एक सहयोग है या इसके पीछे कोई खास वजह छुपी है जिंदगी में कोई भी घटना बस यूं ही नहीं होती हर छोटी-छोटी चीज के पीछे कोई ना कोई वजह होती है अब सवाल यह उठता है कि नहाते वक्त हमें पेशाब क्यों आती है क्या यह हमारे शरीर की कोई कमजोरी है क्या यह किसी बीमारी का संकेत है या फिर यह दिमाग और शरीर के बीच गहरे रिश्ते की तरफ इशारा करता है बस सोचो अगर यह सिर्फ शरीर का एक सामान्य काम होता तो हर कोई इसे इतना गहराई से क्यों महसूस करता नहाना सिर्फ साफ सफाई का मामला नहीं है नहाना एक ऐसा प्रक्रिया है जिसमें शरीर दिमाग और आपकी पूरी चेतना जुड़ी होती है पानी जिसे सबसे पवित्र तत्व माना जाता है सिर्फ आपके शरीर को नहीं धोता बल्कि आपके अंदर जमा थकान तनाव और दबाव को भी धो देता है और जैसे-जैसे शरीर हल्का हो जाता है उसका दबाव पेशाब के रूप में बाहर निकलता है लेकिन यह तो बस सतह की बात है असली कहानी इससे कहीं गहरी है क्योंकि शरीर का हर अनुभव मन का भी अनुभव होता है और मन का हर अनुभव शरीर में उतरता है तो जब आप नहाते हैं यह सिर्फ एक जैविक प्रक्रिया नहीं है यह आपके मन और शरीर के बीच एक बातचीत है अब सोचो जब पानी तुम्हारे शरीर को छूता है तो क्या होता है तुम्हारी त्वचा के हर रोम छिद्र में हलचल मच जाती है तंत्रिका तंत्र सक्रिय हो जाता है ठंडक या गर्म पानी का एहसास दिमाग को यह बताता है कि शरीर को कुछ छोड़ने की जरूरत है और उसका पहला तरीका पेशाब करना होता है लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है क्योंकि अगर यह सिर्फ ठंडे पानी का असर होता तो फिर जब हम गर्म पानी से नहाते हैं तो यह क्यों होता अगर यह सिर्फ मूत्राशय की वजह से होता तो नहाने से पहले यह क्यों नहीं होता और पानी गिरते ही अचानक क्यों होता है यही वो राज है जो लोगों को हैरान कर देता है जैसे ही आप नहाना शुरू करते हैं शरीर तुरंत शरीर आराम की स्थिति में चला जाता है और जैसे ही शरीर आराम करता है सबसे पहले वह दबाव को रिलीज कर देता है यह दबाव कभी पेशाब के रूप में दिखता है कभी गहरी सांसों में और कभी थकान के एहसास में इंसान तब तक दबाव में रहता है जब तक वह खुद को छोड़ना नहीं सीखता नहाना पानी में डूबना ये सब काम इसलिए अच्छे लगते हैं क्योंकि यह आपके अंदर के बोझ को हटा देते बस याद करो कि कभी गर्मी में जब तुम ठंडे पानी से नहाने बैठते हो तो पहला छींटा ही पूरा शरीर एक झटका महसूस करता है उस झटके में शरीर कुछ देर के लिए नियंत्रण खो बैठता है और नियंत्रण खोने से इच्छा पैदा होती है अब आप सोचेंगे कि क्या यह हर किसी के साथ होता है हां लगभग हर किसी ने कभी ना कभी इसे महसूस किया होता है लेकिन फर्क यह है कि कुछ लोग इसे सामान्य समझकर भूल जाते हैं और कुछ इसके पीछे छुपे राज की तलाश शुरू कर देते हैं और जो तलाश शुरू करता है वह जिंदगी के असली ज्ञान के करीब पहुंच जाता है क्योंकि यहां एक नाजुक बात छुपी है पानी और पेशाब दोनों एक ही तत्व से बने होते हैं जब जब पानी बाहर से शरीर को छूता है तो शरीर के अंदर पानी का तत्व भी प्रतिक्रिया करता है यही प्रकृति का संतुलन है यह एक अनुनाद है शरीर और प्रकृति के बीच रिश्ता आईने जैसा होता है जो कुछ बाहर होता है वो अंदर भी परिलक्षित होता है तो जब बाहर का पानी तुम्हारे शरीर से मिलता है तो अंदर का पानी यानी पेशाब भी बाहर आने को बेचैन हो जाता है लेकिन अब सवाल उठता है क्या यह सिर्फ पानी और मूत्राशय की बात है या इसके पीछे कुछ और भी है क्या यह किसी कमजोरी का संकेत है क्या यह क्या यह किसी बीमारी का शुरुआती लक्षण है या बस मन और शरीर के बीच की एक बातचीत है यहीं से हमारी यात्रा शुरू होती है शरीर के विज्ञान से लेकर आध्यात्मिक दृष्टि तक क्योंकि अगर हम इसे बिना समझे सामान्य कहकर नजरअंदाज कर देंगे तो हम जीवन के एक बहुत बड़े संकेत को खो देंगे तो चलिए अब इस रहस्य को और गहराई से समझते हैं हर बार जब तुम कुछ छोड़ते हो कुछ रिहा करते हो तो वह तुम्हारे बोझ से आजादी देता है लेकिन ध्यान रखना यह सफर आसान नहीं होगा क्योंकि जो दिखता है वह सच नहीं होता और जो नहीं दिखता वो गहरा सच होता है लेकिन सवाल यह है कि ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोग इसे ज्यादा महसूस करते हैं और कुछ कम यहां मनोविज्ञान की भूमिका आती है मनोविज्ञान कहता है कि हमारा मन और शरीर गहराई से जुड़े होते हैं जैसे ही मन आराम करता है शरीर भी रिलीज होना चाहता है इसे कैथार्सिस कहते हैं सोचो जब तुम रोते हो तो कैसा महसूस करते हो पहले तो भारीपन होता है लेकिन रोने के बाद हल्कापन महसूस होता है बिल्कुल ऐसा ही होता है पेशाब आने में भी ऐसा होता है यह एक तरह की साफ सफाई है और नहाना भी ऐसी ही एक प्रक्रिया है जो आराम और तरोताजगी दोनों को जगाती है इंसान लगातार दबावों के नीचे रहता है तनाव इच्छाएं डर गुस्सा चाहत सब अंदर जमा रहते हैं जब आप नहाते हैं तो पानी सिर्फ शरीर को नहीं धोता यह आपके दबाव को भी पिघला है और जैसे ही दबाव कम होता है शरीर से छोटे-छोटे रिहाई के संकेत पहले निकलते हैं मतलब पेशाब आने की इच्छा सिर्फ जैविक नहीं है बल्कि मनोवैज्ञानिक भी है यह इस बात की निशानी है कि जैसे ही आप आराम में शरीर राहत चाहता है पानी सिर्फ शरीर को साफ नहीं करता यह आपके अवचेतन तक पहुंचता है क्योंकि पानी का अस्तित्व बहुत गहरा है आप मां के गर्भ में पानी से घिरे हुए पैदा हुए थे आपके पहले अनुभव पानी से जुड़े होते हैं इसलिए जब भी पानी आपको छूता है आपका अवचेतन सक्रिय हो जाता है इसीलिए नहाना इतना सुखद लगता है इसीलिए पानी में डूबना किसी झील या समुंदर के किनारे बैठना इतना आरामदायक होता है और इसीलिए जब भी शरीर पानी से टच करता है तो वह तुरंत राहत चाहता है क्योंकि यह उसकी सबसे पहली अनुभूति होती है हर बार जब पानी तुम्हें छूता है तो गर्भाशय का अनुभव वापस आ जाता है गर्भ में तुम पूरी तरह आराम में थे कोई तनाव नहीं कोई दबाव नहीं पानी का माहौल और राहत पाने का एहसास ही वजह है कि नहाते वक्त पेशाब आना स्वाभाविक होता है लेकिन अब एक सवाल बचता है क्या नहाते वक्त पेशाब आने की इच्छा सिर्फ एक सामान्य रिफ्लेक्स है या यह किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है विज्ञान मानता है कि अगर यह समस्या अगर यह बहुत बार होता है

नहाते समय पेशाब आना हर किसी के किस्मत मे नहीं होता Shri Premanand ji maharaj satsang
राधा रानी का वृंदावन
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