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Atiq Ahmed ka Ant: Yogi ka Operation Clean | 2D Animation

AniDoc

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[0:00]15 अप्रैल 2023 रात के 10 बज रहे थे एक सफेद जीप से दो कैदी उतरते हैं दोनों के हाथ हथकड़ी से बंधे हैं यह कोई आम मुजरिम नहीं थे मीडिया के लोग माइक लेकर उनकी तरफ दौड़ते हैं सवाल पूछे जाते हैं और तभी गोलियों की वो तड़तड़ाहट जिसने सिर्फ 9 सेकंड में पूरे भारत को सन्न कर दिया तीन नौजवान शूटर्स जिन्होंने पुलिस के कड़े घेरे को तोड़कर भारत के सबसे खूंखार माफिया सरगना अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के सिर में सटाकर गोली मार दी थी कैमरे में कैद हुई यह हत्या एक झटके में अंजाम दी गई इस घटना ने पूरे देश को हिला डाला

[0:47]साल 1979 उत्तर प्रदेश का पुराना इलाहाबाद शहर जिसे आज हम प्रयागराज कहते हैं और उसका एक बदनाम इलाका चकिया मोहल्ला इसी मोहल्ले में फिरोज नाम का एक तांगे वाला रहता था उसके बड़े बेटे का नाम था अतीक अहमद घर में तंगी थी गरीबी थी लेकिन अतीक के अंदर बचपन से ही एक अलग तरह की जिद थी उसे पढ़ाई लिखाई में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी 1979 आते-आते 17 साल का अतीक 10वीं के एग्जाम में फेल हो गया पर उसे इस बात का कोई दुख नहीं था उसकी नजरें तो कहीं और थी उसे ताकत चाहिए थी पैसा चाहिए था और वो भी शॉर्टकट से अतीक ने सबसे पहले मालगाड़ियों से कोयला चुराने का धंधा शुरू किया वो अपने कुछ दोस्तों के साथ रात के अंधेरे में कोयला चुराता और उसे ब्लैक में बेच देता इसी चोरी चकारी के बीच अतीक के हाथों पहली बार खून हुआ उसके खिलाफ एक हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ उस दौर में इलाहाबाद में जुर्म करना कोई छोटी बात नहीं थी लेकिन अतीक को समझ आ गया था कि लोगों के अंदर डर पैदा करके ही वो पैसा और पावर कमा सकता है धीरे-धीरे उसने रेलवे के ठेकेदारों से हफ्ता वसूलना शुरू कर दिया उसका तरीका एकदम सीधा या तो पैसा दो या जान से हाथ धो बैठो 80 का दशक आते-आते पुराना इलाहाबाद एक और खूंखार नाम से कांपने लगा था शौके इलाही उर्फ चांद बाबा पुलिस चांद बाबा के इलाके में घुसने से पहले 10 बार सोचती थी अगर उसका कोई गुर्गा पकड़ा जाता तो चांद बाबा पुलिस स्टेशन पर सरेआम बंबारी करके उसे छुड़ा लाता था अतीक शुरुआत में चांद बाबा को अपना उस्ताद मानता था उसे देखकर ही उसने जुर्म के तरीके सीखे थे 1985 आते-आते अतीक चांद बाबा का सबसे वफादार और खतरनाक शूटर बन चुका था अपहरण रंगदारी कत्ल अतीक हर काम में माहिर था इसी बीच उत्तर प्रदेश में 1985 में वीर बहादुर सिंह की सरकार बनी राज्य में फैलते जंगलराज को रोकने के लिए 1986 में यूपी का पहला गैंगस्टर एक्ट लागू किया गया चांद बाबा जैसे दिग्गजों के मौजूद रहते हुए उत्तर प्रदेश के इतिहास का पहला गैंगस्टर एक्ट लगा अतीक अहमद पर पुलिस ने रातों रात अतीक को उसके घर से उठाया और एक गुप्त स्थान पर ले गई तीन दिन तक अतीक का कोई अता पता नहीं था शहर में यह खबर फैल गई कि अतीक का एनकाउंटर हो गया है लेकिन यहीं से खेल में एक नया मोड़ आया इलाहाबाद के एक रसूखदार सांसद जिनके पास उस दौर की सबसे महंगी गाड़ियां हुआ करती थी उनके दिल्ली दफ्तर से सीधा फोन लखनऊ सेक्रेटेरिएट पहुंचा लखनऊ से कॉल कनेक्ट हुआ सीधे इलाहाबाद पुलिस चीफ के केबिन तक वो लड़का हमारा है उसे कुछ नहीं होना चाहिए फोन पर एक भारी आवाज गूंजी दोपहर होते-होते अतीक अहमद इलाहाबाद की सड़कों पर सीना ताने आजाद घूम रहा था उस दिन अतीक को एक बात समझ आ गई थी अगर हमेशा के लिए पुलिस और कानून से बचना है तो खुद सिस्टम का हिस्सा बनना पड़ेगा साल 1989 इलाहाबाद में चांद बाबा म्युनिसिपलिटी का चुनाव जीत चुका था और अब उसकी नजरें विधानसभा पर थी समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव जानते थे कि चांद बाबा की पापुलैरिटी और खौफ दोनों चरम पर है उन्होंने चांद बाबा को इलाहाबाद वेस्ट सीट से टिकट का ऑफर दिया चांद बाबा ने मुलायम सिंह से कहा नेताजी मेरा एक चेला है अतीक बहुत धार है उसमें उसे टिकट दे दीजिए मुलायम सिंह जो राजनीति के कच्चे खिलाड़ी नहीं थे उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया चांद अगर तुमने उस लड़के को विधानसभा भेज दिया तो कल वो तुमसे बड़ा हो जाएगा तुम्हारा कद छोटा पड़ जाएगा यह चुनाव तुम खुद लड़ो चांद बाबा ने फिर तय किया कि वो खुद इलाहाबाद वेस्ट से लड़ेगा जब अतीक को यह बात पता चली कि चांद बाबा ने उसे टिकट नहीं दिया तो वो भड़क उठा अतीक ने अपने ही गुरु के खिलाफ इंडिपेंडेंट कैंडिडेट्स नॉमिनेशन पेपर भर दिया चुनाव हुए वोटिंग के नतीजे आने से चार दिन पहले ही हवा का रुख अतीक की तरफ मुड़ चुका था चांद बाबा समझ गया कि यह तांगे वाले का लौंडा अब उसके हाथ से निकल चुका है उसने अतीक को खत्म करने का मौत का फरमान जारी कर दिया इलाहाबाद वेस्ट का एक ढाबा में अतीक अपने गैंग के साथ चाय पी रहा था चांद बाबा को भनक लग गई वह अपनी हथियारों से लैस फौज लेकर वहां पहुंचा लेकिन अतीक को इस हमले का पहले से अंदाजा था जैसे ही चांद बाबा वहां पहुंचा चारों तरफ से गोलियों की बारिश हुई अतीक की बंदूक से निकली गोलियों ने चांद बाबा के सीने को छलनी कर दिया गुरु अपने ही चेले के हाथों सड़क पर तड़प-तड़प कर मारा गया अगले एक हफ्ते के अंदर अतीक के गुर्गों ने गिद्धों की तरह चांद बाबा के गैंग के हर एक आदमी को चुन-चुनकर मौत के घाट उतार दिया चुनाव के नतीजे आए अतीक अहमद पहली बार इलाहाबाद वेस्ट से विधायक बन चुका था अब वह सिर्फ एक माफिया नहीं था वह माननीय अतीक अहमद था विधायक बनने के बाद अतीक का खौफ पूरे इलाहाबाद में फैल गया जिस रेलवे यार्ड से वह कभी लोहे के टुकड़े चुराता था अब उस पूरे रेलवे स्क्रैप का टेंडर सिर्फ अतीक के नाम पर छूटता था दहशत इस कदर थी कि कोई दूसरा ठेकेदार अतीक के सामने टेंडर का फॉर्म भरने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाता था 1991 और 1993 के चुनाव उसने लगातार जीते उसके पास अब 120 से ज्यादा शार्प शूटर्स की एक पूरी प्राइवेट आर्मी थी अतीक जल्द ही मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी के करीब आ गया समाजवादी पार्टी का साथ मिलते ही अतीक का कद बहुत बड़ा हो गया वो चौथी बार विधायक बना विधायक की कुर्सी पर बैठकर उसने सैकड़ों लोगों की जमीनों मकानों और दुकानों पर रातों रात कब्जा कर लिया इसी दौरान 1995 में यूपी की राजनीति में एक ऐसा कांड हुआ जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया इसे गेस्ट हाउस कांड कहा जाता है उस वक्त यूपी में एसपी और बीएसपी की गठबंधन सरकार थी लेकिन बीएसपी सुप्रीमो मायावती इस गठबंधन को तोड़ना चाहती थी 2 जून 1995 को मायावती लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में अपने विधायकों के साथ मीटिंग कर रही थी जब एसपी के नेताओं को भनक लगी कि सरकार गिरने वाली है तो वो बौखला गए अतीक अहमद के नेतृत्व में एसपी के गुंडों और विधायकों की एक भारी भीड़ ने गेस्ट हाउस पर हमला कर दिया दरवाजे तोड़े गए गालियां दी गई और मायावती के साथ बदसलूकी की कोशिश की गई अगर उस दिन कुछ पुलिस अफसर बीच-बचाव ना करते तो बहुत अनर्थ हो सकता था इस घटना ने साबित कर दिया कि सत्ता के नशे में अतीक और उसके जैसे बाहुबली लोकतंत्र को जूते की नोक पर रखते थे उसी साल 1996 में सिविल लाइंस इलाके में एक मशहूर व्यापारी अशोक साहू की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई इस मर्डर को अंजाम दिया था अतीक के छोटे भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ ने पुलिस अशरफ को पकड़ने दौड़ी लेकिन जब रिकॉर्ड खंगाले गए तो पुलिस अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई जिस वक्त अशोक साहू के सीने में गोलियां उतारी जा रही थी सरकारी कागजों के मुताबिक अशरफ उस वक्त चंदौली जेल की सलाखों के पीछे बंद था अतीक ने जेल के पूरे सिस्टम को खरीद लिया था अशरफ की जगह कोई और शख्स अशरफ के नाम पर जेल में हाजिरी लगा रहा था 2000 का दशक आते-आते अतीक इलाहाबाद का बेताज बादशाह बन चुका था लेकिन 2002 का साल आते-आते उत्तर प्रदेश की गद्दी पर मायावती विराजमान हो चुकी थी मायावती के शासन में अपराधियों पर नकेल कसना शुरू हुई अतीक पर एक ही दिन में 113 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गए इलाहाबाद में लालजी शुक्ला जैसे तेज तर्रार पुलिस अफसर को अतीक के पीछे लगा दिया गया 7 अगस्त 2002 इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतीक की पेशी थी अचानक कोर्ट परिसर में एक जोरदार बम धमाका हुआ कई पुलिस वाले लहूलुहान होकर गिर पड़े लेकिन इसमें अतीक को कुछ नहीं हुआ अतीक ने मीडिया के सामने बयान दिया यह पुलिस और मायावती सरकार मुझे मरवाना चाहती है लालजी शुक्ला ने मुझ पर बम फिकवा है लेकिन जब पुलिस ने जांच की और इलाक नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया तो जो सच सामने आया उसने सबको चौका दिया यह बम धमाका खुद अतीक और उसके पिता ने पुलिस पर दबाव बनाने और जनता की सिंपैथी बटोरने के लिए करवाया था जब पत्रकारों ने इंस्पेक्टर लालजी शुक्ला से पूछा कि क्या उन्होंने बम फिकवाया था तो शुक्ला ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया अगर मैं बम फिकवा था तो अतीक अहमद जिंदा नहीं बचता इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने अतीक को फूलपुर सीट से टिकट दे दिया जिस सीट से कभी पंडित जवाहरलाल नेहरू चुनाव जीतकर देश के प्रधानमंत्री बने थे उसी सीट से अब एक ऐसा इंसान चुनाव लड़ रहा था जिसके ऊपर हत्या और अपहरण के दर्जनों केस थे अतीक यह चुनाव लगभग 64000 वोटों से जीत गया वो अब सांसद था सांसद बनने के बाद इलाहाबाद वेस्ट की उसकी विधायक वाली सीट खाली हो गई अतीक ने सोचा कि वो दिल्ली में बैठकर राज करेगा और इलाहाबाद की सीट अपने छोटे भाई अशरफ को दे देगा उसने अशरफ को उस सीट से उपचुनाव में उतार दिया लेकिन यहीं से अतीक की बर्बादी की स्क्रिप्ट लिखी जानी शुरू हुई अशरफ के खिलाफ बीएसपी ने एक युवा नेता को टिकट दिया जिसका नाम था राजू पाल राजू पाल खुद कोई दूध का धुला नहीं था वो एक हिस्ट्री शीटर था कभी राजू अतीक के ही गैंग के लिए काम करता था लेकिन उसमें एक बात थी वो अतीक से डरता नहीं था जब उपचुनाव के नतीजे आए तो अतीक के पैरों तले से जमीन खिसक गई उसका भाई अशरफ बीएसपी के राजू पाल से चुनाव हार गया यह अतीक के लिए सिर्फ एक हार नहीं थी यह उसके गुरूर पर एक तमाचा था जिस इलाहाबाद में लोग उसके नाम से थर थर कांपते थे वहां कोई उसके भाई को कैसे हरा सकता है अतीक को लगा कि अगर उसने राजू पाल को नहीं हटाया तो शहर से उसका खौफ खत्म हो जाएगा 25 जनवरी 2005 राजू पाल अपनी गाड़ी से जा रहे थे तभी अतीक के शूटरों ने भरे बाजार उनकी गाड़ी को घेर लिया और ak47 से गोलियों की बारिश कर दी राजू पाल के शरीर में 19 गोलियां उतारी गई उसके समर्थक उसे लहूलुहान हालत में ऑटो में डालकर अस्पताल की तरफ भागे 5 किलोमीटर के उस रास्ते में चार पुलिस स्टेशन पड़ते थे लेकिन अतीक के शूटर उस चलती हुई गाड़ी पर लगातार फायरिंग करते रहे किसी खाकी वर्दी की हिम्मत नहीं हुई कि वो बीच में आकर इसे रोके इस पूरे रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड का एक चश्मदीद गवाह था राजू पाल का चचेरा भाई उमेश पाल राजू पाल की मौत के बाद उस सीट पर दोबारा उपचुनाव हुए मायावती ने राजू पाल की 9 दिन की विधवा पूजा पाल को अतीक के खिलाफ मैदान में उतारा पूजा पाल अपने हाथों की मेहंदी दिखाकर स्टेज पर रोती थी लेकिन जिस अशरफ को दो महीने पहले जनता ने नकार दिया था उसी अशरफ को जनता ने डर के मारे भारी मतों से जिता दिया लेकिन फिर 2007 में यूपी के चुनाव हुए और मायावती पूर्ण बहुमत के साथ मुख्यमंत्री बनी मायावती भूली नहीं थी कि 1995 के गेस्ट हाउस कांड में अतीक ने क्या किया था सत्ता में आते ही उन्होंने सबसे पहले अतीक अहमद पर नकेल कसनी शुरू की अतीक के गैंग का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया गया करोड़ों की संपत्ति जब्त कर ली गई अतीक के सिर पर इनाम घोषित हो गया सरकार बदलते ही समाजवादी पार्टी ने भी अतीक से पल्ला झाड़ लिया जो अतीक कभी पुलिस को अपनी जेब में रखता था वह अब एक चूहे की तरह अपनी जान बचाने के लिए दर दर भाग रहा था दिल्ली पुलिस ने उसे प्रीतमपुरा के एक फ्लैट से गिरफ्तार कर लिया अतीक जेल की सलाखों के पीछे था लेकिन 2008 में जब भारत-अमेरिका न्यूक्लियर डील पर संसद में वोटिंग होनी थी तो सरकार बचाने के लिए एक एक सांसद की जरूरत थी मुलायम सिंह यादव ने अतीक को जेल से बाहर निकलवाया ताकि वह संसद में वोट कर सके अतीक अहमद को पुलिस कस्टडी में संसद लाया गया ताकि वह वोट डाल सके लेकिन अतीक ने यहां गद्दारी की उसने पार्टी के खिलाफ जाकर वोट किया जिसके बाद मुलायम सिंह ने उसे हमेशा के लिए पार्टी से निकाल फेंका राजनीति से मिलने वाला सहारा खत्म हो गया साल 2017 उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बहुत बड़ा बदलाव आया बीजेपी की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने नई सरकार का रवैया एकदम साफ था माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा के पटल पर खड़े होकर वो ऐतिहासिक दहाड़ लगाई थी जिसकी गूंज से उत्तर प्रदेश का हर माफिया कांप उठा था अतीक अहमद के खिलाफ पीड़ित परिवारों ने मुकदमा दर्ज कराया उसके परिवार के खिलाफ व समाजवादी पार्टी के द्वारा पोषित माफिया है और उसकी कमर व तोड़ने का काम हमारी सरकार ने किया है इस माफिया को मिट्टी में मिला देंगे और इसके बाद शुरू हुआ ऑपरेशन क्लीन अतीक की 70 करोड़ से ज्यादा की अवैध संपत्तियों पर सरकार के बुलडोजर गरजने लगे उसके गैंग के गुर्गों को चुन-चुनकर सलाखों के पीछे धकेला जाने लगा लेकिन अतीक का अहंकार कम नहीं हुआ 2018 आते-आते अतीक देवरिया जेल में बंद था लेकिन जेल उसके लिए कैदखाना नहीं बल्कि उसका नया हेड क्वार्टर था लखनऊ के एक बड़े व्यापारी मोहित जैसवाल को अतीक के गुंडों ने सरेआम अगवा किया और सीधे देवरिया जेल के अंदर लेकर आए जेल के अंदर अतीक और उसके गुंडों ने मोहित जैसवाल को बेरहमी से पीटा और हथियारों के जोर पर उसकी करोड़ों की प्रॉपर्टी अपने नाम लिखवा ली जेल के अधिकारी तक उसकी जेब में थे जेल के अंदर हुई इस गुंडई का सच जब बाहर आया तो पूरे देश में हाहाकार मच गया सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस मामले में दखल दिया और आदेश दिया कि उसे उत्तर प्रदेश की किसी भी जेल में रखना सुरक्षित नहीं है 23 अप्रैल 2019 को कड़े पहरे के बीच अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल में शिफ्ट कर दिया गया लेकिन अतीक का अहंकार अभी भी जिंदा था उसे लगा कि साबरमती जेल में बैठकर भी वो उत्तर प्रदेश को अपनी उंगलियों पर नचा सकता है फरवरी 2023 राजू पाल हत्याकांड का मुख्य गवाह उमेश पाल जो पिछले 18 सालों से अतीक के खिलाफ डटकर खड़ा था अतीक की आंखों में चुभ रहा था उसने साबरमती जेल से एक साजिश रची 24 फरवरी 2023 की दोपहर प्रयागराज जैसे ही उमेश पाल अपनी गाड़ी से उतरा अतीक का बेटा असद और उसका शूटर गुलाम हथियारों के साथ उस पर टूट पड़े दिनदहाड़े बम और गोलियों की बौछार कर दी गई उमेश पाल और उसकी सुरक्षा में लगे दो पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया गया इस पूरे हमले का वीडियो सीसीटीवी में कैद हो गया जिसने पूरे देश को झकझोर दिया अतीक ने सोचा था कि वो 2005 की तरह फिर से खौफ पैदा कर देगा और कोई गवाह नहीं बचेगा लेकिन वो भूल गया था कि अब 2005 नहीं 2023 चल रहा है और यूपी में सरकार बदल चुकी है इस घटना के बाद पुलिस और एसटीएफ ने वह तांडव किया जिसकी उम्मीद अतीक ने सपने में भी नहीं की होगी अतीक के पूरे गैंग को चुन-चुनकर निशाना बनाया जाने लगा कुछ ही हफ्तों में एसटीएफ ने एक एनकाउंटर में अतीक के बेटे असद को मार गिराया जब साबरमती जेल में अतीक को पता चला कि उसका बेटा मारा गया है तो वो फूट-फूटकर रोया जो माफिया कभी अदालतों में मूछों पर ताव देता था वो साबरमती से प्रयागराज लाए जाते वक्त पुलिस वैन में फूट-फूटकर रो रहा था 28 मार्च 2023 को कोर्ट ने एक पुराने अपहरण मामले में अतीक को उम्रकैद की सजा सुनाई अपनी पूरी जिंदगी में अतीक पहली बार किसी मामले में कानूनी रूप से सजा पा रहा था 15 अप्रैल 2023 की वो रात प्रयागराज का कॉल्विन अस्पताल अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को मेडिकल चेकअप के लिए लाया गया था दोनों के हाथों में हथकड़ी थी मीडिया का जमावड़ा लगा था लाइव कवरेज चल रही थी पत्रकार अतीक से उसके बेटे के जनाजे में ना जा पाने को लेकर सवाल कर रहे थे अतीक जी आप अपने बेटे असद के जनाजे में नहीं जा पाए कुछ कहेंगे अतीक ने निराशा भरी आवाज में जवाब दिया नहीं ले गए तो नहीं गए यह अतीक के मुंह से निकले आखिरी शब्द थे उसी पत्रकारों की भीड़ में प्रेस का फर्जी आईडी कार्ड गले में डाले हाथ में माइक लिए तीन नौजवान लड़के आगे बढ़े और लगातार अतीक और अशरफ के ऊपर फायरिंग की 40 साल से उत्तर प्रदेश को डराने वाला वो बाहुबली धड़ाम से जमीन पर गिर पड़ा अगले 10 सेकंड के अंदर उन तीन लड़कों ने 18 राउंड फायरिंग की नौ गोलियां अतीक को लगी और चार अशरफ को लाइव टीवी पर पुलिस की मौजूदगी में देश के सबसे खूंखार बाहुबलियों में से एक का अंत हो चुका था गोली चलाने वाले उन तीनों हत्यारों ने भागने की कोशिश नहीं की उन्होंने तुरंत हथियार डाल दिए और पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया जब उनसे पूछताछ हुई तो उनका कहना था कि वो अतीक के गैंग का सफाया करके क्राइम की दुनिया में अपना नाम बनाना चाहते थे आज वो तीनों जेल की सलाखों के पीछे हैं और मामले की जांच चल रही है लेकिन क्या यह सच था क्या यह तीनों सिर्फ मोहरे थे पूछताछ में अतीक ने कई पॉलिटिशियंस बड़े बिल्डर्स और भ्रष्ट अधिकारियों के राज खोलने की धमकी दी थी क्या उनमें से किसी ने अपने राज दफन करने के लिए अतीक को हमेशा के लिए खामोश कर दिया यह सवाल आज भी हवा में तैर रहा है जांच एजेंसियों की चार्ज शीट में जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि अतीक के तार सीमा पार पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से जुड़े हुए थे पंजाब के रास्ते ड्रोन से जो हथियार गिराए जाते थे वो अतीक के गैंग तक पहुंचते थे जिन हथियारों की कंसाइनमेंट सरहद पार से आती थी उसका सीधा इस्तेमाल हमारे ही देश की धरती पर बेगुनाहों का खून बहाने के लिए किया जाता था दोस्तों यह थी अतीक अहमद की कहानी अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो तो इसे एक लाइक जरूर करें और कमेंट करिए जरूर बताइएगा कि अगला वीडियो आपको किस टॉपिक पर चाहिए तब तक के लिए जय हिंद जय भारत

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