[0:00]और जीवन को ऐसे ही व्यर्थ नहीं गवाना।
[0:06]हम बात कर रहे हैं जीवन की। अलग-अलग पहलुओं से जीवन को देखना है अलग-अलग पहलुओं से जीवन को परखना है अलग-अलग पहलुओं से जीवन को निहारना है कि जीवन किस दिशा में जा रहा है जीवन को बेहतर कैसे बनाएं? जीवन को सुंदर कैसे बनाएं? जीवन को अद्भुत कैसे बनाएं? जीवन को बेहतरीन कैसे बनाएं? ये हमारे हाथ में है। और इसीलिए हमने अल्फाबेट सीरीज शुरू कर रही है। हमने बात करी थी। ए वन लाइफ बनानी हो तो तीन एक को आपके जीवन में प्रवेश करवाना पड़ेगा। एक्सेप्टेंस का भाव आपके भीतर लाना पड़ेगा। हमेशा एनालिसिस आपको करता रहना पड़ेगा। कहीं ना कहीं देखते रहना पड़ेगा कि जीवन किस ओर जा रहा है। जीवन किस दिशा में जा रहा है। किस दिशा में गतिमान हो रहा है और आज बी की बात करनी है। जीवन को A1 बनाना है तो 3A चाहिए और जीवन को ब्यूटीफुल बनाना है तो 3B चाहिए। जीवन को सुंदर बनाना है। हमारी लाइफ कैसी हो? ब्यूटीफुल लाइफ हो। हम संसार में जितनी भी चीजें चाहते हैं, सब अच्छी चाहते हैं, बेहतर बेहतर चाहते हैं। तो जीवन बेहतर क्यों ना हो? संसार में हमारी जितनी भी चाह है, हम चाहते हैं कि हमारे पास कोई भी पदार्थ हो, हमारे पास कोई भी वस्तु हो, वो बेहतर हो, बेहतरीन हो, सबसे अच्छी हो, ब्यूटीफुल हो, सुंदर हो तो फिर जीवन को ब्यूटीफुल क्यों ना बनाए और इसीलिए कहा कि जीवन को ब्यूटीफुल बनाना है। तीन बी यदि आपकी लाइफ में है तो आपकी लाइफ ब्यूटीफुल बन सकती है।
[1:49]कहा कि तीन चीजों में बैलेंस आ जाना चाहिए। लाइफ कैसी होनी चाहिए? बैलेंस लाइफ होनी चाहिए। हमारी लाइफ बड़ी इनबैलेंस है। इसीलिए कभी इधर झुक जाते हैं, कभी इधर झुक जाते हैं। कभी इधर मुड़ जाते हैं, कभी इधर मुड़ जाते हैं, कभी ये रास्ता पकड़ लेते हैं, कभी ये रास्ता पकड़ लेते हैं, कभी हमारा झुकाव इस ओर हो जाता है, कभी हमारा झुकाव इस ओर हो जाता है, कभी इतना धर्म कर लेते हैं कि हमें खुद को आश्चर्य होता है कि इतना कैसे हो गया और कभी धर्म से इतना विमुख हो जाते हैं कि हमें खुद को आश्चर्य होता है कि हम क्या कर रहे हैं। इनबैलेंस। कहा कि जीवन में हर चीज बैलेंस चाहिए। एक बिल्डिंग खड़ी होती है, एक इमारत खड़ी होती है। और इमारत कभी कभार हम न्यूज़पेपर में अखबारों में सुनते हैं, पढ़ते हैं, देखते हैं कि कभी कभार 15 मंजिला, 20 मंजिला इमारत ढह गई नीचे गिर गई है। क्या हुआ? वो इनबैलेंस हो गई। उसके भीतर उसके मूल में उसके स्त्रोत में जहां बैलेंस बना रहना चाहिए वहां कहीं ना कहीं परेशानी खड़ी हुई और इसीलिए इनबैलेंस हो गई तो इमारत भी नीचे गिर जाती है। और इसीलिए मैं आपको कहना चाहता हूं कि जीवन की इमारत भी नीचे गिर जाएगी यदि हमको बैलेंस करना नहीं आया। इसीलिए हमारे यहां बताया गया कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों का बैलेंस करना जिसको आ जाता है वो संसार में रहते हुए भी कभी दुखी नहीं हो सकता और यदि धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का बैलेंस करना आपको नहीं आता तो आप संसार में कहीं ना कहीं परेशान रहते हैं। बैलेंस लाइफ। जीवन बड़ा संतुलित होना चाहिए।
[3:33]हमारी नैया बड़ी डामाडोल है। और ये भवसागर से पार निकलना हो, जीवन में कहीं ना कहीं सुख शांति समाधि प्राप्त करनी हो तो कहीं ना कहीं बैलेंस्ड लाइफ हमें बनानी पड़ेगी और इसीलिए मैं आपसे कहना चाहता हूं कि जीवन में कोशिश करिएगा आपकी लाइफ बैलेंस्ड लाइफ हो। हर चीज हो सके धर्म भी आप कर पाओ। परिवार भी आप संभाल पाओ। व्यापार भी आप कर पाओ व्यवहार में भी आप खड़े रह पाओ समाज के कार्य भी आप कर सको, संघ के कार्य भी आप कर सको, अनुष्ठानों में हिस्सा भी आप ले सको हर चीज आप कर सको ऐसी बैलेंस लाइफ आपकी होनी चाहिए आज का आदमी परेशान है ये करता हूं तो ये छूट जाता है ये करता हूं तो ये छूट जाता है। क्योंकि हमें बैलेंस करना नहीं आता। ना टाइम को बैलेंस करना आता है, ना लाइफ को बैलेंस करना आता है और इसीलिए मैं आपसे कहना चाहता हूं कि जीवन को बड़ा बैलेंस्ड बनाना होगा। कोई भी चीज हमसे चुकनी नहीं चाहिए। कोई भी चीज हमसे छूटनी नहीं चाहिए। हमें बैलेंस्ड लाइफ बनानी है। और कहा कि बैलेंस्ड लाइफ चाहिए तो तीन चीजों में आपका बैलेंस होना बड़ा जरूरी है। कहा नंबर वन बैलेंस इन माइंड। लाइफ को बैलेंसिंग रखना हो, लाइफ को बैलेंस बनाना हो तो सबसे पहले माइंड को बैलेंस करना पड़ेगा। कहीं ना कहीं हम वहां चूक जाते हैं। मन का संतुलन होगा तो जीवन संतुलित बन जाएगा। माइंड यदि हमारा बैलेंस है तो निश्चित तौर पर जीवन भी हमारा बैलेंस्ड बन जाएगा और इसीलिए मैं आपसे कहना चाहता हूं कि मन को बड़े संतुलित भाव में रखिए।
[5:15]बड़ा संतुलन चाहिए मन में। हमारे जीवन की जितनी भी समस्याएं खड़ी होती है कहीं ना कहीं मन से खड़ी होती है। और हमारे जीवन में जितनी भी समस्याओं का समाधान होता है कहीं ना कहीं मन से ही होता है। समस्या पैदा भी यहां से होती है और समस्याओं का समाधान भी यही से होता है। बैलेंसिंग लाइफ आपको करनी हो, बैलेंस आपका जीवन बनाना हो, संतुलित आपका जीवन बनाना हो तो निश्चित तौर पर आपको निश्चित तौर पर जीवन में तीन जगह पर बैलेंस बनाना आना चाहिए। नंबर वन, बैलेंस इन माइंड। मन को थोड़ा संतुलित रखिए।
[6:00]जो हमारी आदत है। हर चीज में अग्रेशन। हर चीज में क्वेश्चन मार्क। धर्म के हर क्षेत्र में शंका। कहीं पर भी श्रद्धा नहीं, कहीं पर भी विश्वास नहीं, कहीं पर भी ट्रस्ट नहीं, कहीं पर भी रिलायबिलिटी हमारे जीवन में है ही नहीं और इसीलिए हम हमारे जीवन में ट्रस्ट को नहीं रख पाते दूसरे के ऊपर भी ट्रस्ट नहीं कर सकते। हमारे भीतर श्रद्धा नहीं है इसलिए दूसरों की श्रद्धा भी हमें पचती नहीं है। हमारे भीतर कहीं ना कहीं इनबैलेंस है इसलिए हम दूसरों का जीवन भी हमें इनबैलेंस लग रहा है और इसीलिए मैं आपसे कहना चाहता हूं कि समझने की कोशिश करना बैलेंसिंग लाइफ चाहिए। जीवन में संतुलनता बड़ी जरूरी है और आप तो संसार में हो, हम साधु है, हमने सब छोड़ दिया। हम एक ही धारा में बहे तो हमारे लिए अच्छा है। हम अध्यात्म की धारा में, हम धर्म की धारा में बहते रहे, वो हमारे लिए अच्छा है लेकिन आप यदि एक ही धारा में बहोगे तो आपका जीवन कहीं ना कहीं परेशान हो जाएगा। आपको सभी धाराओं को संभालना है। आपकी लाइफ वन साइडेड नहीं हो सकती। आप संसार के भीतर बैठे हो इसलिए हर चीज आपको मैनेज करनी है हर चीज में बैलेंस बनाना है हर चीज में आपको संभालना है इसीलिए मैं आपसे कई बार कहता हूं मैं तो प्रवचनों के माध्यम से कई बार कहता हूं कि एक चीज समझ लेना। कभी जीवन में ऐसी परिस्थिति आ जाए। कि आपके धर्म करने की वजह से परिवार का माहौल बिगड़ रहा है घर का माहौल बिगड़ रहा है कहीं ना कहीं घर में सब परेशान हो रहे हैं कहीं ना कहीं सभी के भीतर एक असमाधि का भाव पैदा हो रहा है तो शास्त्रकार भगवंतों ने कहा कि पहले उन लोगों की समाधि बनाएं उसके बाद में धर्म के क्षेत्र में आए।
[8:13]बैलेंस इन नेचर। आपका स्वभाव भी संतुलित चाहिए।
[8:21]हमारी परेशानी है। हम प्रेम बरसाते हैं तो इतना बरसाते हैं। कि आदमी परेशान हो जाए कि आज हुआ क्या? और क्रोध करते हैं तो इतना करते हैं। कि आदमी सोचे कि यही आदमी था या और कोई था। बैलेंस इन नेचर। हम हमारे स्वभाव को भी कहीं ना कहीं संतुलित नहीं कर पाते। नेचर बैलेंस होना बहुत जरूरी है क्योंकि परिस्थितियां आपके सामने विकट बनेगी। कहीं ना कहीं विपरीत परिस्थितियां आपके सामने खड़ी होगी। कहीं ना कहीं डिफरेंशिएट आपके जीवन में आएंगे। कहीं ना कहीं आपके माइंड को डिस्ट्रैक्ट करने वाली परिस्थितियां आपके जीवन में बनेगी और उस समय यदि आपके नेचर में बैलेंस नहीं है तो समझना बड़ा कठिन हो जाएगा। एक अस्पताल में एक छोटे बच्चे का हार्ट का ऑपरेशन था।
[9:18]बड़ा क्रिटिकल सिचुएशन में वो बच्चा था। और डॉक्टर ने जो समय दिया था। उससे 20-25 मिनट 30 मिनट ज्यादा हो गई डॉक्टर अभी तक पहुंचे नहीं सारे परिवार वाले परेशान हैं। ये क्या हो गया? इतनी क्रिटिकल सिचुएशन है। इतना बड़ा ऑपरेशन है और डॉक्टर कैसा है? उसको उसकी उसके ड्यूटी के लिए वो जरा भी सिंसियर नहीं है। सभी क्रोध में तिल मिला रहे हैं। सभी परेशान है। सभी ये सोच रहे है कि डॉक्टर आया उसको सुना दे उसको बोल दे। उतने में अस्पताल का दरवाजा खुला डॉक्टर ने अंदर प्रवेश किया। ये सब अभी कुछ बोले उसके पहले सीधा ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टर ने एंट्री ले ली। छोटे बच्चे का ऑपरेशन था। बड़े सुंदर तरीके से वो ऑपरेशन को निपटाया परिपूर्ण किया। और बहुत अच्छी तरीके से वो ऑपरेशन को परिपूर्ण करके करीबन दो घंटे के बाद डॉक्टर जब बाहर निकले तब भी यहां पे उनके सगे स्नेही संबंधी बच्चे के खड़े हुए थे पूछने के लिए क्या हुआ, कैसे हुआ, किस तरह से हुआ। डॉक्टर ने कुछ आंसर नहीं दिया दरवाजा खोल कर के चले गए। सगे स्नेही बड़े परेशान हैं। कि ये क्या हुआ डॉक्टर को? लेट आए 20 मिनट 25 मिनट हमारी बात सुनी नहीं और ऑपरेशन खत्म करके चले भी गए फिर भी हमारी बात सुनने को राजी नहीं सुनने को तैयार नहीं। असिस्टेंट को बुलाया। कि ये कैसा बेकार डॉक्टर है?
[10:53]हमारी बात तो सुने कम से कम हमें समझे तो सही हमें जवाब तो दे ऑपरेशन कैसा हुआ किस तरह से हुआ ऐसा डॉक्टर कोई होता है क्या डॉक्टर को हम भगवान का स्वरूप मानते हैं लेकिन ये तो उसका निम्नतर स्वरूप है। असिस्टेंट ने कहा कि आपको पता ना हो तो बता दूं। अभी-अभी 3 घंटे पहले डॉक्टर साहब के बेटे का एक्सीडेंट हुआ है और उनकी मृत्यु हो गई है। लेकिन फिर भी मेरी एक ड्यूटी है, मेरा एक कर्तव्य है। इसीलिए बेटे को वैसे ही वहां पर रख के यहां पर आए आपके बेटे का ऑपरेशन किया क्योंकि डॉक्टर साहब ने कहा कि मेरा बेटा तो चला गया लेकिन मेरी वजह से दूसरे किसी का बेटा चला जाए ये मुझे जरा भी नहीं चलेगा। इसीलिए बेटे को वैसा ही छोड़कर यहां पे आए और ऑपरेशन निपटा के अब उसकी चिता को दाग देने के लिए। बैलेंस इन नेचर।
[11:56]तुम्हारा स्वभाव कैसा हो? बैलेंस्ड हो। जीवन की कोई भी सिचुएशन में हमें संतुलन बनाना आना चाहिए। यदि संतुलन बनाना नहीं आएगा तो जीवन बड़ा व्यथित हो जाएगा। हम बड़े व्यथित रहेंगे, हम बड़े पीड़ित रहेंगे, परेशान रहेंगे इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि जीवन को यदि संतुलित बनाना है तो तीन चीजों में संतुलन होना बड़ा जरूरी है। सबसे पहले नंबर में बैलेंस इन माइंड नंबर टू बैलेंस इन नेचर एंड नंबर थ्री बैलेंस इन डाइट। तुम्हारी भोजन व्यवस्था भी बैलेंसिंग होनी चाहिए। आज आप लोगों का जीवन अस्तव्यस्त हुआ कहीं ना कहीं आपकी दिनचर्याएं बिगड़ी है। कहीं ना कहीं आपकी भोजन व्यवस्था आपकी निद्रा ये सारी व्यवस्थाएं टूटी है इसलिए आपका जीवन कहीं ना कहीं अस्तव्यस्त हुआ है। इसलिए कहा कि बैलेंस इन डाइट। भोजन सात्विक हो। भोजन व्यवस्थित हो। भोजन अच्छा हो। भोजन सुचारू हो। जो हमारे शरीर को बल देने वाला हो। हमारे स्वास्थ्य को बिगाड़ने वाला नहीं हो लेकिन हमारे स्वास्थ्य को सुधारने वाला हो। ऐसा भोजन यदि किया जाए तो हमारी दिनचर्या बराबर रहेगी। दिनचर्या बराबर रहेगी तो आपकी निद्रा बराबर रहेगी और निद्रा बराबर रहेगी तो आपका पूरा जीवन पूरी साइकिल बराबर चलेगी जहां भोजन बिगड़ता है वहां आपके पूरे जीवन की साइकिल बिगड़ती है। इसलिए कहा कि बैलेंस इन डाइट। और तीन चीजों में हमें बैलेंस बनाना आ जाए। तीन चीजों को हम बैलेंस कर ले तो निश्चित तौर पर हमारी लाइफ ब्यूटीफुल हो सकती है और बैलेंस लाइफ ही ब्यूटीफुल लाइफ बन सकती है वरना हम चाहे कितनी कोशिश कर ले कितना पुरुषार्थ कर ले लेकिन हमारी लाइफ सुचारू सुंदर नहीं बन पाएगी। हमें लाइफ को ब्यूटीफुल बनाना है तो बैलेंस बनाना पड़ेगा और बैलेंस यदि बनाना है तो तीन चीजों का बैलेंस जीवन में होना बहुत जरूरी है। सबसे पहले नंबर में बैलेंस इन माइंड नंबर टू बैलेंस इन नेचर एंड नंबर थ्री बैलेंस इन डाइट। ये तीन चीजों का बैलेंस बनाइए।
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