[0:00]आपने शायद सुना होगा कि वेट लॉस के लिए डिसिप्लिन की ज़रूरत है। मैं भी पहले यही सोचा करता था कि थोड़ा डिसिप्लिन हो जाऊं तो शायद अपना वेट लॉस कंप्लीट कर लूंगा।
[0:11]बट सच्चाई तो यह है कि डिसिप्लिन काम ही नहीं करता। यस, आपने सही सुना। अगर मैं डिसिप्लिन पे डिपेंड करता तो शायद आज भी 150 kg का ही होता।
[0:20]जो लोग एक्चुअल में वेट लॉस करके उसे मेंटेन करते हैं, उनके पास कोई सुपर ह्यूमन डिसिप्लिन नहीं होता।
[0:27]बाहर से हम लोगों को लगता है कि वाह, उस बंदे में क्या डिसिप्लिन है, क्या विल पावर है। बट इन रियलिटी, ये लोग बॉडी मेंटेन करने के लिए ज्यादा कुछ एफर्ट नहीं डाल रहे।
[0:36]इन लोगों ने अपनी एक नई लाइफ बनाई है। एक ऐसी लाइफ डिजाइन करी है जहां हेल्दी रहना एफर्टलेस बन जाता है।
[0:43]सच बताऊं तो एक लाइफ चेंजिंग ट्रांसफॉर्मेशन के लिए आपको सिर्फ दो चीजें चाहिए। फर्स्ट, एक स्ट्रांग पर्पस एंड सेकंड, इजी टू फॉलो सिस्टम्स।
[0:53]स्ट्रॉन्ग पर्पस यानी कोई ऐसी वजह जिसे आप डीपली वैल्यू करते हो।
[0:58]ये नहीं कि मुझे पतला दिखना है या मुझे सिक्स पैक एप्स बनाना है। ये मेजॉरिटी लोगों के लिए सिर्फ सरफेस लेवल गोल्स होते हैं।
[1:05]खुद से पूछो कि आपका रीजनिंग, आपका पर्पस क्या है। बट सिर्फ़ एक स्ट्रॉन्ग पर्पस गारंटी नहीं देता कि आप फैट लॉस कर लोगे।
[1:12]कुछ लोगों के पास बहुत ही स्ट्रॉन्ग रीज़न होता है। जैसे अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल बनना, अपने पेरेंट्स के लिए फिट होना।
[1:21]बट कंसिस्टेंट रिजल्ट्स देखने के लिए आपको पर्पस के साथ-साथ एक सिस्टम चाहिए।
[1:26]एक ट्रस्टवर्दी प्रोसेस जो चैलेंजिंग सिचुएशंस के लिए प्रिपेयर करता हो।
[1:29]जब मैं ओवरवेट था, मुझे लगता था कि मुझ में डिसिप्लिन की कमी है, लेकिन बाद में समझ आया कि डिसिप्लिन बनाया नहीं जाता, डिसिप्लिन तो एक रिजल्ट होता है जब आपके पास एक स्ट्रॉन्ग पर्पस एंड इजी टू फॉलो सिस्टम्स हो।
[1:42]सिस्टम क्या होता है भाई? सिस्टम होता है आपका स्ट्रक्चर, आपका एनवायरनमेंट, आपकी डेली हैबिट्स।
[1:48]ट्रांसफॉर्मेशन का असली गेम है अपनी लाइफ को रीडिजाइन करने में।
[1:53]ऐसी लाइफ डिजाइन करो जहां हेल्दी डिसीज़ंस लेना सबसे आसान चॉइस हो।
[1:57]फॉर एग्जांपल, जब आप अपनी डाइट चार्ट बना रहे हो, अगर ऐसे मील्स चूज़ करो जो कुक करने में आसान हैं, टेस्ट आपको पसंद है और आपके गोल्स को सपोर्ट करते हैं, तो क्या इस डाइट को फॉलो करने के लिए आपको डिसिप्लिन की ज़रूरत पड़ेगी?
[2:10]नहीं ना? आप नेचुरली चिपके रहोगे। जब भी लाइफ में कोई चैलेंजिंग सिचुएशन आती है, उस टाइम आपका डिसिप्लिन टेस्ट नहीं होता। उस टाइम आपके सिस्टम्स टेस्ट होते हैं।
[2:20]आपने देखा होगा कि बहुत सारे लोग वेट लॉस करके फिर से मोटे हो जाते हैं। इन लोगों के पास एक स्ट्रॉन्ग पर्पस तो था, बट जिस दिन लाइफ में थोड़ी ऊंच-नीच हुई, इनके सिस्टम्स एक्सपोज हो गए।
[2:31]अगर आपके सिस्टम्स स्ट्रॉन्ग हों तो आप मोटिवेशन पे डिपेंड नहीं करोगे।
[2:36]लेकिन एक और चीज है जहां लोग गलती कर देते हैं और वो है माइंडसेट के साथ।
[2:41]जब तक सभी कुछ सही चल रहा है, तब तक डिसिप्लिन और सिस्टम दोनों आसान लगते हैं।
[2:46]लेकिन जैसे ही प्रोग्रेस स्लो हो जाती है, लोग अपनी बिलीफ खोना स्टार्ट कर देते हैं।
[2:52]इस पॉइंट पे सिर्फ एक चीज काम आती है और वो है कंट्रोल्ड ऑप्टिमिस्म।
[2:57]जब आप फैट लॉस स्टार्ट करते हो, एक पॉजिटिव माइंडसेट रखना बहुत ज़रूरी होता है।
[3:01]शुरुआत के कुछ हफ़्तों में कोई प्रूफ़ नहीं होता। कोई गारंटी नहीं होता कि आप ट्रांसफॉर्मेशन करोगे। बस होता है एक बिलीफ।
[3:09]आपको अपने एफर्ट्स पे विश्वास रखना पड़ता है बिना ये जाने कि रिजल्ट्स कब दिखेंगे।
[3:15]ये फेज सबसे मुश्किल है। इसीलिए, कंट्रोल्ड ऑप्टिमिस्म का माइंडसेट रखना बहुत ज़रूरी है।
[3:20]नोट करिए कि मैंने ऑप्टिमिस्म नहीं बल्कि कंट्रोल्ड ऑप्टिमिस्म कहा, क्योंकि इसका मतलब ये नहीं होता कि आप हर दिन पॉजिटिव सोचो।
[3:28]कंट्रोल्ड ऑप्टिमिस्म का मतलब है रियलिटी को समझना और फिर भी होपफुल रहना।
[3:33]कुछ दिन आपको रिजल्ट्स मिलेंगे और कुछ दिन कोई भी प्रोग्रेस नहीं दिखेगी।
[3:37]मेरे पुराने वीडियोस में मैं इतना कॉन्फिडेंटली इसलिए पोस्ट कर रहा था क्योंकि मेरे मन में कहीं ना कहीं मैं जानता था कि जल्द ही अपने गोल को अचीव करने वाला हूं।
[3:46]ये कन्विक्शन, ये विश्वास आपको बहुत दूर तक लेकर जा सकती है।
[3:50]एज़ अ फैट लॉस कोच, मेरा काम सिर्फ डाइट पकड़ना नहीं होता। मैं अपनी क्लाइंट्स की लाइफ में हेल्दी हैबिट्स एंड बिहेवियर्स कल्टीवेट करने की कोशिश करता हूं।
[3:59]अगर आप भी अपनी लाइफ को रीडिजाइन करना चाहते हो, देन चेक आउट माय वेबसाइट। ऑनलाइन कोचिंग स्लॉट्स आर ओपन।
[4:06]अब कुछ लोग ये भी बोलेंगे कि मोहित, हमने माइंडसेट चेंज कर लिया, बढ़िया सिस्टम सेटअप कर लिया, बट फिर भी क्रेविंग्स से हार जाते हैं।
[4:14]एंड ऑनेस्टली, मैं आपको समझ सकता हूं। मुझे भी बहुत क्रेजी क्रेविंग्स हुआ करती थी।
[4:18]अगर मोटे लोगों की क्रेविंग्स मैजिकली गायब हो जाएं तो शायद दुनिया में मोटे लोग बचेंगे भी नहीं।
[4:24]सो द रियल क्वेश्चन इज, क्रेविंग्स से एक्चुअली डील कैसे करें।
[4:28]देखो, क्रेविंग्स कंट्रोल करने का सलूशन डिसिप्लिन नहीं होता। सलूशन है अपनी बॉडी और इमोशंस को समझना।
[4:34]क्रेविंग्स तब होती है जब या तो आपकी बॉडी अंडरनरिश्ड है या फिर आप अपने इमोशंस को फूड के थ्रू टैकल कर रहे हो।
[4:42]जब आप अपनी बॉडी को प्रॉपर्ली सैटिएट करते हो तो क्रेविंग्स नेचुरली कम हो जाती हैं।
[4:48]और सैटिएट करने का मतलब सिर्फ ये नहीं होता कि कैलोरीज मैनेज कर ली। प्रॉपर्ली सैटिएट करने का मतलब होता है कि आप रियल एंड हेल्दी फूड्स खा रहे हो।
[4:56]अच्छा खासा पोर्शन साइज ले रहे हो और जंक फूड कम से कम खा रहे हो।
[5:00]शुरुआत में खुद को फोर्स करना पड़ेगा, बट एक बार जब आप एक्सपीरियंस कर लो कि एक हेल्दी बॉडी एंड हेल्दी माइंड कैसा फील करता है, तो मैं गारंटी देता हूं कि आप अपने पुराने हैबिट्स पे वापस नहीं जाओगे।
[5:13]एक दिन ऐसा भी आएगा कि आप अपने फेवरेट फूड्स को गिल्ट फ्री एंजॉय करना स्टार्ट कर दोगे।
[5:18]मिठाई का एक पीस खा के अगला पीस खाने की लालच भी नहीं आएगी।
[5:22]सस्टेनेबल वेट लॉस का मतलब क्रेविंग्स से लड़ना नहीं होता, बल्कि एक ऐसी लाइफ डिजाइन करना होता है जिसमें क्रेविंग्स होती ही नहीं।
[5:30]मैं अपना एग्जांपल देता हूं। जब मैं मोटा था, मैं समझ गया था कि मेरे लिए टेस्ट बहुत इंपोर्टेंट है।
[5:36]बट अगर मेरा मील बहुत टेस्टी होता तो मैं ओवर ईटिंग कर लेता। सलूशन मैंने निकाला कि 90% ऑफ द टाइम मैं एवरेज टेस्ट के मील्स खाऊंगा।
[5:43]एवरेज टेस्ट के मील्स के साथ कंसिस्टेंसी मेंटेन करना आसान हो जाता है, क्योंकि अगर आपका मील बहुत टेस्टी है तो खाने के बाद भी सेटिस्फेक्शन नहीं होगा।
[5:51]और अगर बुरा है तो आप डाइट फॉलो ही नहीं कर पाओगे।
[5:55]ये एवरेज टेस्ट का सिस्टम फॉलो करते हुए मुझे पांच साल हो गए। अभी तक ये सिस्टम टूटा नहीं है।
[6:01]बट हां, सिर्फ बॉडी को नरिश् करना काफी नहीं होता। आपको माइंड को इमोशनली रेगुलेट करना भी सीखना पड़ेगा।
[6:07]ये एक और डिटेल टॉपिक है एंड अगर आपको इस टॉपिक में वीडियो चाहिए, देन इस वीडियो के 3000 लाइक्स कंप्लीट कर दो।
[6:13]और साथ ही साथ, मैं तो बोलूंगा कि कमेंट्स में सभी लोग अपना स्टार्ट वेट एंड एंड वेट लिखो एंड अगर आप कंफर्टेबल हो शेयर करने में, तो वेट लॉस क्यों स्टार्ट किया, वो पर्पस भी लिख दो।
[6:24]शायद कोई और देख के मोटिवेट हो जाए।
[6:27]एंड बिकॉज़ हम फिजिकल एंड साइकोलॉजिकल हेल्थ की बात कर रहे हैं, मैं एक सप्लीमेंट भी रेकमेंड करना चाहूंगा एंड दैट इज़ क्रिएटिन।
[6:33]मसल ब्लेज़ क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट आपके बॉडी एंड माइंड दोनों के लिए बेनिफिशियल है।
[6:38]सप्लीमेंट्स खरीदना मुश्किल नहीं होता, बल्कि उन्हें रेगुलरली लेना असली चैलेंज होता है।
[6:43]इसीलिए मैंने क्री एम्प यूज़ करना स्टार्ट किया। इसके फ्लेवर्स जैसे सिट्रस ब्लास्ट प्री वर्कआउट से पहले एक रिफ्रेशर जैसा फील करते हैं।
[6:51]कोई बोरिंग सप्लीमेंट जैसा नहीं। जब टेस्ट अच्छा हो और रिजल्ट्स भी मिले तो कंसिस्टेंसी मेंटेन करना मुश्किल नहीं लगता।
[6:58]और असली मसल ग्रोथ वहीं कंसिस्टेंसी से आती है।
[7:01]सो चेक आउट muscleblaze.com एंड गेट योरसेल्फ द मसल ब्लेज़ क्रैंप क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट।
[7:06]अब एक और सबसे कॉमन प्रॉब्लम जहां लोग अटक जाते हैं और वो है ऑल और नथिंग वाला माइंडसेट।
[7:11]कुछ लोग बोलते हैं ना कि अगर मैं करना चाहूं तो सब कर लूंगा। भाई, ये लोग कुछ नहीं करते।
[7:16]ये माइंडसेट मुझे सबसे ज्यादा पीछे रोकता था। हर बार मैं सोचता था कि इस बार परफेक्ट रहना है, परफेक्ट डाइट, परफेक्ट रूटीन, परफेक्ट ट्रेनिंग।
[7:24]लेकिन जिस दिन इस परफेक्ट रूटीन से थोड़ी ऊंच-नीच हो गई, मैं गिव अप कर देता था।
[7:29]वही होता था जो सब लोगों के साथ होता है। चीट मील चीट डे बन गया, चीट डे चीट वीकेंड, फिर अगले महीने ही स्टार्ट करूंगा।
[7:35]देखो, अगर तुम एक दिन गलत कर लेते हो तो टेक्निकली तुम्हारा प्रोग्रेस डिले होता है, डिस्ट्रॉय नहीं।
[7:41]रियल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए तुम्हें सीखना पड़ेगा बाउंस बैक माइंडसेट।
[7:46]एक दिन गलत हो गया, कोई बात नहीं। नेक्स्ट मील पे वापस सही चॉइस करो।
[7:50]और जो लोग न्यू ईयर का इंतजार कर रहे हैं, भाई, अभी अक्टूबर-नवंबर चल रहा है। जनवरी में स्टार्ट करोगे तो यू आर ऑलरेडी टू मंथ्स बिहाइंड।
[7:58]जो भी दिन आप इस वीडियो को स्टार्टिंग देख रहे हो, वही आपका स्टार्ट डेट है।
[8:02]थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग। आई विल सी यू इन द नेक्स्ट वन। बाय-बाय।



