[0:00]सबसे बड़ी समस्या क्या है? सूर्य ही एक ऐसी शक्ति है पूरे प्रकृति में, ब्रह्मांड में जो मैंने आपसे कहा कि 350 से ज्यादा कीटाणु और जीवाणुओं को मारने की ताकत अकेले सूर्य में है।
[0:12]तो उन इलाकों में जहां सूर्य है नहीं, वहां सभी तरह के जीवाणु और सभी तरह के कीटाणु पनपते हैं।
[0:17]तो उन देशों में सबसे ज्यादा बीमारियां, वायरल इंफेक्शन और बैक्टीरियल इंफेक्शन की ही होती है।
[0:23]तो इसलिए यूरोप में क्या होता है, कोई भी छोटी सी बीमारी या महामारी आई तो सबको टीके लगाना अनिवार्य कर दिया जाता है।
[0:30]कारण क्या है कि वह एक वायरस और एक बैक्टीरिया जो मर सकता है सूर्य की तेज रोशनी में है ही नहीं वहां पर तो वह तो फैलने वाला है, बढ़ने वाला है।
[0:38]तो दवा देकर ही उसको रोक पाएंगे। अब हम उनकी नकल करके भारत में भी यही शुरू कर देते हैं मास वैक्सीनेशन।
[0:46]सबको हेपेटाइटिस बी के टीके लगाओ चाहे हो या ना हो।
[0:49]सबको पोलियो का वैक्सीन देते जाओ, हो या ना हो।
[0:54]सबको ये वैक्सीन दे दो, सबको वो वैक्सीन दे दो।
[0:58]ये उनकी नकल करके हमने अपने देश में जो शुरू किया है, ये अपना ही सर्वनाश करने का काम हम कर रहे हैं।
[1:03]अब इसमें होता क्या है, एक तो फालतू खर्चा हम करते रहते हैं।
[1:07]दूसरा हमारी प्रकृति ने हमारे शरीर को क्षमता दे रखी है बीमारी से लड़ने की और जो वैक्सीन या दवा हम लेते हैं, वो हमारी उसी क्षमता को प्रभावित करती रहती है।
[1:18]तो अंतिम दुष्परिणाम यह होता है कि आपने जिन बीमारियों से बचने के लिए टीके लगवाए थोड़े दिन के बाद यह बड़े पैमाने पर बीमारियां फैलने लगती हैं भारत में।
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