[0:00]हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए। नमस्कार जय हिंद वंदे मातरम प्यारे बच्चों यूपी लेखपाल की अगर आप तैयारी कर रहे हैं तो ग्राम समाज एवं विकास एक महत्वपूर्ण टॉपिक है आपका और इस विषय में आपको पांच नंबर का स्कोप मिलता है। अगर पांच नंबर आप सही करते हैं तो आप कटाव के काफी नजदीक पहुंच जाएंगे। तो उन पांच नंबर की तैयारी करने के लिए आज की यह मैराथन क्लास लेकर आया हूं। जब आप यह क्लास कंप्लीट कर रहे होंगे तो आपके अंदर वह कॉन्फिडेंस पैदा हो जाएगा कि ग्राम समाज एवं विकास से अब कोई प्रश्न गलत नहीं होगा। वीडियो को लाइक कर लीजिएगा चैनल पर नए हैं चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिएगा क्योंकि प्रश्न यहीं से आएगा। पढ़ते रहेंगे आप मेरे साथ तो आपको यकीन आएगा। रही बात आज की इस वीडियो के पीडीएफ की या हमारे चैनल पर उपलब्ध अन्य वीडियोस की पीडीएफ की तो स्क्रीन पर आपको एक व्हाट्सएप नंबर दिख रहा होगा जहां पर आप मैसेज करके सारी पीडीएफ को प्राप्त कर सकते हैं। बहुत ही कम समय में बहुत ही अच्छी तैयारी हम आपको 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हैं। प्रसिद्ध पुस्तक 'रूरल सोशियोलॉजी इन इंडिया' के लेखक ए. आर. देसाई हैं। ग्रामीण समाज की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार प्राथमिक क्षेत्र अर्थात कृषि एवं पशुपालन होता है। ग्रामीण समाज की सबसे प्रमुख सामाजिक विशेषता संयुक्त परिवार प्रणाली है और हम की भावना है यानी कि वी फीलिंग। ऐतिहासिक रूप से भारतीय गांवों का आर्थिक और सामाजिक ताना-बाना जाति व्यवस्था एवं जजमानी व्यवस्था पर टिका रहा है। भारत का पहला डिजिटल गांव होने का गौरव गुजरात के अकोदरा को प्राप्त है। एशिया का सबसे स्वच्छ गांव मावलिन नोंग माना जाता है जो मेघालय राज्य में स्थित है। नगरीय समाज में स्तरीकरण वर्ग पर होता है जबकि ग्रामीण समाज में सामाजिक स्तरीकरण का आधार जाति और भूमि स्वामित्व है। भूमि स्वामित्व के अलावा एक और अभी जो मॉडर्न आप देखते हैं समाज उसमें आप आर्थिक रूप से आप कितने संपन्न हैं उतनी ही इज्जत आपको मिलेगी फिर चाहे आप किसी भी जाति से आते हो। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में कुल आबादी का लगभग 70% हिस्सा गांवों में निवास करता है। ग्रामीण विकास का वास्तविक अर्थ केवल आय वृद्धि नहीं बल्कि बहुआयामी आर्थिक सामाजिक और संस्थागत सशक्तिकरण है। अब हम बात कर लेते हैं ग्रामीण विकास के ऐतिहासिक पायलट प्रोजेक्ट की जो आपके लिए बहुत ही इंपॉर्टेंट है। गुड़गांव प्रयोग 1920 में हुआ ब्रिटिश काल में एफएल ब्रायन द्वारा शुरू किया गया जिसमें ग्राम गाइड की अवधारणा दी गई थी। श्री निकेतन परियोजना 1922 की शुरुआत पश्चिम बंगाल में रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा की गई थी। कुटीर उद्योगों के विकास हेतु मार्तंडम परियोजना 1928 केरल में डॉक्टर स्पेंसर हैच द्वारा बाय एमसीए के सहयोग से शुरू हुई। सेवाग्राम और वर्धा योजना 1936 में महात्मा गांधी द्वारा महाराष्ट्र में ग्राम स्वराज व नई तालीम के आधार पर प्रारंभ की गई। भारत में सामुदायिक विकास कार्यक्रम का अग्रदूत इटावा पायलट प्रोजेक्ट 1948 को माना जाता है जिसे अल्बर्ट मेयर ने शुरू किया था। यह इंपॉर्टेंट है एग्जाम में पूछा गया है। पायलट प्रोजेक्ट शुरुआत में इटावा के 64 गांवों में शुरू हुआ था लेकिन बाद में 1956 तक यह 366 गांवों तक फैला था। भारत में ग्रामीण विकास का मील का पत्थर सामुदायिक विकास कार्यक्रम सीडीपी कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम की शुरुआत 2 अक्टूबर 1952 को हुई। 1952 के सीडीपी कार्यक्रम का मूल मंत्र ग्रामीणों द्वारा ग्रामीणों के लिए विकास था। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय विस्तार सेवा एनईएस यानी कि नेशनल एक्सटेंशन सर्विस का प्रारंभ वर्ष 1953 में किया गया था। ग्रामीण विकास विभाग की स्थापना 1974 में हुई जिसे 1991 में स्वतंत्र ग्रामीण विकास मंत्रालय बना दिया गया। बंजर भूमि विकास विभाग का सृजन वर्ष 1992 में किया गया। सघन कृषि क्षेत्र कार्यक्रम का शुभारंभ वर्ष 1964 65 में हुआ था। यह सारे इंपॉर्टेंट है एक-एक लाइन। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीआर द्वारा राष्ट्रीय प्रदर्शन योजना वर्ष 1965 में शुरू की गई थी एनडीपी जिसको कहते हैं। अब हम बात कर लेते हैं पंचायती राज व्यवस्था का इतिहास एवं समितियां। प्राचीन भारत में अपनी उन्नत स्थानीय सुशासन प्रणाली के लिए चोल साम्राज्य प्रसिद्ध था। ब्रिटिश काल में 1870 में लॉर्ड मेयो ने पंचायतों को वित्तीय स्वायत्ता देने का प्रथम प्रस्ताव रखा था। 1882 के ऐतिहासिक प्रस्ताव के कारण लॉर्ड रिपन को भारत में स्थानीय सुशासन का जनक कहा जाता है। संविधान के अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के संगठन का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। बलवंत राय मेहता समिति ने भारत में त्रिस्तरीय पंचायती ढांचे ग्राम ब्लॉक जिला की सिफारिश की है। तो 1957 में बलवंत राय मेहता समिति ने भारत में त्रिस्तरीय पंचायती ढांचे की सिफारिश की थी। ग्राम ब्लॉक और जिला। 2 अक्टूबर 1959 को पंडित नेहरू ने नागौर राजस्थान में भारत में पहली बार पंचायती राज का शुभारंभ किया। पंचायती राज को अपने संपूर्ण राज्य में लागू करने वाला भारत का पहला राज्य आंध्र प्रदेश था। अशोक मेहता समिति 1977 ने पंचायत के दुस्तरीय ढांचे की सिफारिश की थी। जीबीके राव समिति 1985 ने भारतीय पंचायतों को बिना जड़ की घास की संज्ञा दी थी। एल एम सिंघवी समिति 1986 ने भारत में पहली बार पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की जोरदार वकालत की थी। पीके थुंगन समिति 1988 ने संवैधानिक मान्यता के साथ 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल का सुझाव दिया था। तो यह जितनी भी समितियां हैं इनको याद कर लीजिए बहुत ही इंपॉर्टेंट है। एग्जाम में बार-बार पूछी गई हैं। अब बात कर लेते हैं 73वें संविधान संशोधन जो पंचायती राज से जुड़ा हुआ है। पंचायती राज को मजबूत आधार देने वाला 73वां संविधान संशोधन अधिनियम 1992 भारतीय लोकतंत्र का मैग्ना कार्टा माना जाता है। 73वां संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ इसलिए प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाते हैं। इस संशोधन के माध्यम से संविधान में नया भाग 9 जोड़ा गया जिसमें अनुच्छेद 243 से 243 ओ तक प्रावधान है। संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें पंचायतों को कार्य करने हेतु कुल 29 विषय सौंपे गए हैं। अनुच्छेद 243 ए के तहत गांव की शक्ति का मूल आधार ग्राम सभा है जो प्रत्यक्ष लोकतंत्र का सबसे अच्छा उदाहरण है। गांव की मतदाता सूची में दर्ज सभी वयस्क व्यक्ति ग्राम सभा के स्थाई सदस्य होते हैं इसे कभी भंग नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश में एक वर्ष में ग्राम सभा की कम से कम दो बैठकें रवि और खरीफ फसल के बाद होना अनिवार्य है। अनुच्छेद 243 बी त्रिस्तरीय ढांचे का प्रावधान करता है 20 लाख से कम आबादी पर मध्यवर्ती ब्लॉक स्तर की छूट है। अनुच्छेद 243 डी के तहत पंचायतों में महिलाओं के लिए न्यूनतम 1/3 33% सीटें आरक्षित की गई है। अनुच्छेद 243 ई के अनुसार पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष है। समय पूर्व भंग होने पर 6 माह के भीतर चुनाव अनिवार्य है। अनुच्छेद 243 एफ के अनुसार पंचायत चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। अनुच्छेद 243 आई के तहत पंचायतों के राजस्व वितरण हेतु राज्यपाल द्वारा हर पांच वर्ष में राज्य वित्त आयोग का गठन होता है। अनुच्छेद 243 के निष्पक्ष पंचायत चुनाव कराने हेतु राज्य निर्वाचन आयोग का गठन करता है। ग्राम विकास प्रबंधन में ग्राम स्तर पर वीडीओ बीपीओ ब्लॉक स्तर पर बीडीओ और जिला स्तर पर डीएम सीडीओ प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। अब बात कर लेते हैं राजस्व प्रशासन एवं प्रमुख भू-अभिलेख। राजस्व प्रशासन एवं प्रमुख भू अभिलेख। उत्तर प्रदेश में राजस्व मामलों की सर्वोच्च न्यायिक संस्था राजस्व परिषद है जिसकी स्थापना 1831 में इलाहाबाद वर्तमान प्रयागराज में हुई थी। राजस्व परिषद के निर्णय उत्तर प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों पर बाध्यकारी होते हैं। राजस्व परिषद की प्रशासनिक शाखा लखनऊ में तथा न्यायिक शाखा प्रयागराज में कार्यरत है। राजस्व पदानुक्रम की अगर बात की जाए तो डीएम, डीएम के नीचे एडीएम, एडीएम के नीचे एसडीएम और उसके नीचे तहसीलदार, तहसीलदार के नीचे नायब तहसीलदार, फिर राजस्व निरीक्षक जिसे कानून गो कहते हैं फिर लेखपाल आता है और अंत में अमीन आता है जिसकी नियुक्ति बहुत कम होती है। लेखपाल की नियुक्ति उत्तर प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम 1901 की धारा 23 के तहत की जाती है। ब्रिटिश काल में इसे पटवारी कहा जाता था 1952 में चौधरी चरण सिंह के कार्यकाल में इसका नाम बदलकर लेखपाल किया गया। लेखपाल वर्ष में तीन बार खेतों का भौतिक निरीक्षण करता है जिसे पड़ताल कहते हैं। खरीफ पड़ताल 10 अगस्त से रवि पड़ताल 1 जनवरी से और जायद पड़ताल 1 मई से प्रारंभ होती है। गांव का मूल कृषि दस्तावेज खसरा है जिसके कंप्यूटरीकृत डिजिटल रूप में 46 कॉलम होते हैं। इसे प्रतिवर्ष नवीनीकृत किया जाता है। भूमि के स्वामित्व का मुख्य दस्तावेज खतौनी है जिसमें रियल टाइम खतौनी के अनुसार 19 कॉलम होते हैं। अधिकार अभिलेख खतौनी को प्रत्येक 6 वर्ष में पूरी तरह से अधतन अपडेट किया जाता है। सजरा पूरे गांव का एक विस्तृत नक्शा होता है जिस पर खेतों की चौहद्दी रास्ते और तालाब अंकित होते हैं। भूमि बिकने या हस्तांतरण पर खतौनी में मालिक का नाम बदलने की विधिक प्रक्रिया को दाखिल खारिज कहते हैं। किसान वही 1992 में शुरू हुई किसान के पास रहने वाली एक पासबुक है जिसमें उसकी भूमि का पूर्ण विवरण होता है। सरकारी रिकॉर्ड में खेतों का क्षेत्रफल सदैव हेक्टेयर में दर्ज होता है और एक हेक्टेयर बराबर होता है 10000 वर्ग मीटर। अब हम बात कर लेते हैं ई गवर्नेंस एवं योजना प्रबंधन की। ग्रामीण विकास योजनाएं अब नीचे से ऊपर बॉटम अप बनती हैं ग्राम स्तर पर इसे जीपीडीपी ग्राम पंचायत विकास योजना कहते हैं। ग्रामीण विकास प्रबंधन की रीढ़ की हड्डी खंड ब्लॉक स्तर को माना जाता है जहां वीडियो प्रमुख होता है। ग्रामीण और शहरी योजनाओं को समेकित करने हेतु जिला योजना समिति का गठन अनुच्छेद 243 जेड डी के तहत अनिवार्य है। डीपीसी के 4/5 सदस्य जिला पंचायत और नगर पालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों में से ही चुने जाते हैं। जिला स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और समन्वय की मुख्य संस्था जिला ग्राम विकास अभिकरण है। ग्राम पंचायतों का 100% वित्तीय लेन-देन अब ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाता है। मनरेगा के कार्यों पर पारदर्शिता हेतु ग्राम सभा की समिति द्वारा सामाजिक अंकेक्षण करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसरो द्वारा विकसित भुवन पंचायत पोर्टल पर ग्राम विकास कार्यों की जियो टैगिंग फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। मिशन अंत्योदय सर्वेक्षण के तहत ग्राम पंचायतों को 0 से 100 के बीच स्कोर देकर विकास की कमियों को मापा जाता है। उत्तर प्रदेश में खसरा खतौनी को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत कर भूलेख पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। अब बात करेंगे ग्रामीण अनुसंधान पीआरए उपकरण एवं डेटा संकलन की तो ग्रामीण विकास शोध का मुख्य लक्ष्य सरकारी योजनाओं हेतु साक्ष्य आधारित नीति निर्माण सुनिश्चित करना है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीआर की स्थापना 16 जुलाई 1929 को नई दिल्ली में हुई थी जिसके पदेन अध्यक्ष कृषि मंत्री होते हैं। अधिकारियों के क्षमता निर्माण हेतु राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान हैदराबाद में स्थित है। पहला कृषि विज्ञान केंद्र 1974 में पुडुचेरी में खुला इसका मुख्य उद्देश्य लैब के शोध को खेतों तक पहुंचाना है। सांख्यिकी मात्रात्मक शोध में बंद प्रश्नावली का प्रयोग होता है जबकि गुणात्मक शोध मानवीय व्यवहार में क्यों का उत्तर खोजता है। शोधकर्ता और ग्रामीण जब मिलकर समस्या हल करते हैं तो उसे क्रियात्मक शोध करके सीखना कहते हैं। सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन पीआरए में ग्रामीण केवल डेटा नहीं देते बल्कि सह-शोधकर्ता होते हैं। इसमें दृश्य उपकरणों का प्रयोग सबसे ज्यादा होता है। पीआरए के सामाजिक मानचित्र उपकरण में ग्रामीण स्वयं जमीन पर रंगोली चाक से गांव का नक्शा बनाकर सुविधाएं दर्शाते हैं। गांव की 50 से 100 वर्ष की ऐतिहासिक घटनाओं बाढ़ अकाल का कालक्रमानुसार विश्लेषण समय रेखा उपकरण से होता है। वेन डायग्राम गांव की विभिन्न संस्थाओं के प्रभाव और आपसी संबंधों को आकार के आधार पर दर्शाता है जिसको हम चपाती मैपिंग कहते हैं। ट्रांसैक्ट वॉक में शोधकर्ता ग्रामीणों के साथ गांव में पैदल भ्रमण कर भौगोलिक स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करता है। रैपिड रूरल अप्रैल बाहरी विशेषज्ञों के उपयोग के लिए है जबकि पीआरए में ग्रामीण स्वयं विश्लेषण कर अपनी योजना बनाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निरक्षरता के कारण डेटा एकत्र करने की अनुसूची विधि श्रेष्ठ है जिसमें शोधकर्ता गणक स्वयं प्रश्न पूछकर फॉर्म भरता है। किसी एक विशिष्ट इकाई परिवार गांव का गहराई से अध्ययन केस अध्ययन कहलाता है एफजीडी फोकस ग्रुप डिस्कशन में 6 से 12 लोगों का समूह चर्चा करता है। ग्रामीणों के दृष्टिकोण या अभिवृत्ति एटिट्यूड को वैज्ञानिक रूप से मापने के लिए लिकट स्केल का उपयोग किया जाता है। अब हम बात करेंगे भूमि सुधार का इतिहास एवं चुनौतियां। अब हम बात करेंगे भूमि सुधार का इतिहास एवं चुनौतियां। ग्रामीण भूमि सुधार का संवैधानिक आधार संविधान का अनुच्छेद 39 है जो संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण का निर्देश देता है। जमीदारी प्रथा जो स्थाई बंदोबस्त कहलाई को 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा बंगाल बिहार उड़ीसा में लागू किया गया जो भारत के 19% भूभाग पर थी। जमींदारी प्रथा में कृषकों से वसूले गए लगान का 10/11 हिस्सा ब्रिटिश सरकार को और 1/11 हिस्सा जमीदार को मिलता था। रयतवाड़ी प्रथा 1820 में थॉमस मुनरो द्वारा मद्रास आदि में लागू की गई। यह सर्वाधिक 51% भूभाग पर थी जहां किसान सीधे सरकार को कर देते थे। महलवाड़ी प्रथा 1822 में हॉल्ट मैकेंजी द्वारा लागू 30% भाग हुई। तो भारत के 30% भाग पर महलवाड़ी प्रथा 1822 में हॉल्ट मैकेंजी द्वारा लागू हुई थी। इसमें राजस्व निर्धारण पूरे गांव महल के आधार पर होता था। उत्तर प्रदेश संयुक्त प्रांत की राजस्व प्रणाली ऐतिहासिक रूप से महलवाड़ी प्रथा पर ही आधारित रही है। स्वतंत्रता के पश्चात प्रारंभिक भूमि सुधार मुख्य रूप से कुमारप्पा समिति 1949 की सिफारिश पर आधारित थी। तो एक कुमारप्पा समिति बनी थी 1949 में और उसने भूमि सुधार के लिए कुछ सिफारिशें दी थी। उत्तर प्रदेश जमीदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 में पारित हुआ और 1 जुलाई 1952 से पूरे राज्य में लागू हुआ। किसानों के बिखरे हुए खेतों को एक जगह करने के लिए चकबंदी यूपी में 1954 में मुजफ्फरनगर कैराना और सुल्तानपुर की सुल्तानपुर की मुसाफिर खाना तहसील से शुरू हुई। भूमि स्वामित्व की अधिकतम सीमा तय करने वाला यूपी सीलिंग एक्ट वर्ष 1960 में पारित हुआ। भूदान आंदोलन की शुरुआत 18 अप्रैल 1951 को विनोबा भावे द्वारा तेलंगाना के पोचमपल्ली गांव से की गई। इसमें 1/6 भूमि दान देने की अपील। वर्तमान में जोतों के विखंडन के कारण भारत में 60% से अधिक लैंड होल्डिंग्स 1 हेक्टेयर से छोटी यानी कि सीमांत जोत रह गई हैं। डीआईएल आरएमपी डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम 2008 का मुख्य लक्ष्य सभी भूमि रिकॉर्ड को कंप्यूटरीकृत कर एक पारदर्शी टाइट लिंग सिस्टम बनाना है। भारत के न्यायालयों में लंबित दीवानी मामलों के लगभग 66% केस भूमि विवाद और गलत रिकॉर्ड से जुड़े हैं। स्वामित्व योजना 24 अप्रैल 2020 को प्रारंभ होती है। ड्रोन सर्वे का उपयोग कर ग्रामीण आबादी क्षेत्र का मानचित्रण कर संपत्ति कार्ड प्रदान कर रही है। अब हम बात करेंगे पंचवर्षीय योजनाओं की फाइव ईयर प्लांस की 1950 में योजना आयोग का गठन हुआ। 2015 में नीति आयोग बनने तक भारत में कुल 12 पंचवर्षीय योजनाएं लागू हुई हैं। प्रथम योजना 1951 से 56 तक रही। हेरॉल्ड डोमर मॉडल पर यह आधारित थी। इसका मुख्य फोकस कृषि और सिंचाई परियोजनाओं पर था। दूसरी योजना 1956 से 61 तक थी। यह पीसी महालनोबिस मॉडल पर आधारित थी जिसका मुख्य लक्ष्य भारी उद्योगों और औद्योगीकरण था। गाड़गिल फार्मूले पर आधारित तीसरी योजना 1961 से 66 तक रही और चीन पाक युद्ध और भीषण सूखे के कारण यह बुरी तरह से असफल रही और भारत की सबसे असफल पंचवर्षीय योजना थी। तीसरी योजना की विफलता के कारण 1966 से 1969 तक तीन वार्षिक योजनाएं चलाई गई जिसे भारतीय इतिहास में योजना अवकाश या प्लान हॉलिडे कहा जाता है कई बार परीक्षाओं में पूछा गया है। डीपी धर मॉडल पर आधारित पांचवी पंचवर्षीय योजना 1974 से 79 में ही प्रसिद्ध गरीबी हटाओ और गरीबी हटाओ का नारा दिया गया था इसमें। चौथी पंचवर्षीय योजना 1969 से 74 तक रही फिर डीपी धर मॉडल पर आधारित पांचवी पंचवर्षीय योजना आती है जो 1974 से 79 चलती है। 1978 से 80 के बीच मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता सरकार द्वारा रोलिंग प्लान शुरू किया गया था। छठी योजना 1980 से 85 के दौरान भारत में पहली बार गरीबी निवारण कार्यक्रम आईआरडीपी और ट्राइसम की बृहद स्तर पर शुरुआत हुई। उदारीकरण एलपीजी के बाद आई आठवीं योजना 1992 से 97 मुख्य रूप से मानव संसाधन विकास शिक्षा व स्वास्थ्य पर केंद्रित थी। परीक्षाओं में पूछा गया है कि जो कौन सी योजना है जो मानव संसाधन विकास पर आधारित थी तो आठवीं पंचवर्षीय योजना जो एलपीजी सुधारों के बाद लागू हुई थी। 11वीं योजना जो है वह 2007 से 2012 तक का मुख्य लक्ष्य तीव्र और अधिक समावेशी विकास रखा गया। 12वीं योजना 2012 से 17 का अंतिम नारा तीव्र अधिक समावेशी और धारणीय विकास था। और यह अंतिम पंचवर्षीय योजना थी। 1 जनवरी 2015 का योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग की स्थापना की गई जो सहकारी संघवाद पर कार्य करता है। अब हम बात करेंगे कृषि प्रणाली एवं हरित क्रांति की। अकाल के बाद भारत में हरित क्रांति का बीजारोपण योजना अवकाश के दौरान 1966 से 67 में हुआ। भारत में हरित क्रांति के जनक एम एस स्वामीनाथन को माना जाता है और इन्होंने एचवाईवी यानी कि हाई एल्डिंग वैरायटी वाले बीजों का उपयोग शुरू किया। हरित क्रांति के फलसुरुप भारत खाद्यान्न आयातक से उबरकर खाद्यान्न निर्यातक अधिशेष वाला सशस्त्र राष्ट्र बन गया। कृषि ऋतुएं भारत में तीन पाई जाती हैं मुख्यतः खरीफ जून जुलाई में जब धान मक्का कपास बोई जाती है रवि अक्टूबर में जब गेहूं चना सरसों बोई जाती है और जायद मार्च में जब जून मार्च से जून का टाइम होता है यहां पर तरबूज, ककड़ी, खरबूजा और जितनी भी सब्जियां हैं, तुरोई, भिंडी आदि बोई जाती है। इसी बीच में जायद के टाइम पर ही मूंग और उड़द भी बोई जाती है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक सिंचित राज्य है। सिंचित राज्य है ठीक है तो भारत का सर्वाधिक सिंचित राज्य कौन सा है उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में सिंचाई का सबसे प्रमुख साधन नलकूप है जो लगभग 75% तक सिंचाई सींचता है। जबकि दूसरे स्थान पर नहरें आती हैं जो 15% तक सिंचाई करती हैं। उत्तर प्रदेश की सबसे लंबी नहर प्रणाली शारदा नहर है बुंदेलखंड क्षेत्र में तालाब झीलें सिंचाई के लिए अधिक प्रचलित हैं। कृषि मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए किसान पायलट कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फसल बीमा का वितरण करना था। अब हम बात करेंगे ऐतिहासिक रोजगार एवं विकास कार्यक्रम की। यह आपकी परीक्षा के लिए बहुत ही इंपॉर्टेंट है तो इनको बहुत अच्छे तरीके से देखिएगा समझिएगा। करों के शुद्ध आगमों के वितरण हेतु प्रथम वित्त आयोग का गठन 1951 में किया गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल हेतु त्वरित ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम 1972-73 में शुरू हुआ। सूखा ग्रस्त क्षेत्र कार्यक्रम सूखे से बचाव और विकास के लिए 1973 में प्रारंभ हुआ। मरुस्थलीकरण रोकने हेतु मरुभूमि विकास कार्यक्रम 1977-78 में पर्यावरण संतुलन के लिए लाया गया। ग्रामीण टिकाऊ संपत्ति निर्माण हेतु काम के बदले अनाज फूड फॉर वर्क कार्यक्रम पहली बार 1977 और फिर 2004 में शुरू हुआ। गांव के सबसे गरीब परिवारों को स्वावलंबी बनाने के लिए अंत्योदय योजना 1977-78 में आई। ग्रामीण युवाओं को तकनीकी कौशल देकर स्वरोजगार हेतु ट्राइसेम योजना 1979 में शुरू की गई। ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वरोजगार ऋण हेतु समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम आईआरडीपी 1980 में आया। ग्रामीण गरीबों को लाभकारी रोजगार अवसर देने हेतु राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम एनआरईपी भी 1980 में शुरू हुआ। ग्रामीण महिलाओं व बच्चों के विकास के लिए डकरा योजना 1982 में लाई गई। ठीक है यह डाकू योजना कही जाती है यहां पर डाकू लिख गया है तो ध्यान रखिएगा डी डब्ल्यूसीआरए इसका इंग्लिश में शॉर्ट फॉर्म है और यही आपका डाकू या डाकरा योजना है। एनआरईपी और आरएलईजीपी को मिलाकर 1989 में बृहद स्तर पर जवाहर रोजगार योजना शुरू की गई। संसद सदस्य को अपने क्षेत्र के विकास हेतु सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना एमपी लेट्स 1993 में शुरू हुई जिसकी जो लिमिट है वो 5 करोड़ वार्षिक है। छह पुरानी योजनाओं का विलय कर 1 अप्रैल 1999 को स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना एसजीएसवाई प्रारंभ हुई। बेरोजगारों के लिए अवसरों के सृजन हेतु जवाहर ग्राम समृद्धि योजना जेजीएसवाई भी 1 अप्रैल 1999 को शुरू हुई। खाद्यान्न व रोजगार सुनिश्चित करने हेतु संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना एसजीआरवाई 25 सितंबर 2001 को शुरू हुई। बेसहारा वृद्धों व निर्धनों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने अन्य पूर्ण योजना 2000 व अंत्योदय अन्न योजना 2000 लाई गई। पेयजल समस्या समाधान हेतु स्वजलधारा कार्यक्रम 2002 में शुरू हुआ जो केंद्र सरकार एवं स्थानीय समुदायों का स्वामित्व में है। जल संग्रहण, वर्षा जल संचयन व वृक्षारोपण हेतु हरियाली योजना वर्ष 2003 में आई। ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं देने का पूरा मॉडल वर्ष 2003 में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा दिया गया। पूरा मॉडल जो है यह बार बार कई बार परीक्षाओं में पूछा गया है। एसजीएसवाई को पुनर्गठित कर जून 2011 में एसएचजी आधारित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन शुरू किया गया। एनआरएलएम के ही अंतर्गत महिलाओं की आय 1 लाख प्लस करने हेतु लखपति दीदी योजना 2023 संचालित की जा रही है। अब हम बात करेंगे केंद्र सरकार की आधुनिक रोजगार एवं अवसंरचना योजनाएं। मनरेगा 2 फरवरी 2006 को शुरू हुआ जिसका नाम 2009 में महात्मा गांधी के नाम पर मनरेगा हुआ। मनरेगा काम के अधिकार के तहत 100 दिनों के अकुशल श्रम की गारंटी देता है। मनरेगा का नाम पहले नरेगा था। मनरेगा में कानूनी रूप से 33% महिला आरक्षण है परंतु वर्तमान में महिलाओं की भागीदारी 53.5% हो गई है। रोजगार संरचना को उन्नत करने हेतु 2026 में नया कानून विकसित भारत जी राम जी लाया गया। बीबीजी रामजी योजना में कार्य दिवसों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। बीबीजी रामजी में एआई व जीपीएस उपस्थिति अनिवार्य है। वेतन में 15 दिन से देरी पर 0.05% प्रतिदिन हरजाना मिलेगा। सबके लिए आवास हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण 20 नवंबर 2016 को आई। सहायता मैदानी इलाकों में 1.2 लाख और पहाड़ी इलाकों में 1.3 लाख। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना 25 दिसंबर 2000 को पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई के जन्मदिन पर शुरू हुई थी। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ जिसका फेज टू अब ठोस कचरा प्रबंधन ओडीएफ प्लस पर केंद्रित है। कृषि फीडर को अलग कर बिजली सुधारने हेतु दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना 25 जुलाई 2015 लाई गई। सौभाग्य योजना पीएम सहज बिजली हर घर योजना 25 सितंबर 2017 को निर्धनों को मुफ्त व अन्य को मात्र 500 में बिजली कनेक्शन देने हेतु आई। 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में पाइप से पानी हर घर जल पहुंचाने हेतु जल जीवन मिशन 15 अगस्त 2019 को शुरू हुआ। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का लक्ष्य घरेलू परिसरों 50 मीटर के भीतर 70 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध कराना है। गांव का क्लस्टर आधारित शहरी विकास करने वाली श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूरबन मिशन 21 फरवरी 2016 को शुरू हुई। भारत नेट योजना का चरण 2 13 नवंबर 2017 को ढाई लाख ग्राम पंचायतों में हाई स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने हेतु शुरू हुई। प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान 8 फरवरी 2017 को 6 करोड़ ग्रामीण साक्षर लक्ष्य शुरू हुआ। सांसद आदर्श ग्राम योजना जयप्रकाश नारायण जयंती 11 अक्टूबर 2014 को आई सांसद अपना ससुराल और अपना गांव छोड़कर अन्य कोई गांव ले सकते हैं। केंद्र सरकार की कृषि कौशल एवं वित्तीय समावेशन योजनाओं के बारे में हम बात करेंगे। पीएम किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि 24 फरवरी 2019 को शुरू हुई किसानों को ₹6000 वार्षिक ₹2000 की तीन किस्तें डीवीटी मिलती है। पीएमएफबीवाई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 18 फरवरी 2016 को आई। प्रीमियम दरें खरीफ 2% रवि 1.5% बागवानी 5%। ई-नाम नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट 14 अप्रैल 2016 को शुरू हुआ जो देश की सभी एपीएमसी मंडियों को जोड़ने वाला एक डिजिटल नेटवर्क है। सिंचाई पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए कुसुम योजना पीएम कुसुम वर्ष 2019 में प्रारंभ की गई। कृषि कार्यों नैनो यूरिया छिड़काव हेतु 15000 महिला एसएचजीएस को सशक्त करने नमो ड्रोन दीदी योजना मार्च 2024 आई। जल संकट दूर करने हेतु प्रत्येक जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवरों का निर्माण अमृत सरोवर मिशन 24 अप्रैल 2022 का लक्ष्य है। 15 से 35 वर्ष के ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने हेतु दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना 25 सितंबर 2014 को आई। पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को ग्रामीण कारीगरों बढ़ई लोहार को 15000 का टूलकिट व सस्ता ऋण देने हेतु आई। एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड जुलाई 2020 के तहत गांवों में कोल्ड स्टोरेज गोदान निर्माण हेतु ऋण पर 3% ब्याज छूट दी जाती है। प्रधानमंत्री जनधन योजना 28 अगस्त 2014 को शुरू हुई। नारा है मेरा खाता भाग्य विधाता जिसमें 2 लाख दुर्घटना बीमा मिलता है। किसान क्रेडिट कार्ड अगस्त 1998 में आरवी गुप्ता समिति की सिफारिश पर आया 2019 में इसमें पशुपालन मत्स्य पालन भी शामिल किया गया। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 9 मई 2015 को 18 से 70 वर्ष के लिए दुर्घटना बीमा है। वार्षिक प्रीमियम ₹20 है और कवर मिलता है 2 लाख का। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 9 मई 2015 को 18 से 50 वर्ष के लिए शुद्ध जीवन बीमा है। वार्षिक प्रीमियम इसकी 436 है कवर मिलता है ₹2 लाख का। असंगठित क्षेत्र के लिए अटल पेंशन योजना 9 मई 2015 को आई और 18 से 40 वर्ष के लिए है 60 वर्ष की आयु के बाद 1000 से 5000 की गारंटीकृत पेंशन मिलेगी। तो यह एक बहुत बड़ा धोखा है ठीक है मैं आपको बताता हूं क्यों वैसे आप याद करिए आपके एग्जाम के लिए है कि अभी 1000 की वैल्यू क्या है 5000 की वैल्यू क्या है मतलब अगर कोई व्यक्ति अभी 18 वर्ष का है तो तकरीबन उसको 40 वर्ष के बाद पेंशन मिलेगी 5000 की मान लीजिए वह सबसे ऊपर वाली सेलेक्ट करता है तो 40 वर्ष के बाद 5000 की वैल्यू 500 भी नहीं होगी यकीन मानकर चलिए। तो यह पेंशन योजना एक सीधा-सीधा धोखा है। मोदी वाले सपने की तरह है। छोटे किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना 12 सितंबर 2019 को शुरू हुई। 60 वर्ष की आयु के बाद ₹3000 मासिक पेंशन मिलेगी। तो यह भी एक धोखा है। खाद्यान्न उत्पादन वृद्धि को टिकाऊ बनाने हेतु नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन 29 मई 2007 को लाया गया। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत चिन्हित परिवारों को 5 किलोग्राम अनाज प्रति व्यक्ति चावल तीन गेहूं ₹2 दिया जाता है। महत्वपूर्ण फसलों के उत्पादन को बढ़ाने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अगस्त 2007 में शुरू की गई। हरित क्रांति योजना इसी में है। बागवानी के विकास से जुड़ी केंद्रीय परियोजना चमन का संबंध प्रत्यक्ष रूप से कृषि क्षेत्र से है। ऊर्जा गंगा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षा और बहुचर्चित गैस पाइपलाइन परियोजना है। अब हम बात करेंगे ग्रामीण स्वास्थ्य शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण से जुड़ी हुई बहुत सारी योजनाओं की। एबीपीएम जेएवाई आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है। 23 सितंबर 2018 को रांची से शुरू हुई। 5 लाख प्रति वर्ष मुफ्त इलाज। उप केंद्रों को अपग्रेड कर आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं जहां ई-संजीवनी के माध्यम से वीडियो टेली-परामर्श दिया जाता है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन एनआरएचएम 12 अप्रैल 2005 को आया। इसकी सबसे बड़ी विशेषता 1000 जनसंख्या पर आशा की नियुक्ति है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने जननी सुरक्षा योजना 12 अप्रैल 2005 को आई ग्रामीण महिला को ₹1400 और आशा को ₹600 कुल ₹2000। प्रधानमंत्री मात वंदना योजना 1 जनवरी 2017 में पहली बार मां बनने पर महिला को पोषण हेतु ₹5000 दिए जाते हैं दूसरी बेटी पर ₹6000। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान 9 जून 2016 को हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की मुफ्त विशेषज्ञ जांच होती है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आरबीएस के 2013 के तहत 0 से 18 वर्ष बच्चों में जन्म दोष व बीमारियां फोर डीस की जांच मोबाइल टीम करती है। छूटे हुए दो वर्ष तक के बच्चों व गर्भवती महिलाओं के पूर्ण टीकाकरण हेतु मिशन इंद्रधनुष सुशासन दिवस 25 दिसंबर 2014 को शुरू हुआ था। आनुवांशिक बीमारी को रोकने के लिए सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 1 जुलाई 2023 को आया। लक्ष्य है वर्ष 2047 तक भारत को सिकल सेल से मुक्त करना। पोषण अभियान 8 मार्च 2018 को महिला दिवस पर झुंझुनू से शुरू हुआ जिसका लक्ष्य स्टंटिंग अल्प पोषण और एनीमिया को कम करना है। टीबी हारेगा देश जीतेगा 2019 का लक्ष्य 2025 तक टीबी मुक्त करना है। निक्षय पोषण योजना में मरीजों को ₹1000 प्रति माह सहायता मिलती है। ग्रामीण भारत के लिए 24/7 मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य हेतु टेलीमानस हेल्पलाइन अक्टूबर 2022 का टोल फ्री नंबर 14416 है। तो जो 24 * 7 यानी कि 24 घंटे सातों दिन लागू होने वाली यह योजना है जिसमें अगर आपको कोई मानसिक स्वास्थ्य की समस्या है तो आप हेल्प लाइन नंबर पर कॉल करके जानकारी ले सकते हैं। 15 से 35 आयु वर्ग के निरक्षण हेतु राष्ट्रीय साक्षरता मिशन 5 मई 1988 को आया। साक्षर भारत मिशन 2009 का जोर प्रौढ़ महिला साक्षरता पर है। स्कूलों में नामांकन बढ़ाने हेतु मध्यान भोजन एमडीएम 15 अगस्त 1995 को शुरू हुआ इसका नया नाम पीएम पोषण सितंबर 2021 में रखा गया। 6 से 14 वर्ष के बच्चों को अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा देने के लिए सर्व शिक्षा अभियान वर्ष 2001 में लागू किया गया। एससी एसटी ओबीसी और गरीब बालिकाओं के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना 2004 के तहत आवासीय विद्यालय खोले गए। बेटी के भविष्य निर्माण हेतु सुकन्या समृद्धि योजना 22 जनवरी 2015 को पानीपत से शुरू हुई। खाता खोलने की न्यूनतम राशि ₹250 है। गिरते बाल लिंगानुपात को सुधारने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान 22 जनवरी 2015 को पानीपत हरियाणा से शुरू किया गया। पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और अल्पसंख्यक कारीगरों की क्षमता निर्माण के लिए सरकार की महत्वपूर्ण उत्पाद योजना उस्ताद योजना है। गैर-कृषि गतिविधियों में महिलाओं के उद्यमशीलता कौशल के माध्यम से सशक्तिकरण का प्रावधान ट्रेड योजना में है। ट्रेड यानी कि ट्रेड रिलेटेड एंटरप्रेन्योरशिप असिस्टेंट एंड डेवलपमेंट। समर्थ योजना का मुख्य फोकस विधवा तलाकशुदा उपेक्षित महिलाओं को तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना है। महिला सशक्तिकरण हेतु वन स्टॉप सेंटर योजना 2015 निर्भया फंड के माध्यम से पूर्णतः वित्त पोषित एक केंद्रीय योजना है। अब हम बात करेंगे उत्तर प्रदेश राज्य की महत्वपूर्ण ग्रामीण योजनाओं की। यूपी की सभी 58189 ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय स्थापित हैं जहां पंचायत सहायक नियुक्त किए गए हैं। यूपी मातृभूमि योजना यदि नागरिक गांव में विकास कार्य भवन बनवाता है तो 60% लागत दानदाता और 40% राज्य सरकार बहन करेगी। पीएमएवाईजी से छूटे हुए गरीब वर्गों मुशहर थारू जनजाति कुष्ठ रोगी को राज्य सरकार मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण से पक्का मकान देती है। बीसी सखी योजना 2020 यूपी की सफल योजना है जो ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट बनाकर घर-घर वित्तीय सेवाएं पहुंचा रही है। बालिकाओं की शिक्षा हेतु मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना 25 अक्टूबर 2019 को शुरू हुई। अप्रैल 2024 में इसकी सहायता राशि बढ़ाई गई और 25000 कर दी गई। आयुष्मान भारत सूची से छूटे गरीबों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान 1 मार्च 2019 के तहत 5 लाख प्रतिवर्ष मुफ्त इलाज मिलता है। मुख्यमंत्री आरोग्य मेला 2 फरवरी 2020 के तहत प्रत्येक रविवार को यूपी के ग्रामीण पीएचसी पर मुफ्त जांच व आयुष्मान कार्ड बनाए जाते हैं। पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में दिमागी बुखार को खत्म करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं द्वारा दस्तक अभियान चलाया गया फरवरी 2018 में। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा 2022 के तहत यूपी के 22 लाख सरकारी कर्मचारियों को स्टेट हेल्थ कार्ड दिया गया है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना 2020 में मृत्यु पर 5 लाख का क्लेम है जिसमें पहली बार भूमिहीन बटाईदार को भी शामिल किया गया है। यूपी में स्कूल ड्रेस अब खरीदकर नहीं दी जाती बल्कि निशुल्क स्कूली ड्रेस योजना के तहत कक्षा 1 से 8 के छात्रों को 1200 वार्षिक सीधे डीवीटी से दिए जाते हैं। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना 29 फरवरी 2024 को छतों पर सौर पैनल रूफटॉप सोलर लगाकर 300 यूनिट मुफ्त बिजली हेतु लागू है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान 2024-25 के तहत देश के 63000 आदिवासी बहुल गांवों को 100% संतृप्त विकास किया जाएगा। यूपी में कन्या विद्या धन योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर हाईस्कूल पास बालिकाओं को उच्च शिक्षा हेतु एकमुश्त ₹30000 राशि प्रदान की जाती है। कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश में आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना वित्तीय वर्ष 2021-2022 से लागू की गई है। कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के भरण-पोषण से संबंधित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक प्रमुख पहल है। कृषकों की कृषि संबंधी नवीनतम जानकारी देने के लिए यूपी में किसान मित्र योजना का आरंभ 18 जून 2001 को हुआ था। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन व डेयरी विकास से संबंधित गोकुल ग्राम योजना मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश राज्य में संचालित है। निशुल्क हेल्थ कार्ड योजना जुलाई 2005 का मुख्य उद्देश्य नगरीय मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। यूनिफॉर्म एवं बाइसिकल अनुदान योजना 2003-04 आश्रम पद्धति विद्यालयों से बाहर पढ़ने वाली एसटी अनुसूचित जनजाति छात्राओं के लिए है। अस्वच्छ पेशा छात्रवृत्ति योजना 2008 के अंतर्गत अस्वच्छ पेशे में लगे परिवारों के बच्चों को कक्षा 1 से 10 तक छात्रवृत्ति दी जाती है। बालिका श्री योजना 2006 का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति की बालिकाओं को विशेष बीमा सुरक्षा प्रदान करना है। मौलाना मोहम्मद अली जोहर छात्रवृत्ति योजना 2005 का उद्देश्य पिछड़े वर्ग के छात्रों को नियमित छात्रवृत्ति प्रदान करना है। कमजोर आय वर्ग के परिवारों को मकान उपलब्ध करवाने के उद्देश्य लोहिया ग्रामीण आवास योजना 24 मार्च 2013 को प्रारंभ की गई थी। उत्तर प्रदेश विधवा पेंशन योजना 2015 के तहत 18 से 60 वर्ष की निराश्रित महिलाओं को वर्तमान में ₹1000 मासिक सहायता दी जाती है। उत्तर प्रदेश वृद्धावस्था पेंशन योजना 1994 के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग राज्यों सरकार द्वारा ₹1000 मासिक वित्तीय सहायता दी जाती है। उत्तर प्रदेश दिव्यांग पेंशन योजना 2016 के तहत 40% से अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को प्रतिमा ₹1000 मासिक सहायता दी जाती है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की शुरुआत अक्टूबर 2017 में की गई थी। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना 2026 में राज्य सरकार नवविवाहित जोड़े को ₹1 लाख की वित्तीय सहायता मोबाइल व आवश्यक घरेलू सामान उपहार स्वरूप देती है। पहले ₹51000 मिलते थे 2026-27 के बजट में इसकी जो सहायता राशि है उसे बढ़ाकर ₹1 लाख कर दिया गया है। भाग्य लक्ष्मी योजना 2006 में नवजात शिशु की मां को 50000 का बांड और 5100 नगद सीधे बैंक खाते में प्रदान किए जाते थे। मुस्लिम समुदाय की लड़कियों को स्नातक की शिक्षा पूरी होने के बाद विवाह करने हेतु सगुण योजना के तहत ₹51000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। अहिल्याबाई योजना 2017 का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को स्नातक स्तर तक की शिक्षा पूर्णतः मुफ्त उपलब्ध कराना है। छोटे और सीमांत किसानों के एक लाख रुपए तक के फसली कर्ज को माफ करने हेतु उत्तर प्रदेश फसल ऋण मोचन योजना 2017 लाई गई थी। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग द्वारा विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए गुलाबी बस योजना शुरू की गई। अब हम बात करेंगे उत्तर प्रदेश के एक जनपद एक उत्पाद योजना की। यूपी की विशिष्ट कुटीर उद्योग की वैश्विक बाजार में जोड़ने हेतु ओडीओपी 24 जनवरी 2018 को शुरू हुई। आगरा एवं कानपुर नगर दोनों जिलों का ओडीओपी उत्पाद चमड़ा उत्पाद है। अमरोहा जिला अपने प्रसिद्ध वाद यंत्र ढोलक के निर्माण के लिए ओडीओपी में चयनित है। अलीगढ़ को दुनिया भर में ताले एवं हार्डवेयर उद्योग के लिए जाना जाता है। औरैया जिले का मुख्य उत्पाद दूध प्रशंसकरण विशेषकर देसी घी है। आजमगढ़ विशेषकर निजामाबाद क्षेत्र अपना काली मिट्टी की कलाकृतियों ब्लैक पॉटरी के लिए ओडीओपी में शामिल है। अयोध्या और मुजफ्फरनगर दोनों ही जिलों का प्रमुख ओडीओपी गुड़ है। भारत की इत्र नगरी कन्नौज का विश्व प्रसिद्ध ओडीओपी उत्पाद इत्र है। भदोई, मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों का एक समान ओडीओपी उत्पाद विश्व स्तरीय कालीन दरी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की पहचान चिकनकारी एवं जरी-जरदोजी के उत्कृष्ट काम से है। पीतल नगरी के नाम से मशहूर मुरादाबाद का ओडीओपी उत्पाद धातु शिल्प पीतल के बर्तन है। सुहाग नगरी फिरोजाबाद का ओडीओपी उत्पाद कांच के उत्पाद मुख्यतः चूड़ियां है। वाराणसी काशी का सबसे प्रसिद्ध और जीआई टैग प्राप्त उत्पाद बनारसी रेशम साड़ी है। गोरखपुर जिले का ओडीओपी उत्पाद पक्की हुई लाल मिट्टी से बने टेराकोटा शिल्प है। प्रयागराज, अमेठी और सुल्तानपुर जिलों का प्रमुख हस्तशिल्प मूंज उत्पाद है। सहारनपुर, बस्ती, बिजनौर और रायबरेली जिलों को लकड़ी पर नक्काशी, कास्ट कला के लिए चुना गया है। सिद्धार्थ नगर जिले का प्रसिद्ध खाद्य उत्पाद बुद्ध का महाप्रसाद कहलाने वाला काला नमक चावल है। प्रतापगढ़ जिले की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खाद्य प्रसंस्करण अर्थात आमला उत्पाद है। पीलीभीत जिले का अत्यंत मधुर ओडीओपी उत्पाद बांसुरी का निर्माण है। मेरठ जिले को विश्व स्तर पर उत्कृष्ट खेल की सामग्री के उत्पादन के लिए जाना जाता है। झांसी का ओडीओपी उत्पाद मुलायम और आकर्षक सॉफ्ट टॉयज है। बलिया जिले का प्रमुख महिला श्रृंगार उत्पाद बिंदी ओडीओपी में शामिल है। मथुरा जिले का सेनिटरी फिटिंग के उत्पाद ओडीओपी में स्थान है। हाथरस जिले के मुख्य और तीखी ओडीओपी उत्पाद मसालों में उपयोग होने वाली हींग है। कुशीनगर जिले में कृषि अवशेषों से केला फाइबर उत्पाद है। संभल जिले का अनूठा हस्तशिल्प पशुओं के सींग और हड्डी से बना हॉर्न-बोन उत्पाद है। बरेली, बदाऊ, चंदौली, कासगंज, शाहजहांपुर और उन्नाव का मुख्य रूप से जरी-जरदोजी है। बांदा का मुख्य रूप से शजर पत्थर शिल्प है जबकि महोबा का ओडीओपी गौरा पत्थर शिल्प है। तो देखिए ओडीओपी डायरेक्ट आपकी ग्राम समाज विकास के सिलेबस में नहीं है ग्राम विकास और समाज के। लेकिन योजनाएं आपके सिलेबस में है तो जो ओडीओपी एक योजना है तो इसलिए आपको उत्पादों को भी ध्यान में रखना होगा। अब हम बात कर लेते हैं कुछ विविध महत्वपूर्ण तथ्य एवं तिथियों की। अनुसूचित जाति के मेधावी छात्रों के लिए श्रेष्ठ योजना की शुरुआत 6 दिसंबर 2021 को की गई। कृषक मजदूरों को जीवन सुरक्षा देने वाली कृषक कृषि श्रमिक सामाजिक सुरक्षा योजना 1 जुलाई 2001 को प्रारंभ की गई थी। फसल नुकसान से बचाव के लिए पुरानी राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना भारत में वर्ष 1999 में लागू की गई थी। 10 ग्राम व 20 ग्राम सोने के सिक्कों की बिक्री हेतु स्वर्ण बुलियन योजना 5 नवंबर 2015 को शुरू की गई। भारी घाटे में चल रही विद्युत वितरण कंपनियों को आर्थिक पुनरुद्धार हेतु उदय योजना 5 नवंबर 2015 को लाई गई। सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को रेलवे क्रॉसिंग से मुक्त ओवरब्रिज निर्माण करने के लिए सेतु भारतम योजना 4 मार्च 2016 शुरू हुई। एससी एसटी और महिला उद्यमियों को नया उद्योग लगाने हेतु ₹1 करोड़ तक का बैंक ऋण स्टैंड अप इंडिया 5 अप्रैल 2016 देता है। गांवों के विकास से राष्ट्र के विकास पर बल देने वाला ग्रामोदय से भारत उदय अभियान 14 से 24 अप्रैल 2016 तक चलाया गया। पवित्र गंगा नदी की स्वच्छता एवं संरक्षण हेतु जल शक्ति मंत्रालय की नमामि गंगे योजना जून 2014 में शुरू हुई। राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन ईटीसी के लिए फास्ट ट्रैक व्यवस्था 31 अक्टूबर 2014 को लागू हुई। भारत को एक वैश्विक विनिर्माण हब बनाने हेतु मेक इन इंडिया योजना 25 सितंबर 2014 को आई। श्रम सुधारों और श्रमिकों की स्थिति बेहतर करने के लिए दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते योजना 16 अक्टूबर 2014 को शुरू हुई। देश के 12 ऐतिहासिक विरासत शहरों की आत्मा को संरक्षित करने हेतु हृदय योजना 21 जनवरी 2015 को शुरू की गई। हृदय योजना में अजमेर अमृतसर अमरावती बादामी द्वारका गया कांचीपुरम मथुरा पूरी वाराणसी विलांकनी वारंगल जैसे 12 शहरों का विकास के लिए चिन्हित किया गया था। और यह योजना 2019 में समाप्त हो गई। छोटे कारोबारियों की कारोबारियों को बिना गारंटी शिशु किशोर व तरुण ऋण 10 लाख तक देने हेतु मुद्रा योजना 8 अप्रैल 2015 को आई। बिजली की खपत कम करने के लिए रियायती दरों पर एलईडी बल्बों का वितरण उजाला योजना 1 मई 2015 के तहत किया गया। देशभर में अत्याधुनिक तकनीकी वाले 100 शहरों का विकास करने के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना 25 जून 2015 को लॉन्च हुई। 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले 500 शहरों में बुनियादी सीवरेज जल सुविधा हेतु अमृत योजना 25 जून 2015 को आई। युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुसार तकनीकी प्रशिक्षण देने हेतु स्किल इंडिया मिशन 15 जुलाई 2015 को शुरू हुआ। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पीएसबी की हालत सुधारने के लिए सरकार का सात सूत्रीय मिशन इंद्रधनुष बैंकिंग अगस्त 2015 में आया। घरों व मंदिरों में निष्क्रिय पड़े सोने को उत्पादक कार्यों में लगाने पर ब्याज देने वाली स्वर्ण मुद्रीकरण योजना 5 नवंबर 2015 को आई। खतरनाक उद्योगों में लगे बच्चों को वहां से हटाकर शिक्षा एवं रोजगार प्रशिक्षण देने हेतु बाल श्रम उन्मूलन योजना 1994 में आई। निम्न साक्षरता दर वाले जिलों में लड़कियों के लिए विद्यालय स्थापना हेतु कस्तूरबा गांधी शिक्षा योजना वर्ष 1997 में लाई गई। बीपीएल परिवारों को बीमा देने वाली जनश्री बीमा योजना 2000 में आई जिसे बाद में आम आदमी बीमा योजना 2007 में मिला दिया गया। बीपीएल परिवारों के बच्चों को कक्षा बाद शिक्षा जारी रखने हेतु शिक्षा सहयोग योजना 2001-02 में छात्रवृत्ति प्रदान करती थी। शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों को उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने हेतु दिव्यांगों हेतु राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना 2002 में शुरू हुई। ग्रामीण पशुपालकों को पशु मृत्यु के जोखिम से बचाने के लिए पशुधन बीमा योजना वर्ष 2006 में शुरू की गई। असंगठित क्षेत्र के बीपीएल मजदूरों को स्वास्थ्य बीमा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना 2008 में आई। देश के शोध संस्थानों शिक्षा स्वास्थ्य कृषि को एक उच्च स्तरीय ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ने वाला राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क 2010 में स्थापित हुआ। 11 से 18 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों के पोषण और स्वास्थ्य कौशल हेतु राजीव गांधी किशोरी सशक्तिकरण योजना सबला 2010 में आई। दिव्यांग जन के लिए सार्वजनिक भवन व परिवहन को बाधा रहित बनाने वाला सुगम्य भारत अभियान 3 दिसंबर 2015 दिव्यांगता दिवस को शुरू हुआ। आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका के सतत साधन उपलब्ध कराने वन बंधु कल्याण योजना 2014 में जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा आई। 20 लाख किसानों को लाभ पहुंचाने और खाद्य प्रसंस्करण को आधुनिक बनाने के लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना 2017 में शुरू हुई। चैनित 100 घर वाले गांव के 7% परिवारों को बीमा से जोड़ने वाली संपूर्ण बीमा ग्राम योजना 13 अक्टूबर 2017 लाई गई। गुजरात से लेकर म्यांमार सीमा तक बॉर्डर व तटीय क्षेत्रों में आर्थिक गलियारों एवं राष्ट्रीय राजमार्गों का मेगा विकास भारतमाला परियोजना 24 अक्टूबर 2017 का हिस्सा है। तो यह आपका 300 वन लाइनर्स का ग्राम विकास और समाज का टॉपिक कंप्लीट होता है और यह आपकी रिवीजन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण क्लास थी बहुत सारी योजनाएं मैं लेकर आया हूं जितना भी आपका बेसिक था वो लेकर आया हूं भूमि सुधार लेकर आया हूं ग्राम पंचायत लेकर आया हूं पंचायती राज लेकर आया हूं तो वीडियो को लाइक कर लीजिएगा चैनल पर नए हैं चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिएगा कमेंट करके बताइएगा कि आज का सेशन आपको कैसा लगा आप कमेंट बहुत कम करते हैं अच्छे-अच्छे कमेंट किया करिए हमें भी अच्छा लगेगा और आपके लिए और बेहतर कंटेंट हम लेकर आएंगे आप यह वीडियो दोस्तों के साथ भी शेयर करिएगा और जितना आप ज्ञान बांटेंगे उतना आपका ज्ञान बढ़ेगा यकीन मानकर चलिए जो आप देते हैं उससे कई गुना आपके पास लौट कर आएगा फिर चाहे आप कुछ भी दे रहे हो रही बात आज की इस वीडियो की पीडीएफ की या हमारे चैनल पर उपलब्ध अन्य वीडियोस की पीडीएफ की फिर चाहे आप लेखपाल की तैयारी कर रहे हो लोअर पीसीएस की तैयारी कर रहे हो सभी के लिए हमारे पास कंटेंट उपलब्ध है बहुत अच्छे नोट्स हमने लोअर पीसीएस के लिए बनाए हैं और ऑलरेडी हम प्रोवाइड करवा रहे हैं जो आप लोगों को बहुत पसंद आ रहे हैं तो अगर आप जुड़ना चाहते हैं स्क्रीन पर आपको एक व्हाट्सएप नंबर दिख रहा होगा वहां पर आप मैसेज करिए और हमारे साथ जुड़ सकते हैं चलिए मिलेंगे फिर किसी अन्य वीडियो में तब तक के लिए आप अपना ख्याल रखिए जय हिंद जय भारत

ग्राम समाज एवं विकास मैराथन | UPSSSC Lekhpal Exam | Gram Samaj Vikas for UP Lekhpal Exam
Quick Revision Classes
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