[0:00]मेरे प्रिय मित्रों, क्या तुम जानते हो कि तुम अपने ही हाथों अपने जीवन की जड़ों को काट रहे हो? तुम जिसे भोजन कहते हो, वह अक्सर तुम्हारी कब्र खोदने का सामान साबित होता है। लेकिन तुम्हारी रसोई के एक छोटे से कोने में एक ऐसी दिव्य औषधि छिपी है जिसे तुमने महज एक स्वाद देने वाला मसाला मान लिया है। वह लहसुन की एक छोटी सी कली जो देखने में मामूली लगती है, तुम्हारे भीतर एक पूरा वैज्ञानिक रूपांतरण घटित कर सकती है। लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि हम बीमार क्यों पड़ते हैं? हम असमय बुढ़ापे की ओर क्यों बढ़ रहे हैं? उसका उत्तर तुम्हारी थाली में छिपा है। अगर तुम इस कली के पीछे छिपे हुए महान सत्य और उसके भीतर छिपे उस रासायनिक चमत्कार को नहीं जानते, तो तुम एक बहुत बड़े अवसर को खो रहे हो। आज मैं तुम्हें उस पर्दे के पीछे ले जाऊंगा, जहां प्राचीन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का मिलन होता है। अगर तुम आज रुककर इस सत्य को नहीं समझ पाए तो तुम्हारी देह एक रुग्णशाला बन जाएगी। आओ इस रहस्य के द्वार खोलें। शरीर एक बहुत सूक्ष्म यंत्र है। इसे तुम कोई जड़ वस्तु मत समझ लेना। यह एक जीवंत प्रयोगशाला है और इस प्रयोगशाला में जो सबसे महत्वपूर्ण तत्व है, वह है तुम्हारी रक्षा प्रणाली जिसे तुम रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हो। वह दरअसल तुम्हारे भीतर के वे सैनिक हैं जो हर पल बाहरी आक्रमणों से लड़ रहे हैं। लेकिन तुम्हारे ये सैनिक थक गए हैं, कमजोर पड़ गए हैं। क्यों? क्योंकि तुमने उन्हें वह पोषण और वह अस्त्र ही नहीं दिया जिसकी उन्हें जरूरत थी। लहसुन की वह सफेद कली महज एक वनस्पति नहीं है, वह एक सघन ऊर्जा का पुंज है। प्राचीन काल में जब ऋषि मुनियों ने इस पर शोध किया तो उन्होंने पाया कि इसके भीतर एक ऐसी अग्नि है जो शरीर की गंदगी को जलाकर भस्म कर सकती है। आज का मनुष्य भ्रमित है, वह महंगी दवाइयों के पीछे भागता है, वह रसायनों की दुकानों पर भीख मांगता है, लेकिन वह उस सत्य को नहीं देखता जो प्रकृति ने उसके लिए सहज उपलब्ध कराया है। लहसुन के भीतर एक विशेष तत्व होता है जिसे विज्ञान अपनी भाषा में एक रासायनिक प्रक्रिया कहता है। लेकिन मजे की बात देखो वह तत्व लहसुन के भीतर खामोश बैठा रहता है। जब तुम लहसुन की कली को वैसे ही निगल लेते हो तो तुम कुछ भी हासिल नहीं करते। वह वैसे ही तुम्हारे शरीर से बाहर निकल जाता है। प्रकृति बड़ी चालाक है। वह अपने रहस्यों को इतनी आसानी से प्रकट नहीं करती। जब तुम उस कली को कुचलते हो, जब तुम उसे तोड़ते हो तब उसके भीतर एक रासायनिक मिलन होता है। दो अलग-अलग तत्व आपस में मिलते हैं और तब जन्म होता है। उस चमत्कार का जिसे दुनिया एक शक्तिशाली औषधि के रूप में जानती है। यही जीवन का भी सूत्र है। जब तक तुम टूटते नहीं, जब तक तुम घिसते नहीं, तब तक तुम्हारे भीतर की असली शक्ति बाहर नहीं आती। लहसुन को कुचलना उसकी मृत्यु नहीं है बल्कि उसके भीतर के अमृत का जागरण है। लेकिन तुम क्या करते हो? तुम उसे आग पर भून देते हो। तुम उसे तेल में तल देते हो। तुमने उसकी आत्मा को तो मार ही दिया। अब तुम केवल उसकी लाश खा रहे हो। याद रखना, जो चीज आग पर चढ़कर अपनी प्रकृति खो दे, वह तुम्हें जीवन कैसे दे सकती है? अगर तुम्हें इस औषधि का पूरा लाभ लेना है तो तुम्हें प्रकृति के नियमों का पालन करना होगा। तुम्हें उसे उसके कच्चे और शुद्ध रूप में स्वीकार करना होगा। मेरे पास लोग आते हैं और कहते हैं कि हमें हृदय की बीमारियां हैं। हमारी धमनियों में कचरा जमा हो गया है। मैं उनसे कहता हूं कि तुमने अपने भीतर की नदियों को गंदा कर लिया है। तुम्हारा रक्त जो जीवन की धारा है, वह गाढ़ा हो गया है। वह धीमा पड़ गया है। और जब जीवन की धारा धीमी पड़ती है तो मृत्यु करीब आने लगती है। लहसुन उस रक्त को फिर से तरलता देता है। वह तुम्हारी धमनियों की दीवारों पर जमे उस कीचड़ को साफ करता है जिसे तुम आज की भाषा में वसा या कोलेस्ट्रॉल कहते हो। यह कोई चमत्कार नहीं है, यह शुद्ध विज्ञान है। जब तुम सही तरीके से इसका सेवन करते हो तो यह तुम्हारे भीतर जाकर एक झाड़ू की तरह काम करता है। यह तुम्हारे रक्त के बहाव को सुगम बनाता है ताकि तुम्हारा हृदय चैन की सांस ले सके। लेकिन समस्या यहां भी समाप्त नहीं होती। आज का समाज तनाव का समाज है। तुम्हारा रक्तचाप तुम्हारा ब्लड प्रेशर हमेशा ऊपर-नीचे होता रहता है। तुम गोलियों के गुलाम हो गए हो। तुम एक गोली खाते हो ताकि रक्तचाप कम हो। फिर दूसरी गोली खाते हो ताकि उसकी दुष्प्रभाव कम हो। तुम एक दुष्चक्र में फंस गए हो। लहसुन की यह दिव्य कली तुम्हारे रक्तचाप को प्राकृतिक रूप से संतुलित करने की क्षमता रखती है। यह तुम्हारी नसों को आराम देती है, उन्हें फैलने की जगह देती है। लेकिन इसके लिए धैर्य चाहिए। प्रकृति रातोंरात चमत्कार नहीं करती। वह धीरे-धीरे सूक्ष्मता से काम करती है। तुम्हें समझना होगा कि यह शरीर पंचतत्वों से बना है। और लहसुन में पृथ्वी और अग्नि तत्व की प्रधानता है। यही कारण है कि यह तुम्हारे शरीर की सुस्ती को भगाता है। जो लोग हमेशा थका हुआ महसूस करते हैं, जिनके भीतर ऊर्जा का कोई प्रवाह नहीं है, उनके लिए यह एक वरदान है। यह तुम्हारे मेटाबॉलिज्म को यानी तुम्हारी पाचन की अग्नि को प्रज्वलित करता है। अगर तुम्हारी जठराग्नि मंद है तो तुम चाहे कितना ही अच्छा भोजन क्यों न करो, वह जहर ही बनेगा। लहसुन उस अग्नि को सहारा देता है ताकि तुम जो भी ग्रहण करो वह रस बने, रक्त बने, मांस बने और अंततः ओज बने। पुराने समय की एक बात मुझे याद आती है। एक वैद्य थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन केवल जड़ी बूटियों के अध्ययन में बिता दिया। उनसे किसी ने पूछा कि सबसे बड़ी औषधि क्या है? उन्होंने एक लहसुन की कली उठा ली और कहा कि इसमें वह सब कुछ है जो एक मरते हुए इंसान को फिर से खड़ा कर सकता है। लेकिन शर्त एक ही है समझ। बिना समझ के तो तुम अमृत भी पियोगे तो वह निष्फल जाएगा। तुम लहसुन खाते तो हो पर उसे भोजन की तरह खाते हो, औषधि की तरह नहीं। औषधि का अर्थ है सही समय, सही मात्रा और सही विधि। जो लोग ठंड से परेशान रहते हैं, जिन्हें आए दिन जुकाम और खांसी घेरे रहती है। उनके लिए यह एक सुरक्षा कवच है। यह तुम्हारे फेफड़ों में जमा उस कफ को बाहर निकालता है जो तुम्हारी सांसों को रोक रहा है। तुम्हारी श्वास ही तुम्हारा जीवन है। अगर श्वास में ही बाधा है तो जीवन में आनंद कहां से आएगा? लहसुन तुम्हारे श्वसन तंत्र को साफ करता है, उसे बल देता है। आधुनिक विज्ञान भी अब मानने लगा है कि इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण हैं। यानी यह एक ऐसा प्राकृतिक कवच है जिसे पहनकर तुम बीमारियों के हमले से बच सकते हो। लेकिन याद रहे मैं तुम्हें किसी अंधविश्वास की बात नहीं बता रहा हूं। मैं तुम्हें उस रसायन शास्त्र की बात बता रहा हूं जो तुम्हारी कोशिकाओं के भीतर काम करता है। जब तुम लहसुन का सेवन करते हो तो उसके तत्व तुम्हारी कोशिकाओं की रक्षा करते हैं। वे उन्हें सड़ने से बचाते हैं। बुढ़ापा क्या है? बुढ़ापा तुम्हारी कोशिकाओं का सड़ना ही तो है। अगर तुम अपनी कोशिकाओं को स्वस्थ रख सको तो तुम लंबे समय तक युवा रह सकते हो। लहसुन में वे गुण हैं जो ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। यानी वह तुम्हें समय से पहले बूढ़ा होने से रोकता है। अक्सर देखा गया है कि लोग बहुत जल्दी घबरा जाते हैं। छोटी सी बीमारी आई नहीं कि वे डॉक्टरों की शरण में दौड़ते हैं। अपनी बुद्धि का प्रयोग करो। प्रकृति ने तुम्हारे घर में ही अस्पताल बना रखा है। बस तुम्हें उसका उपयोग करना नहीं आता। तुम बाहर खोज रहे हो जबकि समाधान तुम्हारे भीतर और तुम्हारे आसपास है। लहसुन की उस गंध से मत डरो। लोग अक्सर कहते हैं कि इसकी गंध बहुत तेज है। जो चीज जितनी प्रभावशाली होगी उसकी उपस्थिति भी उतनी ही प्रखर होगी। वह गंध ही प्रमाण है कि उसके भीतर सक्रिय तत्व जीवित हैं। जो गंधहीन है वह निर्जीव है। तुम्हें अपने शरीर के प्रति संवेदनशील होना पड़ेगा। तुम्हें सुनना पड़ेगा कि तुम्हारा शरीर क्या मांग रहा है। अगर तुम्हारा पेट खराब रहता है, अगर तुम्हें गैस और अफारा की समस्या है तो समझो कि तुम्हारे भीतर वायु का प्रकोप बढ़ गया है। लहसुन उस वायु को शांत करता है। वह तुम्हारे पाचन तंत्र के मित्र की तरह काम करता है। वह उन हानिकारक कीड़ों और बैक्टीरिया का नाश करता है जो तुम्हारी आंतों में घर बनाकर बैठे हैं। यह एक प्राकृतिक सफाई अभियान है जो हर सुबह तुम्हारे शरीर में चलना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे ज्ञान का अर्थ केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं है। तुम यह सब सुनकर घर जा सकते हो और फिर वही पुरानी गलतियां कर सकते हो। असली परिवर्तन तब आता है जब तुम उस ज्ञान को अपने आचरण में लाते हो। लहसुन को अपने जीवन का हिस्सा बनाना एक कला है। इसे कब लेना है, कैसे लेना है और किसके साथ लेना है, यह सब जानना अनिवार्य है। अगर तुम इसे सही तरीके से लोगे तो यह तुम्हें वह स्वास्थ्य प्रदान करेगा जिसकी तुमने कल्पना भी नहीं की होगी। मनुष्य का शरीर एक अद्भुत रचना है, लेकिन हमने इसे कचरे का डिब्बा बना दिया है। हम इसमें वह सब डालते हैं जो स्वादिष्ट है लेकिन वह नहीं जो लाभदायक है। लहसुन स्वाद में तीखा हो सकता है लेकिन उसके परिणाम मीठे हैं। वह तुम्हारे शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालने का सबसे सरल रास्ता है। तुम्हारे लीवर को जो तुम्हारे शरीर का मुख्य सफाई कर्मचारी है, लहसुन से बहुत सहारा मिलता है। वह लीवर की कार्यक्षमता को बताता है ताकि वह खून को बेहतर तरीके से साफ कर सके। सोचो एक छोटी सी चीज तुम्हारे हृदय, तुम्हारे रक्त, तुम्हारे फेफड़ों और तुम्हारे लीवर सबको एक साथ ठीक कर रही है। क्या यह किसी चमत्कार से कम है? लेकिन हम इसे चमत्कार नहीं कहेंगे क्योंकि चमत्कार रहस्यमय होते हैं। यह तो विज्ञान है, यह तो प्रकृति का गणित है। जो बोओगे वही काटोगे। अगर तुम अपने शरीर में स्वास्थ्य के बीज बोओगे तो तुम्हें आनंद की फसल मिलेगी। लहसुन वह बीज है। जीवन में संतुलन ही सब कुछ है और लहसुन तुम्हें वह संतुलन पाने में मदद करता है। यह तुम्हारे भीतर की अतिरिक्त वसा को जलाता है, तुम्हें हल्का बनाता है। जब शरीर हल्का होता है तो मन भी हल्का होता है। एक भारी शरीर कभी भी ऊर्जा से भरा हुआ नहीं हो सकता। वह हमेशा आलस्य और तंद्रा में डूबा रहेगा। अगर तुम चाहते हो कि तुम सुबह उठो और तुम्हें ऐसा लगे कि तुम ऊर्जा से लबालब भरे हो तो तुम्हें अपनी जीवन शैली में इन छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण चीजों को शामिल करना ही होगा। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि पुराने समय में पिरामिड बनाने वाले मजदूरों को लहसुन खिलाया जाता था। क्यों? ताकि उन्हें असीम शक्ति मिल सके। ताकि वे कठिन परिश्रम के बाद भी बीमार ना पड़े। यह शक्ति का स्रोत है। यह केवल बीमारों के लिए नहीं है। यह उनके लिए भी है जो स्वस्थ रहना चाहते हैं। जो चाहते हैं कि बीमारी उनके दरवाजे तक भी ना आए। आज के समय में प्रदूषण हमारे चारों ओर है। हम जो सांस लेते हैं उसमें जहर है। हम जो पानी पीते हैं उसमें जहर है। हमारा शरीर हर पल इन विषों से लड़ रहा है। लहसुन में सल्फर के यौगिक होते हैं जो इन भारी धातुओं और विषों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं। यह एक डिटॉक्स प्रक्रिया है जो निरंतर चलती रहनी चाहिए। अगर तुम अपने शरीर की सफाई नहीं करोगे तो गंदगी जमा होती जाएगी। और एक दिन वह बीमारी का रूप ले लेगी। इसलिए जागरूक बनो। अपने भोजन को औषधि की तरह देखो। हर निवाला जो तुम अंदर लेते हो, वह या तो तुम्हें जीवन दे रहा है या तुम्हें मृत्यु की ओर ले जा रहा है। चुनाव तुम्हारा है। लहसुन की वह छोटी सी कली तुम्हें एक विकल्प देती है, एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन का विकल्प। लेकिन याद रहे इसे लालच में आकर बहुत ज्यादा मत खाना। प्रकृति में अति वर्जित है। सही मात्रा ही औषधि है और गलत मात्रा विष बन सकती है। तुम्हें अपने शरीर की भाषा को समझना सीखना होगा। जब तुम लहसुन लेना शुरू करते हो तो देखो कि तुम्हारा शरीर कैसे प्रतिक्रिया कर रहा है। क्या तुम्हें ऊर्जा महसूस हो रही है? क्या तुम्हारा पाचन बेहतर हुआ है? अगर हां तो तुम सही रास्ते पर हो। यह यात्रा केवल शरीर की नहीं है। यह समझ की यात्रा है और जैसे-जैसे तुम्हारी समझ बढ़ेगी, तुम्हारा जीवन बदलने लगेगा। मेरे प्रिय मित्रों जीवन एक संतुलन है, एक संगीत है और इस संगीत में अगर एक भी तार ढीला पड़ जाए तो पूरा राग बिगड़ जाता है। हमने शरीर के बाहरी तंत्रों की बात की, लेकिन अब हमें उस गहराई में उतरना होगा जहां यह दिव्य औषधि तुम्हारे अस्तित्व के सूक्ष्म हिस्सों से जुड़ती है। लोग अक्सर पूछते हैं कि आयुर्वेद इसे दिव्य क्यों कहता है? क्या सिर्फ इसलिए कि ये बीमारियों को ठीक करता है? नहीं, दिव्य वह है जो तुम्हें तुम्हारी प्रकृति के करीब ले आए। लहसुन की इस कली में वह अग्नि है जो तुम्हारे भीतर के अंधकार और जड़ता को मिटाने की क्षमता रखती है। तुम्हें समझना होगा कि आयुर्वेद केवल जड़ी बूटियों का संग्रह नहीं है, वह जीवन जीने का एक तार्किक विज्ञान है। इसमें तीन दोषों की बात की गई है वात, पित्त और कफ। जब तुम्हारे भीतर वायु बढ़ जाती है तो तुम बेचैन हो जाते हो। तुम्हारे जोड़ों में दर्द होने लगता है, तुम्हारा मन भटकने लगता है। लहसुन अपनी उष्ण प्रकृति से उस बढ़ी हुई वायु को शांत करता है। यह तुम्हें जमीन से जोड़ता है, तुम्हें स्थिरता देता है। जो लोग वात रोग से पीड़ित हैं, उनके लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। लेकिन विडंबना देखो जिसे लोग गैस की समस्या कहते हैं, वे उसके लिए रसायनों की गोलियां खाते हैं, जबकि समाधान उनकी रसोई में मौजूद है। पुराने समय में एक और अद्भुत प्रयोग होता था लहसुन का तेल। अगर तुम्हारे कान में दर्द है, अगर संक्रमण है, तो लहसुन की कलियों को शुद्ध तेल में पकाकर उसकी दो बूंदें वह काम कर सकती हैं जो महंगी एंटीबायोटिक दवाएं भी नहीं कर पातीं। क्यों? क्योंकि लहसुन के भीतर जो गंधक है, जो सल्फर है, वह कीटाणुओं का काल है। यह एक प्राकृतिक सुरक्षा चक्र है। विज्ञान कहता है कि इसके भीतर जो सूक्ष्म तत्व हैं वे सीधे कोशिका की झिल्ली को पार करने की क्षमता रखते हैं। यानी यह केवल ऊपर-ऊपर से काम नहीं करता, यह जड़ तक जाता है। लेकिन अक्सर लोग एक गलती कर बैठते हैं। वे इसे बिना सोचे समझे किसी भी समय खा लेते हैं। याद रखना औषधि का समय ही उसकी प्रभावशीलता तय करता है। जब तुम सुबह खाली पेट ताजी हवा में बैठकर लहसुन की एक या दो कलियों को कुचलकर उसे पानी के साथ लेते हो, तब वह तुम्हारे शरीर के लिए अमृत का काम करती है। उस समय तुम्हारा शरीर खाली होता है। तुम्हारी जठराग्नि जाग रही होती है। उस समय लिया गया लहसुन सीधे तुम्हारे रक्त प्रवाह में शामिल हो जाता है और सफाई का काम शुरू कर देता है। लेकिन अगर तुम इसे भारी भोजन के साथ, बहुत सारे मसालों के साथ पकाकर खाओगे तो इसका प्रभाव नगण्य हो जाएगा। एक उदाहरण देखो। एक आदमी है जो बहुत मेहनत करता है, लेकिन फिर भी उसका वजन बढ़ता जा रहा है। वह जिम जाता है, वह दौड़ता है, लेकिन उसका शरीर भारी बना रहता है। क्यों? क्योंकि उसका मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ गया है। उसके भीतर की आग बुझ गई है। लहसुन उस आग को फिर से सुलगाता है। वह शरीर की उस जिद्दी चर्बी को पिघलाने में मदद करता है जिसे तुम सालों से ढो रहे हो। यह तुम्हें भीतर से हल्का करता है और जब शरीर हल्का होता है तो तुम्हारा उत्साह अपने आप बढ़ जाता है। परंतु यहां एक सावधानी की भी जरूरत है। मैं देखता हूं कि लोग सुनी सुनाई बातों पर आकर अति कर देते हैं। वे सोचते हैं कि अगर एक कली अच्छी है तो दस कलियां और भी अच्छी होंगी। यह मूर्खता है। लहसुन बहुत गर्म होता है। अगर तुम्हारे पेट में पहले से ही जलन है, अगर तुम्हें अल्सर है या अगर तुम्हारा पित्त बहुत बढ़ा हुआ है तो लहसुन तुम्हारे लिए वर्जित है। औषधि और विष के बीच केवल मात्रा का अंतर होता है। सही मात्रा तुम्हें जीवन देगी और गलत मात्रा तुम्हें कष्ट। इसलिए अपने शरीर की पुकार सुनो। अगर इसे खाने के बाद तुम्हें बहुत ज्यादा बेचैनी या जलन महसूस हो तो समझो कि तुम्हारा शरीर अभी इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। आज का आधुनिक विज्ञान भी उन बातों की पुष्टि कर रहा है जो हजारों साल पहले चरक और सुश्रुत ने कही थी। होमोसिस्टीन नामक एक तत्व होता है जो हमारी धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। शोध बताते हैं कि लहसुन इस तत्व के स्तर को कम करता है। यानी यह तुम्हारे दिल की धड़कनों को सुरक्षा देता है। जब तुम तर्क और विज्ञान की कसौटी पर इसे देखते हो तो तुम्हें समझ आता है कि हमारे पूर्वज कितने गहरे वैज्ञानिक थे। उन्होंने धर्म को विज्ञान से जोड़ दिया था ताकि तुम स्वस्थ रह सको। लेकिन तुमने धर्म को पकड़ लिया और विज्ञान को भूल गए। तुमने लहसुन को तामसिक कहकर छोड़ दिया, बिना यह समझे कि बीमार शरीर के लिए तामसिक भी सात्विक हो सकता है अगर वह औषधि का काम करे। मनुष्य की बुद्धि अक्सर उसे भटकाती है। तुम सोचते हो कि जो चीज महंगी है वही कीमती है। जो दवा विदेश से आई है वही असर करेगी। यह तुम्हारी हीन भावना है। प्रकृति बहुत उदार है। वह अमीरों और गरीबों में भेद नहीं करती। उसने यह दिव्य औषधि हर घर में उपलब्ध कराई है। लहसुन की कली में वह सामर्थ्य है कि वह तुम्हें कैंसर जैसी भयानक बीमारियों से भी सुरक्षा प्रदान कर सके। इसके भीतर के एंटीऑक्सीडेंट्स तुम्हारी कोशिकाओं के डीएनए को सुरक्षित रखते हैं। वे मुक्त कणों को नष्ट करते हैं जो शरीर में तबाही मचाते हैं। एक और बात याद रखना। लहसुन केवल शरीर को ठीक नहीं करता। यह तुम्हारी इंद्रियों को भी प्रखर बनाता है। जब तुम्हारा शरीर विषमुक्त होता है, जब तुम्हारा रक्त शुद्ध होता है तो तुम्हारी आंखों की रोशनी, तुम्हारे सुनने की क्षमता और तुम्हारी त्वचा की चमक अपने आप बढ़ जाती है। यह कोई सौंदर्य प्रसाधन नहीं है। यह आंतरिक शुद्धि का परिणाम है। जो भीतर से साफ है वह बाहर से सुंदर दिखेगा ही। अक्सर समाज में लोग गंध के कारण इससे बचते हैं। मैं कहता हूं उस गंध से मत डरो जो तुम्हें स्वास्थ्य दे रही है। उस सड़ांध से डरो जो गलत भोजन के कारण तुम्हारे भीतर जमा हो रही है। अगर तुम लहसुन खाने के बाद थोड़ा सा हरा धनिया या पुदीना चबा लो तो वह गंध गायब हो जाएगी। लेकिन उस छोटी सी असुविधा के लिए स्वास्थ्य के इस महाकुंभ को मत छोड़ो। तुम्हें अपने जीवन का मालिक खुद बनना होगा। कब तक तुम दूसरों के द्वारा दी गई सलाहों और गोलियों पर निर्भर रहोगे? लहसुन का यह प्रयोग तुम्हें आत्मनिर्भर बनाता है। यह तुम्हें सिखाता है कि छोटी-मोटी बीमारियों के लिए तुम्हें किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है। सर्दी जुकाम हो, दांत में दर्द हो या पेट में कीड़े हों लहसुन हर जगह तुम्हारा रक्षक बनकर खड़ा है। एक व्यक्ति था बहुत परेशान। उसे नींद नहीं आती थी। उसका शरीर हमेशा भारी रहता था। मैंने उसे सिर्फ इतना कहा कि अपनी जीवन शैली बदलो और सुबह की शुरुआत एक प्राकृतिक औषधि से करो। कुछ महीनों बाद वह आया और उसकी आंखों में एक नई चमक थी। उसने कहा कि मुझे ऐसा लगता है जैसे मेरा बोझ उतर गया है। यह बोझ क्या था? यह बोझ था उन विषों का जो उसके शरीर में जमा थे। लहसुन ने उन विषों के बंधनों को काट दिया। जीवन को टुकड़ों में मत देखो। यह मत सोचो कि लहसुन सिर्फ एक मसाला है। उसे एक समग्र औषधि के रूप में देखो। यह तुम्हारे पूरे तंत्र को फिर से व्यवस्थित करने की क्षमता रखता है। यह तुम्हें सिखाता है कि कैसे छोटी-छोटी चीजें बड़े बदलाव ला सकती हैं। जैसे एक छोटी सी चिंगारी पूरे जंगल को जला सकती है, वैसे ही लहसुन की एक छोटी सी कली तुम्हारे भीतर की बीमारियों के जंगल को साफ कर सकती है। लेकिन याद रहे लहसुन कोई जादू की छड़ी नहीं है। इसके साथ तुम्हें अपने पूरे जीवन को देखना होगा। अगर तुम सारा दिन गलत भोजन करते हो, अगर तुम व्यायाम नहीं करते, अगर तुम तनाव में डूबे रहते हो तो केवल लहसुन तुम्हें नहीं बचा पाएगा। यह एक सहायक है, यह एक मित्र है, लेकिन मुख्य काम तो तुम्हें ही करना होगा। तुम्हें अपने शरीर के प्रति सजग होना होगा। अतः आज से एक नया संकल्प लो। अपनी रसोई को अपनी प्रयोगशाला बनाओ। प्रकृति के इन उपहारों को आदर के साथ स्वीकार करो। लहसुन की उस कली को जब तुम उठाओ तो याद करना कि इसमें सदियों का ज्ञान और प्रकृति की असीम शक्ति छिपी है। इसे सही विधि से लो। इसे कूटकर थोड़ी देर हवा में छोड़कर फिर कच्चे रूप में ग्रहण करो। यही इसके दिव्य चमत्कार को जगाने की कुंजी है। तुम्हारे भीतर वह सारी क्षमता मौजूद है कि तुम एक पूर्ण और स्वस्थ जीवन जी सको। बीमारियों का काम है आना, लेकिन तुम्हारा काम है उन्हें टिकने ना देना। लहसुन वह द्वारपाल है जो अवांछित अतिथियों को तुम्हारे शरीर रूपी मंदिर में प्रवेश नहीं करने देगा। अपनी जड़ों की ओर लौटो, उस प्राचीन सत्य की ओर लौटो जिसे विज्ञान आज झुककर सलाम कर रहा है। सत्य सरल होता है। लेकिन मनुष्य उसे जटिल बनाने में माहिर है। लहसुन का सत्य भी बहुत सरल है। यह शुद्धि है, यह अग्नि है, यह जीवन है। इसे अपने भीतर उतरने दो और देखो कि कैसे तुम्हारी देह के हर अणु में एक नया संगीत बजने लगता है। तुम बीमार होने के लिए पैदा नहीं हुए हो, तुम आनंद के लिए पैदा हुए हो और स्वास्थ्य उस आनंद की पहली सीढ़ी है। जाओ और अपनी इस यात्रा को आज से ही शुरू करो। प्रकृति तुम्हारा इंतजार कर रही है। वह तुम्हें सब कुछ देने को तैयार है बस तुम्हें हाथ बढ़ाकर उसे स्वीकार करना है।

लहसुन का यह विज्ञान जान लिया तो दंग रह जाओगे | लहसुन खाने का सही तरीका और असली सच
Echo Of Silence
25m 41s3,729 words~19 min read
Auto-Generated
Watch on YouTube
Share
MORE TRANSCRIPTS


