[0:00]इस ट्रैक्टर को देखो जब यह ऐसे स्टंट परफॉर्म करता है तो इस पर जबरदस्त फोर्स लगते हैं फिर भी इसके टायर और ट्रैक्टर एकदम ओके हैं। अब इस कार को देखो जब यह ड्रिफ्टिंग करती है तो सोचो इसके आगे के टायर पर कितने जबरदस्त फोर्स लगते हैं। सबसे पहले इस टायर के ऊपर से फोर्स लग रहा है जिसको रेडियल फोर्स बोलते हैं और यह फोर्स गाड़ी का जो वेट है वह अप्लाई कर रहा है। उसके बाद ड्रिफ्टिंग के टाइम टायर इस गाड़ी को छोड़कर इधर भागने की कोशिश करेगा और इस फोर्स को एग्जियल फोर्स बोलते हैं जो फिलहाल इस टायर पर पूरी पावर के साथ में लग रहा है। थोड़ा सोचो कौन इन फोर्स को हैंडल करता है कुछ लोग बोलेंगे यहां पर गाड़ी के टायर में जो नट बोल्ट लगे हैं वह। कुछ हद तक आपका आंसर सही है लेकिन गाड़ी के टायर में बेयरिंग लगे रहते हैं जो इस फोर्स को हैंडल करते हैं। अब गाड़ी के टायर के फोर्स से कई गुना ज्यादा फोर्स आता है स्टीम टरबाइन की शाफ्ट पर जो 3000 आरपीएम की स्पीड पर रोटेट करती है। यहां पर जो बेयरिंग यूज होते हैं वह ना ही तो आपने कभी देखे होंगे और ना ही उनका नाम सुना होगा। और यह बेयरिंग स्टीम टरबाइन के अलावा बड़े-बड़े कंटेनर शिप के प्रोपेलर की शाफ्ट विंड टरबाइन में भी लगे रहते हैं। अब हम धीरे-धीरे इन बेयरिंग को समझते हैं बेयरिंग बेसिकली दो बॉडी के बीच में लगा रहता है जहां पर एक बॉडी फास्ट मूव करती है और एक रेस्ट में रहती है। तो बेयरिंग यहां पर फ्रिक्शन को भी कम करता है मैकेनिकली भी इनको बैलेंस करता है और इसके लोड को भी हैंडल करता है। जो आप बेयरिंग देख रहे हो इसको बॉल बेयरिंग बोलते हैं और जनरली आपने इसी को देखा होगा। इसके बाहर की रिंग को आउटर रिंग बोलते हैं और अंदर की रिंग को इनर रिंग बोलते हैं। और इन दोनों के बीच में बॉल लगी रहती है जिसको बचपन में हम सबने बहुत निकालने की कोशिश की लेकिन इन बॉल को होल्ड करके रखता है केस ताकि बॉल आपस में एक दूसरे से ना टकराए। यहां पर एज ए लुब्रिकेंट ग्रीस को यूज में लिया जाता है जो फिर से फ्रिक्शन को ही रिड्यूस करता है। मोस्टली बॉल बेयरिंग हाई कार्बन क्रोमियम स्टील के बने होते हैं यहां पर दोनों ही रिंग के बीच में बॉल को आगे बढ़ाने के लिए रास्ता बना रहता है जिनको ग्रू बोलते हैं। इनर रिंग के अंदर साफ्ट को सेट किया जाता है जो साफ्ट के साथ में रोटेट करती है और आउटर रिंग फिक्स होती है। इस टाइप के बेयरिंग ऊपर से आ रहे फोर्स को हैंडल करते हैं जिनको रेडियल फोर्स बोलते हैं और यह लो मेंटेनेंस बेयरिंग होते हैं और लॉन्ग टाइम तक चलते हैं। इससे थोड़ा आगे बढ़े तो यह बेयरिंग रेडियल फोर्स भी हैंडल कर सकते हैं बस थोड़े से यहां पर बदलाव करने होंगे। यहां पर आउटर रिंग और इनर रिंग को स्लाइटली एक एंगल पर सेट कर दिया जाता है इसलिए इनको एंगुलर कांटेक्ट बॉल बेयरिंग भी बोलते हैं। ऊपर से आ रहे रेडियल फोर्स को तो यह हैंडल कर ही लेगा लेकिन साइड में आ रहे एग्जियल फोर्स को भी यहां पर रिंग के अंदर कुछ एंगल बने रहते हैं जो बॉल को बेयरिंग से बाहर नहीं जाने देंगे। बॉल बेयरिंग आपको हमारे घर में इजली देखने को मिल जाएंगे सीलिंग फैन वाशिंग मशीन मोटर्स के अंदर जो ज्यादा हाई स्पीड में ऑपरेट नहीं करते हैं। अब इनका ही एक बड़ा भाई आता है सेल्फ अलाइनिंग बॉल बेयरिंग इस बेयरिंग की जो आउटर रिंग होती है वह स्लाइटली स्फेरिकल होती है और यहां पर ग्रूव नहीं बने रहते हैं। ग्रूव सिर्फ इनर साफ पर होते हैं जो बॉल को होल्ड करके रखते हैं। अब हमारी जो साफ्ट है वह हमेशा स्ट्रेट फॉरवर्ड नहीं होती है कभी कभार वह अपना एंगल बदलती रहती है और बेयरिंग यदि थोड़ा बहुत फ्लेक्सिबल नहीं हुआ तो या तो साफ्ट टूट जाएगी या फिर बेयरिंग टूट जाएगा। तो यह बेयरिंग सेल्फ अलाइन कर सकते हैं अपने आपको साफ्ट के हिसाब से लगभग 30 डिग्री के एंगल तक। अब यहां पर डबल बॉल्स लगी हुई है तो यह हाई स्पीड में भी ऑपरेट करते हैं और इनकी लोड केयरिंग कैपेसिटी भी ज्यादा बढ़ जाती है। लेकिन यह सिर्फ रेडियल फोर्स को ही हैंडल कर सकता है साइड में से यदि कोई फोर्स लगा तो बॉल बाहर निकल जाएगी। अब इस बॉल बेयरिंग की कैटेगरी में भी एक और बेयरिंग आता है जो सिर्फ एक्जियल लोड को ही हैंडल कर सकता है सेम टू सेम ऊपर के बेयरिंग जैसे ही है। लेकिन यहां पर इनर और आउटर रिंग कुछ इस तरीके से पहले सेट होती है और फिर बीच में इनके बॉल्स लगी रहती है कुछ ऐसे और साफ्ट को कुछ ऐसे कनेक्ट करके यह बेयरिंग मैक्सिमम एग्जियल लोड को हैंडल कर सकता है। अब थोड़े से पावरफुल बेयरिंग की तरफ चलते हैं जो शायद आपने नहीं देखे होंगे और इनका नाम है रोलर बेयरिंग। सेम टू सेम बॉल बेयरिंग जैसे ही होते हैं लेकिन यहां पर बॉल की जगह रोलर को काम में लिया जाता है और रोलर को इसलिए काम में लिया जाता है क्योंकि रोलर इनर और आउटर रिंग के बीच में अपना जो कांटेक्ट एरिया है उसको बढ़ा लेता है। जिससे इसकी लोड केयरिंग कैपेसिटी ज्यादा हो जाती है यह हाई रेडियल लोड को उठा सकता है और अच्छी बात यह है कि इनकी हाई एक्यूरेसी होती है और हाई स्पीड पर जब यह ऑपरेट करते हैं तो यह वाइब्रेशंस को भी हैंडल कर लेते हैं। लेकिन आवाज ज्यादा करेंगे क्योंकि इनका कांटेक्ट एरिया बढ़ जाता है। यह सिलिंड्रिकल रोलर बेयरिंग है जो सेम टू सेम बॉल बेयरिंग जैसा ही है। इसके बाद में आता है स्फेरिकल रोलर बेयरिंग। इसकी खास बात यह है कि एक तो इसकी लोड केयरिंग कैपेसिटी ज्यादा है और यदि साफ्ट थोड़ी मिस अलाइनमेंट भी है तो यह अपने एंगल को एडजस्ट करके साफ्ट के लोड को हैंडल कर लेगा। यह भी सेम टू सेम सेल्फ अलाइनिंग बॉल बेयरिंग जैसा ही है आउटर रिंग थोड़ी स्फेरिकल होती है और इनर रिंग में ग्रूस बने रहते हैं। इनका ज्यादातर यूज ऑफरोड व्हीकल जैसे थार गाड़ी fortuner इनमें होता है जहां पर लोड तो हैवी होता है लेकिन स्पीड ज्यादा नहीं होती। इसके अलावा जो छोटे शिप का प्रोपल्शन सिस्टम होता है वहां पर भी इनका यूज होता है। यहां पर थ्रस्ट रोलर बेयरिंग भी होता है जो एग्जियल लोड को हैंडल करने के लिए होता है जो सेम टू सेम अभी ऊपर एक बॉल बेयरिंग देखा था उसी के जैसे काम करता है। अब रोलर बेयरिंग की फैमिली से एक और बेयरिंग आता है थोड़ा अलग टाइप का जिसको टेपर्ड रोलर बेयरिंग बोलते हैं। इसमें इनर रिंग आउटर रिंग सेम टू सेम ऊपर के जितने भी बेयरिंग है उनके जैसे ही होती है लेकिन एक तो यह जो रिंग होती है वह टेपर्ड शेप में होती है। इधर से इसकी रेडियस ज्यादा है लेकिन इधर से थोड़ी कम है सेकंड थिंग इसमें जो रोलर लगे रहते हैं वह भी टेपर्ड शेप में ही होते हैं। अब इनके शेप से ही आपको अंदाजा लग जाएगा कि यह रेडियल फोर्स को तो हैंडल करते ही है लेकिन यह एग्जियल फोर्स को भी बहुत शानदार तरीके से हैंडल कर सकते हैं। क्योंकि इधर से इसकी रेडियस कम है तो जो भी फोर्स आएगा यह टेपर्ड शेप उसको होल्ड कर लेगा। तो अभी आपने जो कार्ड देखी थी जिसके पास में स्पीड भी अच्छी है और ड्रिफ्टिंग के टाइम पर रेडियल और एग्जियल फोर्स दोनों अवेलेबल रहते हैं और यह बेयरिंग इन दोनों फोर्स को अच्छे से हैंडल कर लेता है। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन के जो हैवी इक्विपमेंट होते हैं उनमें भी इसका यूज होता है। गियर बॉक्स में यूज होता है ट्रेन के अंदर जो ट्रेक्शन मोटर लगी रहती है उसमें भी यूज होता है। एयरप्लेन का जो लैंडिंग गियर होता है उसमें भी यह लगा रहता है क्योंकि एयरप्लेन के लैंडिंग गियर में एग्जियल और रेडियल फोर्स बहुत ज्यादा हाई पावर के साथ में लगते हैं। नेक्स्ट जो बेयरिंग है इनको बोलते हैं नीडल रोलर बेयरिंग। लेकिन अपनी लाइफ की गाड़ी को भी एकदम स्मूथली रन करना चाहते हो तो हमने रिसेंटली एडवांस 3डी एनिमेशन का कोर्स लॉन्च किया है जो काफी ज्यादा पावरफुल है और एनिमेशन के हर एक मॉड्यूल को डिटेल से कवर किया है। जैसा आप चाहते हो वैसा एनिमेशन आप सीख पाओगे डिस्क्रिप्शन में डिटेल्स अवेलेबल है जरूर से चेक आउट कीजिएगा। नीडल रोलर बेयरिंग की लेंथ ज्यादा होती है लेकिन इसका डायमीटर बहुत कम होता है इस बेयरिंग के अंदर इनर रिंग नहीं होती है। साफ्ट को डायरेक्ट रोलर पर ही सेट किया जाता है जिसके पीछे एक बड़ा रीजन है मोस्टली इन बेयरिंग को उन जगहों पर यूज किया जाता है जहां पर जगह बहुत कम होती है। क्योंकि यदि आप इसके आउटर रिंग और रोलर की थिकनेस देखोगे तो बहुत कम है और यह हाई लोड को भी हैंडल कर सकते हैं। हाई स्पीड पर भी ऑपरेट कर सकते हैं और जगह भी इनको कम चाहिए अब बात करते हैं प्लेन बेयरिंग्स के बारे में बेसिकली इनमें देखा जाए तो कोई रोलिंग एलिमेंट नहीं होता है। लेकिन फिर भी इनकी सबसे ज्यादा हाई लोड केयरिंग कैपेसिटी होती है यह सस्ते होते हैं और कॉम्प्लेक्शन भी इनका नहीं होता है। साफ्ट को डायरेक्ट बेयरिंग के यहां पर सेट किया जाता है यह मोस्टली ट्रेन का जो एक्सल होता है वहां पर यूज होते हैं। नॉर्मल साइज के स्टीम टरबाइन में लगे रहते हैं एग्रीकल्चर मशीनरी जैसे ट्रैक्टर प्लाउ हार्वेस्टर में भी यूज होता है बुलडोजर क्रेन में भी यह लगे रहते हैं और शिप के प्रोपल्शन सिस्टम में भी इनका यूज होता है। लेकिन इसमें लुब्रिकेशन देने के लिए रेगुलर ऊपर से ऑयल की सप्लाई की जाती है। प्लेन बेयरिंग की कैटेगरी में ही कुछ और बेयरिंग आते हैं जैसे बुश बेयरिंग इनका नाम आपने सुना होगा। ज्यादातर आप जब पानी के सबमर्सिबल पंप ठीक करवाते हो तो मैकेनिक आपको बोलता है इनके बुस खराब हो गए तो वह बस और कुछ भी नहीं होता है यह प्लेन बेयरिंग ही होते हैं। और यह कुछ इस साइज के भी होते हैं जो छोटे एप्लीकेशन जैसे टेबल फैन होता है उनमें भी यह लगे रहते हैं। अब हम बात करते हैं कुछ एक्सट्रीमली पावरफुल बेयरिंग के बारे में और जो आप बेयरिंग देख रहे हो इनको बोलते हैं फ्लूइड बेयरिंग जो हैवी स्टीम टरबाइन होते हैं वह काफी हाई स्पीड में रोटेट करते हैं और हाई स्पीड की वजह से वहां पर वाइब्रेशंस जनरेट होते हैं। तो फिर उनको मैकेनिकली बैलेंस करना एक चैलेंज बन जाता है और वहां पर यूज होते हैं फ्लूइड बेयरिंग बेसिकली इनमें भी कोई भी रोटेटिंग पार्ट नहीं होता है। यहां पर पैड लगे रहते हैं जिन पर साफ्ट को सेट किया जाता है इन पैड के बीच में नोजल लगे रहते हैं जो रेगुलरली ऑयल को स्प्रे करते हैं। अब इन नोजल में ऑयल को दो तरीके से भेजा जा सकता है एक तो आप बेयरिंग को ऑयल से भर दो और यही ऑयल लुब्रिकेशन प्रोवाइड करवाता रहेगा। इस टाइप के बेयरिंग हाइड्रोडायनामिक बेयरिंग की कैटेगरी में आते हैं और दूसरा तरीका है हम एक अलग सेपरेट मोटर की हेल्प से यहां पर हाई प्रेशर से ऑयल भेजते हैं जिनको हाइड्रोस्टेटिक बेयरिंग बोलते हैं। लेकिन इनकी कुछ खास बात और ही है जब यहां पर लगी हुई साफ्ट हाई स्पीड में रोटेट करने लग जाती है तो यहां पर साफ्ट इन पैड को टच नहीं करती है। साफ्ट और पैड के बीच में ऑयल आ जाता है और साफ्ट थोड़ी सी ऊपर उड़ जाती है अब यहां पर साफ्ट बहुत ज्यादा हैवी रहती है तो यह साफ्ट को ज्यादा नहीं उठा पाता। लेकिन हाई स्पीड की वजह से थोड़ा सा यह पैड से ऊपर उठ जाता है आपको पता है ऑयल की विस्कोसिटी ज्यादा होती है तो जो ऑयल के पार्टिकल साफ्ट से चिपके हुए हैं। वह तो साफ्ट की स्पीड में ही रोटेट करने की कोशिश करेंगे लेकिन साफ्ट से जो थोड़े से दूर है वह साफ्ट के बराबर तो रोटेट नहीं कर पाएंगे। लेकिन फिर भी कोशिश करेंगे रोटेट करने की क्योंकि जो साफ्ट के टच हो रहे हैं पार्टिकल वह इनको भी अपने साथ में ले जाने की कोशिश करेंगे। लेकिन इतनी ज्यादा एनर्जी ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे इस तरीके से जो थर्ड लेयर के पार्टिकल होंगे वह थोड़ा और कम स्पीड में रोटेट करेंगे। तो यह जो पार्टिकल्स की लेयर बन रही है साफ्ट के चारों तरफ यह पैड और साफ्ट के बीच में आ जाएंगे और साफ्ट को ऊपर उठा देंगे तो स्टीम टरबाइन की स्पीड ज्यादा होती है और हमें फ्रिक्शन को मेंटेन करना बहुत ज्यादा जरूरी है। तो यह बेयरिंग फ्रिक्शन को एज मच एज रिड्यूस कर देते हैं और हाई स्पीड की वजह से जो वाइब्रेशंस जनरेट होते हैं उनको भी यह इजीली कंट्रोल कर लेते हैं। अब हमारा लास्ट बेयरिंग बचा है जो आज के टाइम की एक नई टेक्नोलॉजी है और इनको मैग्नेटिक बेयरिंग बोलते हैं। यदि सिंपल लैंग्वेज में समझाऊं तो जैसे दो मैग्नेट है और उनके सेम पोल एक दूसरे से रिपेल करेंगे और इसी का फायदा हम उठाते हैं। साफ्ट के ऊपर हम मैग्नेट के पोल सेट कर देते हैं और साइड में बाहर की जो आउटर रिंग है वहां पर भी मैग्नेट के पोल सेट कर देते हैं कुछ इस टाइप से। यहां पर यह दोनों पोल एक दूसरे से रिपेल कर रहे हैं तो साफ्ट ऊपर उड़ जाएगी और यह दोनों पोल एक दूसरे को अट्रैक्ट कर रहे हैं तो साफ्ट रोटेट भी करेगी। इसको मैग्नेटिक लेविटेशन बोलते हैं आप इस मैगले वाले वीडियो से बहुत आसानी से समझ पाओगे जहां पर हमने डिटेल से बात की है। इस टाइप के बेयरिंग एकदम जीरो फ्रिक्शन प्रोवाइड करवाते हैं इनके और भी बहुत ज्यादा बेनिफिट है जिनको किसी सेपरेट वीडियो में हम डिटेल से समझेंगे। लेकिन फिलहाल जो मैग्नेटिक बेयरिंग होते हैं उनको मैकेनिकल बेयरिंग का भी सपोर्ट हमें देना पड़ता है। क्योंकि जब तक साफ्ट स्पीड में नहीं चलेगी तब तक साफ्ट लेविटेटर नहीं कर पाएगी और इस टाइम पर हमें मैकेनिकल सपोर्ट देना बहुत जरूरी है। तो यहां पर हमने इंडस्ट्री के ऑलमोस्ट सभी टाइप के बेयरिंग के बारे में बात कर ली है फिर भी आपको कोई पता हो तो जरूर से कमेंट बॉक्स में लिखना। 3डी एनिमेशन में इंटरेस्टेड हो तो डिस्क्रिप्शन में डिटेल्स अवेलेबल है वीडियो आपको कैसा लगा वीडियो को लाइक और कमेंट करके हमें जरूर से बताना थैंक यू।

What Is Bearing? All Types Of Bearings And Their Usage And Working
LifeAda
11m 1s2,410 words~13 min read
Auto-Generated
Watch on YouTube
Share
MORE TRANSCRIPTS


