[0:00]अगर कोई आपको धीरे-धीरे बिना आपको पता चले आपकी ही जिंदगी में कैद करते तो क्या आप पहचान पाओगे?
[0:06]यही आज की सबसे खतरनाक सच्चाई है। एक आदमी अपनी बंदूक तोड़ देता है और फिर वही आदमी 30 जंगली सूअरों के लिए एक दीवार बनाना शुरू करता है।
[0:15]पहले दिन बर्फ से ढकी जमीन पर अचानक 500 किलो पीला मक्का गिरता है। ना कोई जाल ना कोई गड्ढा
[0:22]भूख से पागल वो सूअर झाड़ियों से निकलते हैं और बिना सोचे उस मक्के पर टूट पड़ते हैं।
[0:28]पेट भरने के बाद वे टहनियां तोड़ते हुए घबराकर भाग जाते हैं और दूर खड़ा आदमी एक बार पलक तक नहीं झपकाता।
[0:34]दूसरे दिन मक्के के पास आधा मीटर ऊंची एक छोटी सी दीवार खड़ी होती है। सूअर उसे नजरअंदाज करते हैं।
[0:40]घूम कर आते हैं और फिर सब खा जाते हैं। तीसरा दिन दसवां दिन दीवार धीरे-धीरे चारों तरफ बंद होने लगती है।
[0:48]लेकिन सूअरों को फर्क नहीं पड़ता वे खाते हैं आराम से जाते हैं। 15वें दिन दीवार और ऊंची हो जाती है।
[0:54]अब चारों तरफ से बंद बस एक छोटा सा रास्ता बचा है। इस बार पेट भरने के बाद वे भागते भी दीवार के पास ही चैन से सो जाते हैं और फिर 16वां दिन
[1:03]दीवार पूरी तरह बंद बस एक तंग सा रास्ता दूर से देखने पर साफ लगता है कि यह एक जाल है लेकिन फिर भी वे सूअर उसी रास्ते से अंदर जाते हैं।
[1:13]क्योंकि उन्हें सिर्फ मक्का दिख रहा है और जैसे ही वे खाने लगते हैं धराम एक भारी लोहे का दरवाजा गिरता है और उन्हें हमेशा के लिए कैद कर देता है।
[1:21]जो कभी पेड़ तोड़ सकते थे वो अब खुद को भी नहीं बचा पाते। यही है मनोविज्ञान का सबसे खतरनाक जाल ओवरटन विंडो सीधा हमला नहीं।
[1:29]बल्कि धीरे-धीरे आपकी सीमाओं को बदल देना असली जिंदगी में भी ऐसे लोग मिलते हैं आज छोटा सा काम कहेंगे।
[1:37]कल आपको मजबूर करेंगे और परसों पूरा बोझ आप पर डाल देंगे तो बचोगे कैसे जब कोई आपकी सीमा को परखे तो उस फ्री मक्के को छूना ही मत।
[1:46]क्योंकि जाल कभी अचानक नहीं बनता वह धीरे-धीरे बनता है और कई बार सबसे बड़ी समझदारी यही होती है कि आप शुरुआत में ही ना कह दो।



