[0:03]भाइयों, बहनों, सबसे पहले तो मैं आप लोग का शुक्रिया करूं, धन्यवाद करूं, थैंक यू कहूं कि आपने मुझे यहां बुलाया. मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात है कि वह एक ऐसा जलसा जो श्री दाभोलकर जैसे महान व्यक्ति की याद में स्मृति में हो रहा हो, वहां मुझे याद किया जाए, मुझे बुलाया जाए.
[0:32]देखिए लोग पैदा होते हैं, जिंदगी गुजारते हैं, चले जाते हैं, लाखों-करोड़ों लोग होते हैं. कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी वजह से लाखों-करोड़ों लोग कुछ सोचने पर मजबूर होते हैं, कुछ समझने पर मजबूर होते हैं. यह लोग सर झुका के नहीं जिए होते हैं, यह लोग जिधर हवा चल रही है उधर नहीं जाते हैं, जिधर पानी बह रहा है उधर नहीं बह जाते हैं. यह अपना रास्ता बनाते हैं, यह सच की तलाश करते हैं. उस सच की तलाश में खतरा है तो खतरा सही, मुश्किल है तो मुश्किल सही, मुसीबत है तो मुसीबत सही. यही लोग हैं और इसी तरह के लोग हैं, डॉक्टर दाभोलकर जैसे ही लोग हैं, जिन्होंने इस दुनिया को दुनिया बनाया है. इसमें जो कुछ अच्छा है, जो भी सुंदर है, जो भी ठीक है, यह ऐसे ही लोगों का बनाया हुआ है. जिनके खिलाफ लोग खड़े हुए हैं, जिनसे लोगों ने दुश्मनी की है, जिनकी जान के दर पे लोग हुए हैं. मगर आज जहां इंसानियत पहुंची है, जहां भी पहुंची है, जितनी भी पहुंची है. वह ऐसे ही लोगों के कारण पहुंची है जिन्होंने कुछ नई बात कही, नई बात समझाने की कोशिश की है. यह एक अजीब बात है दुनिया में, कहा जाता है परंपरा है ये तो, यह तो हमारे रीति-रिवाज है, यह तो हमारे जीने का सैकड़ों साल से तरीका है. तुम कौन होते हो इसे बदलने वाले, तुम कैसे कह रहे हो कि ठीक नहीं है. यह दुनिया के हर कोने में होता है और आज भी दूसरे बहुत से देश हैं जिनमें हमसे भी बहुत ज्यादा होता है. लेकिन हम धीरे-धीरे उधर सरकने की कोशिश कर रहे हैं. तो अगर जो होता है वही होता रहे या जो होता था वही होता रहता, तो इंसान तो आज भी गुफाओं में रह रहा होता या पेड़ों पर बैठा होता. हर आने वाली पीढ़ी ने, हर आने वाले नए युग ने, नए दौर में कोई नई बात सोची है, जो पहले नहीं सोची गई थी, कोई नई बात समझी है, जो पहले नहीं समझी गई थी. इसी से दुनिया आगे बढ़ी है, इसी से दुनिया बेहतर बनी है. इस दुनिया में करोड़ों साल तक स्लेवरी थी, गुलामी थी, इंसान बेचे जाते थे, खरीदे जाते थे. तो सैकड़ों साल तक हुआ था ना. तो क्योंकि यह सैकड़ों साल तक हुआ था तो ठीक हो गया? और अब इसे कोई कहे गुलामी बंद करो, स्लेवरी नहीं होनी चाहिए तो वह बुरा है. सैकड़ों साल तक इंसान को बहुत सारी बातें नहीं मालूम थी. इंसान को यह नहीं पता था कि फ्लड क्यों आता है. इंसान को यही पता था कि बारिश क्यों होती है. इंसान को यह नहीं पता था कि सूखा क्यों पड़ जाता है. इंसान को यह नहीं पता था कि बीमारियां क्यों होती हैं. तो जिन चीजों का पता नहीं था, उसका रिएक्शन, उसका जो लोगों पर असर हुआ, वह दो तरह का हुआ. एक उससे डर गए, उसको पूजने लगे. हर चीज जिससे डरे उसे पूजा. दूसरे वह थे, जिन्होंने कहा कि पता लगाओ यह कैसे होता है और इसको ठीक कैसे किया जाए.
[4:21]जब नाइल में बहुत बड़ी नदी है इजिप्ट में, वहां जब फेरो होते थे. तो जब फ्लड आता था उसमें, तो कहते थे कि नाइल का देवता नाराज हो गया है. और इसमें हमको अब कुंवारी लड़कियां उनका बलिदान करना पड़ेगा, उनकी आहुति देनी पड़ेगी, तब नाइल का देवता जो है वह शांत होगा. तो लड़कियों को उस फ्लड में फेंक देते थे. फ्लड तो बाद में धीरे-धीरे ठीक ही होता है, तो जब ठीक होता तो देखो अब नाइल का देवता प्रसन्न हो गया. यह वह लोग थे, ऐसा नहीं है कि बिल्कुल जाहिल लोग थे. यही वह लोग थे जिन्होंने इतने बड़े-बड़े पिरामिड भी बनाए हैं कि जिनका आज तक समझ में नहीं आता कि कैसे बनाए हैं. लेकिन दूसरी ओर यह जहालत भी थी. तो आज जब हम देखते हैं कुछ जहालत है, कुछ अंधविश्वास, तो लोग क्या कहते हैं कि क्या है सब पागल हैं क्या? अरे भाई यह पढ़े-लिखे लोग भी हैं, यह अपना काम धंधा सही संभालते हैं, यह अपना घर ठीक चलाते हैं, यह अपनी दुनिया ठीक चला रहे हैं, लेकिन यह बात मानते हैं तो कोई पागल थोड़ी है. यह आप बाकी कामों में देखो होशियार हैं. तो होशियार वह भी थे, जिनको पिरामिड बनाना आता था लेकिन जब फ्लड आता था तो उसमें लड़कियों को फेंक देते थे. तो यह पूरा पागलपन जो है नहीं होता कभी-कभी, कभी होता है एक हिस्सा जो है गलत है बाकी ठीक चल रहा है. और आज तो यह बहुत ज्यादा हो गया है. आप यह देखिए कि बहुत बरसों पहले एक आदमी कॉपरनिकस था, कॉपरनिकस के बाद एक आदमी था उसका नाम गैलीलियो था. उसने कहा के भाई आप लोग जो मानते हैं, जैसा आप कहते हैं कि आपकी होली बुक में लिखा हुआ है, के यह सूरज जो है यह धरती के चारों ओर घूम रहा है. ऐसा नहीं है.
[6:22]है यह है कि यह धरती जो है यह सूरज के चार ओर, पृथ्वी जो है पृथ्वी घूम रही है सूरज के चारों ओर. तो उसको उन्होंने कहा कि यह तो हमारे जो विश्वास हैं, यह जो हमारा धर्म है, यह जो हमारी आस्था है, यह उसके खिलाफ बोल रहा है, इसको तो मार डालो. और उसे मौत की सजा दे नहीं वाले थे गैलीलियो को, तो उसने कहा भाई मुझसे गलती हो गई माफ कर दीजिए, सूरज ही घूम रहा है. अब वो बेचारा क्या करता. कुछ दिनों बाद फिर उसने कहा कि नहीं मैं माफी चाहता हूं लेकिन सूरज घूम नहीं रहा है. घूम तो पृथ्वी रही है. यह लोग जो थे मैं इन्हें माफ करने को तैयार हूं. मैं इसलिए माफ करने को तैयार हूं कि जो इनकी नॉलेज थी, जो इनका ज्ञान था और जो इनकी आस्था थी, वह एक थी. उनको यही मालूम था. तो चलो कोई बात नहीं माफ कर दो कि जाहिल थे. मुझे हैरत अब होती है.
[7:25]आचार्य अचरज यह होता है कि आज ऐसे लोग हैं, जो नासा में बैठ के चांद के ऊपर किस जगह कहां रॉकेट पहुंचेगा वह हिसाब लगाकर भेज सकते हैं. जो यहां बैठकर यह बता सकते हैं कि वह प्लेनेट जो है उसका कितने माइल का सरकम्फ्रेंस है, उसका घेरा कितने माइल्स का है. यह किस स्पीड से चल रहा है. और उसके बाद भी उनकी धार्मिक आस्था वही रहती है, जो हजारों साल पहले उनकी थी, जिन्होंने पृथ्वी घूम रही है के इल्जाम में गैलीलियो को मार डाला था.
[8:08]यह पहली बार हुआ है आज के युग में कि जो इंसान का ज्ञान है और जो इंसान की आस्था है, यह एक नहीं है अब. यह दोनों बातें एक ही आदमी मान रहा है. वह यह साइंस को भी मान रहा है और वह यह इस धर्म को भी मान रहा है, जो एक दूसरे के साथ जुड़े हुए नहीं है, एक दूसरे के खिलाफ है. मैं तो उसे भी माफ करने को तैयार हूं, जो इतना जाहिल है कि यह जानता ही नहीं इन चीजों के बारे में. कमाल यह है कि दोनों ही बातें जान के भी इंसान इसको साइकाइट्री में कहते हैं, स्किजोफ्रेनिया, कि एक ही आदमी के अंदर दो अलग-अलग तरह के आदमी मौजूद हो. लेकिन अब इतने हैं कि आप कह नहीं सकते. दुनिया की बहुत सारी बातें इसलिए सही मान ली जाती हैं कि बहुत सारे लोग कर रहे हैं. आज से ढाई हजार, तीन हजार साल पहले वहां ग्रीस में एक देवता पूजा जाता था जुपिटर. और यह ग्रीस कोई मामूली जगह नहीं थी, इसने बड़े-बड़े फिलॉसोफर, बड़े-बड़े इंटेलेक्चुअल पैदा किए हैं, बड़े-बड़े राइटर पैदा किए हैं उस समय में. लेकिन जुपिटर की पूजा होती थी, हरकुलिस की पूजा होती थी, एक बैक्सस नाम का गॉड था, एक जीस नाम का गॉड था, इनकी पूजा होती थी. फिर वह खत्म हो गए, दूसरे धर्म आ गए वह नहीं रहे. आज अगर आपको किसी के बारे में मालूम हो, मेरे बारे में पता चले, कि यह बड़ी बातें करता है कि मैं नास्तिक हूं और यह है वह है कहता रहता है, सच बात कुछ और है. सच यह है कि सुबह उठ के जुपिटर की एक घंटे पूजा करता है.
[10:07]तो आप सोचेंगे कि मैं पागल हूं क्या, जुपिटर की पूजा करता है.
[10:14]तो मैं आपको पागल लगूंगा.
[10:18]लेकिन विश्वास रखिए कि अगर 10 करोड़ आदमी जुपिटर की पूजा करने लगे तो फिर मैं पागल नहीं लगूंगा. यह गलत काम बड़े स्केल पर जब होता है, यह गलत बात जब बड़े स्केल पर मानी जाती है तो उसको सम्मान मिल जाता है. फिर आप कुछ नहीं कह सकते. मुझे लोग कहते हैं कि हम यह मानते हैं भाई, तो हमको इससे मन को शांति जो है मिलती है. तो हम क्यों ना माने. तो मैं उनसे कहता हूं कि भाई वह जो बिल गेट्स है दुनिया का सबसे अमीर आदमी, मैं यह मान लूं कि मेरा खोया हुआ भाई है तो मुझे बड़ी शांति मिलेगी. तो तुम मुझे पागल समझोगे. अरे मुझे शांति मिल रही है तो तुम्हें क्या तकलीफ होगी? एक बात अगर गलत बात से तुम्हें शांति मिल रही है, तो वह शांति ठीक नहीं है, इसलिए कि यह गलत बात तुमसे बहुत सारी गलत बातें करवाएगी. यह दुनिया में चल रहा है. कमाल की बात यह है कि हमारे जो दुनिया में बड़े-बड़े धर्म हैं, मैं तो कभी सोचता हूं कि जो दुनिया में सबसे धार्मिक आदमी भी है. वह क्रिश्चियन हो, वह मुस्लिम हो, वह जू हो, वह हिंदू हो, सिख हो, कोई भी मजहब मान दुनिया में कोई समझिए बड़े रिलीजन 10 है. उनमें से एक ही मानता होगा ना वो. मैं तो यह भी बात नहीं मानता जी वह अलग-अलग रास्ते हैं, जाना तो एक ही जगह है, यह तो पॉलिटिकल पार्टीज भी कहती हैं. सब पॉलिटिकल पार्टी कहते हैं हम देश की प्रगति के लिए और उन्नति के लिए हैं, तो अगर सभी प्रगति उन्नति चाहते हो तो अलग-अलग पार्टी क्यों हो, सब एक साथ हो जाओ.
[12:06]वैसे ही यह धर्म है. यह बोलते हैं हमारा जी अलग-अलग रास्ता है लेकिन जाना तो एक ही जगह है, तो अब जाना एक ही जगह तो साथ चले जाओ, अलग-अलग कहे जाते हो. यह सब बेकार बातें हैं अलग-अलग हैं. और इन्हें एक दूसरे से सख्त नफरत है. अब आप देखिए कि मैं ऐसा विश्वास रखता हूं कि जो सबसे ज्यादा धार्मिक आदमी भी होता है, वह भी 90% नास्तिक होता है. इसलिए कि उसकी अकल अपने धर्म में खराब हो जाती है, बाकी जो नौ धर्म है ना उनको बिल्कुल करेक्ट देखता है वह.
[12:47]उनमें जो जो गलतियां है उसे सब दिखाई देती हैं. बल्कि बात करते हैं आपस में. कमाल है यार ये कैसे मानते ऐसी बातें. अच्छा तो तुम क्या मानते हो जरा बताओ. तो यह एक जो ख्याल है कि यह अल्टीमेट सच है, यह सबसे बड़ा सत्य है, यही तो असली सत्य है जो आपको समझना है. अच्छा भाई ये सत्य होगा मान गया मैं. तो ये सत्य अगर इतना बड़ा है, तो तुम सवाल क्यों नहीं करने देते हो. तुम्हें तो डरना ही नहीं चाहिए, डरना तो हमें चाहिए हम गलत सड़त बातें करते हैं, यार सवाल करेंगे तो क्या जवाब देंगे यार. धर्म कहता है सवाल नहीं करना दादा. कोई भी धर्म. एक हद तक पूछ लो मगर अंदर ही अंदर एरिया में पूछना, बाहर निकल के नहीं पूछ लेना. तो हर धर्म आपको और यह सिर्फ धर्म की बात नहीं है. यह बात है फेथ की. यह सच बात यह है कि यह गलती सिर्फ धर्म नहीं है. अब वह जो, यह तो कम्युनिस्ट ने भी गलती की है. यह तो जो अल्ट्रा नेशनलिज्म जर्मनी की थी, नाज़िस की, उसमें भी यही था. सवाल नहीं करो. जो हम कह रहे हैं वही सही है. यह एक तरफ हमें कहा जाता है कि देखो गॉड हैस मेड यू इन हिस ओन इमेज, कि ईश्वर ने तो तुम्हें अपने ही इमेज में बनाया है अपनी तरह बनाया है अपना जैसा बनाया है. तभी तो सारे जो जीव जंतु हैं, तुम उनसे ज्यादा सुपीरियर हो, उनसे ऊपर हो. क्यों हो? इसलिए कि तुम्हें समझ दी गई है, तुम सोच सकते हो, समझ सकते हो, जितनी समझ दूसरे जानवरों में नहीं है. उसी सांस में एक दूसरी बात भी हमसे कही जाती है. खबरदार जो इस समझ को इस्तेमाल किया.
[14:44]चुपचाप सुनते रहो और मानते रहो जो हम कह रहे हैं, सवाल नहीं करना. जिस जगह सवाल करने की इजाजत नहीं हो, वह चाहे कोई फिलॉसफी हो, चाहे कोई सिस्टम हो, चाहे कोई आस्था हो, वह खतरनाक जगह है. वह सिस्टम ही खराब है, वह सरकार भी ठीक नहीं होगी, वह समाज भी ठीक नहीं होगा, वह गांव ही ठीक नहीं होगा, वह आबादी ही ठीक नहीं होगी जब सवाल की इजाजत नहीं हो. इंसान जहां पहुंचा है, इंसान जिसने कितनी गुत्थियां जो खोली हैं, वह एक ही तरह से खोली है. सवाल करके यह होता है यह क्यों होता है, यह कैसे होता है. यही बीमारियां जो एक इंजेक्शन से जिनका इलाज हो जाता है, एक टीका लगा देते हैं और बच्चा बीमारी से बच जाता है, इन्हीं बीमारियों को तो बरसों यह कह के पूजा गया है ना कि माता आ गई है. तमाम कमाल की बात यह है कि जो लोग मानते हैं, अच्छा यह अभी इसके बाद फिर आपको यह भी बता रहा है कि जो हो रहा है यह तुम्हारा मुकद्दर है, यह तुम्हारा भाग्य है. यानी यह भी सवाल मत करो कि मैं बुरी हालत में क्यों हूं, मैं खराब क्यों हूं. अच्छा-अच्छा तो सब खुदा करता है ना. के आप सीढ़ी से गिरे नीचे चोट नहीं लगी तो कहते हैं अल्लाह ने बचा लिया. अबे गिराया किसने था.
[16:22]वह कोई और था.
[16:27]एक अंदर गड़बड़ है. सवाल यह है कि अगर भाग्य कोई चीज है, अगर नसीब कोई चीज है, अगर जो हो रहा है वह लिखा है, वही डेस्टिनी है. तो फिर पाप और पुण्य कैसे हो सकते हैं. अरे भाई एक आदमी के भाग में लिखा था कि मेरा मर्डर करेगा, सो उसने कर दिया, आप उसे हत्यारा क्यों कह रहे हैं. उसका क्या दोष है. मेरे भाग में लिखा था कि मैं इसका पैसा खा जाऊंगा. आप मुझे चोर क्यों कह रहे हैं. अगर भाग्य में लिखा था, तो पाप और पुण्य हो ही नहीं सकते. फिर कहते हैं, नहीं-नहीं ऐसी बात नहीं है. है क्या कि आपको ईश्वर ने अकल दिए और वह देख रहा है, कि आप अच्छा करते हैं या बुरा करते हैं आपको छूट दी है. अच्छा भाई 6 बिलियन आदमी है इस पृथ्वी पर, सबको थोड़ी-थोड़ी छूट दी है तो काफी छूट हो गई मिल के. अब इतनी छूट में मैं तो उधर ही देख रहा हूं, इधर जो छूट वाले हैं वह मेरे साथ कुछ भी गड़बड़ कर सकते हैं. तो मैं अब जो कहते हैं ना कि पत्ता उसकी मर्जी के बगैर नहीं हिलता, तो ये जब आपने छूट सबको दी हुई तो बहुत सारे पत्ते उसकी मर्जी के बगैर भी हिल रहे हैं. दोनों काम यह आपस में ही जो आप ध्यान से देखेंगे जो धर्म होते हैं, इनका आपस के अंदर ही जो बात एक बात में दूसरी बात में ही अंतर्विरोध है.
[18:05]आप या तो कोई गॉड है, खुदा है, ईश्वर है, जो टोटल कंट्रोल है जिसका, टोटल कंट्रोल है तो पाप है, पुण्य नहीं हो सकता. पाप पुण्य है तो टोटल कंट्रोल नहीं हो सकता. तय कर लो भाई, जो कहो हम वही मान जाएंगे. अच्छा था, मुझे फ्री मिल गई, फ्री विल मिल गई, मुझे छूट मिली कि अच्छा देखो तुम क्या करते हो. मैंने बुरे काम किए. मैंने की चोरी, जेब कतरा बन गया मैं, पिक पॉकेट हो गया, कोई बड़ा जुर्म नहीं किया मैं सारी जिंदगी लोगों की छोटी-छोटी चोरियां करता रहा. अब मैं मर गया. मरने के बाद अब मरने के बाद कुछ हो सकता है या नहीं हो सकता इस बारे में भी बात करते हैं, जो मैं सोचता हूं वो बताऊंगा आपको. मरने के बाद अलग-अलग फार्मूलाज़ हैं. जैसे ये जो सेमिटिक रिलीजन है, जुड़ाइज़्म, क्रिश्चियनिटी, इस्लाम, उसमें आदमी ऊपर जाता है, वहां पर कोर्ट है. कोर्ट में कहते हैं अच्छा तुमने ये किया था सुनो ऐसा करो, इसको स्वर्ग में भेज दो. भाई साहब आपको नरक में जाना पड़ेगा, जो भी वह चलता है. तो अब मैंने तो सारी जिंदगी चोरी की थी, जेबें काटी थी, कोई ऐसा ढाका नहीं मारा था मैंने, किसी को हमला नहीं किया था, कि दे भाई लोटा लेकर भाग जाता था, कुछ कहीं पर दरवाजे पर कोई चीज रखी है, दूध की शीशी लेकर भाग गया ऐसा, छोटे-मोटे. मगर चोरी थी तो मुझे तो नरक में ही जाना है. तो मैं चला गया. अब आप यह बताइए कि यह छोटी-छोटी चोरियों के लिए मैं कितने दिन नरक में रहूंगा. हजारों, लाखों, करोड़ों साल. अरे भाई छोटी-छोटी चोरियां की है, 6 महीने की सजा हो जाए, 8 महीने की सजा हो जाए, एक साल की, दो साल की, हमेशा तो नहीं हो सकता, ये तो कोई जस्टिस की बात ही नहीं है. और वहां भी नरक में आग और कोड़े और गर्मी और तकलीफ और ये बहुत टॉर्चर वहां बहुत ज्यादा है. अब 6 महीने, 8 महीने बाद अगर मुझे छोड़ दिया तो मैं कहां जाऊंगा.
[20:06]मैं स्वर्ग में तो जा नहीं सकता हूं ऐसा तो कोई काम मैंने किया नहीं है. अच्छा और आपके धर्म के मुताबिक मेरा जन्म भी नहीं होने वाला है दोबारा.
[20:16]वह दूसरा धर्म है उसकी भी बात करेंगे. तो अभी मेरा होगा क्या? इसका मुझे कोई मौलवी या कोई प्रीस्ट है, कोई क्रिश्चियन को मुस्लिम प्रीस्ट हो मुझे बताएं. अच्छा साहब अब के उधर चलिए कि पुनर्जन्म हो गया. तो मैंने इतने पाप किए हैं, इतने पाप किए हैं कि मुझे विधाता ने कहा कि अब इस काबिल नहीं है कि ये इंसान बने. इसको ऐसा करते हैं कॉकरोच की योनी में पैदा करो. ठीक है साहब मैं कॉकरोच पैदा हो गया. अब मुझे बताइए मैं एक कॉकरोच होते हुए कौन से काम करूं जिससे मैं फिर वापस ऊपर आना शुरू करूं. हाउ टू बी ए गुड कॉकरोच.
[21:01]यह कहानियां जो हैं, ये पूरी दुनिया इन कहानियों पर चल रही है. दुनिया के 90% लोग आई होप उससे कम 90 से तो डर लग रहा है मुझे. तो कम से कम 75% लोग तो डेफिनेटली यह बातें मानते हैं. और अपने को समझदार कहते हैं, अपने को मॉडर्न कहते हैं. आप सोचिए ये जो पूरा कॉन्सेप्ट दो चीजों पर चलते हैं धर्म. लालच और डर. ये दोनों निहायत बुरी चीजें हैं. अच्छे आदमी भी दोनों चीजें नहीं होनी चाहिए. लालच इनाम की, कि वह खुश हो जाएगा तो यह दे देगा, वह दे देगा. और डर, कि अगर वह नाराज हो गया तो यह सजा मिलेगी, वह सजा मिलेगी. यानी कोई भला काम आप बिना लालच और डर के करते नहीं है. यह है धार्मिक आदमी. अब वह कहते हैं अच्छा भाई धर्म को अगर तुम नहीं मानोगे, तो फिर यह मोरालिटी क्या है, हम शराफत से क्यों रहें, हम सच क्यों बोलें, हम किसी का जो देना है वह क्यों दें, हम इस तरह क्यों रहें भाई. मोरालिटी ही नहीं हो सकती बिना धर्म के. दो बातें कहना चाहूंगा.
[22:16]आप गाड़ी लेफ्ट पर चलाते हैं इंडिया में, अमेरिका में राइट पर चलती है. लेफ्ट पर क्यों चलाते हैं. मोरालिटी है, उसने हुकुम दिया है.
[22:30]अगर आप नहीं चलाएंगे सबने तय कर लिया कि देखो भाई लेफ्ट पर चलेंगे, उधर से आने वाले अपने लेफ्ट पर चलेंगे, इधर से आने वाले अपने लेफ्ट पर चलेंगे. इसलिए कि अगर नहीं चले तो आने वाली, जाने वाली गाड़ियों में टक्कर हो सकती है, ट्रैफिक जैम हो सकता है, हो सकता है आपकी गाड़ी से किसी को चोट लग जाए, हो सकता है किसी की गाड़ी से आपको चोट लग जाए. इसलिए बेटर ये है आप लेफ्ट पे चलिए, यह एक तरीका बनाया है. इसमें कोई मोरालिटी की बात नहीं है, कोई इसमें हेलो नहीं है चारों तरफ यह एक बड़ी पवित्र बात है कि आदमी लेफ्ट पे चले. ऐसा कुछ नहीं है. ट्रैफिक तभी ठीक चलेगा अगर आप लेफ्ट पर चलेंगे. उसी तरह से सच बोलना, ईमानदारी क्योंकि इंसान अकेले नहीं रह सकता है, उसे रहना तो समाज में ही है. ये एक बहुत बड़ा क्लब है ह्यूमन सोसाइटी जो है. अब इसकी मेंबरशिप में यह क्लब ठीक चले तो कुछ तो उसूल बनाने पड़ेंगे ना भाई, जैसे वो लेफ्ट पे गाड़ी चलाना है. तो आपने यह उसूल बनाया है वक्त के साथ कि देखो भाई ये नहीं करना, किसी का सामान उठा के नहीं ले जाओ, वरना फिर गड़बड़ कैओस होगा, फिर वह ट्रैफिक जैम हो जाएगा. यह है मोरालिटी. अगर आप ये काम किसी डर से कर रहे हैं तो वो गलत है, किसी लालच से कर रहे हैं तो गलत है. सच बात यह है कि आप इसलिए करना चाहिए कि इसी तरह से इंसान का समाज सही तरह से चल सकता है. बाकी बचा कि मरने के बाद इसका सजा मिलेगी या इनाम मिलेगा, एक बात मुझे अच्छी लगती है धर्मों की. इन्होंने कहा है कि तुम्हें मरने के बाद हम सजा देंगे या इनाम देंगे, ये तो खुद ही मान रहे हैं कि इस जन्म में नहीं दे सकते. अगर इस जन्म में दे सकते तो इन्हें स्वर्ग बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती, इन्हें नरक बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. आप अच्छे-अच्छे काम कीजिए, यह आपको आईओयू देंगे एक चेक, कि भैया पोस्ट डेटेड चेक है, मरने के बाद कैश करा देना. यह आपको खुद मानते हैं इस दुनिया में हम तुम्हारा कुछ नहीं कर सकते. उधर आ जाना हमारी गली में आना वहां करेंगे.
[24:40]और वह गली कहां है. मरने के बाद क्या होना है मेरा. कुछ नहीं. कुछ भी नहीं है. लोग कहते हैं आपको कैसे पता साहब, कैसे कैसे कह सकते हैं आप कि कुछ नहीं हो सकता. अरे आप तो करोड़ों साल मरे रहे हैं पहले. जिस दिन पैदा हुए थे उससे एक साल पहले कहां थे आप? आप नहीं थे. मैं किसी से पूछूं भाई साहब 1857 में आपका क्या रोल था, तो कहेगा 1857 में पागल हो गए 1857 में मैं कहां था. पहले नहीं था यह मानने को तैयार है. आइंदा नहीं होगा ये नहीं मानना चाहता.
[25:22]तुम फिर नहीं होगे दोस्त. कुछ चांसेस ही नहीं होने का ना मेरे ना आपके. वह जहां से देख रहे हैं मेरे पिताजी कहीं से नहीं देख रहे हैं वो अब नहीं है.
[25:37]इसलिए कि मैं हूं कौन समझने वाली बात है कि जो दोबारा हो सकता है. क्या मैं अपना हाथ हूं, मेरा हाथ काट दोगे तब भी मैं ही रहूंगा, मेरा पैर हूं नहीं हूं, पैर काट दोगे तब भी मैं ही रहूंगा. तो मैं हूं कौन? मैं अपनी सारी मेमोरी और अपनी सारी थिंकिंग और अपना सारा माइंड. ब्रेन नहीं माइंड, ब्रेन है टेप रिकॉर्डर, उसके ऊपर जो गाना रिकॉर्ड है, वह हूं मैं. एक. दूसरी चलो मेरी बॉडी भी है, यह मेरी ही बॉडी है, फिंगरप्रिंट तो मेरे जैसे किसी और के नहीं है ना. ये कैसे बनी थी. यह मां के पेट में जब 12 क्रोमोसोम बाप के और 12 क्रोमोसोम मां के मिले, जिनके एक-एक क्रोमोसोम के अंदर जनरेशंस भरी हुई थी, पीढ़ियां भरी हुई थी. जिनमें रेस में पांच घोड़े दौड़ते हैं, जैकपॉट नहीं लग पाता आपसे, यहां तो करोड़ों घोड़े का दौड़ रहे हैं अंदर. अब उसमें जो कॉम्बिनेशन बनेगा, वह दोबारा इसी मां के पेट में भी दोबारा नहीं बन सकता. पॉसिबल ही नहीं है. तो यह जो बॉडी फॉर्म हुई है यह पहली और आखिरी बार हुई है. इसलिए कि इसमें बाटर होता है कि कहीं से नाक आ गई, कहीं से कान आ गया, कहीं से आवाज आ गई, कहीं से हाइट आ गई, कहीं से मेंटल इंक्लिनेशन आ गया और वह खून में चल रहा है. यह हो सकता है कि दादा की आंखें नीले रंग की थी, बाप की नहीं थी, मां की नहीं थी, बच्चे की आंख नीली हो गई. यह नीली आंख बह रही थी खून में बाहर नहीं आई थी. तो यह क्या बाटर हुआ, क्या सौदा हुआ इन 12 और उन 12 में, यह सौदा अब दोबारा नहीं हो पाएगा. तो यह जो बॉडी बनी है यूनिक है. अब मैं पैदा हुआ. मैं जिस जगह पैदा हुआ और जहां पैदा हुआ वह जगह इससे पहले थी ही नहीं और आइंदा भी नहीं होगी. मेरा एक भाई है अभी अमेरिका में रहता है साइको एनालिस्ट है. क्या मैं और मेरा भाई एक घर में पैदा हुए हैं? क्या मैं और मेरा भाई एक मां-बाप की औलाद है? नहीं.
[27:54]मैं जिस घर में पैदा हुआ था वहां एक औरत थी एक मर्द थी और एक बच्चा मैं पहला पैदा हुआ था. एक मां, एक बाप और एक बच्चा मैं उस घर में हूं. मेरा भाई मेरे डेढ़ साल बाद जो पैदा हुआ वह एक ऐसे घर में पैदा हुआ जहां बाप था मां था और एक बड़ा भाई था मां थी और बड़ा भाई था.
[28:35]हम दोनों एक घर में नहीं पले. फिर उसकी जिंदगी में क्या एक्सपीरियंस क्लास में हुआ मुझसे तो एक क्लास पीछे था. वहां उसके क्लास फेल हो लगते टीचर अलग थे, उसके साथ अलग बात होती थी, वह रोज सुबह से शाम तक ये दूसरा दिन गुजार रहा था मैं दूसरा गुजार रहा था. धीरे-धीरे-धीरे देखिए जी हुआ यह कि वह तो जाकर हो गया दिमाग का डॉक्टर और मैं थोड़ा सा पागल हो गया मैं आ गया फिल्मों में. तो हम ना एक घर में पले, ना हमारा जो डाटा अगर आप उसके माइंड में जितनी थॉट्स और मेमोरी है वह निकाल लो और मेरे माइंड में जितनी थॉट्स और मेमोरी निकाल लो, वह कितनी अलग होंगी एक दूसरे से. सेम डाटा ऑफ थॉट्स और मेमोरी, के एग्जैक्टली वही यादें, वही थॉट, वही ख्याल, वही विचार, वही भावनाएं एक सर में हो और दूसरे सर में हो ही नहीं सकती. तो ना बॉडी सेम हो सकती है, ना माइंड सेम हो सकता है. तो सेम हो क्या सकता है. वह क्या चीज है जो दोबारा जन्मेगी.
[29:40]यह हो सकता है कि मेरी बॉडी में जो फास्फोरस है वह जमीन में मिल जाए और कोई चीज उससे बन जाए, जो आयरन है जो मेरी बॉडी में आयरन है उससे कोई फूल कोई पत्ता उगाए. मगर वह मैं तो नहीं होगा ना.
[29:55]एक मौत के बाद यह ख्याल रोमांटिक है. हम लोग साल में एक्सेप्ट नहीं करना चाहते हैं.



