[0:00]मैंने एक बड़ी काल्पनिक कथा सुनी है। मैंने सुना है कि परमात्मा ने आदमी को बनाया और ये आपको पता है। आदमी को बनाने के बाद उसने फिर कुछ भी नहीं बनाया। आदमी को बना के वो घबड़ा गया होगा। और उसने बनाने का अपना सारा काम बंद कर दिया होगा और आदमी से शायद वो डर गया होगा। उसकी आशा ना थी कि ऐसा आदमी बन जाएगा। और शायद पुरानी कथा है, वो इतना डर गया अपने ही बनाए हुए आदमी से, उसने देवताओं से पूछा कि आज नहीं? कल ये आदमी मुझे परेशान करने लगेगा, मुझे कोई छिपने की जगह बता दो जहां मैं छिप जाऊं और ये आदमी मुझे ना खोज सके। तो अलग-अलग सुझाव आए, बड़े प्रस्ताव आए। किसी ने कहा दूर हिमालय में पहाड़ों में छिप जाओ। परमात्मा हँसा और उसने कहा जो आदमी है, हिमालय इसके लिए बहुत दूर नहीं है। ये वहां पहुंच जाएगा। किसी ने कहा चांद तारों में छिप जाओ। परमात्मा ने कहा थोड़ी बहुत देर छिपे रह सकते हैं। लेकिन ये आदमी जैसा मैंने बना लिया है, ये वहां पहुंच ही जाएगा। फिर किसी ने उससे कहा, फिर एक ही रास्ता है, इसी आदमी के भीतर छिप जाओ। परमात्मा राजी हो गया। ये सुझाव उचित और बड़ी समझदारी का था क्योंकि आदमी और सब जगह ढूंढेगा, शायद ही उसे ख्याल आए कि उसके भीतर भी ढूंढ़ने को कुछ है। ये कहानी तो काल्पनिक है, लेकिन बात बड़ी सच है। आदमी ढूंढता है बाहर और जिसे पाना है वो है उसके भीतर। इसलिए जितनी खोज बढ़ती है, उतना ही खोता चला जाता है।

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