Thumbnail for EP 366: एक चोर जो दो महीने तक जज बन कर अदालत में फ़ैसला सुनाता रहा, पूरी कहानी शम्स की ज़ुबानी by Crime Tak

EP 366: एक चोर जो दो महीने तक जज बन कर अदालत में फ़ैसला सुनाता रहा, पूरी कहानी शम्स की ज़ुबानी

Crime Tak

29m 19s5,450 words~28 min read
AI audio transcription
Transcript source

AI audio transcription

This transcript was generated from the video's audio because no usable YouTube caption track was available. The transcript below is server-rendered so it can be read, searched, cited, and shared without opening the original YouTube player.

Timestamped outline
[0:06]Section 1

आदाब नमस्कार गुड इवनिंग सत श्री अकाल एक बार फिर आप तमाम लोगों का स्वागत है क्राइम तक की कहानी के इस एपिसोड में उम्मीद है कि आप सभी अच्छे...

[4:21]Section 2

पर उस वक्त भी लोग फिर दूसरे रास्ते को अपनाते थे जल्दी काम कराने के लिए पैसे देते थे तो उसने देखा कि लाइसेंसिंग अथॉरिटी में लोग आते हैं उन...

[8:35]Section 3

पुलिस वाले ने भी कहा हां क्या करें तब तक पुलिस वाले चाय पीते रहे इसने कहा मैं आ रहा हूं।

[13:20]Section 4

कुछ करप्शन का मामला था उसको लेकर इंक्वायरी बैठा दी गई थी और यह इंक्वायरी बैठाई थी पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने।

[18:29]Section 5

इस एक एपिसोड 40 दिन के जज बनने के बाद धनीराम मित्तल की जब कहानी आई मीडिया में उसके बाद जुर्म की दुनिया के जो छोटे-मोटे जितने जालसाज चोर थे

[25:00]Section 6

अशोक पेथानी है इनका कहना है कि इन्होंने इनकी पत्नी ने उपवास रखा हुआ है कि जब तक निर्भया के गुनहगारों को फांसी नहीं हो जाएगी यह खाना नहीं...

Pull quotes
[0:06]आदाब नमस्कार गुड इवनिंग सत श्री अकाल एक बार फिर आप तमाम लोगों का स्वागत है क्राइम तक की कहानी के इस एपिसोड में उम्मीद है कि आप सभी अच्छे होंगे। कल की कहानी को लेकर कुछ सवाल थे। इसके अलावा सीएए और
[0:19]जो एनसीआर थी उसको लेकर भी कुछ सवाल थे आखिर में कोशिश करूंगा अगर याद रहा उस वक्त तक तो आपको उसका जवाब दूंगा। अब आज की कहानी पर सीधे लौटते हैं।
[0:30]इसी कहानी के एपिसोड में आपको चार शोभराज की मैंने स्टोरी सुनाई थी और भी बंटी चोर की भी कहानी सुनाई थी।
[0:50]और यही क्राइम की दुनिया में अक्सर होता है लगता है कि इससे खूंखार इससे बड़ा इससे जालिम कोई नहीं है लेकिन फिर कुछ आगे चलकर ऐसे ऐसी वारदात होती है कि लगता है कि नहीं वह तो कुछ नहीं था इसके आगे।
Use this transcript
Related transcript hubs

[0:06]आदाब नमस्कार गुड इवनिंग सत श्री अकाल एक बार फिर आप तमाम लोगों का स्वागत है क्राइम तक की कहानी के इस एपिसोड में उम्मीद है कि आप सभी अच्छे होंगे। कल की कहानी को लेकर कुछ सवाल थे। इसके अलावा सीएए और

[0:19]जो एनसीआर थी उसको लेकर भी कुछ सवाल थे आखिर में कोशिश करूंगा अगर याद रहा उस वक्त तक तो आपको उसका जवाब दूंगा। अब आज की कहानी पर सीधे लौटते हैं।

[0:30]इसी कहानी के एपिसोड में आपको चार शोभराज की मैंने स्टोरी सुनाई थी और भी बंटी चोर की भी कहानी सुनाई थी।

[0:38]हमेशा जब इन लोगों की कहानी सुनाता हूं तो लगता है कि इनसे बड़ा कोई इनसे शातिर इनसे जहन दिमाग कोई होगा नहीं लेकिन फिर जैसे-जैसे नए-नए कैरेक्टर सामने आते जाते हैं तो लगता नहीं यार पिछला वाला थोड़ा सा कमजोर था उससे ज्यादा तो होशियार ही है।

[0:50]और यही क्राइम की दुनिया में अक्सर होता है लगता है कि इससे खूंखार इससे बड़ा इससे जालिम कोई नहीं है लेकिन फिर कुछ आगे चलकर ऐसे ऐसी वारदात होती है कि लगता है कि नहीं वह तो कुछ नहीं था इसके आगे।

[1:03]आज की जो कहानी है हिंदुस्तान में इसकी दूसरी मिसाल इसलिए नहीं मिलेगी कि एक ऐसा शख्स जिसने चोरी के जरिए एक ऐसा मकाम हासिल किया

[1:16]कि कुछ वक्त के बाद खुद पुलिस वाले भी उसको देख के मुस्कुराते थे जब भी उसे गिरफ्तार करते थे।

[1:23]जब उसको अदालत में ले जाया जाता था तो जज भी उसको इतना पहचानने लगे थे जितना शायद वह अपने अर्दली मुनीम और मुंशी को जितना उनसे वास्ता पड़ता था उससे ज्यादा क्योंकि हर हफ्ते महीने

[1:36]कुछ महीनों में उसकी शक्ल जरूर देखने को मिलती थी कोर्ट के अंदर।

[1:40]और दिमाग ऐसा कि उसने जो जो काम किया चोरी की दुनिया में शायद उसकी जगह कोई ले ही नहीं सकता था।

[1:48]इस वक्त उसकी उम्र करीब 80 साल है और अभी भी जिंदा है।

[1:53]लेकिन अब पिछले तीन साल में आखिरी बार 2016 में गिरफ्तार किया गया था।

[1:59]और फिर कुछ वक्त के बाद वह छूट गया लेकिन उसके बाद से उसकी कोई खबर नहीं है और उम्र भी इस मकाम के था कि जब वह आखिरी बार गिरफ्तार हुआ तब 77 साल की उम्र थी अभी करीब 80 की होगी क्योंकि 19 है ही है।

[2:11]एक वक्त में इसके साथ करीब 80 से 100 लोग काम करते थे।

[2:16]बेहद पढ़े-लिखे फैमिली से एक भाई पानीपत में जज भी रहे।

[2:23]और चोरी करने के लिए चोर अलग-अलग तरीके अपनाता है नई नई चीजें सीखता है लेकिन इसने चोरी करने के लिए और

[2:30]चोरी के काम में कोई तकलीफ ना हो और चोरी करने के बाद पकड़ा जाए तो उसमें कैसे बरी हो इन चीजों को ध्यान में रखकर इसने जो काम किया और जो पढ़ाई की उसकी भी दूसरी मिसाल नहीं मिलती।

[2:42]बात कर रहा हूं मैं धनीराम मित्तल की धनीराम मित्तल हिंदुस्तान में चोरी की दुनिया में एक अलग नाम एक अलग मकाम है।

[2:53]1939 में धनीराम मित्तल की पैदाइश अ हरियाणा में होती है।

[3:01]और हरियाणा के भिवानी इलाके में करीब 24 25 साल तक धनीराम मित्तल की जिंदगी बिल्कुल नॉर्मल थी।

[3:11]रोहतक के कॉलेज से ग्रेजुएशन किया पढ़ाई लिखाई में अच्छा।

[3:18]लेकिन ग्रेजुएशन के बाद 1964 में जब इसकी उम्र करीब 25 साल थी

[3:23]नौकरी के लिए इधर-उधर भटका कई जगह इंटरव्यू दिया टेस्ट दिया नौकरी मिली नहीं तो इसे लगा कि बाकी लोगों को भी देखा अपने दोस्तों को और बाकी भिवानी जैसी जगह पे तो उसे लगा कि बड़ा मुश्किल होता है सरकारी नौकरी और बाकी नौकरी को पाने में सही रास्ते पर चलकर।

[3:39]यह उसके दिमाग में बैठा हुआ था तो उसने कहा कि नौकरी तो करनी है लेकिन चलो इसके लिए रास्ता दूसरा अपनाते हैं।

[3:47]तो सबसे पहले इसने काम यह किया कि यह जो अथॉरिटी होती है ड्राइविंग लाइसेंस और इसकी

[3:56]तो यह आरटीओ के दफ्तर पहुंचा और आरटीओ के दफ्तर के चक्कर काटने लगा और देखा कि यहां पर काम क्या क्या होता है।

[4:02]उसके बाद थोड़े दिन के बाद ही इसको तजुर्बा हो गया कि यहां कैसे लाइसेंस और यह बात हो रही है 1964 की उस जमाने में यह कंप्यूटराइज और यह सारी चीजें तो थी नहीं सारा काम कागज पे होता था।

[4:13]और तब शायद विजिलेंस और यह इतनी सारी चीजें भी नहीं थी टेररिज्म और यह सब का थ्रेट भी नहीं था तो चीजें आसानी से बनती थी।

[4:21]पर उस वक्त भी लोग फिर दूसरे रास्ते को अपनाते थे जल्दी काम कराने के लिए पैसे देते थे तो उसने देखा कि लाइसेंसिंग अथॉरिटी में लोग आते हैं उनको दौड़ाया जाता है लेकिन कुछ दलाल हैं जो पैसे लेते हैं मना लेते हैं।

[4:34]कई के पेपर पूरे नहीं होते वह पेपर बनाने जाता है तो दलाल वह भी बना देते हैं यहां उसने पहली चीज सीखी कि फर्जी पेपर फर्जी दस्तावेज तैयार हो सकता है इसके बाद इसने

[4:45]रोहतक के आरटीओ में फर्जीवाड़े का काम शुरू किया नकली पेपर बनाने का काम और उस तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस लोगों का बनाने का काम इससे इसने पैसे कमाने शुरू किए।

[4:58]लेकिन इस इसकी मंजिल यह थी नहीं जब यह फेक पेपर और यह सारे बनाने लगा नकली दस्तखत भी कराने लगा तो धीरे-धीरे उसे लगा कि इन कागजों का इस्तेमाल कहीं और बड़े लेवल पर भी किया जा जा सकता है।

[5:11]फिर इसने फेक डिग्री अच्छे नंबर और ट्रेनिंग के वह सारे जो पेपर होते हैं अलग-अलग डिपार्टमेंट के सरकारी उसने उनके फर्जी पेपर बनाने शुरू किए।

[5:25]और इसको पहली कामयाबी बड़ी मिली 1968 में यह सारा रोहतक के आरटीओ में काम करने के बाद

[5:32]इसने फर्जी दस्तावेज के जरिए 1964 में भारतीय रेलवे में नौकरी ले ली और बाकायदा स्टेशन मास्टर बन गया।

[5:41]1968 से 74 तक 6 साल इसने स्टेशन मास्टर का जॉब किया और सारे नकली दस्तावेज के आधार पर।

[5:51]लेकिन फिर इसका मन नहीं लगा बोर हो गया यह इसने कहा कि 6 साल हो गए अब इसको छोड़ा जाए।

[5:58]फिर वहां से निकला उसके बाद इसे लगा कि नहीं अब कुछ और भी चीज करनी चाहिए।

[6:03]फिर इसने गाड़ियां चुराने का काम शुरू किया उस वक्त गाड़ियां बड़ी महंगी और गाड़ी चोरी को लेकर इतना सरदर्द नहीं था।

[6:09]बट गाड़ी चुराने के दौरान में कई बार यह पकड़ा गया और गाड़ी बेचने में भी दुश्वारियां होती थी लोग पेपर मांगते थे।

[6:17]तो इसने कहा कि अब इसके लिए भी कुछ और चीज करनी चाहिए।

[6:21]फिर यह गिरफ्तार होता रहा बाहर आता रहा फिर इसने कहा कि नहीं और बाहर आने के बाद कोर्ट कचहरी के चक्कर वकील के फीस तो उसे लगा वकील लोग भी बड़ा बेवकूफ बना रहे हैं इसको।

[6:33]तो इसने कहा ऐसा क्या किया जाए कि वकीलों से भी चक्कर छूटे तो इसने कहा वकील भी बनते हैं।

[6:39]फिर यह बाकायदा राजस्थान गया और राजस्थान से इसने एलएलबी की डिग्री ली पढ़ाई की।

[6:50]एलएलबी के बाद फिर फिर इसने अपनी चोरी का काम रखा यह सारी चीजें सेकेंडरी सिर्फ वो कर रहा है।

[6:56]एलएलबी की पढ़ाई के बाद फिर इसे लगा कि नहीं कुछ और भी करना चाहिए। फिर इसने बाकायदा हैंडराइटिंग का कोर्स किया।

[7:03]कि कैसे हैंडराइटिंग एक्सपर्ट बनते हैं कैसे क्या चीज पता चलता है असली और नकली में फर्क क्या होता है।

[7:07]यह समझने और जानने के लिए इसने हैंडराइटिंग की पढ़ाई की। हैंडराइटिंग की पढ़ाई करने के बाद भी यह रुका नहीं इसके बाद फिर इसने कहा कि कुछ और चीजें भी करते रहनी चाहिए।

[7:19]फिर इसने ग्राफोलॉजी की पढ़ाई की ग्राफोलॉजी आपकी हैंडराइटिंग के जरिए लोगों को पहचानने की एक वह होती है।

[7:28]कौन कैसा क्या है तो इसने एलएलबी ग्राफोलॉजी हैंडराइटिंग का कोर्स सब कुछ किया लेकिन असली चीज नहीं छोड़ी और वह चोरी की।

[7:37]और यह लगातार चोरियां करता रहा दिल्ली चंडीगढ़ पंजाब हरियाणा राजस्थान इन शहरों में इन राज्यों के अलग-अलग जगहों पर

[7:46]चोरियां करता पकड़ा जाता चोरियां करता पकड़ा जाता बार-बार कोर्ट में लाया जाता।

[7:53]कॉन्फिडेंस लेवल इतना हाई था कि एक बार दिल्ली में कोर्ट में इसको ले जाया गया और उस कोर्ट में उससे पहले कई साल तक वह हर बार पकड़ के लाया जाता और जज साहब भी उसी कोर्ट में जमा थे कई सालों से।

[8:05]तो जब उन्होंने देखा धनीराम मित्तल को पुलिस लेकर आई और कोर्ट के अंदर पेश किया गया तो जज उसको देखते ही थोड़े से ऊब गए और फिर कहते कि तुम फिर चले आओ।

[8:16]उसके बाद कहते हैं कि तुम बाहर निकलो मेरी कोर्ट से अब बाहर जाओ।

[8:20]धनीराम उठा दो पुलिस वाले साथ में थे दोनों भी उठ गए उसको देख के जज साहब ने सामने बोला था बाहर गया उसने चाय मंगाई दोनों के साथ चाय पी बोला फिर कहता है यार हमारा देखो जज साहब भी मुझसे गुस्से में है और बिना सुनवाई किए उन्होंने कह दिया जाओ।

[8:35]पुलिस वाले ने भी कहा हां क्या करें तब तक पुलिस वाले चाय पीते रहे इसने कहा मैं आ रहा हूं।

[8:41]उसके बाद यह थोड़ी देर के बाद गायब पुलिस वाले अंदर आए कि शायद यह कोर्ट रूम में आ गया है।

[8:46]अब इतने में धनीराम मित्तल का नाम पुकारा गया उसकी बारी आई पुलिस वाले के हाथ पैर फूल गए धनीराम मित्तल गायब।

[8:55]तो इस दौरान भी पता चला जब जज साहब ने पूछा कि भैया वो कहां है तो उसने कहा मुझे तो बाहर जाकर उसने यही कहा और कि जज साहब ने खुद कहा है कि तुम जाओ यहां से।

[9:05]तो अब यह बताओ तुम जज साहब ने जब कहा है तो फिर मैं कैसे अंदर जाऊंगा उन्होंने तो मुझे छोड़ दिया है अब पुलिस वाले को भी कुछ समझ में नहीं आया।

[9:14]तो अब जज साहब भी हंसे कि किस चीज को कहां ले जाया गया लेकिन मुजरिम हाथ से भाग चुका था।

[9:20]खैर पुलिस को भी उम्मीद थी कि ज्यादा दिन भागेगा नहीं वह फिर पकड़ा गया।

[9:26]फिर आया फिर जेल गया फिर बाहर आया और उसने इस दौरान में एलएलबी की पढ़ाई कर ली थी कानूनी सारी चीजें समझता था फिर कोई वकील कुछ कहता तो वह उसको उल्टा ही कानून सिखाता।

[9:37]अपना केस खुद तैयार करता कौन-कौन सी कड़ियां कमजोर है कौन से सबूत नहीं है कौन सी क्या चीजें हैं उसकी स्टडी करता।

[9:43]बाकायदा कोर्ट में अदालत से कहता है कि मुझे यह पुलिस के जो भी चार्जशीट और बाकी चीजें हैं उसको मुहैया कराई जाए तो उसका राइट था अदालत भी देती।

[9:52]और वह फिर जो पुलिस उसे पकड़ती उसी पुलिस वालों के वह कोर्ट में कपड़े भी फाड़ देता है दलील से अपने।

[9:59]इस दौरान में उसकी चोरियां चलती रही और वह करीब 1000 से ज्यादा उसने गाड़ियां चुराई।

[10:05]और गाड़ी चुराने का उसका तरीका बड़ा आसान था और कभी भी उसने रात को चोरी नहीं की कभी किसी को मारा नहीं कभी किसी को एक थप्पड़ नहीं मारा अपने पूरे क्राइम के इस करियर में।

[10:14]सिर्फ और सिर्फ यह था गाड़ियां चुराता था उसको बेचता था और फिर उन पैसों से वह अपना ऐश करता था।

[10:20]तो गाड़ियां चुराने के बाद बेचने की उसको बड़ी प्रॉब्लम होती थी इसीलिए उसने हैंडराइटिंग और इसके ग्राफोलॉजी का कोर्स भी किया।

[10:28]और फिर फेक पेपर गाड़ियों कहीं खुद तैयार करता खुद गाड़ी चुराता उन गाड़ी के दूसरे कागजात बनाता और फिर दूसरी पार्टी को बेच देता।

[10:38]ऐसा चलता रहा सारी चोरियां यह दिन में करता और लोगों की नजरों के सामने गाड़ी लगती वह जाता आराम से और सारी मास्टर की से वह गाड़ी खोलता महारत थी उसको उसमें।

[10:50]और उसके बाद गाड़ी को लेकर फिर वहां से निकल जाता फिर उसकी गाड़ी की कागज तैयार करता और बेच देता।

[10:57]कई बार ऐसा हुआ यह एक गाड़ी में बैठकर गाड़ी चोरी करने के लिए गया और गाड़ी को लगा जिस गाड़ी को चुराई इसने उस गाड़ी को पहले उठाया अपनी गाड़ी वहीं छोड़ दी उसको ले जाकर उसने एक जगह पर डंप किया रखा कहीं दूसरी जगह लगाई ले जाकर वापस आया उसी जगह फिर अपनी उस गाड़ी को भी उठाया जो पहले उसने कहीं और से चुराई फिर उसको भी वहां ले गया फिर उनमें से एक-एक करके गाड़ियां बेचनी शुरू कर दी।

[11:20]यह सारी चीजें चलती रही उम्र के साथ-साथ धीरे-धीरे यह हुआ कि 64 से उसने शुरू किया था 2000 2005 10 आ गया लेकिन उसने वह बुजुर्ग होता गया बूढ़ा होता गया।

[11:32]उसने अपने बुढ़ापे का भी अपने जुर्म की दुनिया में बड़ा फायदा उठाया पहले गाड़ी चोरी करते हुए कई बार रंगे हाथ पकड़ा भी गया पुलिस वाले आए फिर चला गया।

[11:41]लेकिन जब इसकी उम्र थोड़ी 65 70 के पार कर गई क्योंकि 77 साल में यह आखिरी बार पकड़ाया था 192016 में।

[11:50]तो किसी गाड़ी को खोल रहा हो और कोई आ गया और अचानक तो फिर यह इस उम्र का हवाला देकर और अपने आप को उस तरीके से पेश करता था और कहता था कि

[12:00]बेटा उम्र हो गई है पता नहीं चला कि यह मेरी गाड़ी है तुम्हारी है तो अपनी गाड़ी छोड़ के तुम्हारी गाड़ी में मैंने चाबी लगा दी तो लोग उल्टा कहते थे अंकल कोई नहीं होता है आप जाइए तो ऐसा करके वह कम से कम दर्जनों बार बचा।

[12:16]और निकलता गया लेकिन फिर उम्र के साथ-साथ इसके गैंग भी कम होते गए उसके बाद इसे लगा कि अब क्या करें लेकिन यह तब भी माना नहीं है और 2016 में दिल्ली में एक साथ तीन जगह से गाड़ी चुराने के बाद इसको गिरफ्तार किया गया।

[12:35]और फिर इसको जेल भेजा गया यह सारी चीजें तो चलती रही सारी चीजें होती रही लेकिन इस धनीराम मित्तल को सबसे अलग हिंदुस्तान का चोर सबसे शातिर और जहीन दिमाग क्यों माना गया उसकी एक कहानी है जो 80 की है।

[12:51]जब इसने सारी पढ़ाई कर ली एलएलबी की फर्जी दस्तावेज और यह कागजात बनाने का तो इसने एक ऐसा काम किया जो चोरी के इतिहास में या किसी चोर ने आज तक हिंदुस्तान में कम से कम नहीं किया।

[13:02]या मुझे लगता है कि शायद दुनिया में इसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलेगी वह मिसाल यह थी कि यह हरियाणा में था और इसने एक दिन अखबार में पढ़ा कि जो झज्जर के एडिशनल सिविल जज हैं उनके खिलाफ कुछ विभागीय जांच चल रही है।

[13:20]कुछ करप्शन का मामला था उसको लेकर इंक्वायरी बैठा दी गई थी और यह इंक्वायरी बैठाई थी पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने।

[13:28]तो झज्जर के एडिशनल सिविल जज के खिलाफ इंक्वायरी थी और यह एक अखबार में खबर छपी इसने यह खबर पड़ी धनीराम मित्तल ने खबर पढ़ने के बाद

[13:38]इसने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार के नाम पर एक लेटर तैयार किया।

[13:45]और उसके बाद वह लेटर को बाकायदा इसने कूरियर किया स्टैंप विस्टंप के साथ उस जज के उस अदालत के पते पर बाकायदा वहां रिसीव किया गया वो खत।

[14:00]और उसमें यह लिखा था कि चूंकि आपके खिलाफ इंक्वायरी चल रही है करप्शन के मामले में तो जब तक यह इंक्वायरी कंप्लीट ना हो जाए आप दो महीने की छुट्टी पर जा रहे हैं।

[14:10]आप दो महीने की लीव पर होंगे पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार की तरफ से यह खत आया यह एक तरह का संबंध आया।

[14:23]खत पढ़ते ही जज साहब जाहिर सी बात है वही करेंगे जो कोई भी करेगा कि इंक्वायरी चल रही है और ऊपर से आदेश है तो वह अगले दिन से छुट्टी पर चले गए।

[14:32]इधर वह छुट्टी पर जाते हैं इधर एक दूसरा लेटर आता है पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्टर से कि जब तक यह दो महीने की छुट्टी पर हैं एडिशनल सिविल जज

[14:42]उनकी जगह पे एक दूसरे जज जो है वह काम देखेंगे कोर्ट का और वह फलाने तारीख से कोर्ट का काम संभालेंगे उसके बाद एक नया जज आता है।

[14:53]40 दिन तक वह जज झज्जर के सिविल कोर्ट में बैठता है 9 बजे से लेकर 5 बजे तक डेली वह उसकी सुनवाई करता है।

[15:02]इस दौरान में 2470 लोगों को अलग-अलग केस में जिनको लाया गया था

[15:07]उनको वह जमानत देता है कई लोगों की जमानत को खारिज करता है कई लोगों को जेल भेजता है।

[15:17]और 40 दिन तक जो जज उस कुर्सी पर बैठा हुआ था वह कोई और नहीं था हिंदुस्तान का ही सबसे जहीन चोर मित्तल था।

[15:27]अब आप अंदाजा लगाइए कि एक चोर यह धनीराम मित्तल 40 दिन तक उसने फर्जीवाड़े से फर्जी कागजात बनाकर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के जैसे रजिस्टर के नाम पर एक जज को छुट्टी पर भेजा दो महीने के लिए।

[15:43]और दो महीना पूरा होने से पहले 40 दिन के बाद उसे लगा कुछ इस दौरान में कुछ ऐसे फैसले हुए जिसको लेकर थोड़ी बातें होने लगी कि यह कैसा जज है क्या है।

[15:53]और किसी ने पहचाना नहीं और धनीराम मित्तल लगातार 40 दिन तक कोर्ट आता बाकायदा बैठता और दली होते सारा कोर्ट उनके देखकर धनीराम को खड़ा हो जाता।

[16:04]वह सारे अलग-अलग जो मुकदमे हैं जिनकी लिस्टिंग होती है वह सारी बारी-बारी से आती वह सबकी सुनवाई भी करता।

[16:11]क्योंकि उसने एलएलबी किया था उसको कानून की समझ भी थी तो वह कई यह भी कहते हैं लोग कि कई उसने फैसले उस वक्त अपने दिमाग से जो दिए वह फैसला मतलब कुछ हद तक सही भी था शायद उसकी जगह कोई और देता तो यह भी देता।

[16:28]लेकिन एक चीज लोगों को परेशान कर रही थी कि इन 40 दिनों में ऐसा क्या हो गया जज साहब इतने अच्छे कैसे हो गए कि धड़ाधड़ लोगों को बेल दे रहे हैं जमानत दे रहे हैं तो उसका कहीं ना कहीं जो क्रिमिनल थे और बाकी छोटे-मोटे मुजरिम थे उनके प्रति शायद उसको हमदर्दी थी क्योंकि वह खुद एक मुजरिम था।

[16:41]तो वह जो भी आता बेल ग्रांटेड ही कर देता तो सिर्फ 40 दिन में 2470 लोगों को उसने जमानत दे दी।

[16:48]और वह सब बाहर खुशी-खुशी आजाद 40 दिन के बाद जब यह अचानक कोर्ट से गायब हो गया तो पता चला कि जज साहब आ नहीं रहे।

[16:57]इसके बाद पड़ताल शुरू हुई तो पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि ऐसा कोई जब झज्जर कोर्ट के रजिस्ट्रार ने पंजाब एंड हरियाणा को रजिस्टर से संपर्क किया तो पता चला कि ऐसा तो कोई आदेश ही नहीं है कि उन जज साहब को छुट्टी पर भेजा गया दूसरे जज को अपॉइंट किया गया है।

[17:15]तो सारे पेपर निकाले गए तो पता चला कि यह तो सारा फर्जी है लेकिन जब तक पता चलता तब तक धनीराम मित्तल झज्जर छोड़ चुका था।

[17:22]बाद में जब अरेस्ट हुआ तो उससे पूछा गया तो उसने कहा कि यह अखबार में पढ़कर मेरे पास आईडिया आया था।

[17:30]और फिर उसने यह भी बताया कि जहां-जहां मुझे लगा जिसको जमानत मिलनी चाहिए मैंने दे दी उसने कहा मैंने किसी कातिल किसी रेपिस्ट इन लोगों को जमानत नहीं दी लेकिन जिनको यह है कि हां हो सकता था 6 महीने बाद मिलती जमानत इतनी जल्दी नहीं मिलती बट मैंने उनको जल्दी दे दी।

[17:45]तो यह एक इकलौता ऐसा चोर था हिंदुस्तान का जो जज की कुर्सी तक बैठा 40 दिन तक उसने फैसले सुनाए।

[17:54]लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो फिर उन 40 दिनों के जितने फैसले थे उन सब को पलटा गया और कहा गया कि यह कानून के खिलाफ है क्योंकि उस कुर्सी पर बैठकर जिसने फैसला सुनाया था कानूनन वह कानून का मुहाफिज या जज था ही नहीं तो जब वह था ही नहीं और फर्जीवाड़े से पैदा हुआ तो उसके हर फैसले जो है वह गलत और गैरकानूनी है।

[18:13]तो उसके बाद फिर उन सारे फैसलों को पलटा गया अब आप अंदाजा लगाइए कि जो खुशी-खुशी जमानत पर 2470 लोग बाहर आए थे उनको ढूंढ ढूंढ कर वापस जमानत कैंसिल की गई बताया गया कि यह यह हो चुका है और फिर वह सब वापस जेल में भेजे गए।

[18:29]इस एक एपिसोड 40 दिन के जज बनने के बाद धनीराम मित्तल की जब कहानी आई मीडिया में उसके बाद जुर्म की दुनिया के जो छोटे-मोटे जितने जालसाज चोर थे

[18:41]यह सब श्रद्धा से भर गए धनीराम मित्तल को लेकर जिस जेल में धनीराम मित्तल जाता तो वहां यही जिक्र होता कि अब यह है वह धनीराम मित्तल देखो जो जज बना था 40 दिन के लिए तो वह भी चौड़ा होकर घूमता जेल के अंदर।

[18:54]कई ऐसी कहानियां है कि जो छोटे-मोटे चोर उचक्के जालसाज थे उन्हें पता चलता था कि इस वक्त धनीराम मित्तल फलाने जेल में है तो वह कोई ना कोई जानबूझ के ऐसी वारदात करते और खुद पकड़े जाते कि पुलिस मुझे पकड़े और जेल भेजे सिर्फ इसलिए कि धनीराम मित्तल की शागिर्दी में कुछ दिन जेल के अंदर रहे और कुछ सीख सके।

[19:10]तो ऐसे बहुत सारे किस्से आए कि जब छोटे-मोटे चोर उचक्के यह सारे जेल में जाते थे सिर्फ धनीराम मित्तल से मिलने के लिए उससे गुरु ज्ञान लेने के लिए।

[19:21]तो यह थी कहानी धनीराम मित्तल की लेकिन अब 80 साल उम्र ज्यादा हो गया अब वह भागदौड़ भी नहीं कर सकता शायद पुलिस भी इतना भगा नहीं सकती।

[19:34]और उसे भी लगा बहुत हो गया थक गया है करीब 94 टाइम्स 94 94 बार धनीराम मित्तल को गिरफ्तार किया गया था।

[19:44]और इतनी बार गिरफ्तारी का अपने देश में शायद कोई दूसरा रिकॉर्ड नहीं है कि किसी एक मुजरिम को इतनी बार गिरफ्तार किया गया हो मतलब छह कम सेंचुरी तो इतनी दफा गिरफ्तार हुआ तो आप सोचिए कि जितने भी दफा गिरफ्तार हुआ उतनी दफा जेल गया होगा।

[20:03]और एक बार गिरफ्तारी के बाद जेल जाने में अगर आप तीन महीने हैं तो कितनी बार कोर्ट में आपको जाना पड़ता होगा कितनी पेशी होते होगी इसीलिए हर जज जो है धनीराम मित्तल का चेहरा जैसे ही वह कोर्ट रूम के अंदर आता था जज साहब भी मुस्कुरा देते थे और पहचानते थे।

[20:16]तो यह थी हिंदुस्तान के जो कहते हैं कि चार शोभराज या फिर दूसरा अपने अ जो इससे पहले एक और नाम बताया था उन सबसे कहीं ज्यादा जहीन दिमाग अगर पुलिस से आप बात करें तो मानते हैं कि इस आदमी के पास जहीन और जहानत और इसलिए थी कि पहला चोर था जिसने अपनी चोरी की कला को निखारने के लिए सिर्फ चोरी नहीं किया नए तरीके नहीं सीखे इसने पढ़ाई की इसने एलएलबी की डिग्री ली।

[20:49]इसने हैंडराइटिंग का एक्सपर्ट बना तो यह एक दूसरा पहलू था तो ऐसे चोर बड़े कम होते हैं ऐसे किस्से बड़े कम होते हैं यह थी पूरी कहानी धनीराम मित्तल की और अब मैं आगे बढूं उससे पहले आज मैं कुछ नोट करके लाया था तो मैंने कहा कि पहले आपको सुना दूं।

[21:09]शुरुआत नवेद अंजुम से इन्होंने मेल लिखा और इनका यह भी था कि शायद आप इस मेल को शामिल नहीं करेंगे इनका कहना था कि न्यूज़ चैनल हो या सोशल मीडिया आजकल हर जगह जो माहौल है हिंदू मुस्लिम की बातें हो रही है बड़ा यह है देश को हमें बचाना चाहिए नवेद अंजुम मैं आपकी बात से सहमत हूं।

[21:24]लेकिन पूरे देश में ऐसा नहीं हां मीडिया को जिस तरीके से अपना रोल प्ले करना चाहिए शायद उस तरीके से पूरा नहीं हो रहा है सोशल मीडिया पे भी बहुत सारे लोग इस तरह की चीजें करते हैं जो गलत है।

[21:34]यह देश बहुत खूबसूरत है लेकिन कुछ लोगों की बेवकूफी से यह बदसूरत हो जाए मैं बिल्कुल इसको नहीं मानता हूं और हर दिन एक जैसा नहीं होता है।

[21:43]वापस सारी चीजें ठीक होंगी इसके अलावा पीयूष सिंह है यह केजीएफ की कहानी सुनना चाहते हैं और इत्तेफाक से अभी हाल में ही मैं केजीएफ फिल्म देख रहा था पता नहीं किसी चैनल पर आ रहा था।

[21:54]तो चलिए मैं इसको खंगाल हूं आपको बताता हूं सोनू शाह है इसके अलावा गौरव विनोद हैं और यह पठानकोट एयर बेस पर हमला जो हुआ था उसकी कहानी सुनना चाहते हैं जल्दी सुनाता हूं आपको।

[22:04]प्रकाश सुवेदी हैं गोपाल राव हैं यह वाईएस राजशेखर रेड्डी जो सीएम रहे आंध्र प्रदेश के जिनकी एक चौपर क्रैश में डेथ हो गई थी उनकी कहानी सुनना चाहते हैं जल्दी सुनाता हूं भार्गव जिंतूरकर हैं।

[22:20]इसके अलावा आशीष चौधरी है आशीष चौहान है सॉरी यह टाइटेनिक की कहानी सुनना चाहते हैं फिल्म देखी थी मैंने।

[22:28]साद ए हसन है यह वही है बांग्लादेश से हैं जिन्होंने वह तीन पुलिस वालों को जो फांसी हुई थी उसकी कहानी दी थी कल मैं भूल गया था।

[22:36]तो साद हसन साहब थैंक यू वेरी मच आपने शेयर की झरना पटेल है यह बाहर रहती हैं शायद ऑस्ट्रेलिया में और इनका कहना है कि इंडिया में जैसी जो सारी चीजें होती हैं क्राइम अगेंस्ट वूमेन रेप तो बाहर रहकर जब लोग कहते हैं इंडिया के बारे में कुछ ऐसी बातें तो बड़ा दिल दुखता है और एक शर्मिंदगी सी होती है कि हमारे देश की क्या मतलब एक छवि बन गई है।

[22:57]तो ऐसा नहीं है झरना जी यह चीजें होती हैं लेकिन इससे कुछ लोगों के कर्म से या कुछ बुरे लोगों की वजह से पूरी पूरा देश बदनाम हो और उसके लिए शर्मिंदा हो हमें ऐसा नहीं है इस देश में अच्छे लोग भी हैं और इस देश में बहुत सारे अच्छी चीजें भी होती हैं।

[23:14]लेकिन यह है कि हां यह चीजें तकलीफ पहुंचाती है बट आप जो कर रही हैं अपने देश के लिए हौसला बढ़ाते रहिए कि सब कुछ य अच्छा नहीं आप ही ने बताया कि बहुत सारे लोग आए जो अच्छी चीजें लेकर यहां से गए हैं।

[23:27]तो वह भी दूसरा पहलू है निहार रंजन है प्रमोद कुमार है अरुण कुमार है यह हाना फोस्टर रेप मर्डर केस की कहानी सुनना चाहते हैं विशाल वर्मा इनका कहना है कि आपने इंटरनेशनल करंट अफेयर्स ऐसी भी कहानियां सुनाए जिससे यूपीएससी में जो लोग बैठते हैं उसको भी फायदा हो तो विशाल कोशिश करूंगा ऋषि लहरी है यह पेंटर है।

[23:47]इसके अलावा प्रिया प्रियाति चौधरी हैं शायद अगर मैंने गलत नाम नहीं किया या प्रियाली चौधरी है यह कामनी रेप मर्डर केस की कहानी सुनना चाहते हैं लक्ष्मी साहू है यह

[23:59]इनका कहना था एक भूत की कहानी सुनाई थी कि यूपी में स्टैंप पेपर बिकता है जिसमें भूत तो इन्होंने कहा इनकी फैमिली में भी एक ऐसा किस्सा हुआ और शायद इनके बक्से में आज भी एक स्टैंप पेपर है।

[24:10]तो यह बताएंगे यूपी जाने के बाद राज यादव है यह अतीक अहमद की कहानी सुनना चाहते हैं लेकिन मैं शायद सुना चुका हूं अतीक अहमद की कहानी।

[24:18]अहमद शहबाज है यह शाह फैसल असस निशन की कहानी सुनना चाहते हैं सऊदी अरब के जल्दी सुनाता हूं और भी इन्होंने कुछ लिस्ट दी है अपूर्व चटर्जी है इसके अलावा दुर्गा पौडेल है दुर्गा पौडेल अदनान सैयद की स्टोरी सुनना चाहते हैं यह यूएस में

[24:34]अदनान सैयद के ऊपर इल्जाम था कि यह अपनी गर्लफ्रेंड का कत्ल किया है और उसको लेकर फिर 14 साल बाद कुछ एक मुहिम चली फिर कहा गया दोबारा मुकदमा चलना चाहिए।

[24:46]और उस केस को लेकर ट्रायल को लेकर उंगलियां उठी काफी अभी 2014 में इसलिए शायद पॉडकास्ट प वो इसकी कुछ वो आई थी पूरी तो उसको लेकर यह चर्चा में केस आया था तो मैं दुर्गा जी कोशिश करूंगा जल्दी अदना सेहत की स्टोरी सुनाऊ आपको।

[25:00]अशोक पेथानी है इनका कहना है कि इन्होंने इनकी पत्नी ने उपवास रखा हुआ है कि जब तक निर्भया के गुनहगारों को फांसी नहीं हो जाएगी यह खाना नहीं खाएंगे।

[25:08]अशोक पेथानी जी और आपकी पत्नी दोनों से मेरी यह गुजारिश है कि देखिए 7 जनवरी को को आने वाला है और शायद अब 7 साल लंबा हो गया था लेकिन अब होगा तो इसलिए आपका यह उपवास जो है इसको अभी रखने की अब जरूरत नहीं है।

[25:23]क्योंकि अब कभी ना कभी फांसी होगी और दूसरा यह भी मान के चलिए दूसरा पहलू यह भी है कि जिस आदमी को पता है कि मरना है लेकिन उसे किस दिन मरना और हर दिन तिल तिल के मर रहा है तो यह भी एक बड़ी सजा उसके लिए है बल्कि यह मुझे लगता है।

[25:36]फांसी में तो डेढ़ से दो मिनट में उसकी सांसे रुक जाएंगी लेकिन यहां हर दिन की पता नहीं अब क्या होगा 7 जनवरी के बाद 8 को क्या होगा 9 को क्या होगा।

[25:45]और हर दिन वो जो मर रहा है वह भी उसके लिए बहुत बड़ी सजा है ज्योति बांगर है इसके अलावा कुमार अभिनव है।

[25:54]बड़े अच्छी चीज इन्होंने मेल लिखा और उन्होंने कहा मैं कुमार अभिनव बक्सर से हूं उसी बक्सर से जहां फांसी के लिए रस्सी तैयार होती है तो अच्छा परिचय आपका कुमार साहब।

[26:03]इसके अलावा दीप राज बरार है जगता सिंह हवारा की कहानी सुनना चाहते हैं मैं आपको जल्दी सुनाऊंगा अब दीपक शुरू हो जाए।

[26:10]सर सबसे पहले सबको आप कांग्रेचुलेशन कह रहे हैं 366 स्टोरीज हो गई है मतलब साल में अगर आप मंडे से लेकर संडे तक करें तो इतनी स्टोरीज आप सुना चुके हैं।

[26:19]अ अच्छा मुझे पता नहीं था 366 स्टोरी हो गई अच्छा इसी पे याद आया कल से तुम माइक लेकर बैठना आज बहुत सारे मेल आए थे कि तुम लोगों की आवाज नहीं आती सवालों की।

[26:27]तो यह 366 स्टोरी के लिए मैं मुबारकबाद का हकदार नहीं हूं बल्कि यह आप लोग हैं आप लोगों ने इतना झेला मुझे और सुना हौसला बढ़ाया।

[26:38]तो इसलिए मैं सुनाता गया मुझे उम्मीद नहीं थी लेकिन अब तो लगता है कि पता नहीं यह सिलसिला जब तक कोशिश करूंगा कि जहां तक जा सकता है जरूर जाए बट थैंक यू पूरी क्राइम तक फैमिली को।

[26:49]सर दूसरा एक कॉमन सवाल है कि सर क्या वेरिफिकेशन नहीं हुआ था जज का कोर्ट में आने से पहले।

[26:55]उस वक्त देखिए यह बात उस वक्त की है कि जब कोई सरकारी ट्रांसफर या पोस्टिंग होती है तो आमतौर पर यह सारा हमारा सरकारी कामकाज पेपर पे ही होता है।

[27:06]और यह जालसाज इतना था कि इसे यह तरीका पता था प्रोसीजर पता था कि कैसे एक जज दूसरी जगह जाता है ट्रांसफर होता है कौन उसकी जगह लेता है उसने उसी को फॉलो किया उसी हिसाब से उसने लेटर बनाए उसी हिसाब से उसने भेजा।

[27:18]और चूंकि वह ऑलरेडी पढ़ा लिखा था ग्रेजुएट था फिर एलएलबी किया तो उसका अपना पूरा बॉडी लैंग्वेज उसका बोलना उसका केस को देखना तो किसी को शक ही नहीं हुआ ना उसने शक होने का किसी को मौका दिया।

[27:31]सर कामदेव सिंह बेगूसरा का स्मगलर किंग था उस पर स्टोरी सुनाना चाहता हूं अच्छा हां बिल्कुल है बेगूसराई के कामदेव सिंह मैं आपको सुनाता हूं।

[27:39]सर पंकज तिवारी और कई लोगों का कहना है कि सर वो फैन तक की स्टोरी सुनते हैं लेकिन सुनकर ऐसा लगता है कि लोगों पर विश्वास नहीं कर पाते समाज में रहकर भी पंकज सिंह ऐसा नहीं है कि कहानी सुनकर लोगों पर समाज पर किसी से भरोसा उठ जाना चाहिए।

[27:50]हां मैं हमेशा कहता हूं चौकन्ने रहने की जरूरत है अलर्ट रहने की जरूरत है।

[27:54]आप किसी पे आंख बंद करके भरोसा ना करें कौन कब किस रूप में कैसे निकल आए कब कौन बदल जाए कहना मुश्किल है तो अगर हम थोड़े से चौकन्ने रहते हैं हम थोड़े से एहतियात बरतते हैं तो बहुत सारी चीजें बहुत सारे हादसे से हम बच सकते हैं।

[28:08]सर निर्मल सिंह परमार जी का कहना है कि धनीराम मित्तल कौन सी ईयर में फक जज बने थे अ एग्जैक्ट मुझे ईयर नहीं पता है लेकिन शायद ये 70 से 80 के बीच की बात है।

[28:18]सर अविनाश शर्मा जी चाह रहे हैं कि लोग बहुत देर से रिक्वेस्ट कर रहे हैं जब टाइम से स्टार्ट हुई कि एक बार उनका नाम नहीं लिए बहुत-बहुत बड़े फैन हैं आपके कौन है अविनाश शर्मा अविनाश शर्मा जी थैंक यू वेरी मच कहानी सुनने के लिए क्राइम तक देखने के लिए आप तमाम पूरी क्राइम तक फैमिली का शुक्रिया।

[28:25]सर नीम अनुराग और कई लोगों का सवाल है कि दिल्ली में ठंड कैसी है कई लोग कह रहे कि सर 100 साल में सबसे ज्यादा ठंड नीम अनुराग साहब दिल्ली में ठंड बस क्या बताऊं आपको कि

[28:31]मतलब मुझे भी दिसंबर में कभी इतनी ठंड पड़ी उसका एहसास नहीं हुआ हालांकि मुझे ठंड और सर्दी का मौसम बहुत पसंद है लेकिन इधर लगातार मुझे लग रहा है कि यह कुछ ज्यादा ही हो गया इतना भी नहीं होना चाहिए जो पसंद के दायरे से बाहर निकल जाए।

[28:50]तो ठंड लगातार बढ़ रही है और मौसम विभाग ने यह कहा कि अगले दो दिन अभी वीकेंड पे तापमान और गिरेगा और अभी सर्दी और होगी तो मान कर चलिए कि 31 तक मौसम कुछ शायद ऐसे ही रहे हालांकि धूप आती है जाती है लेकिन पारा बहुत गिरा हुआ है और ठंड बहुत ज्यादा है।

[29:09]सर कलीम भारद्वाज जी चाह रही है कि एक बार उनका आप नाम ले दे कलीम भारद्वाज जी थैंक यू वेरी मच क्राइम तक की कहानी सुनने के लिए क्राइम तक देखने के लिए आप तमाम पूरी क्राइम तक फैमिली का शुक्रिया।

[29:19]तो आज इतना ही कल मुलाकात होगी आपसे हालांकि कल सैटरडे है कल कहानी रिकॉर्डेड होगी लेकिन अच्छी कहानी होगी तो कल सुनिए इसके बाद लाइव आपसे मुलाकात मंडे को होगी उम्मीद करते हैं मंडे तक थोड़ा सा तापमान भी गिर जाए और सब कुछ ठीक हो तो इसी दुआ के साथ अपना ख्याल रखिए थैंक यू।

Need another transcript?

Paste any YouTube URL to get a clean transcript in seconds.

Get a Transcript