[0:02]खुद से जीतने वालों को मेरा सलाम और प्रणाम। मुट्ठी में फंसी हुई जिंदगी। एक लड़का गुरु के पास आया और बोला गुरुदेव, आपने कहा मेहनत करो, अच्छा सोचो, कोशिश करो। मैं ये सब करता हूं, फिर भी उलझा हुआ हूं। मेरे मन में कई डाउट है। आप कहते हैं चीजों को ब्रह्मांड पर छोड़ दो। लेकिन छोड़ने में डर लगता है और जब पकड़ता हूं तो घुटन होती है। मैं करूं तो क्या करूं? गुरु ने उसकी आंखों में देखा और बोले तुम्हारी सबसे बड़ी दिक्कत गलत तरह से की गई कोशिश है। तुम जिंदगी बदलना चाहते हो लेकिन रिएक्शन पुराना है। तुम उड़ना चाहते हो लेकिन अभी भी कुछ पकड़े हुए हो। लड़का चुप रहा, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। गुरु ने कहा चलो, आज मैं तुम्हें तुम्हारा ही मन दिखाता हूं। बिना दीवार की जेल। गुरु लड़के को आश्रम के पीछे एक शांत हिस्से में ले गए। वहां एक बड़ा सा पिंजरा था लेकिन अजीब बात यह थी कि उस पिंजरे का दरवाजा खुला हुआ था। और उसके पास एक सुंदर बाज बैठा था। तेज आंखें, मजबूत पंख, शरीर में कोई कमजोरी नहीं। लड़का कुछ देर उसे देखता रहा फिर बोला खुला होने के बाद यह उड़ता नहीं। यानी यह पालतू बाज है गुरुदेव। शायद बचपन से ही यहीं पला होगा, इसीलिए यही रहता है। गुरु मुस्कुराए और बोले ध्यान से देखो, अगर तुमने इस बाज को ठीक से समझ लिया, तो तुम्हें अपने जीवन के कई गहरे सवालों का जवाब मिल जाएगा। लड़के ने फिर बाज को देखा, पिंजरा खुला था, पंख सलामत थे, फिर भी वह उड़ नहीं रहा था। लड़के ने पूछा अगर यह आजाद है तो यह उड़ता क्यों नहीं? गुरु ने कहा यही तुम्हारे पहले सवाल का जवाब है। जो कभी जरूरत थी अब वही कैद है। गुरु ने बाज की ओर देखा और धीरे से कहा, कुछ समय पहले एक शिकारी ने इसे तीर मार दिया। घायल होकर यह आश्रम के पास गिरा। हम इसे भीतर ले आए, इसके घाव भरे, देखभाल की। धीरे-धीरे यह ठीक हो गया। लेकिन इसके साथ एक अजीब बात हुई, ये उड़ा नहीं। एक समय आराम करना जरूरी था। इस शाखा पर रुकना जरूरी था। उस समय उड़ना खतरा था और रुकना बुद्धिमानी थी। लेकिन अब घाव भर गए हैं फिर भी यह उड़ता नहीं। अगर इसे बाहर छोड़ दो तो यह ज्यादा दूर नहीं जाता, बस यही आकर बैठ जाता है। लड़के ने धीमे स्वर में पूछा, तो क्या इसे अभी भी लगता है कि यह घायल है? गुरु बोले, इसे घाव याद नहीं है, लेकिन घाव का डर अभी भी मौजूद है। और बेटा, यही मनुष्य की त्रासदी है। दर्द चला जाता है, उसका रिएक्शन नहीं जाता। खतरा खत्म हो जाता है, लेकिन पकड़ नहीं छूटती, इसलिए इंसान ब्रह्मांड पर विश्वास नहीं कर पाता। गुरु ने शाखा की ओर इशारा किया और बोले समस्या यह नहीं है कि यह उड़ नहीं सकता। समस्या यह है कि अब इसे उड़ने से ज्यादा पकड़ के बैठना सुरक्षित लगता है। और यही बिना दीवार की जेल है। बहुत लोग किसी बंद पिंजरे में नहीं रहते, फिर भी कैद होते हैं। पुराने डर में, पुराने मन के रिएक्शन में। जो कभी जरूरी थे लेकिन अब बंधन बन चुके हैं। लड़के की आंखें धीरे-धीरे खुलने लगी। वह बोला गुरुदेव, क्या इंसान भी अपने पुराने रिएक्शंस में ऐसे ही फंसा रहता है? गुरु ने कहा हां, इंसान को पुराने विचार, पुराने डर, हर भावना को पकड़ कर रखने की पुरानी आदत है। जो एक समय उसे बचा रही थी वही बाद में उसकी उड़ान रोकने लगती है। तुम भी नई जिंदगी चाहते हो लेकिन अभी भी पुराने मन से जी रहे हो। लड़के ने धीमे से पूछा, गुरुदेव, मैं सच में अपने पुराने रिएक्शंस में फंसा हूं। अब इनसे बाहर कैसे निकलू? आजादी की नई शुरुआत। अगर आदतें और डर पुराने हैं तो फिर नई शुरुआत कैसे हो? गुरुदेव ने कहा पुरानी पकड़ से निकलना और ब्रह्मांड के flow में बहना एक ही बात है। लेकिन इसके लिए सबसे पहले समझो, तुम अपने मन का नेचुरल स्टेट पहचानो। गुरु बोले जैसे बाज का स्वभाव उड़ना और शिकार करना है, बैठे रहना नहीं। वैसे ही तुम्हारा नेचुरल स्टेट खुशी और भरोसा है। डर, चिंता, स्ट्रेस, और कमी का एहसास, यह तुम्हारे मन की असली अवस्था नहीं है। लड़का ध्यान से सुनता रहा। गुरु ने कहा बचपन में बच्चे विश्वास में जीते हैं। खेलते हैं, गिरते हैं और तेजी से सीखते हैं। क्योंकि उनके भीतर एक सहज भरोसा होता है कि हम सब देखभाल में हैं। वे सब जानते हैं कि हम सीख लेंगे, कर लेंगे। और ना आया तो भी ठीक है। क्योंकि उनके भीतर एक सहज भरोसा होता है कि सब अच्छा है। लेकिन जैसे-जैसे जीवन में चोटें लगती हैं, तुलना बढ़ती है, यही भरोसा चिंता में बदल जाता है। और फिर इंसान जीवन के फ्लो में बहने की जगह एक रिजल्ट, एक पुरानी बात पकड़ कर बैठ जाता है। इसलिए हमेशा मन में दोहराओ, मैं विश्वास और सफलता से भरा हूं। मुझे सब कुछ आसानी से प्राप्त हो रहा है। मैं हर दिन नई शुरुआत करता हूं और मैं रिजल्ट से पूरी तरह आजाद हूं। लड़के ने पूछा लेकिन गुरुदेव अगर मैं रिजल्ट की चिंता छोड़ दूं, तो तैयारी कैसे करूंगा? गुरु मुस्कुराए, पहले यह समझो कि जीवन बदलने के लिए सही चीज पकड़नी पड़ती है और गलत छोड़नी पड़ती है। नियम दो, ड्यूटी पकड़ो और रिजल्ट छोड़ो। रिजल्ट पर कंट्रोल छोड़ना यानी अपनी शक्ति को आज duty पर लगाना है। ज्यादातर लोग उल्टा करते हैं, वे अपना कर्म अपनी Duties ढीली छोड़ देते हैं और परिणाम को कसकर पकड़ने लगते हैं। फिर टेंशन होती है मन भारी होता है। मैं इतना सोचता हूं फिर भी लाइफ क्यों नहीं बदलती? गुरु ने लड़के की ओर देखा, बस इतना सोचो जिससे तुम आज और कल का काम बेहतर कर सको। इससे ज्यादा सोचना Result का बोझ ढोना बन जाता है। तुम्हें अपना काम अपना कर्तव्य पकड़ना है। बस आज का काम सही करना है। लड़का बोला लेकिन गुरुदेव, अगर मैं result को छोड़ दूं तो मेहनत करने की आग कम नहीं हो जाएगी? गुरु ने कहा नहीं, बल्कि पहली बार मेहनत शुद्ध होगी। अभी तक तुम मेहनत कम और पकड़ ज्यादा रहे थे, यही कारण है कि जितना फोर्स लगाते हो, उतना मन थकता है। जिसे हर पल खींचना पड़े वो विश्वास नहीं बेचैनी है और बेचैनी में ऐसा लगता है कि तुम अकेले परेशान हो रहे हो। बल्कि सच ये है कि ब्रह्मांड तुम्हारे हर अच्छे सपने को support करता है। लड़के ने आश्चर्य से कहा, कृपया मुझे इस बात को गहराई से समझाइए क्योंकि मुझे तो लगता है कि मैं अकेले ही संघर्ष कर रहा हूं। मेरे साथ कोई नहीं। नियम 3. ब्रह्मांड कमी नहीं जानता। ब्रह्मांड flow जानता है, रुकना नहीं जानता। ब्रह्मांड रास्ते खोलना जानता है, वो देना जानता है। गुरु जी ने कहा सहारा हमेशा मौजूद होता है बस हमारे मन में इतना शोर होता है कि हम उसे सुन नहीं पाते। नियम 4. शांत मन ही सहारा सुनता है। उन्होंने बाज की ओर इशारा किया, देखो आकाश इसके साथ है। हवा इसके साथ है। पंख भी इसके साथ है। फिर भी यह उड़ता नहीं। क्यों? भीतर की पकड़ अभी बाकी है। जिस mind में बहुत डर हो, बहुत tension हो, वह guidance receive नहीं कर सकता। Opportunities का इस्तेमाल नहीं कर सकता। उसे हर जगह risk दिखता है, support नहीं। हर मोड़ में कमी दिखती है रास्ता नहीं। उसे हर देरी में इनकार दिखता है, और timing नहीं। गुरु बोले इसलिए सिर्फ छोड़ना काफी नहीं है। भीतर शांत होना भी जरूरी है। लड़के ने पूछा और अगर भीतर बहुत शोर हो? गुरु बोले उसको दबाओ मत पहचानो। मन को पकड़ कर खींचने की कोशिश मत करो बस देखो। इस समय मेरे भीतर क्या चल रहा है? डर? अधीरता? control की भूख? जो दिख जाए, उसे पहचान लो। जिस reaction को तुम साफ देख लेते हो, उसकी पकड़ धीरे-धीरे ढीली होने लगती है। लड़का अब शांत था लेकिन उसके भीतर एक गांठ बाकी थी। उसने पूछा गुरुदेव अगर घाव पुराने हो, अगर मन आदत से मजबूर होकर बार-बार उसी चीज को याद करें, तो उसे कैसे छोड़ा जाए? नियम 5. दर्द को कहानी नहीं Meaning दो। दर्द सच है, आंसू सच है, रिश्तों का टूटना भी सच है। लेकिन दर्द और असहायता को अपनी जीवन की मुख्य कहानी मत बनाओ। दर्द को अभी के अभी शक्ति में बदलने का सबसे सरल तरीका है उसे सही meaning देना। हर बार यह मत पूछो यह मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? पूछो कि यह मुझे क्या सिखा रहा है? ये मेरे भीतर क्या shape ले रहा है? मैं आज के आज क्या कर सकता हूं? यहीं से जीवन के बदलने की शुरुआत होती है। जब दर्द को सही meaning मिलता है, तो उसी समय से वो दर्द ताकत में बदल जाता है और यहीं से जीवन बदलने की शुरुआत होती है। लड़के ने पूछा लेकिन जो अभी तक मेरे साथ हुआ वह सच में बहुत बुरा था। गुरु बोले जो तुम्हें रोकता हुआ दिख रहा है कई बार वही तुम्हें बना भी रहा होता है। अभी तुम पूरा चित्र नहीं देख पा रहे। इसका यह मतलब नहीं है कि यह चित्र गलत है। कई लोग घटना से कम बल्कि उसके मतलब से टूट जाते हैं। वो हर टूटने को अंत समझ लेते हैं। वो हर देरी को हार समझ लेते हैं। हर कठिनाई को सजा मानते हैं। इसके बाद गलत सोच के कारण जीवन उन्हें सिखा नहीं पाता क्योंकि वे हर चीज से लड़ने हैं और शिकायत रखते हैं। याद रखो चिंता कल को बेहतर नहीं बनाती। वह सिर्फ आज की clarity, आज की energy, आज का विश्वास खा जाती है। लड़के की आंखों में नमी उतर आई। वह समझ गया था कि अब उसे दर्द से सीखना है, बेहतर मतलब देना है। और तभी दर्द नया रास्ता बनाता है। पकड़ छूटी और उड़ान भरी। इतने में तेज हवा चली। सूखी शाखा जोर से हिलने लगी। बाज ने शाखा को और कसकर पकड़ लिया। गुरु ने इशारा किया और शिष्य से कहा, अब समय आ गया है। जैसे ही हवा तेज चली बाज अपनी शाखा से थोड़ा ऊपर उठा। इतने में गुरु जी ने आगे बढ़कर वह शाखा तोड़ दी। लड़के का दिल तो धक्क से रह गया। उसे लगा अब यह बाज नीचे गिर जाएगा। लेकिन अगले ही क्षण कुछ अद्भुत हुआ। जैसे ही पकड़ छूटी बाज नीचे नहीं गिरा। उसके पंख खुल गए उसने पंख चलाए। पहले एक बार फिर दूसरी बार फिर उसने पंखों पर फिर हवा पर भरोसा किया और धीरे-धीरे ऊपर उड़ने लगा। कुछ ही पलों में वो आकाश को चीर रहा था। नई आजादी में जी रहा था जिससे वो एक समय डरता था। गुरु बोले देखा? इसे नए पंख नहीं चाहिए थे। इसे बस पुरानी पकड़ छोड़नी थी। आकाश भी यहीं था, हवा भी यहीं थी। शक्ति भी इसके भीतर ही थी। रोक सिर्फ इसकी पकड़ थी। लड़का आकाश की ओर देख रहा था। उसका मन हल्का था। बाज की उड़ान देखकर ऐसा लगता था कि जैसे उसके मन की गठाने खुल रही हो। Summary गुरु जी ने कहा, तुम्हें नई जिंदगी की शुरुआत करने से पहले नई शक्ति ढूंढने की जरूरत नहीं। तुम्हें सबसे पहले अपने भीतर के पुराने reaction पहचानने हैं। कौन सी चिंता? कौन सी शिकायत? तुम बार-बार पकड़ लेते हो? कौन सा डर तुम्हें result से बांध देता है? कौन सा पुराना घाव तुम्हारे हर decision में बोलता है? उसे देखो उससे भागो मत बस पहचानो और इन 5 नियमों को हमेशा याद रखो। फिर खुद से बार-बार दोहराओ। मैं नए जीवन का स्वागत करता हूं। अब जो काम का नहीं उसे पीछे छोड़ता हूं। मेरा मन सफलता खुशी और विश्वास से भरा हुआ है। सब कुछ मुझे बड़ी आसानी से प्राप्त होता है। मैं पूरा मन लगाकर, कर्तव्य से काम करता हूं। मैं परिणाम छोड़कर अपनी duty निभाता हूं। मैं दर्द को नया meaning देता हूं। ब्रह्मांड, परमात्मा हर पल मेरे साथ है। हर पल guidance उपलब्ध है। लड़के की आंखों से आंसू बह निकले लेकिन इस बार वो हार के आंसू नहीं थे। वे हल्केपन और विश्वास के आंसू थे। दोस्तों जब जिंदगी unfair लगे मेहनत का फल देर से मिले तब आपको अगली कहानी समझाती है कि संघर्ष ही जीवन है। शिकायत मत करो और मेहनत करो। इस पर अगला वीडियो जरूर देखिए। मैं काम के किस्से लाता रहूंगा। हम जीतेंगे।

Everything Will Be Fine When You Stop Trying to Control Everything
Hum Jeetenge Meditation
12m 47s2,039 words~11 min read
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