[0:00]मेरे प्रियो बुद्ध ने कोई प्रार्थना नहीं सिखाई क्योंकि प्रार्थना का अर्थ है मांगना
[0:09]और मांगने वाला हमेशा एक भिखारी होता है। बुद्ध ने तुम्हें भिखारी नहीं एक सम्राट बनाना चाहा।
[0:21]उन्होंने नहीं कहा कि उस नीले आकाश में बैठे किसी परमात्मा के सामने हाथ फैलाओ या याचक बनो।
[0:29]क्योंकि जो बाहर तलाश रहा है वह भटक रहा है। परमात्मा कोई व्यक्ति नहीं है जो ऊपर बैठा तुम्हारा फैसला कर रहा है।
[0:41]बुद्ध का संदेश बड़ा सीधा है अपने भीतर जाओ। वहां जो शांति है, वहां जो अनंत प्रकाश है, वही परमात्मा है।
[0:54]तुम्हें किसी से कुछ मांगने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जो तुम मांग रहे हो वह तुम स्वयं हो।
[1:02]जैसे ही तुम याचक बनना छोड़ते हो, तुम सिद्ध हो जाते हो। तुम ही परमात्मा हो बस इतना जान लेना ही काफी है।
[1:16]इसलिए बाहर मत देखो अपने भीतर मुड़ जाओ, वही मंजिल है।



