[0:06]तो जैसा कि पिछले कुछ वीडियो में मैंने आपको हस्तरेखा के बारे में बताया आज उसी विषय में आगे बढ़ते हुए मैं आज आपको हाथ की उंगलियों के प्रथम पर्व में शंख
[0:20]चक्र या सीप जो होती है उनके क्या प्रभाव रहते हैं इनके बारे में बताऊंगा।
[0:28]तो आइए जरा इसको शुरू करते हैं और देखते हैं कि यह प्रथम पर्व में क्या-क्या पाया जाता है अगर सबसे पहले हम निशान की बात करें तो प्रथम पर्व में तीन तरह के निशान पाए जाते हैं।
[0:40]एक कुछ इस तरह के निशान
[0:48]दूसरे कुछ इस तरह के निशान
[0:57]और तीसरे किस्म के जो निशान रहते हैं वह कुछ इस तरह के होते हैं।
[1:08]यह जो निशान है इस तरह के चक्र इन्हें शंख और इनको सीप कहा जाता है।
[1:26]आपको यह उंगली के प्रथम पर्व में दिखाई देंगे।
[1:33]यह जो हाथ के फिंगरप्रिंट्स है उनसे बने होते हैं प्रथम पर्व में यहां पहले पर्व में।
[1:45]यहां हम चर्चा कर रहे हैं कि इनका प्रभाव कैसा रहेगा इनसे क्या लाभ होगा क्या हानि होगी।
[1:53]यदि मैं प्रथम पर्व की बात करूं तो प्रथम पर्व में यदि आपको इस तरह का चक्र दिखाई दे।
[2:07]तो इसका क्या प्रभाव होगा उंगली में जो चक्र है हमारी जो उंगली है वह एक एंटीना की तरह काम करती है यानी ग्रहों की रश्मियों को ग्रहण करके उसे पर्वत तक पहुंचाती है ऐसा हम मान सकते हैं।
[2:18]यदि ऐसा हम माने तो इसमें शुभ चिन्ह प्रथम पर्व में इसके गुणों को बढ़ा देगा जबकि इसमें सामान्य या अशुभ चिन्ह इसके गुणों को घटा देगा।
[2:32]तो चक्र की यदि हम बात करें तो चक्र किसी भी उंगली में प्रथम पर्व में अगर चक्र को बात करें तो चक्र तीन स्थानों पर रह सकता है।
[2:47]दो स्थानों पर रह सकता है सबसे पहला चक्र ऊपरी हिस्से में हो सकता है।
[2:57]दूसरा चक्र निचले हिस्से में हो सकता है छोटा ही मिलेगा या फिर चक्र बिल्कुल बीचोंबीच हो सकता है।
[3:10]जैसे कि पूरी उंगली में चक्र बनता हुआ दिखाई दे सकता है इस तरह से।
[3:17]यदि चक्र इस प्रकार से बीचोबीच है तो निश्चित रूप से यह एक शुभ संकेत है।
[3:25]यह ग्रहों के प्रभाव को बढ़ा देगा इसमें वृद्धि करेगा और इस गुण में ग्रह जो भी नीचे गुण होगा उसके गुणों को शुभ कर देगा।
[3:39]ऐसा सामान्यतः क्या होता है कि जैसे कि मान लीजिए अभी यह बृहस्पति पर्वत है।
[3:46]तो अगर बृहस्पति पर्वत में आपको शुभ संकेत दिखाई दे रहे हैं उसके ऊंची स्थिति दिखाई दे रही है आपको लगता है कि बृहस्पति पर्वत काफी उन्नत है।
[3:57]तो उन्नत बृहस्पति पर्वत में अगर प्रथम पर्व में चक्र है उंगली की लंबाई अच्छी है बहुत छोटी नहीं है और इसमें चक्र भी है तो यह अच्छे गुण बढ़ जाएंगे द्विगुणित हो जाएंगे।
[4:13]इसे कुछ हम इस तरह भी कह सकते हैं कि जिन उंगलियों में चक्र दिखाई देता है अक्सर उनमें पर्वत भी अच्छी स्थिति में दिखाई देते हैं जबकि यदि आप देखें कि जहां यहां शंख है वहां भी पर्वत शुभ स्थिति में दिखाई देते हैं लेकिन जिन उंगलियों में सीप रहती है उन उंगलियों में पर्वतों की उतनी अच्छी स्थिति नहीं देखी गई कुछ एक में ऐसा हो सकता है लेकिन उतनी अच्छी स्थिति दिखाई नहीं देती है।
[4:42]तो अगर प्रथम उंगली में चक्र है तो हम मानेंगे कि इसने गुरु के गुणों को बढ़ा दिया है तो प्रथम उंगली को हम मैं आपको नाम आपको कंफ्यूजन ना हो तो इसलिए लिख देता हूं इसके पहले पहले शब्द लिख देता हूं यह तर्जनी है यह मध्यमा और यह अनामिका और यह कनिष्ठा।
[5:04]और यह अंगूठा तो अंगूठे के प्रथम पर्व में यदि चक्र हो।
[5:11]तो ऐसा व्यक्ति बातचीत की शैली बढ़िया हो जाती है काफी प्रभावशाली हो जाता है।
[5:20]आकर्षक बातचीत करता है और उसके मित्र अधिक हो जाएंगे साथ ही साथ शुक्र के गुण भी बढ़ जाएंगे।
[5:28]इसलिए वह विपरीत लिंगी के प्रति आकर्षण बढ़ जाएगा।
[5:33]और शुक्र व्यवहार की गुणों को बढ़ा देता है व्यवहारिक बनाता है व्यक्ति को शुक्र आंतरिक सौंदर्य को बढ़ा देता है कला की समझ को बढ़ा देता है तो यह सभी गुण चक्र होने पर बढ़ जाएंगे।
[5:47]इसी प्रकार से प्रथम पर्व में तर्जनी के प्रथम पर्व में यदि चक्र हो तो इसके गुणों को वृद्धि कर देगा गुरु के गुणों को वृद्धि कर देगा अगर मध्यमा के प्रथम पर्व में चक्र हो तो यह शनि के गुणों में वृद्धि कर देगा।
[6:02]इसी प्रकार से यदि अनामिका के प्रथम पर्व में चक्र हो तो यह सूर्य के गुणों में वृद्धि कर देगा और कनिष्ठा के प्रथम पर्व में चक्र होने पर बुध के गुणों में वृद्धि कर देगा।
[6:13]अगर यहां हम कनिष्ठा की यदि बात करें कनिष्ठा यदि जैसे मैंने लंबी बनाई है यदि यह प्रथम पर्व से ऊपर चली जाए और अब इसमें चक्र भी हो और अब इसमें चक्र भी हो तो ऐसी स्थिति में क्या होगा कनिष्ठा के प्रभाव में बहुत बहुत वृद्धि हो जाएगी ऐसा व्यक्ति बहुत मेधावी होता है बुद्धि बहुत तेज होती है और सामान्यतः वह अधिकतर व्यापार में सफल रहता है।
[6:40]उसका बृहस्पति पर्वत आपको उन्नत पाएंगे।
[6:44]तो यहां अगर यह लंबी उंगली है साथ में पर्व में चक्र भी है तो यह सोने पर सुहागे वाली बात हो जाएगी।
[6:52]गुण बहुत अधिक बढ़ जाएंगे विशिष्ट रूप से बढ़िया हो जाएंगे तो इसीलिए हम यह मानते हैं कि ऐसा चक्र का होना विशेष रूप से शुभ है लेकिन यदि उंगली में चक्र ऊपर की ओर हो।
[7:08]अगर उंगली में चक्र नीचे से जगह खाली है और ऊपर की ओर स्थित है तो यह भी चक्र के समान ही गुण माने जाएंगे इसमें कोई खास अंतर नहीं पड़ेगा गुणों में पॉजिटिविटी अधिक होगी तो यह चक्र बहुत शुभ माना जाता है।
[7:23]चक्र यदि नीचे की ओर हो तो एक तो यह चक्र छोटा होगा।
[7:27]दूसरा यह चक्र सुस्पष्ट नहीं होगा तो ऐसी स्थिति में हम इसे बहुत शुभ नहीं मानते हैं हालांकि शुभ है चक्र होना शुभ होता है लेकिन यह उतना शुभ नहीं है जितना कि केवल एक चक्र होना मध्य में या फिर ऊपरी हिस्से में चक्र होना शुभ होता है।
[7:44]हालांकि निचला चक्र कम ही लोगों में दिखाई देता है कुछ लोगों के हाथ में आपको दोनों चक्र दिखाई दे सकते हैं ऊपर भी और नीचे भी दो-दो चक्र दिखाई दे सकते हैं।
[7:54]अगर आपको दो-दो चक्र दिखाई दें तो यह स्थिति अच्छी नहीं है ऐसा होने पर जैसा कि मैंने पिछले कुछ वीडियोस में भी कहा है कि अति जो है सदैव बुरी होती है तो यहां भी अति हो गई है और दो चक्र होने पर ऐसे व्यक्ति के स्वास्थ्य में अस्थिरता बनी रहती है ऐसा व्यक्ति स्वय सदैव ही स्वास्थ्य को लेकर
[8:16]अशुभ फल दिखाई देते हैं अलग-अलग तरह की बीमारियां होती रहती है अगर उसकी सभी उंगलियों में दो-दो चक्र है तो वह काफी अस्वस्थ रहेगा।
[8:26]संवेदनशील स्वास्थ्य होगा कभी कुछ तो कभी कुछ होता ही रहेगा शरीर में यह केवल चक्र की बात हुई लेकिन यदि किसी व्यक्ति की दसों उंगलियों में चक्र है तो प्राचीन समय में कहा जाता था कि ऐसा व्यक्ति चक्रवर्ती होगा चक्रवर्ती राजा होगा।
[8:44]तो क्या राजा संभव है आज की परिस्थितियों में राजा तो संभव नहीं है लेकिन वहां राजा का आशय क्या था वहां राजा का आशय था धन प्रसिद्धि नाम सुख आदि उसके पास सभी कुछ होगा।
[9:00]और एक निश्चित बात यह होगी कि वह व्यक्ति धनी जरूर होगा अगर सभी उंगलियों में चक्र है तो ऐसा व्यक्ति धनी होगा लेकिन कभी-कभी आपको ऐसे लोगों के हाथ में भी चक्र दिखाई देंगे जिनके पास धन नहीं है और उनकी सभी उंगलियों में चक्र है।
[9:14]तो ऐसा व्यक्ति बहुत परम संतोषी होगा और सुख को अगर आप कल्पना करेंगे तो आप पाएंगे कि निश्चित रूप से वह राजा है क्योंकि वह बहुत सुख से जीवन व्यतीत कर रहा है बिना किसी अतिरिक्त इच्छा के।
[9:30]तो यहां शास्त्र का आशय हम यह भी ले सकते हैं कि वह राजा होने का अर्थ सुखी होने से ले रहे हैं।
[9:37]तो चक्र यदि दसों उंगलियों में हो तो बहुत शुभ यदि सात या आठ चक्र भी हो तब भी बहुत शुभ माने जाते हैं अगर बाकी उंगलियों में सिर्फ शंख हो तो ऐसा व्यक्ति काफी प्रसिद्धि प्राप्त करता है यानी कि अगर आपकी उंगलियों में केवल चक्र हैं और एक या दो उंगली में शंख है तो आप काफी प्रसिद्धि प्राप्त कर सकते हैं काफी उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।
[10:01]अब यदि आपकी यदि किसी व्यक्ति की उंगली के प्रथम पर्व में शंख हो।
[10:08]यहां जो प्रथम पर्व है इसमें शंख आपको कुछ इस तरह से दिखाई देगा।
[10:24]ये सब एक सिरे की ओर इकट्ठी हो रही होंगी रेखाएं।
[10:28]यदि ऐसा आपको दिखाई दे तो यह निश्चित रूप से शंख चिन्ह है और यह स्थिति भी शुभ स्थिति मानी जाती है शंख होने पर व्यक्ति अच्छी नाम प्राप्त करता है।
[10:44]और शंख जैसे कि शंख ध्वनि दूर तक गुंजायमान रहती है ऐसा व्यक्ति जिसके हाथ में बहुत सारे शंख हो ऐसा व्यक्ति काफी सुना जाता है ऐसा व्यक्ति जब सभा में खड़ा होता है तो लोग उसे गंभीरता से सुनते हैं उसकी बात में प्रभाव अच्छा होता है उसका मान काफी अच्छा रहता है तो शंख भी शुभ संकेत है जहां हम ग्रहों की प्रभाव की बात करें तो यह चक्र जितना शुभ तो नहीं है।
[11:10]लेकिन शंख होना निश्चित रूप से ग्रहों के गुणों में वृद्धि ही करता है कोई बाधा नहीं करता है किसी किस्म की कोई कमी नहीं लाता है।
[11:21]अब अगर सभी उंगलियों में शंख शंख और चक्र हैं तो काफी प्रसिद्धि काफी सुखी काफी नाम व्यक्ति इकट्ठे करेगा।
[11:33]लेकिन यदि कुछ उंगलियों में ही शंख है केवल एक या दो उंगली में ही चक्र आपको दिखाई दे तो उस समय क्या स्थिति होगी एक या दो उंगली में चक्र दिखाई दे तो जिस उंगली में चक्र आपको दिखाई दे रहा है उस स्थान पर ध्यान दीजिए यदि वह पर्वत बहुत अच्छी स्थिति में है तो व्यक्ति उसी ग्रह का प्रधान व्यक्ति होगा।
[12:00]और उसी के गुणों में विशेष वृद्धि केवल प्राप्त करेगा बाकी गुणों में बाकी सब मामलों में वह काफी सामान्य होगा मान लीजिए किसी व्यक्ति के शनि पर्वत पर चक्र है।
[12:07]और बुध पर भी चक्र है और बाकी सब हाथों में चक्र नहीं है तो ऐसा व्यक्ति अब क्या देखेंगे अच्छा व्यापारी होगा धन में धन में विशिष्ट रुचि रहेगी ऐसे व्यक्ति की थोड़ा एकांत प्रिय होगा लेकिन बुध क्योंकि उसको बहुत बुद्धिमान बनाता है तो उसकी सामंजस्य की स्थिति बहुत अच्छी होगी और ऐसा व्यक्ति बहुत सारा धन इकट्ठा कर लेगा केवल दो चक्र के बावजूद यह व्यक्ति अद्भुत धनी होगा।
[12:31]तो यहां चक्रों की संख्या पर बहुत ध्यान नहीं देना है हमें यह देखना है कि बाकी लक्षण कैसे हैं यदि बुध बहुत अच्छा है और चक्र भी है उंगली लंबी भी है शनि में भी चक्र है और यहां शनि का जो पर्वत है वो बहुत अच्छी स्थिति में है और भाग्य रेखा बहुत अच्छी स्थिति में है तो ऐसा व्यक्ति तो निश्चित रूप से बहुत धनी हो जाएगा।
[12:50]लेकिन बाकी उंगलियों में जो समस्या है उन पर ध्यान दीजिए जैसे कि मान लीजिए कि यहां ना शंख है ना चक्र है तो ऐसी स्थिति में सूर्य के गुणों में कमी आएगी तो सूर्य का गुण उसको नहीं देंगे तो धनी तो होगा हो सकता है उसकी बहुत प्रसिद्धि ना हो बहुत नाम उसको ना मिले बहुत कला में रुचि उसकी ना हो तो यह सब भी आपको सामंजस्य बुद्धि में बिठाना होगा।
[13:12]इसके बाद हम बात करते हैं सीप की यह जो सीप उंगलियों में रहती है यह सीप रहना थोड़ा अशुभ प्रभाव कारक माना जाता है हम इसे बहुत शुभ नहीं मानते हैं यह ऐसा तो नहीं होगा कि यह बुरा फल देती है लेकिन वास्तव बात यह है कि यह ग्रहों के गुणों में वृद्धि भी नहीं करती है।
[13:31]मैंने ऐसे लोग जिनके सभी हाथ में सीप है उनको देखा है अक्सर यह पाया है कि वो लोग प्रभावहीन हैं ऐसा व्यक्ति यदि घर का मुखिया है तो उसकी कोई बात नहीं सुनता है प्रभाव बहुत कम है ऐसी स्त्रियों की पति या पुत्र उन्हें बहुत महत्व नहीं दे रहे हैं वो उन्हें कम जानकारी वाली या बिल्कुल सामान्य स्थिति को सामान्य बुद्धि की स्त्री मान लेते हैं।
[13:58]तो यह जो सीप है यह सीप आपके ग्रहों के गुणों को कम करती है इस कारण प्रभावितता प्रभावत और सुख दोनों में कुछ कमी लेती है लेकिन जिनके हाथों में सीप रहती है वो बहुत चिंता नहीं करते हैं खा पीकर मस्त रहने वाले लोगों के हाथ में सीप अधिक देखी जाती है तो ये लोग बस खाओ पियो और सो जाओ इस तरह का जीवन व्यतीत कर रहे हैं बहुत ग्रहों की सामान्य स्थिति की वजह से बहुत ही सामान्य स्थिति की वजह से ये लोग ना तो बहुत कार्य करते हैं ना बहुत उन्नति की कोशिश करते हैं लेकिन यदि ग्रह बहुत अच्छे हों नीचे पर्वतों की स्थिति बहुत अच्छी हो और ऊपर सीप हो तो ग्रह के गुणों में कुछ कमी तो आएगी लेकिन ग्रहों के गुण नष्ट नहीं होंगे तो ऐसी स्थिति में सबसे पहले मैंने आपको बताया था कि आप पहले कर पृष्ठ को फिर कर तल को इसके पर्वतों की स्थिति को देखिए और पर्वतों की स्थिति जान लेने के बाद फिर आपको उंगलियों में चक्र या पर्वत क्या है उनको चक्र या शंख या सीप क्या बना हुआ है उनको ध्यान दें और इनका पूरा अध्ययन करने के बाद फिर उसके बाद रेखाओं की बात करेंगे।
[15:02]तो जब पहले आप सभी इनको अच्छे से समझ लें कि उंगलियों के प्रथम पर्व में क्या है अंगूठे के प्रथम पर्व में क्या है और इसका ग्रहों के पर्वतों की स्थिति क्या है इसका सम्मिश्रण अच्छी तरह दिमाग में बिठा लें जब आप ये सब समझ लें पूरा अपने कर तल को अच्छी तरह समझ लिया है इसके बाद रेखाओं पर ध्यान दें इसके बिना रेखाओं का यदि आप फल कहेंगे तो निश्चित रूप से आपको फल में विपरीत स्थिति दिखाई देगी अब किसी के अंगूठे की बनावट बहुत बुरी है अंगूठा बहुत विकृत है प्रथम पर्व में उसके सीप बनी है और बृहस्पति पर्वत आपको ठीक दिखाई दे रहा है तो आप उसको गुणों को यदि बढ़ा चढ़ाकर कहते हैं तो ये बड़ा उल्टा हो जाएगा।
[15:44]क्योंकि ये स्थिति होने पर ग्रह के गुणों में बहुत कमी आ जाएगी फिर पर्वत अच्छा होने पर भी उतना शुभ फल नहीं दे पाएगा जितना कि उसे देना चाहिए तो इस वीडियो में मैंने आपको बात की है जो ये चक्रों के बारे में और ये सीप के बारे में और शंख के बारे में लेकिन इसी मामले में मैं आपको आगे एक और बहुत अच्छी जानकारी दे देता हूं जो आपको कम किताबों में मिलेगी कि चक्र यदि स्पष्ट ना हो यानी कि अर्ध चक्र बना हो तब क्या होगा यदि अर्ध चक्र बना हो तो ऐसी स्थिति में जैसे कि चक्र बन तो रहा है लेकिन स्पष्ट सा दिखाई नहीं दे रहा है वो आधा आधा सा दिखाई दे रहा है आप कंफ्यूज हैं कि वह चक्र है या वह शंख है तो ऐसी स्थिति में जो दृश्य दृष्टि में इसके बीच का सामंजस्य बिठा लीजिए आप फल कैसे करें कि वह चक्र तो है आपको उंगली में प्रथम पर्व में देखने पर चक्र ही लग रहा है लेकिन सामान्यतः सुस्पष्ट चक्र जैसा होता है वैसा आपको दिखाई नहीं दे रहा है तो इस स्थिति में हम कहेंगे कि ये मध्य की स्थिति बन गई है ना तो ठीक से शंख बना है ना ही ठीक से चक्र बना है यह शुभ स्थिति है इसे चक्र ही माना जाएगा लेकिन चक्र के गुणों में थोड़ी प्रतिशतता की कमी आ जाएगी और शंख जैसा प्रभाव भी थोड़ा दिखाई देगा इसी प्रकार से यदि किसी उंगली में आपको शंख बना हुआ दिखाई दे रहा है और आप उसे चक्र के लगभग देख रहे हैं आप उसे देख रहे हैं कि चक्र जैसा है लेकिन शंख ही है आप डिसाइड कर लेंगे कि शंख है तब हम उसे सिर्फ शंख मानेंगे लेकिन जब आपको चक्र दिख रहा है और शंख जैसा दिख रहा है आपको यह लग रहा है कि जैसे चक्र बन रहा था पर बना नहीं शंख बन गया है तो ऐसी स्थिति में ये शंख से थोड़ी बेहतर स्थिति मानी जाएगी।
[17:25]और यदि आप किसी हाथ में शंख देखते हैं लेकिन वो सीप जैसा दिख रहा है शंख स्पष्ट नहीं है तो ऐसी स्थिति में शंख के गुणों में कमी आएगी और यह सीप और शंख के बीच का सामंजस्य मान लेंगे हम इसे लेकिन कभी-कभी ये हो जाता है कि आपको स्पष्ट रूप से शंख दिखाई दे रही है और उसमें आपको चक्र जैसा कुछ दिखाई दे रहा है ये बहुत कम हाथों में दिखाई देगा लेकिन यदि चक्र जैसा कुछ दिखाई दे रहा है सीप के स्थिति में तो ऐसी स्थिति में सीप के जो बिल्कुल सामान्य स्थिति है थोड़ी अशुभ स्थिति है उसमें शुभता आ जाएगी और इस तरह सीप के गुणों को हम खंडित या निष्प्रभावी ही मानेंगे अगर आपको चक्र उसमें बनता हुआ लगभग प्रतीत हो रहा है तो लेकिन यदि वह बिल्कुल स्पष्ट रूप से सीप है तो निश्चित रूप से वह शुभ स्थिति नहीं है तो यहां हमने जाना अर्ध चक्र हो या अर्ध शंख हो या अर्ध सीप हो तो ऐसी स्थिति में सामंजस्य बिठाकर ही फल करिए तो यह था शंख और चक्र के बारे में अगली वीडियो में हम हाथ की रेखाओं से शुरू करेंगे।



