Thumbnail for The Last Lesson Class 12 | Class 12 English Chapter 1 | Animation | CBSE | NCERT by Sunlike study

The Last Lesson Class 12 | Class 12 English Chapter 1 | Animation | CBSE | NCERT

Sunlike study

9m 46s1,908 words~10 min read
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[0:00]हर स्टूडेंट की लाइफ में एक ऐसा टीचर जरूर होता है जिससे हमें सबसे ज्यादा डर लगता है, है ना? और अगर हमने उस टीचर का होमवर्क ना किया हो तो वह डर दुगना हो जाता है। ऐसे में स्कूल जाने का बिल्कुल मन नहीं करता, बस ऐसा लगता है कि कहीं छुप जाओ। हमारी कहानी का हीरो एक छोटा सा लड़का जिसका नाम है फ्रांज़। उसके लिए वो डरावने टीचर थे एम हेमल। और आज फ्रांस की हालत भी कुछ ऐसी ही थी, क्योंकि उसने भी अपना होमवर्क नहीं किया था। हेलो एवरीवन, मैं हूं राहुल रावत और आज हम क्लास 12थ का पहला और सबसे यादगार चैप्टर The Last Lession by अल्फोंस डूडैट की दिल को छू लेने वाली कहानी सुनेंगे। यह कहानी फ्रेंच की उस दिन की है जो एक आम दिन की तरह शुरू हुआ पर उसकी जिंदगी का सबसे इंपोर्टेंट दिन बन गया। चलिए शुरू करते हैं। तो उस सुबह फ्रांस स्कूल के लिए बहुत लेट हो गया था और उसे एम हेमल से डांट पड़ने का बहुत डर लग रहा था। क्यों? क्योंकि एम हेमल ने कहा था कि वो पार्टिसिपल्स पर क्वेश्चंस पूछेंगे। और बेचारे फ्रांस को तो पार्टिसिपल्स का पी भी नहीं आता था। फ्रांस का स्कूल जाने का बिल्कुल मन नहीं कर रहा था। उसने तो सोच लिया था कि क्यों ना स्कूल छोड़कर पूरा दिन बाहर ही बताया जाए। और वैसे भी दिन ही इतना सुहाना, इतना खूबसूरत था कि दिल करता था कि बस उस पल में खो जाएं। मौसम बार्म और ब्राइट था, हल्के-हल्के धूप पड़ रही थी। बर्ड्स चहचहा रही थी और दूर एक खेत में पुरुसियन सोल्जर्स ड्रिल कर रहे थे, जैसे कोई ग्रैंड परेड चल रही हो। यह सब फ्रेंज को स्कूल से कहीं ज्यादा इंटरेस्टिंग लग रहा था। लेकिन फिर उसने अपने मन को समझाया, उसने हिम्मत की और स्कूल की तरफ तेजी से दौड़ पड़ा। उसके लिए तो यह एक बिल्कुल आम सा दिन लग रहा था, लेकिन उसे क्या पता था कि यह दिन उसकी जिंदगी का रुख ही बदल देगा। रास्ते में जब फ्रांस टाउन हॉल के पास से गुजरा तो उसने देखा बुलेटिन बोर्ड के सामने भीड़ लगी हुई है। वह बड़ा सा बोर्ड जहां पिछले 2 साल से सिर्फ बुरी खबरें चिपकती आई थी। फ्रेंको पुरुसियन वॉर्स की अपडेट्स, हारी हुई बैटल्स, नए-नए मिलिट्री ऑर्डर्स और हर वो न्यूज़ जो लोगों के चेहरे से मुस्कान छीन लेती थी, वह उसी बुलेटिन बोर्ड पर छपती थी। फ्रेंज ने सोचा कि अब क्या बात हो गई पर वह रुका नहीं, उसने थोड़ा सोचा, लेकिन फिर वो अपने स्कूल की तरफ बढ़ गया। जब फ्रेंज स्कूल के कंपाउंड में पहुंचा तो वो हैरान रह गया। वहां एक अजीब सी शांति थी।

[2:16]हमेशा तो स्कूल शुरू होने से पहले काफी शोर-शराबा होता था, डेस्क के खिसकने की आवाजें आती थी, बच्चों की एक साथ लेसंस रिपीट करने का शोर आता था जो गली तक सुनाई देता था। पर आज हर जगह शांति थी, बिल्कुल संडे मॉर्निंग जैसे, जैसे मानो स्कूल की छुट्टी हो। फ्रेंज को ये खामोशी थोड़ी अजीब लग रही थी, बेचैन कर रही थी। उसे ऐसा लग रहा था कि आज कुछ तो अलग है। फ्रांस डरते-डरते सांस रोके क्लासरूम के अंदर गया, उसके मन में एक ही डर था कि अब तो एम हेमल से जोर की डांट पड़ेगी। लेकिन उसे एक सरप्राइज मिलता है। एम हेमल ने उसे गुस्से से देखने की बजाय बड़े प्यार से कहा कि जल्दी से अपनी जगह पर बैठ जाओ लिटिल फ्रांस, हम तुम्हारे बिना शुरू कर ही रहे थे। फ्रांस हैरान रह गया कि सर को अचानक से ये हो क्या गया है। फ्रांस जल्दी से अपनी सीट पर बैठ गया। जैसे-जैसे उसका डर थोड़ा कम हुआ उसने आसपास देखना शुरू किया और तब उसकी नजर गई एम हेमल पर। आज उन्होंने अपने स्पेशल ओकेजन वाले कपड़े पहने हुए थे, उनका ग्रीन कोट, फ्रिल्ड शर्ट और एक छोटी सी ब्लैक सिल्क कैप, सब कुछ बहुत सुंदर लग रहा था। फ्रेंज ने सोचा कि सर तो ऐसे कपड़े सिर्फ प्राइज डे या इंस्पेक्शन के दिन पहनते हैं, पर आज क्यों, आज तो ऐसा कुछ है ही नहीं। और फिर फ्रांस की नजर गई क्लास के पीछे और उसका मुंह खुला का खुला रह गया। वो बेंचेस जो हमेशा खाली रहती थी, आज वहां गांव के बड़े-बड़े लोग बैठे हुए थे, बिल्कुल शांत जैसे स्टूडेंट्स हो। ओल्ड हाउसर, फॉर्मर मेयर, फॉर्मर पोस्ट मास्टर सब वहां बैठे थे। उनके चेहरे बहुत उदास लग रहे थे और उनकी आंखों में एक गहरी उदासी थी, जैसे वो कुछ कहना चाहते हो पर कह नहीं पा रहे हो। फ्रांस की कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब हो क्या रहा है। आज सब इतना अलग क्यों लग रहा है? फिर एम हेमल अपनी कुर्सी पर बैठे और अपनी गंभीर लेकिन प्यार भरी आवाज में उन्होंने वो शब्द कहे जो फ्रांस की पूरी दुनिया हिला गए। माय चिल्ड्रन दिस इज द लास्ट लेसन आई शैल गिव यू। फ्रांस के लिए यह बात बिजली की तरह थी, जैसे अचानक उसके सिर पर एक थंडर क्लैप हो गया हो। वह हक्का-बक्का रह गया। फिर एमएमएल ने बताया कि बर्लिन से ऑर्डर आया है कि अब से एलसेस और लोरें के जितने भी स्कूल्स हैं उनमें सिर्फ जर्मन लैंग्वेज पढ़ाई जाएगी। कल से एक नया मास्टर आएगा और आज तुम्हारा आखिरी फ्रेंच लेसन है। और तब सब कुछ फ्रेंज को समझ आ गया कि जो खबर उसने बुलेटिन बोर्ड के पास देखी थी, वो यही थी। इसलिए एम हेमल ने आज अपने स्पेशल कपड़े पहने थे और इसलिए गांव के बूढ़े लोग क्लास के पीछे शांति से बैठे थे। और वो सब इसलिए आए थे ताकि वह एम हेमल की 40 साल की मेहनत और ईमानदारी को और अपनी प्यारी फ्रेंच भाषा को आखिरी बार रिस्पेक्ट और शुक्रिया कह सके। यह सब महसूस करते ही फ्रांस के दिन में गहरा पछतावा भर गया। उसने सोचा कि मेरा आखिरी फ्रेंच लेसन है और मुझे तो ठीक से लिखना भी नहीं आता। अब उसे लग रहा था कि इतने सालों से जो वह पढ़ाई से भागता रहा, वह उसकी सबसे बड़ी गलती थी। वो किताबें जो अभी तक उसे बोरिंग और बेकार लगती थी, अब वह उसे सबसे प्यारी लग रही थी। जैसे वो उसके पुराने और अच्छे दोस्त हो, जिन्हें वो कभी खोना नहीं चाहता था। और एम हेमल जो हमेशा स्ट्रिक्ट रहते थे, जिनसे वो हमेशा डरता था, आज वो उसे एक बड़े ही प्यारे और समझदार टीचर लग रहे थे। उनका आयरन रूलर, उनकी डांट सब कुछ भूल गया था फ्रांस। अब उसके दिल में सिर्फ यह था कि वह जा रहे हैं और मैं उन्हें फिर कभी नहीं देख पाऊंगा। एक छोटा सा बच्चा अचानक बड़ा हो गया था। उसे समझ में आ गया था कि भाषा सिर्फ बर्ड्स नहीं होती, वह होती है आपकी सोच, आपकी संस्कृति, आपकी पहचान। और अगर आप अपनी भाषा को संभाल के रखते हैं तो कोई भी आपसे आपकी आजादी नहीं छीन सकता। देखो दरअसल क्या था कि फ्रांस बोर हार गया था और उसके ऊपर पुरुसिया का कब्जा हो गया था। इसलिए एम हेमल ने हर चीज इतने पेशेंस से पढ़ाई, जैसे वो जाने से पहले अपना सारा ज्ञान, अपनी सारी नॉलेज उनके दिमाग में भर देना चाहते हों। उन्होंने ग्रामर पढ़ाया और फ्रांस को हैरानी हुई कि उसे सब कुछ कितनी आसानी से समझ में आ रहा था। मैंने कभी इतने ध्यान से नहीं सुना था और एम हेमल ने भी कभी इतनी पेशेंसली सब कुछ नहीं समझाया था। वो एक नॉर्मल क्लास नहीं थी, वो एक अनमोल पल था जिसमें हर वर्ड, हर लाइन जैसे दिल में उतर रही थी। वो चाहता था कि बस सब कुछ सीख ले, सब कुछ याद कर ले, पर वक्त निकलता जा रहा था। उसे लग रहा था कि अगर आज उसने अपनी लैंग्वेज को नहीं पकड़ा तो कल ही उसके पास नहीं रहेगी। आखिर में एम हेमल ने फ्रांस लैंग्वेज की तारीफ की, उसे दुनिया की सबसे ब्यूटीफुल, सबसे क्लीयरेस्ट, सबसे लॉजिकल लैंग्वेज बताया। और उन्होंने एक बहुत ही गहरी और बहुत ही इंपॉर्टेंट बात कही। व्हेन ए पीपल आर इंसलेव्ड, ऐज लॉन्ग ऐज दे होल्ड फास्ट टू देयर लैंग्वेज, इट इज ऐज इफ दे हैड द की टू देयर प्रिजन। कितनी बड़ी बात है दोस्तों। जब तक लोग अपनी भाषा को मजबूती से पकड़े रहते हैं, तब तक उनके पास अपनी जेल की चाबी होती है। कहने का मतलब यह है कि जब किसी कम्युनिटी के ऊपर कब्जा हो जाता है, लेकिन वह लोग अपनी भाषा को नहीं छोड़ते हैं तो ऐसा होता है जैसे उनके पास अपनी जिंदगी की जेल की चाबी हो। भाषा सिर्फ शब्दों का जोड़ा नहीं होती, वो होती है आपकी सोच, आपकी संस्कृति, आपकी पहचान। और अगर आप अपनी भाषा को संभाल के रखते हैं तो कोई भी आपसे आपकी आजादी नहीं छीन सकता। देखो दरअसल क्या था कि फ्रांस वॉर हार गया था और उसके ऊपर पुरुसिया का कब्जा हो गया था। इसलिए इनके ऊपर जबरदस्त जर्मन लैंग्वेज थोपी जा रही थी। इसलिए एम हेमल ने यही कहा कि जब तक आप अपनी भाषा को जिंदा रखते हो तब तक आपके पास अपनी जेल की चाबी होती है और जब आप अपनी भाषा को संभाल के रखते हैं तो दुनिया की कोई ताकत आपसे आपकी आजादी नहीं छीन सकती। आगे फ्रांस देखता है कि छत पर कबूतर धीरे से गुटरगू कर रहे थे। फ्रांस ने उन्हें देखा, मासूमीयस से सोचा, विल दे मेक देम सिंग इन जर्मन? इवेन द पिजंस। क्या ये लोग कबूतरों को भी जर्मन में गाने पर मजबूर करेंगे? एक बच्चे का यह सवाल उस जुल्म की पूरी कहानी बयां कर रहा था। और फिर चर्च की घड़ी ने 12 बजाए, एंग्लस प्रेयर बेल बजती है। उसी वक्त पुरुसियन सोल्जर्स के ट्रेम्पेट्स की आवाज आती है। हेमल अपनी चेयर से उठते हैं, उनका चेहरा एकदम पीला पड़ा हुआ था। वो बहुत लंबे और गर्व से भरे हुए लग रहे थे। उन्होंने कुछ कहना चाहा, माय फ्रेंड्स पर उनका गला भराया। इमोशंस ने उन्हें जकड़ लिया, वो फिर बोल ही नहीं पाए। फिर वो ब्लैक बोर्ड की तरफ मुड़े, चौक का एक पीस उठाया और अपनी पूरी ताकत से जितना बड़ा वो लिख सकते थे, उन्होंने लिखा बाय ला फ्रांस। इसका मतलब होता है लॉन्ग लिव फ्रांस। फिर वो रुके, अपना सिर ब्लैक बोर्ड से टिका लिया और बिना कुछ कहे हाथ से इशारा किया स्कूल इज डिस्मिश्ड, यू मे गो। द लास्ट लेसन वाज ओवर। पर उसका सबक जिंदगी भर के लिए था। तो दोस्तों द लास्ट लेसन सिर्फ एक कहानी नहीं है, यह एक एहसास है। यह हमें याद दिलाती है कि हम अक्सर चीजों की, आजादी की और अपनी जुबान की वैल्यू तभी समझते हैं जब वह हमसे छिनने वाली होती है। यह कहानी है एक टीचर की जिन्होंने अपने आखिरी लेसन में सिर्फ ग्रामर नहीं बल्कि देश प्रेम और सेल्फ रिस्पेक्ट का सबसे बड़ा लेसन पढ़ाया। और यह कहानी है एक बच्चे की जिसने एक ही दिन में पछतावे से लेकर अपनी भाषा से प्यार तक का लंबा सफर तय किया। तो दोस्तों अपनी भाषा से प्यार कीजिए क्योंकि यही है आपकी पहचान और यही है आपकी आजादी की चाबी। उम्मीद है आपको यह लेसन पसंद आया होगा। अगर आपने इस कहानी के मैसेज को अच्छे से महसूस किया है तो लाइक और सब्सक्राइब कर सकते हो। और अगली वीडियो में हम मिलेंगे ऐसे दो बच्चों से जिनका बचपन गरीबी और मजबूरी की धूप में कहीं खो गया है। उसे देखने के लिए यहां क्लिक कीजिए। तब तक के लिए टेक केयर मिलते हैं अगले चैप्टर में।

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