[0:07]यहां पत्थर बोलते नहीं फिर भी बहुत कुछ कह जाते हैं। मध्य भारत की पावन धरती पर विदिशा के पास एक नाम खामोशी में टिक गया बीजा मंडल।
[0:18]टूटे स्तंभ बिखरी सिलाएं और सवाल यह जगह क्या छुपाती है और हमें क्यों बुलाती है।
[0:24]कभी यहां प्रार्थनाओं की गूंज थी लेकिन समय के साथ बस खामोशी रह गई और शायद यही खामोशी हमें बार-बार यहां खींच लाती है कुछ महसूस करने के लिए।
[0:37]हर पत्थर किसी बीते पल की गवाही देता है। आज हम उसी संकेत को पढ़ेंगे धीरे और सम्मान के साथ ताकि इतिहास फिर से सुनाई दे।
[0:45]तो बस एक पल ठहरिए और सुनिए जो शब्दों में नहीं है।
[0:54]नमस्कार। विजय मंदिर हमारी पौराणिक धरोहर से आप सभी को गर्व के साथ रूबरू कराने के लिए मैं दिव्या शर्मा इस 10 एपिसोड की भव्य सीरीज में आप सभी का स्वागत करती हूं।
[1:20]मध्य भारत की पावन भूमि पर स्थित विदिशा मात्र एक नगर नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता की गहराई को समेटे लिए एक जीवित इतिहास है।
[1:29]इसी विदिशा के प्राचीन किले की पश्चिमी सीमा में स्थित है एक स्थल बीजा मंडल जिसे इतिहास विजय मंदिर के नाम से जानता है।
[1:38]कई कीमती विरासतें रोजमर्रा की भीड़ में खो जाती हैं और जब हम रुककर देखते नहीं तो उनका अर्थ हमसे दूर होता चला जाता है।
[1:46]यह यात्रा इसलिए जरूरी है क्योंकि हम एक भूली धरोहर को फिर पहचानेंगे जिसकी अहमियत वक्त के साथ हमारी यादों से ओझल हो गई।
[1:58]और शायद अब वक्त है उसे फिर से सुनने का।
[2:07]आज यह मंडल विवाद भ्रम और अपेक्षा के बीच खड़ा है लेकिन इसके पत्थरों में आज भी एक गौरवशाली अतीत सांस लेता है।
[2:14]विजय मंदिर केवल रेत और पत्थर की संरचना नहीं था बल्कि यह आस्था संस्कृति और विद्या का केंद्र रहा है।
[2:22]यह जगह आज कई परतों में ढकी हुई है जैसे अपनी ही कहानी छुपा ली हो।
[2:28]बीते समय की धुंध ने इसके असली स्वरूप को कहीं गहराई में समेट दिया है। फिर भी हर शिला हर निशान अपने भीतर एक उज्जवल इतिहास की झलक संजोए हुए है।
[2:40]एक ऐसा समय जब यह स्थान केवल संरचना नहीं बल्कि विश्वास का आधार था।
[2:48]परंपराओं का जीवंत विस्तार और सीखने समझने का वह केंद्र जहां विचार आकार लेते थे।
[2:59]और जिनकी गूंज आज भी इन खंडहरों में महसूस होती है।
[3:04]विदिशा का प्राचीन नाम भील साका और इस नाम की उत्पत्ति इसी मंदिर से जुड़ी हुई है। यानी यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि पूरे नगर की पहचान रहा है।
[3:15]यह डॉक्यूमेंट्री उसी पहचान को पुनः सामने लाने का प्रयास है एक ऐसे मंदिर की कहानी जो बार-बार टूटा पर कभी विस्मृत नहीं हुआ।
[3:26]इतिहास सिर्फ बीते हुए समय की कहानी नहीं होता यह हमारी पहचान का वह हिस्सा जो हमें समझाता है कि हम कौन हैं।
[3:37]और जब हम अपनी धरोहर को समझते हैं तब हम सिर्फ अतीत को नहीं बल्कि अपने वर्तमान को भी नए अर्थ देते हैं।
[3:44]तो इस यात्रा का हिस्सा बनिए धीरे-धीरे सुनिए क्योंकि यही खंडहर आपको अपना सच खुद बताएंगे।



