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अगर Trading में Success चाहिए तो 90 दिन गायब हो जाओ | Takashi Kotegawa | Jeet ki raah

Jeet Ki Raah

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[0:00]और सबसे जरूरी बात ट्रेड प्रॉफिट में गया या लॉस में उससे ज्यादा जरूरी यह कि क्या तुमने अपना प्रोसेस फॉलो किया?
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[0:00]अगर तुम ट्रेडिंग में लगातार लॉस कर रहे हो तो शायद तुम्हें अगली स्ट्रेटेजी की जरूरत नहीं है। तुम्हें अगले 90 दिनों के लिए अपनी पुरानी जिंदगी से गायब होने की जरूरत है और मैं जानता हूं कि यह सुनकर पहला सवाल यही उठेगा कि आखिर 90 दिन गायब होकर करना क्या है? क्या मार्केट देखना बंद करना है? क्या सारे इंडिकेटर छोड़ देने हैं? क्या ट्रेडिंग से ही दूरी बना लेनी है? नहीं बिल्कुल नहीं इन 90 दिनों में तुम्हें एक ऐसी चीज से दूर होना है जो शायद तुम्हारी ट्रेडिंग को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। और वो है तुम्हारी अपनी पुरानी आदतें और सच तो यह है कि इन 90 दिनों का सबसे मुश्किल हिस्सा ट्रेडिंग सीखना नहीं होगा बल्कि खुद को रोकना होगा। क्योंकि दे एक बार तुम अपनी स्ट्रेटजी छोड़ना चाहोगे। डे 30 पर तुम्हें जल्दी प्रॉफिट चाहिए होगा और डे 60 पर तुम्हारा ईगो तुम्हें फिर उसी पुराने रास्ते पर खींचने की कोशिश करेगा। लेकिन अगर तुम इन 90 दिनों को पूरा कर गए तो शायद तुम्हारा सबसे बड़ा बदलाव तुम्हारे बैंक अकाउंट में नहीं बल्कि तुम्हारे दिमाग में दिखाई देगा। तो चलो सबसे पहले एक गलतफहमी तोड़ते हैं क्योंकि 90 दिन गायब का मतलब मार्केट से गायब होना बिल्कुल नहीं है। इसका मतलब है रैंडम ट्रेडिंग से गायब होना, स्ट्रेटेजी हॉपिंग से गायब होना, सिग्नल हंटिंग से गायब होना, जल्दी अमीर बनने की सोच से गायब होना और दूसरों की ट्रेडिंग देखकर परेशान होने की आदत से गायब होना। क्योंकि एक साधारण ट्रेडर हमेशा मार्केट को कंट्रोल करना चाहता है जबकि एक प्रोफेशनल ट्रेडर सिर्फ और सिर्फ खुद को कंट्रोल करता है। और यहीं से एक सवाल उठता है कि अगर तुम्हें सिर्फ एक स्ट्रेटेजी चुननी हो तो कौन सी स्ट्रेटेजी चुनोगे? इसका जवाब हम आगे जानेंगे लेकिन पहले बात करते हैं इन 90 दिनों के पहले 30 दिनों की जिसे हम रीसेट फेस कहेंगे। क्योंकि इस दौरान ना कोई नई स्ट्रेटजी आएगी, ना कोई नया इंडिकेटर, ना हर दूसरे दिन कोई नया यूट्यूब गुरु, ना कोई टेलीग्राम सिग्नल, ना कोई रैंडम एंट्री। इस फेस का मकसद ट्रेडिंग सीखना नहीं है बल्कि अपनी ट्रेडिंग की असली बीमारी पहचानना है। क्योंकि अगर कोई ट्रेडर रोज पांच अलग-अलग स्ट्रेटेजीज देखता है तो उसे लगता है कि वह सीख रहा है। लेकिन असल में उसका दिमाग सिर्फ कंफ्यूजन जमा कर रहा होता है और इसीलिए मैं चाहता हूं कि तुम एक नोटबुक बनाओ। नाम दो 90 डेज ट्रेडिंग ट्रांसफॉर्मेशन जनरल और हर दिन उसमें लिखो कि आज कितने ट्रेड लिए। क्यों लिए? सेटअप किया था? एंट्री क्यों ली? स्टॉप लॉस कहां था? उस वक्त इमोशन क्या था? कोई रूल टूटा या नहीं? और सबसे जरूरी बात ट्रेड प्रॉफिट में गया या लॉस में उससे ज्यादा जरूरी यह कि क्या तुमने अपना प्रोसेस फॉलो किया? और असली शौक तब मिलेगा जब तुम अपने पहले 30 दिनों का जर्नल खोलोगे। क्योंकि वहां तुम्हें मार्केट की गलती नहीं अपनी गलती दिखाई देगी। और यहीं पर ट्रेडर की सबसे बड़ी धारणा टूटती है क्योंकि हर ट्रेडर कहता है मेरी स्ट्रेटेजी काम नहीं करती। लेकिन सच यह है कि कई बार स्ट्रेटेजी बिल्कुल ठीक होती है और एग्जीक्यूशन खराब होता है। सेटअप ठीक होता है लेकिन एंट्री जल्दी में ली जाती है एनालिसिस सही होता है लेकिन रिस्क गलत लिया जाता है। ट्रेड सही होता है लेकिन एग्जिट पूरी तरह इमोशनल होता है। मान लो तुम्हारी स्ट्रेटेजी 50 ट्रेड्स जीतती है लेकिन तुम विनर को जल्दी काट देते हो। लूजर को बहुत देर तक पकड़े रहते हो स्टॉप लॉस हटा देते हो और लॉस के बाद रिवेंज ट्रेड ले लेते हो तो समझ लो स्ट्रेटेजी नहीं तुम खुद अपनी स्ट्रेटेजी का फायदा खराब कर रहे हो। और अब आता है 90 दिन का सबसे कठिन रूल जिसे फॉलो करना ज्यादातर ट्रेडर्स के लिए किसी भी स्ट्रेटेजी से कहीं ज्यादा मुश्किल होगा। क्योंकि अगले 90 दिनों में तुम्हें सिर्फ एक ट्रेडिंग सेटअप पर फोकस करना है एक मार्केट एक टाइम फ्रेम एक सेटअप एक एंट्री रूल, एक स्टॉप लॉस रूल, एक एग्जिट रूल ताकि कम ट्रेड्स में ज्यादा क्लेरिटी मिल सके। सोचो मार्केट खुला है चार्ट चल रहा है लेकिन तुम्हें कोई सेटअप नहीं मिल रहा ऐसे में मन बार-बार कहेगा कुछ तो ट्रेड ले ले और यही असली टेस्ट है। क्योंकि अगर तुम उस पल ट्रेड नहीं लेते जब तुम्हारा सेटअप नहीं बना है तभी पता चलेगा कि तुम असल में ट्रेडर बन रहे हो या सिर्फ स्क्रीन पर क्लिक करने वाले इंसान हो। और यहीं से एक बहुत रिलेटिबल सिचुएशन शुरू होती है तुमने ट्रेड नहीं लिया और मार्केट तुम्हारी डायरेक्शन में 200 पॉइंट्स चला गया अब दिमाग चिल्लाता है। यार यह ट्रेड तो लेना चाहिए था फिर अगला सेटअप आता है तुम बिना कंफर्मेशन के एंट्री ले लेते हो मार्केट उल्टा चला जाता है लॉस होता है। फिर रिवेंज ट्रेड फिर दूसरा लॉस। याद रखना मिस्ड ट्रेड कभी लॉस नहीं होता लेकिन बिना सेटअप का ट्रेड हमेशा असली रिस्क होता है। क्योंकि एक प्रोफेशनल ट्रेडर की पहचान यह नहीं है कि वह कितने मौके पकड़ता है बल्कि यह है कि वह कितने गलत मौके जानबूझकर छोड़ देता है। और अब आता है तीसरा बड़ा बदलाव अगले 90 दिनों में तुम्हें प्रॉफिट देखना कम करना है आज ₹5000 कमाना है आज ₹10000 निकालना है ऐसी सोच छोड़नी है। और इसकी जगह सिर्फ एक बात याद रखनी है आज रूल नहीं तोड़ना है। हर दिन खुद को स्कोर दो सेटअप फॉलो किया या नहीं, रिस्क फॉलो किया या नहीं, स्टॉप लॉस फॉलो किया या नहीं, रिवेंज ट्रेडिंग से बचे या नहीं, जर्नल पूरा किया या नहीं। क्योंकि सच यह है कि प्रॉफिट तुम्हारे कंट्रोल में कभी नहीं होता लेकिन प्रोसेस पूरी तरह तुम्हारे कंट्रोल में होता है। और अभी तक हमने सिर्फ ट्रेडर को डिसिप्लिन करना सीखा है अब अगले फेज में हमें उसके ईगो से लड़ना होगा। क्योंकि हर ट्रेड के अंदर एक पैटर्न होता है लॉस के बाद वह कहता है मार्केट गलत था और प्रॉफिट के बाद कहता है मैंने मार्केट को पढ़ लिया और यही ईगो असली खतरा है। क्योंकि जब कोई ट्रेडर लगातार तीन-चार ट्रेड्स जीत जाता है उसका कॉन्फिडेंस बढ़ता है वह रिस्क बढ़ाता है पोजीशन साइज बढ़ाता है और फिर एक बड़ा लॉस आकर सब कुछ मिटा देता है। इसीलिए हमेशा याद रखना एक अच्छा ट्रेड तुम्हें जीनियस नहीं बनाता और एक खराब ट्रेड तुम्हें फेलियर नहीं बनाता। लेकिन अगर 60 दिन तक डिसिप्लिन रखने के बाद भी तुम प्रॉफिटेबल नहीं हुए तो यहीं पर ज्यादातर ट्रेडर्स हार मान लेते हैं। इसलिए अगले 90 दिनों के अंदर एक बात गहराई से समझनी है प्रोफेशनल ट्रेडिंग असल में अक्सर बहुत बोरिंग होती है। यहां कोई हर दिन जैकपॉट नहीं मिलता कोई हर दिन 10 ट्रेड नहीं होते कई बार पूरा दिन सिर्फ इंतजार में निकल जाता है और फिर या तो एक ट्रेड आता है या जीरो ट्रेड रहता है। क्योंकि एक बिगनर को हमेशा एक्साइटमेंट चाहिए होता है जबकि एक प्रोफेशनल को सिर्फ सही एग्जीक्यूशन चाहिए होता है इसीलिए एक रूटीन बनाओ। मार्केट से पहले 20 से 30 मिनट एनालिसिस करो इंपॉर्टेंट लेवल्स मार्क करो अपना ट्रेडिंग प्लान बनाओ। मार्केट के दौरान सिर्फ प्लांट सेटअप पर टिके रहो रिस्क पहले से फिक्स्ड रखो कोई इंपल्सिव एंट्री नहीं और मार्केट के बाद अपना जर्नल भरो। स्क्रीनशॉट रखो मिस्टेक रिव्यू करो इमोशन रिव्यू करो और अब तुम्हारे पास स्ट्रेटेजी भी है और डिसिप्लिन भी। लेकिन आखिरी दिन तुम्हें यह सिखाएंगे कि असली प्रोफेशनल ट्रेडर कब ट्रेड करता है और कब जानबूझकर कुछ नहीं करता। क्योंकि इस चैलेंज के आखिरी हिस्से में समझना है कि मार्केट में हर दिन पैसा बनाना जरूरी नहीं है। कुछ दिन ऐसे भी आएंगे जहां ना कोई सेटअप बनेगा ना कोई ट्रेड होगा ना प्रॉफिट होगा ना लॉस होगा और फिर भी वह दिन सक्सेसफुल कहलाएगा। क्योंकि उस दिन तुमने अपना कैपिटल बचाया और याद रखो जिस दिन तुमने गलत ट्रेड नहीं लिया उस दिन तुमने कुछ कमाया नहीं लेकिन कुछ खोया भी नहीं। और ट्रेडिंग में यही छोटी-छोटी जीतें लंबे समय में सबसे बड़ा फर्क बनाती हैं। तो अब जब यह 90 दिन पूरे हो जाएं तो खुद से सात सवाल जरूर पूछना क्या मैं अब बिना सेटअप के ट्रेड करता हूं? क्या मैं स्टॉप लॉस हटाता हूं? क्या मैं लॉस के बाद रिवेंज ट्रेड करता हूं? क्या मैं बार-बार स्ट्रेटेजी बदलता हूं? क्या मेरा रिस्क पहले से तय होता है? क्या मैं अपने ट्रेड्स का जर्नल रखता हूं और क्या अब मेरा ध्यान प्रॉफिट से ज्यादा प्रोसेस पर है और अगर इन सात सवालों में से ज्यादातर का जवाब हां है तो समझ लो इन 90 दिनों में तुम्हारे अंदर सच में एक बदलाव आया है। लेकिन अब एक जरूरी सच्चाई भी सुन लो यह 90 दिन का चैलेंज तुम्हें प्रॉफिटेबल बनाने की कोई गारंटी नहीं देता। क्योंकि ट्रेडिंग में कोई भी रूटीन गारंटीड प्रॉफिट नहीं दे सकती लेकिन यह 90 दिन तुम्हें ज्यादा डिसिप्लिन्ड, ज्यादा पेशेंट, ज्यादा सेल्फअवेयर, ज्यादा रिस्क कॉन्शियस और ज्यादा सिलेक्टिव जरूर बना सकते हैं। और यही किसी भी प्रोफेशनल ट्रेडिंग की असली नीव होती है लेकिन एक चीज ऐसी है जो अगर तुमने 90 दिनों में नहीं बदली तो 900 दिन भी तुम्हें नहीं बदल पाएंगे और वह है तुम्हारा प्रॉफिट के साथ रिश्ता। क्योंकि एक साधारण ट्रेडर हमेशा सोचता है मुझे कितना कमाना है जबकि एक प्रोफेशनल हमेशा सोचता है मुझे कितना रिस्क लेना चाहिए। एक ट्रेडर पूछता है आज कितना प्रॉफिट हुआ और एक प्रोफेशनल पूछता है क्या मैंने आज अपना प्रोसेस फॉलो किया और यही एक मेंटल शिफ्ट पूरी इस जर्नी का सार है। तो सोचो दो ट्रेडर्स के पास बिल्कुल एक जैसी स्ट्रेटेजी है पहला रोज 10 ट्रेड करता है दूसरा सिर्फ अपने सेटअप का इंतजार करता है 30 दिन बाद जब दोनों के रिजल्ट सामने आते हैं तो फर्क साफ दिखता है और सवाल यही उठता है कि फर्क स्ट्रेटेजी का था या बिहेवियर का। और सोचो उस ट्रेडर को जिसने एक बड़ा मूव मिस कर दिया पहले उसे अफसोस हुआ फिर उसने अगला ट्रेड बिना सेटअप के लिए लिया लॉस हुआ फिर रिवेंज ट्रेड लिया फिर एक और बड़ा लॉस हुआ। और सच यह है कि पहला मिस्ड ट्रेड कभी नुकसान नहीं था असली नुकसान वह गलत ट्रेड था जो उसके बाद लिया गया और सोचो उस 90 दिन के जर्नल को जहां डे एक पर लिखा है आज मैं बहुत पैसा कमाऊंगा। डे 30 पर लिखा है मेरी स्ट्रेटेजी बेकार है डे 60 पर लिखा है शायद प्रॉब्लम स्ट्रेटेजी नहीं मैं हूं और डे 90 पर लिखा है अब मुझे हर दिन ट्रेड करने की जरूरत महसूस नहीं होती यही असली ट्रांसफॉर्मेशन है। तो अब आखिर में इतना ही कहूंगा हो सकता है इन 90 दिनों में तुम्हारा अकाउंट अचानक डबल ना हो हो सकता है तुम हर दिन प्रॉफिट भी ना करो। हो सकता है कई बार तुम्हें लगे कि कुछ बदल ही नहीं रहा लेकिन अगर 90 दिन बाद तुम बिना सेटअप के ट्रेड लेने से खुद को रोक सकते हो लॉस के बाद रिवेंज ट्रेड नहीं करते मिस्ड ट्रेड देखकर खुद को कोसते नहीं। हर ट्रेड में कितना रिस्क लेना है यह पहले से जानते हो और सबसे बड़ी बात प्रॉफिट के लिए नहीं बल्कि अपने प्रोसेस के लिए ट्रेड करते हो तो समझ लेना कि तुम्हारे अंदर कुछ सच में बदल चुका है। क्योंकि ट्रेडिंग में सक्सेस पाने के लिए हमेशा ज्यादा सीखना जरूरी नहीं होता कभी-कभी सक्सेस की शुरुआत उसी दिन होती है जिस दिन तुमने गलत चीजें करना बंद कर दिया। तो अगले 90 दिन मार्केट को हराने की कोशिश मत करना अगले 90 दिन खुद को हराने की कोशिश करना। क्योंकि जिस दिन तुमने अपने माइंड को कंट्रोल करना सीख लिया उसी दिन ट्रेडिंग तुम्हारे लिए सिर्फ पैसा कमाने का खेल नहीं रहेगी बल्कि डिसिप्लिन का खेल बन जाएगी और अगर तुम सच में अपनी ट्रेडिंग को अगले 90 दिनों में बदलने का फैसला कर रहे हो तो कमेंट में सिर्फ 90 डेज लिखो और आज से एक बात याद रखना। नई स्ट्रेटेजी नहीं नया इंडिकेटर नहीं रैंडम ट्रेड नहीं बस एक सेटअप फिक्स्ड रिस्क और 90 दिन का डिसिप्लिन क्योंकि हो सकता है 90 दिन बाद तुम्हारा सबसे बड़ा प्रॉफिट तुम्हारे अकाउंट में नहीं बल्कि तुम्हारे अंदर दिखाई दे। तो दोस्तों कर दिखाओ कुछ ऐसा दुनिया करना चाहिए आपके जैसा धन्यवाद।

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