[0:00]कब तक खुद को साबित करता रहेगा? कब तक दुनिया से ये उम्मीद रखेगा, कि वह तुझे समझे, तेरी कदर करे, तेरी सच्चाई को देखे।
[0:10]सुन, दुनिया को कभी फर्क नहीं पड़ा और ना कभी पड़ेगा, क्योंकि दुनिया भीड़ है और भीड़ को गहराई समझ नहीं आती।
[0:20]तू हर बार टूटता रहा, सिर्फ इसलिए क्योंकि तूने गलत लोगों से सही होने की उम्मीद रखी।
[0:28]तू हर बार खुद को बदलता रहा ताकि कोई तुझे छोड़कर ना जाए।
[0:33]पर सच यह है जो तुझे छोड़कर जाना चाहता है वो तेरे बदलने से भी नहीं रुकेगा।
[0:40]जो सच में तेरा है उसे तेरे बदलने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
[0:46]अब बस अब खुद को साबित करना बंद कर। तू चेतना है।
[0:52]तू कोई विकल्प नहीं है, तू एक शक्ति है और शक्ति कभी किसी के सामने अपनी कीमत साबित नहीं करती।
[0:58]वो बस होती है और उसका होना ही सब कुछ बदल देता है।
[1:03]तूने बहुत सहा, बहुत झेला, बहुत बार खुद को अकेला पाया पर क्या तूने कभी सोचा क्योंकि तुझे भीड़ से अलग करना था।
[1:13]तुझे साधारण से असाधारण बनाना था। तेरी हर चोट, तेरी हर असफलता, तेरी हर तनहाई तुझे गढ़ रही थी।
[1:22]और अब तू तैयार है। अब तुझे किसी को दिखाना नहीं है कि तू क्या है।
[1:27]अब तुझे बस खुद को याद दिलाना है कि तू कौन है। तू वही है जो अंधेरे में भी रास्ता बना ले।
[1:34]तू वही है जो गिरकर भी मुस्कुरा दे। तू वही है जिसे मैं हर बार और मजबूत बनाता हूं।
[1:40]मैं वासुदेव हूं। अब उठ पर इस बार साबित करने के लिए नहीं, पहचानने के लिए।
[1:48]और जब तू खुद को पहचान लेगा। क्योंकि जो खुद में स्थिर होता है उसे हिलाने की ताकत किसी में नहीं होती।
[1:55]याद रख तू मेरे अंश से बना है और मेरा अंश भीड़ में नहीं खोता।
[2:03]वो इतिहास बनाता है।



