[0:00]मैं अपने थाने के अंदर होता हूं, अपने कर्तव्य पर होता हूं। मेरी असी अर्थात मेरा शस्त्र मेरी रिवाल्वर, मेरी तलवार आप जो भी कहें वह मेरे साथ होती है और आंतरिक सुरक्षा के लिए मैं आपके बीच में खड़ा होता हूं। जब मेरे हाथ में मेरी मसीह होती है, मेरी सियाही होती है, मैं आदरणीय बाल कवि वैरागी जैसे विद्युत जनों के चरणों में बैठकर आपको जगाने का प्रयास करता हूं कुमार के साथ चलता हूं रमेश मुस्कान के साथ और मनवीर मधुर के साथ यात्राएं करता हूं। अगर कहीं स्वाभिमान का एक भी शब्द मेरी इन पंक्तियों के अंदर आपके हृदय को छू जाए तो फिर यहां से लेकर वहां तक अपने स्वाभिमान में हाथ उठाना मेरी कविता में उठाओ या ना उठाओ। हम असी मसीह के संयोजन से चित्र बनाया करते हैं। एक पुलिस वाले और एक कवि दोनों के बीच में क्या समानताएं हैं मैं बताता हूं। हम असी मसीह के संयोजन से चित्र बनाया करते हैं। मिला स्वेद में शोणित को नवरंग सजाया करते हैं। प्यार कपोतों से हमको पर बाजुओं से परहेज नहीं। भारत की तरुणाई को होने देंगे निस्तेज नहीं। हम इसकी रज में खेले हैं और स्वाभिमान में आना। हम इसकी रज में खेले हैं, हम इसीलिए अभिमानी हैं। हम धन्य हुए हम गर्वित हैं क्योंकि हम हिंदुस्तानी हैं। हम धन्य हुए हम गर्वित हैं क्योंकि हम हिंदुस्तानी हैं। यह बात चोरी से घुस के सीमाओं के अंदर कोई हमारे सैनिकों का शीश ले जाए और सोचे कि हिंदुस्तान को झुका देंगे तो यह संभव नहीं है। दुनिया में हिंदुस्तान था, हिंदुस्तान है और हिंदुस्तान रहेगा यह कभी नष्ट नहीं हो सकता। Google पर चलकर देखिएगा एक नक्शा प्रकृति बनाती है जिसे हिंदुस्तान बोलते हैं। 40 सभ्यताएं समाप्त हो गईं, हिंदुस्तान है आज भी। यह वक्त बहुत ही नाजुक है। हम पर हमलें दर हमलें हैं। दुश्मन का दर्द यही तो है हम हर हमले पर संभले हैं।
[2:15]और एक आश्वासन देता हूं भाई साहब, रामेश्वर जी की कर्मश्री संस्था की तरफ से, आदरणीय बाल कवि वैरागी की तरफ से। यहां बैठे हुए किसी भी रहीम रहमान या सलमान की तरफ से या रमेश दिनेश और उमेश की तरफ से, इस देश की तरुणाई का प्रतिनिधित्व करने वाले कुमार की तरफ से या रमेश मुस्कान और मंच पर बैठे हुए सभी लोगों की तरफ से। एक आश्वासन देता हूं मदन मोहन समर की इस खाकी वर्दी की तरफ से एक आश्वासन देता हूं भोपाल की उस बड़ी झील की तरफ से जिस पर राजा भोज विराजता है। अगर वह आश्वासन आपका हो वह आश्वासन आपका हो वह आश्वासन मेरा हो तो फिर आश्वासन में अपने हाथ उठाकर उस आश्वासन का समर्थन कीजिएगा। कि यह वक्त यह वक्त बहुत ही नाजुक है, हम पर हमले दर हमले हैं, दुश्मन का दर्द यही तो है हम हर हमले पर संभले हैं। सैनिक ओ सैनिक, सैनिक सीमा साधे रहना। हम भीतर देश बचाएंगे, तुम कसम निभाना सरहद पर हम अपना नमक चुकाएंगे। तुम कसम निभाना सरहद पर हम अपना नमक चुकाएंगे। तुम कसम निभाना सरहद पर हम अपना नमक चुकाएंगे। हर युवा 18 से 35 तक माता आह्वान करती है, गुड़ी पड़वा पर मात का आह्वान करती है यह भारत माता आह्वान करती है। आइए हर युवा हर युवा 18 से 35 तक बने कमांडो भारत का। यह रखे हौसला उत्तर दे दुश्मन की एक एक शरारत का। शीश काट ले गए मरने की बात पुरानी है आइए संकल्प लीजिए। मरने की बात पुरानी है अब बिना मरे हम मारेंगे और अपनी उंगली दिए बिना दुश्मन के मुंड उतारेंगे।
[4:09]कोई पाकिस्तान नहीं, कोई रावलपिंडी लाहौर नहीं किसी पर झंडा नहीं गढ़ाएंगे। हमारा झंडा तो विश्वव्यापी है। वह अपने आप पूरी दुनिया के ऊपर चल रहा है। कैसे चल रहा है कविता पहाड़ों से निकलकर हरिद्वार के बाद गंगा की भांति आगे बढ़ती है। मैदानी इलाकों में उसका प्रभाव प्रभूदित होता है। आइए उस धारा के साथ यात्रा करते हैं। अगर उसकी यात्रा के साथ आप बहेंगे तो आपको इस कविता का कल-कल नाथ सुनाई देगा अपने हाथ खोलिएगा तब। और अगर आप इस कविता से स्लिप हो गए फिसल गए तो फिर किनारों के अवशिष्ट के अलावा आपके पास कुछ नहीं बचेगा। दुनिया की पूरी परिधि पर संवेश स्वरों में गर्जन हो पाताल व्योम के क्षितिज ऊपर भारत का जय-जय वर्धन हो। हम रहे शला मुस्कारों में शत्रु के हिस्से रुदन पड़े अपनी देहरी पर दीप लिए सृष्टि के सारे शगुन खड़े। यह कैसे होगा? यह ऐसे होगा कि भारत मां का तिलक करो सब चंदन अक्षत रोली से। आज तिरंगा ऊंचा कर दो इंकलाब की बोली से एक पृष्ठ तुम और जोड़ दो भारत के उत्थान का। कौन रास्ता रोक सका ये झंझावत तूफान का संकल्पों के साधक हो तुम साहस भरी उड़ान हो। मुकुट तुम ही हो भारत मां का तुम ही हिंदुस्तान हो तुम ही शिवाजी की हुंकार राणा की तलवार तुम ही। शंखनाद हो भगत सिंह का उधम की ललकार तुम ही शेखर के संकल्पों को तुम काती हुई जवानियों। तुम ही सुनीता विलियम वाली साहस भरी कहां हो इंदिरा हो तुम लाल बहादुर तुम ही अटल बिहारी हो। भीमराव हो जय प्रकाश हो नेहरू की फुलवारी हो गांधी की तुम परम अहिंसा तुम ही सुभाष का नारा हो। तुम ही इरादे हो पटेल के तुम कलाम की धारा हो अन्याय का उत्तर देता नीतिगत संग्राम तुम ही। लोकतंत्र में सिंहासन को कसती हुई लगाओ तुम ही स्वाभिमान की नई कहानी वाला पन्ना तुम ही तो हो। जनमत से हटन झुकाने वाला अन्ना तुम ही कहो जनमत से हटन झुकाने वाला अन्ना तुम ही कहो। जनमत से हटन झुकाने वाला अन्ना तुम ही हो। ऐसा नहीं है मित्रों कि हिंदुस्तान तिहार जेल के पीछे बैठे हुए कलमड़ी ए राजाओं या कलीमोजियों से बनता है। हिंदुस्तान किन से बनता है रामेश्वर शर्मा जब कर्मश्री के माध्यम से नव वर्ष का संदेश देने के लिए कवि सम्मेलन आयोजित करते हैं तो उसका उद्देश्य होता है। कि हम अपने उन पूर्वजों को याद करें जिनकी दीप्ति हमारी आत्माओं में प्रज्वलित होती है। जिनके प्रकाश से अंधधित प्रमाण होते हैं। आइए उन्हें याद करते हैं कि आप क्या हो आप क्या हो आप क्या हो और पीछे तक खड़े हुए मेरे भाई क्या हैं? शूर कबीरा मीरा नानक रहमन वारस कान तुम ही। तुकाराम रैदास फरीदाबाद तानसेन की तान तुम ही। तुम ही दधीचि दुर्वासा परशुराम दशमेश तुम ही एकलव्य हो भेष तुम ही हो लक्ष्मण का व्रत वेश तुम ही। पीर फकीरों की माला हो शिरडी का अवतार तुम ही। मदन टेरेसा की गोदी में जिंदा प्यार दुलार तुम ही दयानंद का शोक तुम ही हो ओशो का अनुरोध तुम ही। परमहंस का बोध तुम ही हो गीता का उद्बोध तुम ही हर युग में चाणक्य तुम ही हो चंद्रगुप्त की ज्वाला हो। तुम ही वेद की हृदय शाश्वत तुलसी और निराला हो महावीर हो बुद्ध तुम ही हो तत्व के ज्ञाता हो। अरे उठो विवेकानंद तुम ही तो भारत के निर्माता हो उठो विवेकानंद तुम ही तो भारत के निर्माता हो। उठो विवेकानंद तुम ही तो भारत के निर्माता हो। मित्रों ऐसा नहीं है कि प्राचीन काल अभी भी देश के युवा देश की धड़कनें अपना तिरंगा लेकर घूम रहे हैं। अगर कहीं से लगे कि मैं आपके नायक के बारे में बात कर रहा हूं। आपके नायक के बारे में बात कर रहा हूं तो फिर उस नायक का सम्मान करना। क्या है आप? दुनिया भर को धूल चटाने वाला खाली तुम ही तो हो। दुनिया भर को धूल चटाने वाला खल तुम ही तो हो। वलवन पलपल का बादल तारा बलि तुम ही तो हो जिसकी बाजी चकरा दे वो विश्वनाथ आनंद तुम ही। बोल कबड्डी वाले दल के दंगों का हर द्वंद तुम ही अभिनव का तुम स्वर्ण पदक ध्यानचंद का घोष तुम ही। तुम ही विजेंद्र का मुक्ता मिल्खा सिंह का जोश तुम ही तुम ही सानिया और सायना उषा की रफ्तार तुम ही। बल्ला थामे सचिन तुम ही हो कपिल देव की धार तुम ही बल्ला थामे सचिन तुम ही हो कपिल देव की धार तुम ही। बल्ला थामे सचन तुम ही हो। और मेरी माताएं बहनें बैठी है मातृशक्ति यहां पर बैठी है। लोग बोलते हैं हिंदुस्तान की नारी कमजोर अंत उन्होंने बहुत अच्छी कविता पढ़ी लेकिन हिंदुस्तान की नारी एक शब्द उसने भी कहा था। के जब पुरुषता से पुरुषता हारती है तब हिंदुस्तान की नारी उसे विजित करती है। आइए मैं आपके सम्मान में चार पंक्तियां पढ़ता हूं अगर लगे कि मैं नारी के सम्मान में पढ़ रहा हूं तो फिर मेरा साथ दीजिएगा यहां से वहां तक। याद करो वह पन्ना धाये वाला पन्ना तुम ही तो हो। याद करो वह पन्ना धाये वाला पन्ना तुम ही तो हो झांसी वाले झंडे की और विजय तमन्ना तुम ही तो हो। तुम ही पद्मिनी हो इज्जत की खातिर जिसने आग चुनी मैं ना हो जो जली मगर चल आजादी का राग बनी। आदर्शों की किरण बांटती वर्दीधारी तुम ही तो हो संसद का प्राचीर बनी कमलेश कुमारी तुम ही तो हो। सारे गाम पा धा नी सा के उस पार लता हो तुम केवल इंदिरा गांधी लिख दो तो भारत का पता हो। केवल इंदिरा गांधी लिख दो तो भारत का पता हो तुम ये बच्चे तुम ही शकुंतल के भारत हो जो शेरों के। लवकुश औरोध हुए जो अश्वमेघ के पैरों के दीवारों में चुने गए जो दुधमुहे का ओश तुम ही। गजनी को ललकार भगाने वाला राजा भोज तुम ही दर्शन हो विज्ञान तुम ही हो कल हो तुम इतिहास हो। पत्थर में भगवान बसा दे तुम ऐसा विश्वास हो दशकर की बड़ी सभा में तुम मंगल का पा हो। कड़ी चुनौती मिल जाए तो अभिमन्यु का धान हो जो दुष्टों को चीर फाड़ दे नरसिंह के नाखून तुम ही। जरा भीम के भुजदंडों में बहने वाला खून तुम ही कपर हो तुम रणचंडी के बांसुरिया हो श्याम की। तुम ही रुद्र का नेत्र तीसरा शक्ति हो तुम राम की अर्जुन के तुम धनुष बाण हो तुम ही स्वयं शड़ंगी हो। मैं तो केवल जांबवंत तुम सारे बजरंगी हो मैं तो केवल जांबवंत तुम सारे बजरंगी हो। मैं तो केवल जांबवंत तुम सारे बजरंगी हो। तुम बजरंगी देश राम है सीता भारत माता है संग नील नल खड़े हुए तो जल सेतु बन जाता है। उठो उठो टटोलो अपने मन को अपनी शक्ति जानो संकट का हर सागर लांगो सुरसा को पहचानो। लेकिन सुरसा तो नहीं पहचाना जा रहा साहब। वो 12:00 बजे रात को एक सनी लियोन नाम की उसमें आती है बिग बॉस में। हां यह कोर्स की बात हो गई यह पढ़ाई की बात हो गई। यह चटनी हो गई मैं जो सुना रहा हूं वह रोटी है। रोटी में मां के हाथ की गंध आती है धरती की सुगंध आती है। चटनी तो चटपटी है भाई साहब जैसे चाहे चक लो। मित्रों बात हंसने की नहीं है आदरणीय प्रभात जी बैठे हैं आदरणीय गुरुदेव बैठे रामेश्वर भाई साहब बैठे हैं। हमारी माताओं बहनों की पवित्र नामों की मंडियां लगा दी गईं साहब। घटिया से घटिया लिखने का दौर फिल्म इंडस्ट्री में शुरू हुआ। शकील भाई कुछ अच्छा लिखिएगा ताकि फिल्म इंडस्ट्री को लगे कि हां मंच से कुछ अच्छा लिखने वाले लोग आएं।
[13:51]हम भी वह घटिया से घटिया लिख सकते हैं और मोटे-मोटे लिफाफे लेकर जा सकते हैं। लेकिन मित्रों अगर हमसे यह कहा जाए कि सुजलाम सुजलाम मलेज शीतलाम या ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी से कुछ अच्छा लिख के बताओ तो हमें सात जन्म लेने होंगे हम उससे अच्छा नहीं लिख सकते।
[14:48]प्रेम जरूरी है लेकिन क्यों चीरते हम वीर रस के कवि क्यों मंदिर मधुर बोलता है चीखता है क्यों आदरणीय ने वीर रस की परंपरा का किस लाका को अपने कर कमलों में थामा। हमको भी तो चुनर चोली चुंबन गाना आता है।
[15:10]वीर रस के कवि है, सब कुछ कर सकते है सब लिख सकते है। ऐसा नहीं है हमको भी तो चुनर चोली चुंबन गाना आता है। यह तरके बल खाते यवन पर बतियाना आता है। लिख सकते हैं मधुर रात के आलिंगन अंगड़ाई पर गालों के शर्मीलेपन पर आंखों की सुरमाई पर। लिख सकते हैं चूड़ी कंगन और कलाई गोरी पर लिख सकते हैं अल्लड़ता पर चिमटी और चिरोरी पर। लिखने को तो लिख सकते हैं मस्ती भरी कहानी पर लिख सकते हैं शीला मुन्नी की बदनाम जवानी पर। हम भी इसमें डूब गए तो तुमको कौन जगाएगा कौन तुम्हें फिर भारत मां के रिश्ते घाव दिखाएगा। इसीलिए मैं चिंगारी की राख हटाया करता हूं। यह वक्त बहुत ही नाजुक है मैं तुम्हें जगाया करता। यह वक्त बहुत ही नाजुक है मैं तुम्हें जगाया करता। जागो जागो आंखें खोलो जागे तो बच पाएंगे सोए तो साजिश के साथ ही तोड़ हमें बिखराएंगे। यह देश हमारा हम इसके यह कहने वाले जाट जागे। इसके हर सजदे पूजा में नट रहने वाले जाग उठे। जागे किसान विज्ञान जगह हर प्रहरी और जवान जगह नारी की शक्ति जाग उठे कर्तव्य जगह ईमान जगह। हर कलाकार मजदूर जागे जागे निर्माता व्यापारी सब सब पत्रकार आलोचक जागे जागे सेवक सरकारी सब। सब कुली जागे हम माल जागे सब रिक्शे ठेले जा। जहर जागे बाजार जागे रेलें मेले जाग उठे हर कलम जागे बंदूक जागे अध्यात्म जागे वा ज्ञान जागे। अपना ये देश बचाने को हर चेहरे की मुस्कान जागे यह खाकी जागे। यह खाकी जागे खादी जागे। यह खाकी जागे खादी जागे। कानूनी काले कोट जगह भारत का भाग्य जगाने को घर-घर के सारे वोट जगह भारत का भाग्य जगाने को। घर-घर के सारे वोट जगह हर जाति जगह हर पात जगह। हर घर जागे हर टोले और कबीले के जितने हैं सब सत कर्म जगह। हर चोर उचक्के लुच्चे लोफर बदमाशों का दिल जागे।
[18:05]हर चोर उचक्के लुच्चे लोफर बदमाशों का दिल जागे। जब संकट में हो भारत तो हर गुंडा डाकू मिल जागे अब गंगा जमुना चंबल रेवा कावेरी के तट जागे। सिंधु का उद्भव जाग उठे रामेश्वर तक सब पट जाए अब जागे अजाने मस्जिद की मंदिर के यज्ञ हवन जागे। गुरुद्वारे चर्च विहार जागे अरिहंतों के उपवन जागे जाग्रत हो गीता रामायण जाग्रत हो संतों की वाणी। कबीरा के दोहे जाग उठे जाग्रत हो मीरा मस्तानी जाग्रत हो मीरा मस्तानी कर्णलाल रुधिरता जाग उठे। माथे का पानी जाग उठे और ध्वज लिए तिरंगा हाथों में हर हिंदुस्तानी जाग उठे ध्वज लिए तिरंगा हाथों में हर हिंदुस्तानी जाग उठे।
[19:50]दोस्तों इस कविता का समय पूरी कविता का समय 17 मिनट और 13 सेकंड का होता है जिसे मैंने लाल किले पर भी बताया था। 15 मिनट की कविता मैंने आपके बीच में दी 2 मिनट और 13 सेकंड की कविता बाकी बचती है। रामेश्वर जी ने मुझे मंच पर बुलाया मुझे एक प्रश्न पत्र हल करने के लिए दे दिया। मैंने प्रश्न हल करके आपको दिया 100 नंबर का पेपर था अगर आपने 33 नंबर दिए हो तो मुझे आदेशित कीजिए कि मैं 2 मिनट और 13 सेकंड आपके और लेता हूं। यह तो डिस्टेंशन मिल गई भाई।
[20:29]मैं वह 2 मिनट और 13 सेकंड शुद्ध कविता। 2 मिनट में 20 पंक्तियां पूरे हिंदुस्तान के 28 प्रदेश आदरणीय सात केंद्र शासित प्रदेश और 32 प्राकृतिक क्षेत्रों को मेरी इन 20 पंक्तियों में 2 मिनट के अंदर बांधूंगा। और 13 सेकंड की चार अंतिम पंक्तियां उपसंहार के रूप में देकर आपसे मैं विदा लूंगा ताकि इस कार्यक्रम के बाद मैं और कहीं जा सकूं यहां से प्रेम और दुलार लेकर मैं निकल सकूं। आदेशित कीजिए मैं अपने 2 मिनट और 13 सेकंड आपके बीच में और पढ़ाए करता हूं। अगर आपकी मिट्टी हिंदुस्तान के सारे लोग यहां है। पूरे क्षेत्रों से अगर आपकी मिट्टी अगर आपकी मिट्टी अगर आपकी मिट्टी कहीं मेरी इन पंक्तियों के अंदर आ जाए तो अपनी मिट्टी का सम्मान कीजिएगा। कौन जगह आपसे शुरू करता हूं सरदार जी पंजाब जागे मद्रास जागे। आप ही से शुरू है पंजाब जगह मद्रास जगह संग उत्तर मध्य बिहार जगह। शोणित जगह राजस्थानी हरियाणी हुंकार जगह अब अरुणाचल का अरुणोदय और आंध्र जगह आसाम जगह। अब अगर तला की सुबह जगह जगजोर बरार की शाम जगह अब झारखंड का मान जगह कर्नाटक का उत्थान जगह। सब खुड़ा के जंगल जाग उठे सैयादिका धन धान जगह अब तमिलनाडु का हुनर जगह मैसूर की शक्ति जाग उठे। इस्पात डालते हुए उड़ीसा का हर व्यक्ति जाग उठे जब जम्मू का पानी जाग उठे लद्दाख की माटी जाग उठे। गण जगह मगध के अवध जगह तन शेखावाटी जाग उठे गुजराती हिम्मत जाग उठे गुजराती हिम्मत जागे हौसला गुजराती। बंगाली हिम्मत जाग उठे और जनगणमन के अभिनंदन को कश्मीर का जनमत जाग उठे जनगणमन के अभिनंदन को कश्मीर का जनमत जाग उठे। दुनिया की एटलस उठाइए दुनिया में एकमात्र देश हिंदुस्तान जिसकी चार दिशाएं और ईश्वर ने चार दिशाओं को चार ऋतुओं के वरदान दिए। किसी भी देश में यह नहीं मिलेगा धन दौलत सब कुछ मिल जाए ईश्वर का यह वरदान नहीं मिलेगा इन चार वरदानों को चार दिशाओं में किस तरह से ईश्वर ने दिया मेरी कविता के अंदर बांधने का प्रयास करता हूं। शिमला का शीतल मन जागे केरल की मलय पवन जागे घनघोर घटा मेघालय की मथल की तक तपन जागे। जो वाटी गरिमा जाग उठे केदारनाथ गढ़वाल जगह सिक्किम का साहस जाग उठे शिलांग जगह इंफाल जगह। उठो मिजोरम नागालैंड संग दमंदी ठोक जगह पूरबिया असमत जाग उठे कचन से गण ठोक जगह। अब मारवाड़ मेवाड़ जगह मेवाड़ जगह खंभात जगह जगह उठे निमाणी अपना पन विंध्या का हर जज्बात जगह। जागे विदर्भ संले जागे जगह तेलंगाना उसकाए जग उठे हलती दक्कन दान तराई मिल जाए स्वराज जगम महाराष्ट्र जगम स्वराज जगम महाराष्ट्र जगम। टपक टपक जग उठे अरे लिए आरती हाथों में हर रोज पोखरन जग उठे लिए आरती हाथों में हर रोज पोखरन जग उठे। लिए आरती हाथों में हर रोज पोखरन जग उठे अब लक्षदीप के दीप जगह काले पानी का इतिहास जगह।
[24:35]उनकी लहरों पर लिखा गया बलिदानों का विश्वास जगह अब जागे जलवा चंडीगढ़ का पंडिचेरी जाग उठे। जय भारत जय हिंद बोलती हर रणभेरी जाग उठे मालव की मीठी राज जागे बुंदेली हर बोले जाग उठे। जय घोष लगा छत्तीसगढ़ जाग उठे सब बड़े मजोल जागे दिल्ली की धड़कन जाग उठे बुंदेली दिल्ली की धड़कन जाग उठे। दिल्ली की धड़कन जागे दिल्ली की धड़कन जागे अब जगह वेदना खोए की पाएगा हर उल्लास जगह। हम सिंध गवाए बैठे हैं जो सिंधी बैठे हो हम सिंध गवाए बैठे हैं बच्चे बच्चे में एहसास जगह। हम सिंध गवाए बैठे हैं बच्चे बच्चे में एहसास जगह संकल्प कलिंग का जाग उठे उत्कल का हर उत्कर्ष जगह। विस्मय से देखेगी दुनिया जब पूरा भारतवर्ष जगह विस्मय से देखेगी दुनिया जब पूरा भारतवर्ष जगह। और मित्रों 13 सेकंड की ये चार पंक्तियां आपके बीच में उपसंहार की देता हूं। आदरणीय का बहुत आशीर्वाद मिला था उस समय आज मैं देखना चाहता हूं मेरा अपना शहर मेरे अपने लोग इन पंक्तियों को किस तरह से मेरी कविता को आशीर्वाद देखते हैं हम जाग उठे। हम जाग उठे एक-एक आदमी एक-एक हिंदुस्तानी हम जाग उठे हम जाग उठे तो अंदर बाहर के दुश्मन ठर्राएंगे।
[26:26]हम जाग उठे तो अंदर बाहर के दुश्मन ठर्राएंगे फिर सभी तिरंगे की इज्जत में जय हो भारत गाएंगे।



