Thumbnail for A AA Hindi Dubbed Movie Part 2 | Nithiin, Samantha, Anupama Parameshwaran | Trivikram by Aditya Movies

A AA Hindi Dubbed Movie Part 2 | Nithiin, Samantha, Anupama Parameshwaran | Trivikram

Aditya Movies

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[0:14]एक बार हस क्या दिया? सीधी कंपार्टमेंट में ही आ गया.

[0:35]इतनी जल्दी फोन भी कर दिया, याद आ गई क्या? मैंने कहा था ना कि मैं कुछ भूल गया हूं अरे वो तुम्हारी मुंह बोली आंटी है ना, उसका लड़का भी साथ जाएगा. अरे बहुत अच्छा लड़का है वो चेकशर्ट और जींस पैंट में है. दूसरा समझ के गाली मत देना तेरी मां के गुस्से से वो तेरे डर से मुझे बहुत डर लगता है. सुनो राम सिंह. नाम जानता हूं मैं अपना ट्रेन निकल गई क्या? हां वो लड़का आया? हां वैसे आ गया. आ गया मतलब इसने कुछ कर तो नहीं दिया?

[1:12]ठीक है जरा फोन दो उसे. हम्म

[1:18]हां जी. पहली बार जा रही है हम लोगों के बिना. मैं हूं ना अंकल जी परसों ही हॉस्पिटल से आई है, पता है ना? हां. उसके सामने ये रोना धोना मरना वगैरा हां मैं समझ गया. अपनी मां को भी बोल देना. ठीक है. रखता हूं संभल कर जाना. ठीक है अंकल जी बाय.

[1:41]थैंक्यू. वैसे आप क्या करते हैं? आपने जवाब नहीं दिया. अ मैं खाना बनाता हूं. खाना बनवाता हूं. ये तो और भी बेकार लग रहा है. ए सॉफ्टवेयर वालों को मसाले भिजवाता हूं.

[2:11]इससे तो अच्छा होगा कि ठेले पर भजिया बेचता हूं ये बता दूं.

[2:16]हां मेरे काम का हां हां पेमेंट मिलता है लेकिन नाम नहीं है.

[2:29]दूर राज्यों में सूखा पड़ने की वजह से कम से कम 200 किसान आत्म

[2:50]स्पोर्ट्स न्यूज़ बेटर होगी. हम्म.

[2:56]रेसिंग हिस्ट्री में उथल पुथल. वाओ. 27 साल के रेसर का ट्रैक पर ही एक्सीडेंट हो गया.

[3:18]सूखे से मर रहे हैं कार चलाने से मर रहे हैं ये सब क्या है यार? क्या कहा नागेश्वर की बेटी ने सुसाइड कर लिया. अच्छा आज तीसरा दिन है क्यों नहीं करेगी भाई ऐशो आराम की जिंदगी मजे लेने के बजाय ये पैसे वाले लोग ऐसे ही काम करते हैं. वैसे उसे नहीं उसके बाप को गाली देनी चाहिए विदेश भेजा था ना कॉलेज की पढ़ाई के लिए इन्हें ऐसे समझ में नहीं आएगा. भरी गर्मी में धूप से चिल्चिलाती सड़क पर बिना चप्पल के खड़ा करके उसकी अच्छी सी चमड़े की पैंट से उसकी चमड़ी उधड़ जाए इतना मारना चाहिए. तब जाकर अकल आएगी बातों से नहीं मारने वाला.

[3:57]क्या हुआ था जी? बेकार लोगों की बात की तो मेरा इतना महंगा फोन भी चला गया. ऊंची आवाज में बात करना काफी नहीं है पकड़ मजबूत होनी चाहिए. किस पर भाई? फोन पर.

[4:11]लगता है ये फोन के लिए मर ही जाएंगे. माया कौन है? अनुसूया रामसिंह नितिन बिहारी. कितना हुआ? 150 सर.

[4:21]आप ने एक बात ऑब्जर्व की क्या? अनुसूया राम सिंह. हां. नितिन बिहारी. हां. वही आ जा.

[4:35]आसपास के दो अक्षर लेकिन परिचय होने में 25 साल लग गए.

[4:53]मुत्तू फिल्म में रजनीकांत जो चलाते हैं वह यही है ना. हां वो तांगा था. तो ये. झटका. हां दोनों में अंतर क्या है? घोड़ा आंखें खोलकर चले तो वो तांगा और बंद करके चले तो झटका. आ मतलब ये अभी आंखें बंद करके चल रहा है. अरे ये कैसी बात कर रही हैं आप उनके पैर हैं और हमारी आंखें बस वही है कॉम्बिनेशन. यहां दीजिए पीजिए.

[5:27]कौन है बे ये बिल्कुल हिंदी फिल्मों की हीरोइन की तरह लगती है. बिल्कुल लगती है.

[5:34]जहां-जहां जो जो चीज होनी चाहिए वहां वहां वो वो चीज है. ठीक कहा.

[5:50]हैदराबाद से अनुसूया शर्मा डॉटर ऑफ महालक्ष्मी महेश्वरी डॉटर ऑफ मंजू और कर्नाटक से झटका जनार्दन. उसकी मां का नाम मैं नहीं जानता इन सब की इच्छा पर छोटा सा हाई स्पीड.

[6:51]तूने क्यों मारा हमें? तो फिर हम गिरे कैसे? लाइफ में आगे बढ़ना है तो मेहनत करनी पड़ती है ऐसे जमीन पर गिरोगे तो क्या होगा अब चाहे जबान फिसले या टायर फिसले एक ही है. तो फिर नीचे क्यों उतरा तू? तेरी मदद करने के लिए. तो फिर तेरे हाथ में बैग क्यों है? अपने गांव आया हूं तो बैग नहीं लाऊंगा तो क्या बैंड बजा साथ लाऊंगा. अह मैं सब जानता हूं. तुम तो ज्ञानी हो भाई. हां मेरा भी टाइम आएगा ही तब बताऊंगा मैं तुझे.

[7:30]हर घड़ी पहनने वाला समझता है कि उसका टाइम आएगा. लेकिन वो बस टाइम देख पाता है.

[7:44]ओए बाइक उठा. हां बाइक उठाऊं क्या?

[7:57]कौन था वो? अपने ही गांव का है. इसकी बातें तो मेरी समझ में नहीं आती. आप जरा अपनी कमेंट्स बंद करके मुझे मेरी बैग देंगी क्या? गांव देखना है बोल रही थी ना तू ओह इच्छा पूरी हो गई ना कर. गांव देखना है क्या? हम्म. आंखें बंद कर लो. देखना है तो आंखें बंद कर लो ये तो कुछ नया कांसेप्ट जैसा लग रहा है.

[8:42]कान बंद कर लो.

[8:49]ये खुशबू कितनी अच्छी लग रही है. बारिश आने से पहले बादल के परफ्यूम की सुगंध है.

[8:58]कानों के साथ अगर नाक भी बंद कर ले तो. तो गांव क्या सीधे ऊपर स्वर्ग भी देख सकती है.

[9:12]इस गांव में मेरा पहला दिन ऐसे गुजरा.

[9:40]बहुत लोग सोचते हैं कि सुसाइड करना हो तो उधार या परेशानियां ही काफी है ऐसा जरूरी नहीं एक शैंपू की बोतल जो ऊंचाई पर हो या फिर मेरी मां ही काफी है. ये शैंपू इतनी ऊंचाई पर क्यों है ये शैंपू तो मेरी मां ने इतनी ऊपर रखा है मैं लंबी हो जाऊं इसलिए. अब शैंपू उठाने से तो कोई लंबा होता नहीं.

[10:06]अक्का शैंपू की बोतल हाथ आई तो ही बाल धो सकती हो वरना सर पर तेल लगाकर घर पर बैठो.

[10:28]अनु सब ठीक तो है ना. शावर होता तो वर्ल्ड में इससे अच्छा बाथरूम कहीं नहीं होता.

[10:44]हाय अब क्या है जी जाते वक्त जो बारिश आनी चाहिए थी वो लौटते वक्त आ गई. भानु जी कौन है ये? ये अनु है हैदराबाद से आई है. अच्छी है ना? हां अच्छी तो है लेकिन कपड़े पहने होते तो और भी अच्छी लगती. उल्लू कहीं का उसके लिए आम बात है.

[11:02]कान के सारे सितार बज उठे हैं. सुनिए जी हां जी बोलिए. ऊपर चलोगे क्या? चलना तो जरूर चाहूंगा जी लेकिन जाऊं कैसे? मैं उठा के ले चलूं तुम्हें? मां हैदराबाद के पड़ोसी की बेटी है ना? तो क्या किया उसने? कुछ नहीं बहुत अच्छी हैं. बहुत ही सीधी-सादी सी लगती है. अच्छा ये है कि आंटी की कोई आदत इसमें नहीं दिखती वरना अनुसूया नहीं असूया बुलाना पड़ता. क्या हुआ गालों पर हाथ फेरता हुआ क्यों आ रहा है अरे वो माया है ना वो चुड़ैल है भाई आखिर हुआ क्या है? थप्पड़ मारा मुझे. लेकिन मारा क्यों? दरवाजा अटक गया है खुल नहीं रहा है. खोल देता हूं.

[11:45]इस पर तो मारेगी नहीं.

[11:51]मुझे कपड़े बदलने हैं. कोई बात नहीं आप अपने कपड़े बदलो उसमें मुझे क्या परेशानी हो सकती है बदलो बदलो. इस पर भी नहीं मारेगी वो. आप जाओगे तो दरवाजा. ए दोबारा अटक गया तो निकलना मुश्किल है. खुला रखकर ही बदल लीजिए ना अच्छा रहेगा. ऐसे ही मारा था ना. थोड़ा हल्का मारा जी. भैया हैदराबाद वाली बुला रही है. आई एम जस्ट कमिंग.

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